प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में आज बुधवार, 7 अक्टूबर को एक महत्वपूर्ण पड़ाव जुड़ गया। सरकार के प्रमुख के रूप में उनके 25 वर्ष पूरे हो गए। यह सफर 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शथ लेने के साथ शुरू हुआ था। इसके बाद करीब साढ़े 12 वर्षों तक गुजरात की राजनीति में मुख्यमंत्री के तौर पर सक्रिय रहने के बाद वे 2014 में राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में पहुंचे और प्रधानमंत्री बने। बुधवार को इस अवसर की शुरुआत उन्होंने दिल्ली के सरोजिनी नगर स्थित श्री विनायक मंदिर में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के साथ की। मंदिर में उन्होंने दर्शन किए और देश की निरंतर प्रगति, सुख-समृद्धि तथा उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की।
श्री विनायक मंदिर पहुंचकर लिया भगवान गणेश का आशीर्वाद
25 साल की इस राजनीतिक यात्रा के विशेष दिन प्रधानमंत्री सुबह दिल्ली के श्री विनायक मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना की। मंदिर में दर्शन के दौरान प्रधानमंत्री ने देशवासियों के कल्याण और राष्ट्र की प्रगति के लिए प्रार्थना की। सरोजिनी नगर का यह मंदिर दिल्ली में रहने वाले दक्षिण भारतीय समुदाय से भी लंबे समय से जुड़ा माना जाता है। प्रधानमंत्री की मंदिर यात्रा को उनके सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के अवसर से जोड़कर देखा गया।
इस मौके पर राजधानी में भारतीय जनता पार्टी की ओर से कई कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के 25 साल के सार्वजनिक जीवन को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में सेवा, जनभागीदारी और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। दिल्ली में ‘सेवा ज्योति’ कार्यक्रम भी इसी कड़ी का हिस्सा है। कार्यक्रम को देखते हुए राजधानी की कुछ प्रमुख सड़कों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव और नो-पार्किंग संबंधी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
2001 में गुजरात की कमान संभालने से शुरू हुआ सफर
नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी। उस समय गुजरात कई तरह की चुनौतियों से गुजर रहा था। उसी वर्ष राज्य में विनाशकारी भूकंप आया था। इसके अलावा इससे पहले के वर्षों में राज्य ने चक्रवात, लगातार सूखे और राजनीतिक अस्थिरता जैसी परिस्थितियों का सामना किया था। प्रधानमंत्री ने खुद भी अपने शुरुआती मुख्यमंत्री कार्यकाल को कठिन परिस्थितियों के बीच मिली जिम्मेदारी के रूप में याद किया है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने गुजरात में लंबे समय तक सरकार का नेतृत्व किया। उनका मुख्यमंत्री कार्यकाल मई 2014 तक चला। इसी अवधि में उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई और लगातार चुनावी जीत के साथ मुख्यमंत्री के रूप में अपनी स्थिति कायम रखी। 2014 में भाजपा ने उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया। चुनाव में भाजपा को बहुमत मिलने के बाद नरेंद्र मोदी ने मई 2014 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
इसके बाद उनका राष्ट्रीय स्तर का सफर शुरू हुआ। 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद भी नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद पर बने रहे। इस तरह गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक की उनकी राजनीतिक यात्रा अब 25 वर्ष के पड़ाव तक पहुंच चुकी है।
गुजरात के अनुभवों से राष्ट्रीय राजनीति तक
प्रधानमंत्री के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से पारित प्रस्ताव में भी उनके गुजरात कार्यकाल और केंद्र सरकार के वर्षों के बीच संबंधों का उल्लेख किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि गुजरात में लागू किए गए कुछ प्रशासनिक प्रयोगों को बाद में राष्ट्रीय स्तर पर भी आगे बढ़ाया गया। इनमें नागरिक शिकायतों के समाधान से जुड़ी SWAGAT व्यवस्था और बिजली क्षेत्र की Jyotigram पहल का उल्लेख किया गया है।
मंत्रिमंडल के प्रस्ताव में प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान लागू किए गए विभिन्न कार्यक्रमों और नीतियों को भी सूचीबद्ध किया गया। इसमें जनधन योजना, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, डिजिटल भुगतान, जीएसटी, बुनियादी ढांचे के विस्तार, रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों का जिक्र किया गया। प्रस्ताव में चंद्रयान-3 और कोविड वैक्सीन के विकास जैसी उपलब्धियों को भी सरकार के कामकाज के प्रमुख हिस्सों के तौर पर गिनाया गया।
कैबिनेट ने 25 साल पूरे होने पर पारित किया प्रस्ताव
प्रधानमंत्री के 25 साल पूरे होने से एक दिन पहले, यानी 6 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उनके लगातार 25 वर्षों के नेतृत्व को लेकर बधाई प्रस्ताव पारित किया। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, प्रस्ताव में 2001 से गुजरात के मुख्यमंत्री और 2014 से प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को एक सतत राजनीतिक यात्रा के रूप में रेखांकित किया गया। इसमें ‘नेशन फर्स्ट’ और ‘सिटीजन फर्स्ट’ को उनकी शासन शैली से जोड़ते हुए कई योजनाओं और पहलों का उल्लेख किया गया।
