एवेन्यू सुपरमार्ट्स के तिमाही नतीजों में कारोबार के विस्तार के संकेत, पुराने स्टोर्स की बिक्री में भी सुधार; एक साल में करीब 20% टूट चुका है कंपनी का शेयर
देश की प्रमुख रिटेल कंपनियों में शामिल डीमार्ट का कारोबार लगातार विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कंपनी की बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन राजस्व के मुकाबले मुनाफे में कम वृद्धि ने लागत और परिचालन खर्च को लेकर सवाल भी खड़े किए हैं। डीमार्ट का संचालन करने वाली कंपनी एवेन्यू सुपरमार्ट्स लिमिटेड के वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई से सितंबर की तिमाही में कंपनी ने 19,644.01 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया। पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा 16,676.30 करोड़ रुपये था। इस तरह सालाना आधार पर कंपनी की आमदनी में करीब 18% की वृद्धि हुई। दूसरी ओर, कंपनी का शुद्ध मुनाफा बढ़कर 743 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 685 करोड़ रुपये था। यानी मुनाफे में लगभग 8.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन आंकड़ों से साफ है कि कंपनी की बिक्री में तेजी बनी हुई है, लेकिन बढ़ते खर्च के कारण इस वृद्धि का पूरा लाभ मुनाफे में दिखाई नहीं दे रहा है।
राजस्व बढ़ा, लेकिन खर्च ने भी बढ़ाई चुनौती
डीमार्ट के वित्तीय प्रदर्शन में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी की कमाई और खर्च दोनों में लगभग समान दर से वृद्धि हुई है। सालाना आधार पर राजस्व करीब 18% बढ़ा, वहीं कुल खर्च में भी लगभग 18% का इजाफा हुआ। खुदरा कारोबार में बिक्री बढ़ना महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन किसी कंपनी की वास्तविक वित्तीय मजबूती का आकलन इस बात से भी होता है कि वह अपनी बिक्री से कितना लाभ बचा पाती है। डीमार्ट के मामले में राजस्व में हुई बढ़ोतरी के बावजूद मुनाफे की वृद्धि अपेक्षाकृत कम रही। इसका अर्थ है कि कारोबार चलाने, कर्मचारियों को वेतन देने और स्टोर नेटवर्क के संचालन पर होने वाला खर्च कंपनी के वित्तीय नतीजों को प्रभावित कर रहा है।
रिटेल सेक्टर में कंपनियों को लगातार अपनी कीमतों, आपूर्ति व्यवस्था, कर्मचारियों की उपलब्धता और स्टोर संचालन के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। डीमार्ट का मॉडल अपेक्षाकृत कम कीमतों पर रोजमर्रा की जरूरतों का सामान उपलब्ध कराने पर आधारित है। ऐसे में कंपनी के लिए ग्राहकों को आकर्षित करने के साथ लागत को नियंत्रित रखना भी जरूरी है। बिक्री में मजबूत वृद्धि कारोबार के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन आने वाली तिमाहियों में मुनाफे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी बढ़ते खर्च को किस हद तक संभाल पाती है।
पुराने स्टोर्स से भी बढ़ रही है कमाई
कंपनी के प्रदर्शन में एक और महत्वपूर्ण पहलू उसके पहले से संचालित स्टोर्स की बिक्री में सुधार है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पुराने स्टोर्स की ग्रोथ पिछले साल के 6.8% से बढ़कर 9.5% हो गई। यह संकेत देता है कि कंपनी की वृद्धि केवल नए स्टोर खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद दुकानों पर भी बिक्री में तेजी आई है।
किसी रिटेल कंपनी के लिए पुराने स्टोर्स का प्रदर्शन खास मायने रखता है। नए स्टोर शुरू होने से कारोबार का कुल आकार बढ़ सकता है, लेकिन मौजूदा स्टोर्स पर बिक्री में सुधार यह समझने में मदद करता है कि ग्राहक कंपनी के उत्पादों और कीमतों के प्रति कितने आकर्षित हैं। अगर पुराने स्टोर्स पर ग्राहक खरीदारी बढ़ाते हैं, तो कंपनी को अपने मौजूदा नेटवर्क से बेहतर कारोबार हासिल करने का अवसर मिलता है।
डीमार्ट के लिए यह प्रदर्शन इसलिए भी अहम है, क्योंकि कंपनी एक तरफ अपने स्टोर नेटवर्क का विस्तार कर रही है और दूसरी तरफ मौजूदा बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रही है। हालांकि, पुराने स्टोर्स की बिक्री में वृद्धि को देखते हुए यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि कंपनी के सामने लागत संबंधी चुनौतियां खत्म हो गई हैं। मजबूत बिक्री और बेहतर लाभप्रदता दो अलग-अलग पहलू हैं, जिन पर कंपनी को एक साथ ध्यान देना होगा।
वित्त वर्ष में अब तक खुले 18 नए स्टोर
डीमार्ट अपनी विस्तार योजना के तहत नए स्टोर भी खोल रही है। वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक कंपनी ने 18 नए स्टोर्स शुरू किए हैं। इसके साथ ही देशभर में उसके स्टोर्स की कुल संख्या बढ़कर 518 हो गई है। नए शहरों और बाजारों में उपस्थिति बढ़ाने से कंपनी को अधिक ग्राहकों तक पहुंचने और अपनी बिक्री का दायरा विस्तृत करने का अवसर मिलता है।
