मथुरा-वृंदावन में प्रेमानंद महाराज से जुड़े आश्रम और वहां सामने आए कुछ मामलों को लेकर अब संत समाज के एक वर्ग ने सवाल खड़े किए हैं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी और जूना अखाड़े के संत राधानंद गिरि ने आश्रम से जुड़े मामलों की विस्तृत और निष्पक्ष जांच की मांग की है। दोनों संतों की ओर से खास तौर पर एक युवा साधक की मौत, आश्रमों में नाबालिगों के रहने और कुछ लोगों के कथित तौर पर लापता होने से जुड़े मामलों को जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस की जांच से सामने आने वाले तथ्यों का इंतजार है।
25 साल के साधक की मौत के बाद उठे सवाल
पूरा विवाद उस घटना के बाद ज्यादा चर्चा में आया, जिसमें 25 वर्षीय साधक दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की वृंदावन में चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। घटना 25 सितंबर 2026 की बताई जा रही है। मौत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम की मदद भी ली गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर गंभीर चोटों का जिक्र सामने आया है। कुछ रिपोर्टों में शरीर के अन्य हिस्सों के अलावा निजी अंग पर चोट या कटे होने की बात भी कही गई है। इन्हीं परिस्थितियों के कारण मामले को लेकर कई तरह के सवाल उठे हैं। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि साधक की मौत किस परिस्थिति में हुई और क्या यह महज दुर्घटना थी या घटना के पीछे कोई दूसरा कारण था।
मौत की परिस्थितियों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कुछ साधु-संतों और परिवार से जुड़े लोगों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इसी क्रम में राधानंद गिरि और दिनेश फलाहारी ने भी जांच का दायरा व्यापक करने की बात कही है।
राधानंद गिरि ने घटना की परिस्थितियों पर जताई चिंता
जूना अखाड़े से जुड़े राधानंद गिरि ने साधक की मौत को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि घटना को सामान्य हादसे के तौर पर देखने से पहले सभी परिस्थितियों की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कथित तौर पर यह सवाल भी उठाया कि संत चौथी मंजिल से नीचे कैसे गिरे।
राधानंद गिरि ने घटना से जुड़े तमाम पहलुओं की फॉरेंसिक और निष्पक्ष जांच कराने की आवश्यकता बताई है। उनके अनुसार, जब किसी व्यक्ति की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में होती है तो घटना से पहले और बाद की पूरी गतिविधियों की जानकारी जुटाना जरूरी होता है। उन्होंने आरोपों को जांच के जरिए स्पष्ट किए जाने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
उनकी ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के आधिकारिक निष्कर्षों से ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस इस मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर पड़ताल कर रही है।
दिनेश फलाहारी ने आश्रमों में नाबालिगों को लेकर उठाया मुद्दा
श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने इस मामले को केवल साधक की मौत तक सीमित नहीं रखने की मांग की है। उन्होंने आश्रमों में रहने वाले नाबालिग बच्चों की स्थिति की भी जांच कराने की बात कही है।
फलाहारी का दावा है कि कृष्ण भक्ति और धार्मिक गतिविधियों के लिए कई नाबालिग बच्चे आश्रमों में आते हैं। ऐसे में उनके परिवारों को बच्चों की स्थिति और उनके ठिकाने की जानकारी मिलती रहनी चाहिए। उन्होंने कथित तौर पर कुछ परिवारों द्वारा अपने बच्चों को तलाशने की बात उठाए जाने का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसे मामलों की जांच आवश्यक है।
उन्होंने आश्रमों से जुड़े कुछ अन्य मामलों में भी कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उनका कहना है कि यदि किसी बच्चे के परिजन उसके लापता होने की शिकायत कर रहे हैं तो संबंधित एजेंसियों को मामले की पूरी जानकारी जुटानी चाहिए और बच्चे की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
16 वर्षीय किशोर को पुलिस ने बरामद किया
इसी बीच आश्रम से जुड़े एक किशोर के लापता होने का मामला भी सामने आया था, जिसके बाद उसके परिवार ने आश्रम के बाहर प्रदर्शन किया। परिवार की ओर से दावा किया गया था कि 16 वर्षीय अनुज दीक्षा लेने के बाद से नहीं मिल रहा था। इस मामले को लेकर परिजनों ने आश्रम के बाहर धरना भी दिया था।
