CJP आज फिर दिल्ली में प्रदर्शन करेगी, जंतर-मंतर पहुंचने की तैयारी, 38 हजार जवान तैनात; दीपके विमान में रोके गए

CJP आज फिर दिल्ली में प्रदर्शन करेगी, जंतर-मंतर पहुंचने की तैयारी, 38 हजार जवान तैनात; दीपके विमान में रोके गए

दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन शनिवार को बड़े सुरक्षा अभियान के बीच रोक दिया गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने राजधानी के जंतर-मंतर पर धरना देने की घोषणा की थी, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान तक पहुंचने से पहले ही अलग-अलग जगहों पर रोकना शुरू कर दिया। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके समेत शीर्ष नेतृत्व के अन्य सदस्यों को भी हिरासत में लिया गया। पुलिस की कार्रवाई के दौरान देश की राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही। अलग-अलग इलाकों में सात हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। इनमें दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दो अन्य पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल बताए गए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस के सात जवान घायल हुए, जबकि दो स्थानों पर पत्थरबाजी की घटनाएं भी हुईं। भारी पुलिस बल की तैनाती, मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध और रेल सेवाओं में रुकावट के कारण राजधानी के कई इलाकों में आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही रोके गए CJP के नेता

प्रदर्शन को लेकर सबसे पहले पार्टी के शीर्ष नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके शनिवार सुबह मुंबई से विमान के जरिए दिल्ली पहुंचे थे। हालांकि, वह राजधानी में उतरने के बाद अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन स्थल तक नहीं पहुंच सके और उन्हें विमान में ही हिरासत में ले लिया गया। पार्टी के अन्य प्रमुख नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को भी पुलिस ने अपनी कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिया। इसके बाद दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद प्रदर्शनकारियों को रोकने का सिलसिला शुरू हुआ। पार्टी की योजना जंतर-मंतर पर एकत्र होकर SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज के खिलाफ आवाज उठाने की थी। साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से पद छोड़ने की मांग भी प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा थी। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रदर्शन को आगे बढ़ने नहीं दिया। नतीजतन, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच पाए।

राजधानी में 38 हजार सुरक्षाकर्मी, कई रास्तों पर बैरिकेडिंग

दिल्ली में प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के करीब 38 हजार जवानों की तैनाती की गई। राजधानी के प्रमुख रास्तों, संवेदनशील स्थानों और प्रदर्शन से जुड़े संभावित मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई थी। कई जगहों पर तीन से सात स्तर तक के अवरोध लगाए गए, ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके। इसके अलावा, 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाए जाने और दिल्ली आने वाली 250 से अधिक यात्री ट्रेनों को रद्द किए जाने की जानकारी भी सामने आई। इन इंतजामों का असर सार्वजनिक परिवहन पर पड़ा और कई यात्रियों को अपनी यात्रा के दौरान परेशानी झेलनी पड़ी। पुलिस की ओर से भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लगातार निगरानी रखी गई। इस दौरान महिला प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए महिला पुलिसकर्मियों की टीम भी तैनात रही। हालांकि, कार्रवाई के कुछ वीडियो और तस्वीरों को लेकर पुलिस के व्यवहार पर सवाल भी उठे।

ममता बनर्जी का सांकेतिक मौन प्रदर्शन, मुंह पर लगाई पट्टी

प्रदर्शन के बीच ममता बनर्जी का विरोध करने का तरीका भी चर्चा में रहा। उन्होंने दिल्ली के साउथ एवेन्यू इलाके में धरना दिया और मुंह पर बैंडेज लगाकर सांकेतिक मौन प्रदर्शन किया। यह तरीका विरोध के दौरान अपनी बात रखने और चुनाव आयोग के खिलाफ नाराजगी जाहिर करने के लिए अपनाया गया। दूसरी तरफ, पुलिस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर उन्हें आगे बढ़ने से रोकती रही। घटनास्थल से सामने आई तस्वीरों में पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति दिखाई दी। एक तस्वीर में पुलिसकर्मी एक प्रदर्शनकारी को पकड़ते नजर आए। बताया गया कि जब वह व्यक्ति वहां से भागने लगा, तो पुलिस ने उसकी टी-शर्ट पकड़कर उसे खींच लिया। महिला प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के दौरान भी धक्का-मुक्की की स्थिति सामने आई। एक महिला के बस से बाहर निकलने की कोशिश करने पर उसे पकड़कर वापस अंदर खींचे जाने का दृश्य भी सामने आया। इन घटनाओं के बीच प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और नागरिकों के विरोध करने के अधिकार को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।

दिल्ली से बाहर भी विरोध, कई राज्यों में हिरासत

CJP के विरोध प्रदर्शन का असर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, झारखंड और असम समेत कई राज्यों में भी प्रदर्शन किए गए। केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर में भी विरोध दर्ज कराया गया। इन स्थानों पर भी पुलिस ने कार्रवाई की और एक हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई। पार्टी की मांगों को लेकर अलग-अलग जगहों पर समर्थकों ने एकत्र होकर चुनाव आयोग के खिलाफ नाराजगी जताई। हालांकि, दिल्ली में जिस स्तर पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, वैसी व्यापक व्यवस्था अन्य सभी स्थानों पर होने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। विभिन्न राज्यों में हुई कार्रवाइयों के बाद यह साफ हुआ कि SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे का मुद्दा अब एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। विपक्षी दलों और CJP की ओर से इस विषय को लेकर लगातार राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है।

