दिल से जुड़ी बीमारियों के बारे में चर्चा करते समय अक्सर हार्ट अटैक का जिक्र होता है, लेकिन कार्डियक अरेस्ट भी एक ऐसी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें कुछ ही मिनटों के भीतर व्यक्ति की जान खतरे में पड़ सकती है। इस स्थिति में दिल अचानक शरीर के विभिन्न अंगों तक खून पहुंचाना बंद कर देता है। नतीजतन, मस्तिष्क और दूसरे महत्वपूर्ण अंगों को ऑक्सीजन मिलनी कम या बंद हो जाती है। समय रहते मदद नहीं मिलने पर स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। यही वजह है कि कार्डियक अरेस्ट के संकेतों को पहचानना, तुरंत आपातकालीन सहायता बुलाना और सही तरीके से सीपीआर देना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से जुड़ी एक खबर में कार्डियक अरेस्ट और उन्हें बचाने के लिए कथित तौर पर लंबे समय तक सीपीआर दिए जाने का जिक्र किया गया। इस खबर ने लोगों का ध्यान एक बार फिर हृदय संबंधी आपात स्थितियों की ओर खींचा है। हालांकि, किसी व्यक्ति की मृत्यु से जुड़ी खबरों और चिकित्सा संबंधी दावों की पुष्टि विश्वसनीय आधिकारिक स्रोतों से करना जरूरी है। कार्डियक अरेस्ट को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि आखिर इस स्थिति में शरीर के अंदर क्या होता है और यह हार्ट अटैक से किस तरह अलग है।
क्या होता है कार्डियक अरेस्ट और दिल अचानक काम करना क्यों बंद कर देता है?
कार्डियक अरेस्ट एक ऐसी स्थिति है, जिसमें दिल की विद्युत गतिविधि में गंभीर गड़बड़ी होने के कारण हृदय प्रभावी ढंग से खून पंप करना बंद कर देता है। सामान्य परिस्थितियों में दिल के भीतर मौजूद प्राकृतिक विद्युत संकेत उसकी धड़कनों को नियंत्रित करते हैं। इन संकेतों की मदद से दिल नियमित रूप से सिकुड़ता और फैलता है, जिससे खून पूरे शरीर में पहुंचता रहता है।
लेकिन जब दिल की विद्युत प्रणाली में गंभीर गड़बड़ी पैदा होती है, तो उसकी धड़कन बहुत तेज, अनियमित या अप्रभावी हो सकती है। कुछ स्थितियों में दिल की मांसपेशियां इस तरह कांपने लगती हैं कि वे खून पंप नहीं कर पातीं। इसे वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन जैसी गंभीर हृदय लय संबंधी समस्या कहा जाता है। ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है और सामान्य रूप से सांस लेना बंद कर सकता है।
कार्डियक अरेस्ट में सबसे बड़ा खतरा यह है कि मस्तिष्क को ऑक्सीजनयुक्त खून मिलना बंद हो जाता है। यदि तुरंत सीपीआर शुरू नहीं किया जाए और जरूरत पड़ने पर डिफिब्रिलेशन की सुविधा उपलब्ध न हो, तो मस्तिष्क को नुकसान पहुंचने और मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए इसे ऐसी इमरजेंसी माना जाता है, जिसमें शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं।
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक ही बीमारी नहीं हैं
कई लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समस्या समझते हैं, जबकि दोनों के बीच स्पष्ट अंतर है। हार्ट अटैक मुख्य रूप से दिल की मांसपेशियों तक खून पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आने से होता है। जब किसी धमनी में रक्त का प्रवाह बाधित होता है, तो दिल की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और उन्हें नुकसान पहुंच सकता है।
इसके विपरीत, कार्डियक अरेस्ट में दिल की विद्युत गतिविधि बिगड़ जाती है और हृदय प्रभावी तरीके से खून पंप नहीं कर पाता। हार्ट अटैक के दौरान व्यक्ति अक्सर होश में रह सकता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट होने पर वह अचानक बेहोश होकर गिर सकता है।
हालांकि, दोनों के बीच संबंध भी है। गंभीर हार्ट अटैक दिल की विद्युत प्रणाली को प्रभावित कर सकता है और इसके कारण कार्डियक अरेस्ट होने का खतरा पैदा हो सकता है। इसके अलावा, हृदय की मांसपेशियों की बीमारियां, कुछ आनुवंशिक समस्याएं और खतरनाक अनियमित धड़कनें भी कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती हैं। इसलिए सीने में दर्द या दबाव को नजरअंदाज करना उचित नहीं है, खासकर जब इसके साथ सांस लेने में परेशानी, पसीना या चक्कर जैसे लक्षण दिखाई दें।
किन संकेतों को देखकर तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए?