हालांकि बाद में पुलिस ने किशोर को बरसाना क्षेत्र से सकुशल बरामद कर लिया। जानकारी के मुताबिक शनिवार को अनुज को राधा बाग मार्ग स्थित लाडली दास आश्रम से बरामद किया गया। इसके बाद पुलिस ने उसे उसके परिजनों को सौंप दिया। इस घटनाक्रम के बाद किशोर के लापता होने को लेकर उठे सवालों में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि बच्चा सुरक्षित मिल गया था।
आश्रम की ओर से भी जांच में सहयोग करने की बात कही गई है। इसलिए इस मामले में परिवार के आरोपों और वास्तविक परिस्थितियों के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी।
नोएडा की महिला के लापता होने का मामला भी चर्चा में
वहीं, नोएडा की 35 वर्षीय एक महिला के 15 अगस्त से लापता होने का मामला भी सामने आया है। उसके परिवार की ओर से आशंका जताई गई है कि महिला प्रेमानंद महाराज के आश्रम गई हो सकती है। हालांकि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि महिला आश्रम में मौजूद है या वह कभी वहां पहुंची भी थी।
इस मामले को लेकर भी अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। किसी व्यक्ति के लापता होने और उसके किसी आश्रम में होने की आशंका के बीच आधिकारिक पुष्टि जरूरी होती है। इसलिए पुलिस द्वारा जुटाई जा रही जानकारी इस मामले में अहम मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री से CBI जांच की मांग
दिनेश फलाहारी ने बताया कि उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से कराने की मांग मुख्यमंत्री के सामने रखी है। उनका कहना है कि मौत, नाबालिग बच्चों से जुड़े मामलों और आश्रमों को लेकर सामने आ रहे दूसरे आरोपों की एक साथ जांच होनी चाहिए।
उन्होंने बाल आयोग से भी कथित तौर पर आश्रमों में रहने वाले नाबालिग बच्चों की स्थिति की पड़ताल करने की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की पहचान, उनके परिवारों से संपर्क और उनकी सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी सामने आनी चाहिए।
फलाहारी ने उस साधक की मौत का भी जिक्र किया और कहा कि घटना से पहले उसकी कथित मनोदशा, डर या किसी तरह के दबाव से जुड़े दावों की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि उनके द्वारा बताए गए इन पहलुओं की पुष्टि अभी जांच एजेंसियों के आधिकारिक निष्कर्षों से नहीं हुई है।
आश्रम और संत प्रेमानंद महाराज को लेकर क्या कहा गया?
दिनेश फलाहारी ने आश्रम से जुड़े क्षेत्र में लंबे समय से कथित विवाद और अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने आश्रमों पर कथित कब्जे तथा कुछ परिवारों पर दबाव बनाए जाने जैसे आरोप भी लगाए हैं। उनका दावा है कि इन सभी मामलों को अलग-अलग देखने के बजाय एक व्यापक जांच के तहत देखा जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इन विवादों के कारण संत प्रेमानंद महाराज के क्षेत्र से दूर चले जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस दावे और इसके कारणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हुई है। इसलिए इस हिस्से को भी संबंधित पक्ष के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
पुलिस जांच से साफ होगी तस्वीर
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अलग-अलग लोगों की ओर से लगाए जा रहे आरोप और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष अलग-अलग चीजें हैं। साधक की मौत के मामले में पुलिस और फॉरेंसिक टीम द्वारा जुटाए गए साक्ष्य यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि घटना किन परिस्थितियों में हुई थी।
वहीं, किशोर अनुज के बरामद होने के बाद उसके लापता होने की परिस्थितियों की भी जांच की जा सकती है। नोएडा की महिला से जुड़े मामले में भी पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होगा कि वह कहां गई थी और क्या उसका किसी आश्रम से कोई संबंध था।
संतों की ओर से CBI जांच की मांग के बीच अब यह देखना अहम होगा कि स्थानीय स्तर पर चल रही जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। यदि किसी मामले में अपराध या अनियमितता के ठोस प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित एजेंसियां आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती हैं। फिलहाल प्रेमानंद महाराज के आश्रम को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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