दीपके बोले- सरकार के इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन

हिरासत की कार्रवाई के बीच अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया। उनका कहना था कि सरकार के इस्तीफे तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। पार्टी की ओर से रविवार सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पर फिर से प्रदर्शन करने की घोषणा की गई। इसके साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अनशन पर विचार करने की चेतावनी दी। इस घोषणा के बाद अगले दिन राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शन को लेकर प्रशासन की तैयारी पर नजर रहेगी। यदि पार्टी अपनी योजना के अनुसार फिर से बड़ी संख्या में समर्थकों को एकत्र करती है, तो पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की आशंका को देखते हुए सुरक्षा प्रबंधन महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, रविवार के कार्यक्रम में कितने लोग शामिल होंगे और पुलिस की ओर से क्या कदम उठाए जाएंगे, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

आखिर CJP क्यों मांग रही है ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा?

CJP के विरोध की मुख्य वजह SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर उठे सवाल हैं। पार्टी इस प्रक्रिया पर पहले से आपत्ति जताती रही है। विवाद को उस समय और हवा मिली, जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े फैसलों को लेकर मतभेद होने की बात सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में SIR से संबंधित निर्णयों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में मतदाता सूची से जुड़े फैसलों, चुनावी आंकड़ों और सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया गया था। इसी रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों और CJP ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी।

मतदाता सूची और फॉर्म-6 को लेकर उठे सवाल

विवाद के केंद्र में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और पहले हटाए गए नामों को दोबारा बहाल करने की प्रक्रिया भी रही। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन प्रक्रियाओं के साथ चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर से जुड़े कुछ मामलों पर सवाल उठाए थे। एक अन्य मामले में फॉर्म-6 में SIR से संबंधित सवाल शामिल करने के निर्णय पर भी आपत्ति जताए जाने की बात सामने आई। इसके अलावा, चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर तक पहुंच के मुद्दे पर कैबिनेट सचिव को पत्र लिखे जाने का उल्लेख भी रिपोर्ट में किया गया। काम के बंटवारे से जुड़े एक आदेश को लेकर भी नियमों के उल्लंघन की चिंता जताई गई थी। इन बिंदुओं को आधार बनाकर CJP और विपक्षी दल चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट में सामने आए कथित मतभेद अपने आप में किसी फैसले के अवैध होने का अंतिम प्रमाण नहीं हैं।

चुनाव आयोग ने दावों पर क्या सफाई दी?

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि किसी भी संस्थान में सदस्यों के बीच अलग-अलग राय और सुझाव होना निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। आयोग के मुताबिक, पिछले एक साल के दौरान SIR सहित सभी प्रमुख फैसले और निर्देश पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे। इस तरह आयोग ने रिपोर्ट के आधार पर उठाए जा रहे सवालों के जवाब में अपने निर्णयों को सामूहिक सहमति से लिया गया बताया। इसके बावजूद राजनीतिक विवाद कम नहीं हुआ। विपक्षी दलों और CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग जारी रखी। इस मामले को लेकर अदालत में भी याचिकाएं दायर किए जाने की जानकारी दी गई है। ऐसे में SIR की प्रक्रिया, चुनावी आंकड़ों की विश्वसनीयता और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चल रही बहस का अगला चरण राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ न्यायिक कार्यवाही से भी प्रभावित हो सकता है।

2 अक्टूबर से 10 अक्टूबर के बीच नौ बड़े प्रदर्शन का दावा

CJP और विपक्षी खेमे की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार विरोध किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 2 अक्टूबर से 10 अक्टूबर के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में इस मुद्दे पर नौ बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं। शनिवार की कार्रवाई इसी विरोध अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी रही। लगातार हो रहे प्रदर्शनों से यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा में बना हुआ है। CJP का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े सवालों का जवाब मिलना चाहिए और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर उठी चिंताओं पर स्पष्टता आनी चाहिए। वहीं, आयोग पहले ही अपने निर्णयों को सर्वसम्मति से लिया गया बता चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शनकारी अपने आंदोलन को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और संबंधित संस्थानों की ओर से इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

NEET विवाद में भी लंबा आंदोलन कर चुकी है CJP

CJP इससे पहले भी एक बड़े मुद्दे पर लगातार प्रदर्शन कर चुकी है। पार्टी ने 20 जून से 25 जुलाई तक NEET पेपर लीक मामले को लेकर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए आंदोलन चलाया था। यह प्रदर्शन 36 दिनों तक चला था। उस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी भूख हड़ताल की थी। आंदोलन के बीच 20 जुलाई को पार्टी की ओर से संसद तक मार्च निकालने का प्रयास भी किया गया था। आखिरकार 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने उस प्रदर्शन को समाप्त करने का ऐलान किया था। अब पार्टी ने SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर दोबारा आंदोलन तेज कर दिया है। दीपके की ओर से रविवार को फिर प्रदर्शन करने की घोषणा और वांगचुक की अनशन संबंधी चेतावनी से संकेत मिलता है कि संगठन इस मुद्दे को जल्द खत्म करने के पक्ष में नहीं है। आने वाले दिनों में इस आंदोलन की दिशा, प्रदर्शनकारियों की भागीदारी और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।