UN में नेतन्याहू का भाषण शुरू होते ही कई देशों ने किया वॉकआउट, ईरान और ममदानी पर भी साधा निशाना

UN में नेतन्याहू का भाषण शुरू होते ही कई देशों ने किया वॉकआउट, ईरान और ममदानी पर भी साधा निशाना

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 24 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित किया। उनके मंच पर पहुंचते ही संयुक्त राष्ट्र महासभा का माहौल अचानक बदल गया। कई देशों के प्रतिनिधि अपनी सीटों से उठकर बाहर चले गए और कुछ जगहों से विरोध की आवाजें भी सुनाई दीं। नेतन्याहू कुछ देर तक मंच पर खड़े रहे और प्रतिनिधियों के बाहर जाने का इंतजार करते रहे।

इसके बाद उन्होंने उन लोगों पर तंज कसा जो उनके भाषण से पहले ही सदन से निकल गए थे। उन्होंने कहा कि अगर कोई और भी यहां रहना नहीं चाहता तो वह भी बाहर जा सकता है। उनके इस शुरुआती बयान के बाद भाषण का पूरा रुख इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों, ईरान, गाजा और इजराइल के अंतरराष्ट्रीय आलोचकों पर केंद्रित रहा।

हालांकि मुख्य हॉल में कई प्रतिनिधि मौजूद नहीं थे, लेकिन गैलरी में नेतन्याहू के समर्थकों ने उनका स्वागत किया। उनके समर्थकों ने तालियां बजाईं और ‘अम यिसराइल चाई’ के नारे लगाए। करीब 40 मिनट के भाषण में नेतन्याहू ने बार-बार कहा कि इजराइल अपने सामने मौजूद चुनौतियों से पीछे नहीं हटेगा।

गाजा युद्ध पर इजराइल का पक्ष रखा

नेतन्याहू ने अपने भाषण में 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले से शुरू हुए युद्ध का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस हमले में इजराइलियों को निशाना बनाया गया और इसके बाद इजराइल के सामने अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई करने की स्थिति बनी।

उन्होंने गाजा में इजराइली सेना की कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि इजराइल का उद्देश्य हमास को खत्म करना और अपने नागरिकों की सुरक्षा करना है। नेतन्याहू ने उन आरोपों को भी खारिज किया जिनमें इजराइल पर गाजा में नरसंहार करने का आरोप लगाया जाता है।

उन्होंने कहा कि इजराइल पर लगाया गया नरसंहार का आरोप झूठ है और उनका देश इसके बजाय ऐसे हमले को रोक रहा है जिसे वह इजराइल के अस्तित्व के लिए खतरा मानता है। इजराइली प्रधानमंत्री ने अपने सैनिकों की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि इजराइल के सामने युद्ध के दौरान कठिन परिस्थितियां थीं।

इजराइल की सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार विवाद बना हुआ है। दूसरी ओर, इजराइली सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है और उसका कहना है कि उसके निशाने हमास के लड़ाके हैं। गाजा में बड़ी संख्या में फिलिस्तीनियों की मौत को लेकर भी इजराइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बना हुआ है।

ईरान पर सबसे ज्यादा फोकस

नेतन्याहू के भाषण का बड़ा हिस्सा ईरान को लेकर था। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमता को इजराइल के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने दावा किया कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर कार्रवाई करना इजराइल के लिए जरूरी था। उन्होंने कहा कि अगर ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से नहीं रोका जाता तो इसका असर केवल इजराइल तक सीमित नहीं रहता। नेतन्याहू ने ईरान के नेतृत्व पर अपने ही नागरिकों से डरने का आरोप लगाया और कहा कि ईरान के लोग इंटरनेट तथा अभिव्यक्ति की आजादी चाहते हैं।

इस दौरान उन्होंने मंच पर एक स्टारलिंक डिवाइस भी दिखाया। नेतन्याहू ने कहा कि यह तकनीक ईरान के लोगों को इंटरनेट से जुड़ने और अपनी बात सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष से कहा कि वह यह डिवाइस ईरानी प्रतिनिधिमंडल तक पहुंचा दें। उनका तर्क था कि अगर ईरानी अधिकारी भविष्य में अपनी सरकार से अलग होते हैं तो वे इस तरह की तकनीक के जरिए अपनी बात दुनिया के सामने रख सकेंगे।

ईरान की खाली सीट पर दिखी कासिम सुलेमानी की तस्वीर

नेतन्याहू के भाषण के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल की सीटें खाली दिखाई दीं। इन सीटों पर ईरान की कुद्स फोर्स के पूर्व कमांडर कासिम सुलेमानी की तस्वीर रखी गई थी।

सुलेमानी को ईरान के प्रभावशाली सैन्य कमांडरों में गिना जाता था। 3 जनवरी 2020 को बगदाद एयरपोर्ट के पास अमेरिकी ड्रोन हमले में उनकी मौत हुई थी। उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प थे और अमेरिकी सरकार ने इस कार्रवाई की जिम्मेदारी ली थी।

नेतन्याहू ने अपने भाषण में ईरान की मौजूदा सत्ता के भविष्य को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि ईरान का शासन एक दिन खत्म होगा और वहां के लोगों को ज्यादा स्वतंत्रता मिलेगी।