कैबिनेट के प्रस्ताव में गुजरात से लेकर केंद्र तक के उनके नेतृत्व के दौरान लागू किए गए कार्यक्रमों का विस्तृत उल्लेख किया गया। इसमें कल्याणकारी योजनाओं से लेकर डिजिटल अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे, रक्षा, तकनीक और विज्ञान तक कई क्षेत्रों को शामिल किया गया। प्रस्ताव में सरकार की ओर से जनधन खातों, आवास निर्माण, पीएम-किसान और गरीबी कम करने से संबंधित आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया।
देशभर में सेवा और जनभागीदारी के कार्यक्रम
25 साल पूरे होने के मौके को भाजपा और उसके सहयोगी दल अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए मना रहे हैं। इन आयोजनों की पृष्ठभूमि में सितंबर से चल रहा ‘सेवा संकल्प अभियान’ भी रहा है। इसके तहत रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, सामाजिक संपर्क, प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जनभागीदारी से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की गईं। अब 7 अक्टूबर को इन गतिविधियों के साथ प्रधानमंत्री के 25 साल के सार्वजनिक जीवन के पड़ाव को रेखांकित किया जा रहा है।
गुजरात में भी इस अवसर पर विशेष कार्यक्रमों की तैयारी की गई है। प्रधानमंत्री के राजनीतिक सफर से जुड़े प्रमुख शहरों और स्थानों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वडनगर, वडोदरा और वाराणसी में भी इस अवसर पर अलग-अलग आयोजन प्रस्तावित हैं। वडनगर प्रधानमंत्री का जन्मस्थान है, जबकि वाराणसी उनके लोकसभा क्षेत्र के रूप में उनकी राष्ट्रीय राजनीतिक यात्रा से जुड़ा प्रमुख स्थान है।
गुजरात भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन के अवसर पर ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ सहित कई कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। पार्टी स्तर पर आयोजित इन कार्यक्रमों में सेवा और जनभागीदारी को प्रमुख विषय बनाया गया है।
आज कार्यकर्ताओं से भी जुड़ेंगे प्रधानमंत्री
इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों से भी संवाद करेंगे। भाजपा की ओर से अलग-अलग राज्यों में आयोजित कार्यक्रमों को प्रधानमंत्री के संबोधन और अन्य गतिविधियों से जोड़ा गया है। दिल्ली में भी ‘विकसित भारत संकल्प सभा–सेवा ज्योति यात्रा’ का आयोजन किया जा रहा है।
इस पूरे आयोजन के जरिए भाजपा प्रधानमंत्री के 25 साल के राजनीतिक सफर को जनता और कार्यकर्ताओं के बीच रेखांकित कर रही है। पार्टी की ओर से सेवा गतिविधियों और जनसंपर्क कार्यक्रमों को इस अवसर से जोड़ा गया है। देश के विभिन्न हिस्सों में पार्टी संगठन से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ता इन कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं।
मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक बदला राजनीतिक दायरा
नरेंद्र मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन को दो बड़े चरणों में देखा जा सकता है। पहला चरण गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में रहा, जबकि दूसरा चरण 2014 के बाद प्रधानमंत्री के रूप में जारी है। 2001 में जब उन्होंने गुजरात की कमान संभाली, तब उनका राजनीतिक दायरा मुख्य रूप से राज्य तक सीमित था। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर पहुंची और केंद्र सरकार की नीतियों तथा कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उनके नेतृत्व में आई।
इन 25 वर्षों में उनके राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण चुनावी पड़ाव आए। गुजरात में लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव जीतकर सरकार बनाने के बाद वे 2014 में लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने। इसके बाद 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सरकार बनाई और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने रहे।
25 साल पूरे होने पर पीएम ने जताया जनता का आभार
प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के इस पड़ाव को केवल राजनीतिक यात्रा के रूप में नहीं, बल्कि सरकार के मुखिया के तौर पर उनके लंबे कार्यकाल के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से पहले साझा किए गए संदेशों में नरेंद्र मोदी ने इस यात्रा के लिए देश की जनता का आभार जताया था। उन्होंने कहा था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इतने लंबे समय तक सरकार के मुखिया के रूप में सेवा करने का अवसर जनता के आशीर्वाद का परिणाम है।
इस खास दिन की शुरुआत धार्मिक आस्था के साथ करने के बाद अब प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों का सिलसिला आगे बढ़ रहा है। एक तरफ दिल्ली में सेवा ज्योति जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गुजरात और देश के अन्य हिस्सों में भाजपा संगठन की ओर से अलग-अलग आयोजन किए जा रहे हैं। इस तरह 7 अक्टूबर 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन में उस तारीख के रूप में दर्ज हो रहा है, जब गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के 25 साल बाद भी वे देश की सरकार के मुखिया के रूप में अपने कार्यकाल को आगे बढ़ा रहे हैं।



