यूक्रेन में रेल सफर पर मंडराया रूसी ड्रोन का खतरा, स्टेशन पर मची तबाही; 14 यात्रियों की मौत

यूक्रेन में रेल सफर पर मंडराया रूसी ड्रोन का खतरा, स्टेशन पर मची तबाही; 14 यात्रियों की मौत

यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध का असर अब देश की परिवहन व्यवस्था पर भी गंभीर रूप से दिखाई दे रहा है। रूसी हमलों के कारण यूक्रेन का रेलवे नेटवर्क लगातार निशाने पर है। इसी बीच मध्य यूक्रेन के प्रमुख शहर निप्रो में एक रेलवे स्टेशन पर हुए ड्रोन हमले ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार सुबह हुए इस हमले में 14 लोगों की जान चली गई, जबकि 10 अन्य लोग घायल हो गए। हमले के समय स्टेशन पर यात्री मौजूद थे और एक इलेक्ट्रिक ट्रेन अपने अगले सफर के लिए रवाना होने की तैयारी कर रही थी।

शहर के अधिकारियों के अनुसार, रूसी ड्रोन ने सीधे यात्रियों को ले जाने वाली ट्रेन को निशाना बनाया। हमले के बाद स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि युद्ध के दौरान आम नागरिकों और सार्वजनिक परिवहन के साधनों को किस तरह खतरे का सामना करना पड़ रहा है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे बेहद भयावह हमला बताया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को और सख्त करने की अपील की। जेलेंस्की का कहना है कि ऐसे हमलों को रोकने के लिए रूस पर दबाव बढ़ाना जरूरी है। वहीं, यूक्रेन के रेलवे नेटवर्क पर लगातार हो रही कार्रवाई के कारण देश में रेल सेवाओं को सामान्य बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है।

ट्रेन के रवाना होने से पहले ड्रोन ने बनाया निशाना

निप्रो रेलवे स्टेशन पर जिस समय हमला हुआ, उस दौरान प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की अच्छी-खासी संख्या मौजूद थी। यूक्रेन की सरकारी रेलवे कंपनी के मुताबिक, रूसी ड्रोन ने प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन नंबर 866 को निशाना बनाया था। यह ट्रेन निप्रो से जापोरिजिया के लिए रवाना होने वाली थी।

ट्रेन में यात्रियों के बैठने और प्रस्थान की तैयारियां चल रही थीं। इसी बीच ड्रोन हमले ने स्टेशन को अपनी चपेट में ले लिया। अधिकारियों के मुताबिक, हमले में 14 लोगों की मौत हुई और 10 लोग घायल हो गए। घटना के बाद प्रभावित यात्रियों और घायलों की मदद के लिए राहत एवं बचाव से जुड़ी गतिविधियां शुरू की गईं।

रेलवे कंपनी ने बताया कि इलाके में संभावित खतरे को लेकर पहले ही चेतावनी जारी की गई थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग प्लेटफॉर्म पर मौजूद थे। ट्रेन का संचालन शुरू होने से पहले ही हमला हो गया, जिससे यात्रियों को संभलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल सका।

इस घटना के बाद रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर उन इलाकों में स्थिति ज्यादा संवेदनशील है, जहां रूसी ड्रोन हमलों की आशंका लगातार बनी हुई है।

आठ महीने में रेलवे से जुड़े ठिकानों पर 1,600 से ज्यादा हमले

निप्रो की घटना कोई अकेली घटना नहीं है। यूक्रेन के रेलवे नेटवर्क को पिछले कई महीनों से लगातार निशाना बनाया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 के शुरुआती आठ महीनों में रूस की ओर से यूक्रेन के रेल नेटवर्क पर 1,600 से अधिक हमले किए गए।

इन हमलों में केवल यात्री ट्रेनें ही नहीं, बल्कि रेलवे इंजन, परिवहन से जुड़े दूसरे उपकरण और रेल व्यवस्था के महत्वपूर्ण ठिकाने भी शामिल रहे। लगातार हमलों के कारण रेलवे सेवाओं के संचालन और रखरखाव पर दबाव बढ़ा है।

यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने भी रेलवे को हुए नुकसान से जुड़े आंकड़े साझा किए हैं। उनके मुताबिक, फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से रूस 500 से अधिक रेल इंजनों को नुकसान पहुंचा चुका है या उन्हें पूरी तरह नष्ट कर चुका है। खास बात यह है कि इनमें से आधे से ज्यादा घटनाएं वर्ष 2026 में सामने आई हैं।

रेल इंजन किसी भी रेलवे व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। इनके क्षतिग्रस्त होने से केवल एक ट्रेन का संचालन प्रभावित नहीं होता, बल्कि संबंधित रेल मार्ग पर दूसरी सेवाओं को भी रोकना पड़ सकता है। ऐसे में लगातार हो रहे हमलों का असर यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन पर भी पड़ रहा है।

रेलवे पर हमला होने से पूरे देश की सप्लाई चेन पर पड़ता है असर

यूक्रेन में रेलवे केवल लोगों को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाने का माध्यम नहीं है। देश की आर्थिक गतिविधियों और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति में भी इसकी अहम भूमिका है। युद्ध के हालात में जब सड़क मार्गों पर आवाजाही प्रभावित होती है, तब रेलवे के जरिए बड़ी मात्रा में सामान को अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता है।

खासतौर पर अनाज और आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई के लिए रेल परिवहन काफी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा युद्ध प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाने में भी रेलवे का इस्तेमाल किया जाता है।