हालांकि, नए स्टोर खोलने के साथ शुरुआती निवेश और नियमित परिचालन खर्च भी बढ़ते हैं। किसी नए स्टोर को स्थापित करने, कर्मचारियों की नियुक्ति करने, सामान की आपूर्ति सुनिश्चित करने और ग्राहकों के बीच पहचान बनाने में संसाधनों की जरूरत पड़ती है। इसलिए स्टोर नेटवर्क का विस्तार तत्काल मुनाफे में उसी अनुपात में वृद्धि सुनिश्चित नहीं करता। नए स्टोर्स को पर्याप्त बिक्री हासिल करने और अपने संचालन को स्थिर बनाने में समय लग सकता है।
डीमार्ट के मामले में राजस्व में 18% की वृद्धि और कुल स्टोर्स की संख्या 518 तक पहुंचना कारोबार के विस्तार को दर्शाता है। दूसरी तरफ, खर्च में भी हुई बढ़ोतरी बताती है कि विस्तार के साथ लागत प्रबंधन की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। कंपनी के लिए भविष्य में यह देखना अहम होगा कि नए स्टोर्स से होने वाली बिक्री किस गति से बढ़ती है और वे कुल मुनाफे में कितना योगदान देते हैं।
कर्मचारियों की सैलरी बढ़ने से परिचालन लागत पर असर
कंपनी के प्रबंधन की ओर से कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि को बढ़ते परिचालन खर्च की एक वजह बताया गया है। कंपनी के सीईओ अंशुल असावा के मुताबिक, एंट्री-लेवल कर्मचारियों की सैलरी बढ़ने से परिचालन लागत पर दबाव पड़ा है। रिटेल कारोबार में स्टोर कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि सामान की व्यवस्था, ग्राहकों की सहायता, बिलिंग और रोजाना के संचालन जैसे कामों के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है।
जब कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी होती है, तो कंपनी की कुल लागत भी प्रभावित हो सकती है। इसका असर विशेष रूप से उन कारोबारों पर दिखाई दे सकता है, जो कम कीमतों पर बड़ी मात्रा में सामान बेचने की रणनीति अपनाते हैं। डीमार्ट के लिए चुनौती यह है कि वह ग्राहकों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उत्पाद उपलब्ध कराते हुए कर्मचारियों और स्टोर संचालन से जुड़े खर्चों को भी संभाले।
वेतन में वृद्धि के अलावा, नए स्टोर्स के संचालन और व्यापक रिटेल नेटवर्क को बनाए रखने की जरूरत भी खर्च के स्तर को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों से यह तय नहीं किया जा सकता कि कुल खर्च में बढ़ोतरी का कितना हिस्सा वेतन और कितना हिस्सा अन्य मदों से आया। इसलिए लागत में वृद्धि के पीछे किसी एक कारण को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
कम कीमतों की रणनीति से ग्राहकों को जोड़ने की कोशिश
डीमार्ट की पहचान बाजार में किफायती कीमतों पर रोजमर्रा की जरूरतों का सामान बेचने वाली रिटेल चेन के रूप में बनी है। कंपनी किराना, घरेलू उपयोग की वस्तुओं और अन्य जरूरी उत्पादों की बिक्री के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करती है। कम कीमतों पर सामान उपलब्ध कराने की रणनीति से उसे बड़ी संख्या में ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिली है।
हालांकि, कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना कंपनी के लिए आसान नहीं है। यदि वेतन, स्टोर संचालन और अन्य खर्च बढ़ते हैं, तो कंपनी को यह तय करना पड़ता है कि ग्राहकों को दी जा रही कीमतों में कितना बदलाव किया जाए और कितनी लागत खुद वहन की जाए। डीमार्ट की कारोबारी रणनीति में कीमतों का विशेष महत्व है, इसलिए बढ़ती लागत के बीच इस मॉडल को बनाए रखना प्रबंधन के लिए एक अहम चुनौती है।
शेयर बाजार में निवेशकों की नजर कंपनी के प्रदर्शन पर
डीमार्ट के शेयर में पिछले कुछ समय से कमजोरी देखी गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कंपनी के तिमाही नतीजे जारी होने से पहले शुक्रवार, 9 अक्टूबर को एवेन्यू सुपरमार्ट्स का शेयर 1.79% गिरकर 3,521 रुपये पर बंद हुआ। एक महीने के दौरान इसमें करीब 5% की गिरावट आई, जबकि एक साल में शेयर लगभग 20% नीचे आ चुका है।
शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव को केवल एक तिमाही के नतीजों के आधार पर नहीं समझा जा सकता। निवेशक आमतौर पर कंपनी की बिक्री, मुनाफे, लागत, भविष्य की विस्तार योजनाओं और प्रतिस्पर्धा जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखते हैं। डीमार्ट की बिक्री में मजबूत वृद्धि सकारात्मक संकेत देती है, लेकिन मुनाफे में अपेक्षाकृत धीमी बढ़ोतरी यह सवाल भी सामने लाती है कि कंपनी आगे चलकर अपनी लाभप्रदता में कितना सुधार कर पाएगी।
कंपनी के शेयर में आई गिरावट का कोई एक निश्चित कारण इन आंकड़ों से स्थापित नहीं होता। निवेश से जुड़ा फैसला लेते समय निवेशकों को कंपनी के आधिकारिक वित्तीय नतीजों, मूल्यांकन और अपने जोखिम स्तर का भी आकलन करना चाहिए।
क्या है एवेन्यू सुपरमार्ट्स और डीमार्ट का संबंध?