लेबनान और हिजबुल्लाह का भी जिक्र

इजराइली प्रधानमंत्री ने लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए सितंबर 2024 के पेजर विस्फोटों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने मंच से पेजर का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या लोगों को वे घटनाएं याद हैं। इसके जरिए उन्होंने हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल की तकनीकी और खुफिया कार्रवाई को याद दिलाया।

सितंबर 2024 में लेबनान और सीरिया में हिजबुल्लाह सदस्यों के इस्तेमाल किए जाने वाले हजारों पेजर में एक साथ विस्फोट हुए थे। इस घटना में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे और कई लोगों की मौत हुई थी।

नेतन्याहू ने अपने भाषण में इजराइल के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों को कई मोर्चों से जुड़ा बताया। उन्होंने गाजा के साथ-साथ ईरान, लेबनान और क्षेत्र के अन्य सशस्त्र समूहों को भी इजराइल के लिए खतरा बताया।

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पर सीधा हमला

भाषण के दौरान नेतन्याहू ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने ममदानी पर इजराइल और यहूदियों के खिलाफ माहौल बनाने का आरोप लगाया। नेतन्याहू ने कहा कि न्यूयॉर्क में दुनिया की बड़ी यहूदी आबादी रहती है, लेकिन उनके मुताबिक शहर में कई यहूदी अब खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। उन्होंने ममदानी की इजराइल को लेकर सार्वजनिक टिप्पणियों पर भी सवाल उठाए।

ममदानी पहले नेतन्याहू को युद्ध अपराधों के आरोपों से जोड़ चुके हैं और उनके न्यूयॉर्क आने की स्थिति में गिरफ्तारी की बात भी कह चुके हैं। नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से कहा कि ममदानी उन्हें चुप नहीं करा सकते।

ममदानी ने बाद में नेतन्याहू की टिप्पणियों को खारिज किया और कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं। दोनों नेताओं के बीच पिछले कुछ समय से इजराइल-फिलिस्तीन मुद्दे को लेकर सार्वजनिक रूप से तीखी बयानबाजी होती रही है।

ट्रम्प को बताया इजराइल का अहम सहयोगी

अपने भाषण में नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भी खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इजराइल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई में साथ काम किया। नेतन्याहू ने ट्रम्प को इजराइल का महत्वपूर्ण सहयोगी बताते हुए कहा कि अमेरिका ने इजराइल का समर्थन किया। उन्होंने गाजा में बंधकों की वापसी के प्रयासों में भी अमेरिका की भूमिका का जिक्र किया।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की ओर से नेतन्याहू के ट्रम्प की तारीफ करने पर तालियां बजाई गईं। इसके साथ ही उन्होंने यूरोप के कुछ देशों के नेताओं पर इजराइल की आलोचना करने को लेकर निशाना साधा।

भाषण के दौरान ब्रिटेन और फ्रांस पर भी निशाना

नेतन्याहू ने सिर्फ विरोधी देशों को ही निशाने पर नहीं लिया, बल्कि ब्रिटेन और फ्रांस जैसे इजराइल के पारंपरिक साझेदारों की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोप के कुछ नेता इजराइल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा रहे हैं और हमास के खिलाफ इजराइल की कार्रवाई को लेकर एकतरफा रुख अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इजराइल को अपनी सुरक्षा के लिए लिए गए फैसलों पर पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

उनके मुताबिक, इजराइल के आलोचक उसके खिलाफ कई आरोप लगा रहे हैं, लेकिन इजराइल अपनी सुरक्षा और अस्तित्व के लिए संघर्ष जारी रखेगा।

UN के बाहर भी हुआ प्रदर्शन

नेतन्याहू के संयुक्त राष्ट्र पहुंचने से पहले और उनके भाषण के दौरान न्यूयॉर्क में भी विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने गाजा में इजराइल की सैन्य कार्रवाई का विरोध किया और अमेरिकी समर्थन पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों में कुछ यहूदी और फिलिस्तीन समर्थक समूह भी शामिल थे। कई लोगों के हाथों में इजराइल की सैन्य कार्रवाई के विरोध में पोस्टर थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने नेतन्याहू के खिलाफ नारे लगाए।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया। रिपोर्टों के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी और प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी।

आखिर में दोहराया- पीछे हटने का विकल्प नहीं

नेतन्याहू ने भाषण के अंतिम हिस्से में कहा कि इजराइल अपने सामने मौजूद चुनौतियों के बीच पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि देश कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है और उसका लक्ष्य जीत हासिल करना है। उन्होंने अपने भाषण का समापन इस संदेश के साथ किया कि इजराइल के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। उनके इस बयान के बाद गैलरी में मौजूद समर्थकों ने तालियां बजाईं।

इस तरह नेतन्याहू का संयुक्त राष्ट्र भाषण गाजा युद्ध के बचाव के साथ-साथ ईरान, हिजबुल्लाह, न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी और यूरोपीय देशों की नीतियों पर सीधी प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया। भाषण शुरू होने से पहले प्रतिनिधियों के वॉकआउट और बाहर हुए विरोध प्रदर्शनों ने भी इसे इस महासभा के सबसे चर्चित संबोधनों में शामिल कर दिया।