ऐसे में किसी रेलवे स्टेशन, इंजन या महत्वपूर्ण रेल मार्ग को नुकसान पहुंचने का प्रभाव काफी दूर तक दिखाई दे सकता है। मालगाड़ियों का संचालन प्रभावित होने से सामान की डिलीवरी में देरी हो सकती है। इससे कारोबार, उद्योग और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

यूक्रेन के पूर्व उप परिवहन मंत्री वासिल शेवचेंको ने रेल इंजनों पर हमलों के प्रभाव को समझाते हुए बताया कि किसी इंजन के निशाने पर आने से पूरे रेल मार्ग पर यातायात बाधित हो सकता है। अगर इंजन में आग लग जाए या वह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाए तो उसे हटाने और रेल मार्ग को दोबारा चालू करने में समय लग सकता है।

उन्होंने डीजल इंजनों से जुड़े एक अन्य खतरे की ओर भी ध्यान दिलाया। ऐसे इंजनों में बड़ी मात्रा में ईंधन मौजूद रहता है। अगर हमले के दौरान ईंधन में आग लग जाए तो विस्फोट के बाद आग तेजी से फैल सकती है। इससे आसपास मौजूद रेल संपत्ति और अन्य उपकरणों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।

आम यात्रियों को भी उठाना पड़ रहा है जोखिम

रेलवे नेटवर्क पर हमलों का सबसे सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जिन्हें रोजाना यात्रा के लिए ट्रेनों पर निर्भर रहना पड़ता है। युद्ध के दौरान यात्रियों के लिए सफर करना पहले की तुलना में ज्यादा मुश्किल हो गया है। ट्रेनें निर्धारित समय पर चलेंगी या नहीं, रास्ते में रोकनी पड़ेंगी या नहीं और स्टेशन तक पहुंचना सुरक्षित होगा या नहीं, इन सवालों के बीच लोगों को यात्रा करनी पड़ रही है।

रूसी ड्रोन की गतिविधियों के कारण रेलवे प्रशासन को कई बार चलती ट्रेनों को बीच रास्ते में रोकना पड़ता है। कुछ मामलों में यात्रियों को ट्रेन से नीचे उतारकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाता है। इससे लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है और उनकी यात्रा का समय भी बढ़ जाता है।

यूक्रेन की सरकारी रेलवे कंपनी के सामने चुनौती यह है कि एक तरफ उसे रेल सेवाएं जारी रखनी हैं, वहीं दूसरी ओर यात्रियों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देनी है। लगातार बदलते सुरक्षा हालात में ट्रेन संचालन का फैसला लेना आसान नहीं है।

ड्रोन पर नजर रखने के लिए बनाए गए निगरानी केंद्र

रेलवे नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए यूक्रेन ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किए हैं। ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकारी रेलवे कंपनी ने विशेष निगरानी केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ड्रोन की गतिविधियों और ट्रेनों की आवाजाही पर नजर रखी जाती है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य संभावित हमले की जानकारी मिलने पर समय रहते जरूरी कदम उठाना है। यदि किसी रेल मार्ग या स्टेशन के आसपास खतरे का संकेत मिलता है तो संबंधित ट्रेनों को रोकने और यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश की जाती है।

रेलवे प्रशासन के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि ड्रोन हमले का खतरा कई बार अचानक पैदा हो जाता है। ऐसे में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने और ट्रेन संचालन रोकने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है।

सितंबर में 5,831 ट्रेनों से उतारे गए यात्री

यूक्रेन में रेलवे सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों का अंदाजा सितंबर के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। सरकारी रेलवे कंपनी के मुताबिक, केवल सितंबर महीने में ड्रोन हमलों की आशंका के कारण 5,831 ट्रेनों से यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतारा गया।

इसका मतलब है कि पूरे महीने में औसतन हर दिन लगभग 205 ट्रेनों को रोकने की नौबत आई। यात्रियों को ट्रेन से उतारने के बाद खतरा खत्म होने तक सुरक्षित स्थान पर इंतजार करने के लिए कहा गया।

कई बार लोगों को रेलवे ट्रैक के आसपास या खुले मैदानों में काफी देर तक रुकना पड़ा। इस दौरान यात्रियों को यह इंतजार करना पड़ा कि कब सुरक्षा एजेंसियों की ओर से दोबारा यात्रा शुरू करने की अनुमति मिलेगी।

एक मामले में सितंबर के दौरान एक ट्रेन को करीब 6.5 घंटे तक रोककर रखना पड़ा था। इतनी लंबी देरी से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, रेलवे प्रशासन के लिए उस समय यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण था।

युद्ध के बीच रेल सेवाएं चालू रखना बड़ी चुनौती

निप्रो रेलवे स्टेशन पर हुए हमले ने यूक्रेन के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों को फिर से उजागर कर दिया है। रेलवे नेटवर्क पर लगातार हमले होने के बावजूद देश के लिए इसका संचालन जारी रखना जरूरी है। लाखों लोगों की आवाजाही और जरूरी सामान की सप्लाई इसी व्यवस्था पर निर्भर करती है।

एक तरफ रेलवे को नुकसान पहुंचने से परिवहन व्यवस्था प्रभावित होती है, वहीं दूसरी ओर हमलों के खतरे के कारण ट्रेनों को बार-बार रोकना पड़ता है। इसका असर यात्रियों के समय, व्यापार और देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

निप्रो में 14 लोगों की मौत की घटना इस बात की गंभीर याद दिलाती है कि युद्ध का असर केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहता। सार्वजनिक परिवहन और आम नागरिक भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। यूक्रेन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती रेलवे नेटवर्क को चालू रखने के साथ-साथ यात्रियों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।