कार्डियक अरेस्ट हमेशा पहले से स्पष्ट चेतावनी देकर नहीं आता। कई मामलों में व्यक्ति अचानक गिर जाता है और कुछ ही क्षणों में बेहोश हो जाता है। ऐसी स्थिति में समय गंवाए बिना यह पहचानना जरूरी है कि कहीं उसे तत्काल जीवनरक्षक सहायता की आवश्यकता तो नहीं है।
इसके प्रमुख संकेतों में अचानक बेहोश होना, आवाज देने या कंधे पर हल्का थपथपाने पर प्रतिक्रिया नहीं देना और सामान्य रूप से सांस न लेना शामिल हैं। कभी-कभी व्यक्ति की सांसें असामान्य, धीमी या हांफने जैसी हो सकती हैं। इस तरह की हांफने वाली सांस को सामान्य सांस नहीं समझना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति बेहोश है और सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है, तो तुरंत स्थानीय इमरजेंसी नंबर पर संपर्क करें और सीपीआर शुरू करें। आम लोगों को नाड़ी जांचने में समय गंवाने के बजाय व्यक्ति की प्रतिक्रिया और सांस पर ध्यान देना चाहिए। यदि संदेह हो, तो आपातकालीन कॉल ऑपरेटर के निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण है।
कुछ लोगों को कार्डियक अरेस्ट से पहले सीने में असहजता, सांस फूलना, तेज धड़कन, कमजोरी या चक्कर आने जैसे लक्षण हो सकते हैं। हालांकि, ये लक्षण हर व्यक्ति में दिखाई दें, ऐसा जरूरी नहीं है। ऐसे संकेतों को केवल थकान या गैस की समस्या मानकर टालने के बजाय जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
किन लोगों में कार्डियक अरेस्ट का खतरा अधिक हो सकता है?
कार्डियक अरेस्ट किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन कुछ स्वास्थ्य स्थितियां इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं। जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक आ चुका है या जिन्हें कोरोनरी आर्टरी डिजीज है, उनमें हृदय संबंधी गंभीर समस्याओं की आशंका अधिक हो सकती है। दिल की मांसपेशियों का कमजोर होना, हृदय का असामान्य रूप से बड़ा होना और कुछ जन्मजात हृदय दोष भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।
परिवार में कम उम्र में अचानक हृदय संबंधी मृत्यु या कुछ आनुवंशिक हृदय रोगों का इतिहास होने पर भी चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी हो सकता है। इसके अतिरिक्त हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी दिल की बीमारियों के जोखिम को बढ़ाते हैं।
बढ़ती उम्र के साथ हृदय संबंधी बीमारियों की आशंका भी बढ़ सकती है। हालांकि, केवल उम्र या किसी एक जोखिम कारक के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट होगा ही। व्यक्तिगत जोखिम का आकलन उसकी मेडिकल हिस्ट्री, लक्षणों और जांच के आधार पर किया जाता है।
दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और तंबाकू से दूरी महत्वपूर्ण हैं। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना भी जरूरी है। जिन लोगों को पहले से हृदय रोग है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेनी चाहिए और नियमित जांच करानी चाहिए।
किसी को कार्डियक अरेस्ट हो जाए तो क्या करें?
कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में तुरंत की गई कार्रवाई किसी की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए, प्रतिक्रिया न दे और सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो, तो सबसे पहले आसपास के लोगों से मदद मांगें और एम्बुलेंस या स्थानीय आपातकालीन सेवा को फोन करें। भारत में आपातकालीन सहायता के लिए 112 नंबर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके बाद व्यक्ति को किसी सुरक्षित, समतल और सख्त सतह पर लिटाएं। यदि वह सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है, तो सीपीआर शुरू करें। छाती के बीचोंबीच हाथ रखकर लगातार और मजबूती से दबाव दें। वयस्कों में छाती को प्रति मिनट 100 से 120 बार दबाने की सलाह दी जाती है। दबाव की गहराई लगभग 5 से 6 सेंटीमीटर होनी चाहिए और हर दबाव के बाद छाती को पूरी तरह वापस ऊपर आने देना चाहिए।
यदि सीपीआर का प्रशिक्षण नहीं लिया है, तो भी अचानक बेहोश हुए वयस्क व्यक्ति में कार्डियक अरेस्ट का संदेह होने पर केवल छाती दबाने वाला सीपीआर शुरू किया जा सकता है। आपातकालीन कॉल ऑपरेटर फोन पर आवश्यक निर्देश दे सकता है। प्रशिक्षित व्यक्ति अपनी जानकारी और परिस्थितियों के अनुसार छाती दबाने के साथ बचाव संबंधी सांसें भी दे सकता है।
यदि आसपास ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर यानी एईडी मशीन मौजूद है, तो उसे जल्द से जल्द लाने के लिए किसी को कहें। मशीन के निर्देशों का पालन करें। एईडी हृदय की लय का विश्लेषण करके जरूरत पड़ने पर बिजली का झटका देने की सलाह देता है। झटका देने के दौरान किसी को भी मरीज को छूना नहीं चाहिए। इसके बाद मशीन के निर्देशों के अनुसार सीपीआर दोबारा शुरू करें।
मरीज के होश में आने, सामान्य रूप से सांस लेने या आपातकालीन चिकित्सा टीम के निर्देश मिलने तक सहायता जारी रखें। यदि व्यक्ति सामान्य रूप से सांस लेने लगे, तो उसकी स्थिति पर नजर रखें और मेडिकल टीम के आने तक उसके साथ रहें। उसे पानी, भोजन या दवा देने की कोशिश न करें।
सीपीआर और एईडी क्यों हो सकते हैं जीवनरक्षक?
सीपीआर दिल को सामान्य रूप से दोबारा धड़काना सुनिश्चित नहीं करता, लेकिन छाती पर लगातार दबाव देने से कुछ मात्रा में खून मस्तिष्क और दूसरे महत्वपूर्ण अंगों तक पहुंचता रहता है। इससे अस्पताल या आपातकालीन टीम की सहायता मिलने तक जीवन बचने की संभावना बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, कुछ प्रकार के कार्डियक अरेस्ट में एईडी का इस्तेमाल बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह मशीन दिल की विद्युत गतिविधि का विश्लेषण करती है और जरूरत पड़ने पर नियंत्रित बिजली का झटका देकर सामान्य हृदय लय बहाल करने में मदद कर सकती है। इसलिए सीपीआर के साथ जल्द डिफिब्रिलेशन उपलब्ध कराना भी जीवनरक्षा की महत्वपूर्ण कड़ी है।
कार्डियक अरेस्ट एक गंभीर स्थिति है, लेकिन समय पर पहचान, तुरंत इमरजेंसी कॉल, सही सीपीआर और एईडी की उपलब्धता से बचने की संभावना बेहतर हो सकती है। हृदय संबंधी चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज न करना और सीपीआर का व्यावहारिक प्रशिक्षण लेना भी उपयोगी है। ऐसी आपात स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत कदम उठाना सबसे जरूरी है।
(Photo : AI Generated)