डीमार्ट एक सुपरमार्केट चेन है, जबकि एवेन्यू सुपरमार्ट्स लिमिटेड वह कंपनी है जो इस रिटेल कारोबार का संचालन करती है। कंपनी के वित्तीय नतीजों के माध्यम से उसके कारोबार की बिक्री, मुनाफे और खर्च की स्थिति का आकलन किया जाता है। रिटेल क्षेत्र में कंपनी की सफलता का संबंध उसके स्टोर नेटवर्क, ग्राहकों की खरीदारी, उत्पादों की उपलब्धता और कीमतों से भी रहता है।
कंपनियों के नतीजों में स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड वित्तीय रिपोर्ट जैसे शब्द भी इस्तेमाल किए जाते हैं। स्टैंडअलोन रिपोर्ट में संबंधित कंपनी की अपनी वित्तीय स्थिति दिखाई जाती है। वहीं, कंसॉलिडेटेड रिपोर्ट में लागू लेखांकन नियमों के अनुसार उसकी सहायक कंपनियों और समूह की अन्य संबंधित इकाइयों के आंकड़ों को भी शामिल किया जाता है। दोनों रिपोर्टों का दायरा अलग हो सकता है, इसलिए किसी कंपनी के नतीजों को समझते समय यह देखना जरूरी होता है कि आंकड़े किस प्रकार की रिपोर्ट से लिए गए हैं।
राधाकिशन दमानी ने 2002 में शुरू किया था कारोबार
डीमार्ट की स्थापना निवेशक और कारोबारी राधाकिशन दमानी ने की थी। कंपनी के शुरुआती सफर की शुरुआत वर्ष 2002 में मुंबई के पवई इलाके में पहले स्टोर से हुई। इससे पहले दमानी ने 1999 में नवी मुंबई के नेरुल में अपना बाजार की एक फ्रेंचाइजी शुरू की थी। हालांकि, वह मॉडल उन्हें अपनी कारोबारी सोच के अनुरूप नहीं लगा और बाद में उन्होंने डीमार्ट के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया।
डीमार्ट ने धीरे-धीरे अपने स्टोर नेटवर्क को बढ़ाया और रोजमर्रा के उत्पादों की खुदरा बिक्री में अपनी पहचान बनाई। कंपनी का कारोबारी मॉडल बड़े पैमाने पर बिक्री, लागत पर नियंत्रण और ग्राहकों को किफायती विकल्प उपलब्ध कराने पर आधारित रहा है। यही वजह है कि उसके विस्तार और वित्तीय प्रदर्शन पर रिटेल उद्योग के साथ-साथ शेयर बाजार के निवेशकों की भी नजर रहती है।
2017 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई कंपनी
एवेन्यू सुपरमार्ट्स ने 21 मार्च 2017 को शेयर बाजार में प्रवेश किया था। लिस्टिंग के समय कंपनी का बाजार पूंजीकरण लगभग 39,988 करोड़ रुपये बताया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बाद में इसका बाजार पूंजीकरण बढ़कर करीब 2.29 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा। बाजार पूंजीकरण कंपनी के शेयरों के बाजार मूल्य के आधार पर तय होता है और शेयर की कीमत में बदलाव के साथ इसमें भी उतार-चढ़ाव आता है।
कुल मिलाकर, डीमार्ट के तिमाही आंकड़े कारोबार की मजबूत बिक्री और विस्तार की तस्वीर पेश करते हैं। राजस्व में 18% की वृद्धि, पुराने स्टोर्स की बिक्री में सुधार और वित्त वर्ष में 18 नए स्टोर खुलना कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत हैं। दूसरी तरफ, मुनाफे में 8.5% की बढ़ोतरी और खर्च में 18% का इजाफा यह दिखाता है कि बढ़ती लागत पर नियंत्रण रखना भी उतना ही जरूरी है। आने वाले समय में कंपनी के प्रदर्शन का आकलन इस आधार पर किया जाएगा कि वह अपने विस्तार, किफायती कीमतों और मुनाफे के बीच कितना बेहतर संतुलन बना पाती है।




