रक्षाबंधन पर सुबह 9:48 के बाद भी बांध सकते हैं राखी? जानें राहुकाल और यमगंड को लेकर क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य

रक्षाबंधन पर सुबह 9:48 के बाद भी बांध सकते हैं राखी? जानें राहुकाल और यमगंड को लेकर क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य

रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके सुखी, स्वस्थ व सफल जीवन की कामना करती हैं। भाई भी बहनों की रक्षा और हर परिस्थिति में उनका साथ देने का वचन देते हैं। यही वजह है कि रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के समय को लेकर लोगों के मन में खास उत्सुकता रहती है।

साल 2026 में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस बार श्रावण पूर्णिमा तिथि को लेकर एक खास स्थिति बन रही है। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त की सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। ऐसे में कई लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या सुबह 9:48 बजे के बाद राखी बांधना उचित नहीं होगा? अगर किसी वजह से भाई-बहन सुबह के समय एक-दूसरे से नहीं मिल पाते तो क्या उन्हें अगले समय का इंतजार करना चाहिए या फिर दिन में बाद में भी राखी बांधी जा सकती है?

खासकर उन परिवारों के लिए यह सवाल महत्वपूर्ण है, जिनके भाई-बहन अलग-अलग शहरों में रहते हैं। कई बार यात्रा लंबी होने के कारण सुबह के सीमित समय में एक-दूसरे के घर पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में रक्षाबंधन के पूरे दिन को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बन जाती है। कानपुर की ज्योतिषाचार्या स्वाति सक्सेना के अनुसार, ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ समय का ध्यान रखते हुए दिन में बाद में भी रक्षाबंधन की रस्म पूरी की जा सकती है।

2026 में कब से कब तक रहेगी श्रावण पूर्णिमा?

इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त, गुरुवार को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 28 अगस्त, शुक्रवार को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा। इसी वजह से रक्षाबंधन के लिए सुबह का विशेष मुहूर्त 5 बजकर 57 मिनट से लेकर 9 बजकर 48 मिनट तक बताया गया है।

इस तरह सुबह के समय राखी बांधने के लिए कुल 3 घंटे 51 मिनट का समय उपलब्ध रहेगा। जिन परिवारों के सदस्य एक ही शहर में रहते हैं और सुबह जल्दी मिल सकते हैं, उनके लिए यह समय काफी सुविधाजनक हो सकता है। लेकिन जिन लोगों को लंबी दूरी की यात्रा करनी है, उनके लिए इतने कम समय में पहुंचना व्यावहारिक रूप से कठिन हो सकता है।

यही कारण है कि रक्षाबंधन के दिन सिर्फ सुबह के मुहूर्त को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। ज्योतिषाचार्या के अनुसार, अगर किसी कारण से निर्धारित सुबह के समय में राखी नहीं बांधी जा सके तो कुछ अन्य समय को ध्यान में रखते हुए बाद में भी भाई की कलाई पर राखी बांधी जा सकती है।

सुबह 9:48 के बाद क्या राखी नहीं बांध सकते?

रक्षाबंधन से पहले सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की हो रही है कि 9:48 बजे के बाद पूर्णिमा समाप्त हो जाएगी, तो क्या उसके बाद राखी बांधना अशुभ माना जाएगा? इस सवाल पर ज्योतिषाचार्या स्वाति सक्सेना का कहना है कि केवल सुबह का मुख्य मुहूर्त समाप्त होने का मतलब यह नहीं है कि भाई-बहन रक्षाबंधन की रस्म ही नहीं निभा सकते।

जो लोग सुबह 9:48 बजे तक राखी नहीं बांध पाएं, वे दिन के बाकी समय में राहुकाल और यमगंड जैसे समयों से बचकर रक्षाबंधन की रस्म कर सकते हैं। यानी अगर किसी बहन का भाई सुबह उपलब्ध नहीं है या परिवार को यात्रा करके एक-दूसरे तक पहुंचना है, तो वे बाद में सुविधानुसार राखी बांध सकते हैं।

इससे उन परिवारों को राहत मिल सकती है, जिनके लिए सुबह के मुहूर्त में मिलना संभव नहीं है। रक्षाबंधन केवल एक निर्धारित समय में पूरी होने वाली रस्म नहीं है, बल्कि भाई-बहन के प्रेम और पारिवारिक भावनाओं से जुड़ा पर्व भी है। इसलिए समय को लेकर अनावश्यक तनाव लेने की जरूरत नहीं है।

रक्षाबंधन पर किन समयों से बचना होगा?

ज्योतिषाचार्या के मुताबिक, अगर सुबह 9:48 बजे तक राखी नहीं बांधी जा सकी तो बाद में राखी बांधने से पहले राहुकाल और यमगंड का ध्यान रखना चाहिए। 28 अगस्त को राहुकाल सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक रहेगा।

इस अवधि के बाद दोपहर में एक समय ऐसा भी आएगा, जब राखी बांधने की रस्म की जा सकती है। हालांकि इसके बाद यमगंड का समय शुरू होगा। 28 अगस्त को यमगंड दोपहर 3 बजकर 35 मिनट से शाम 5 बजकर 11 मिनट तक बताया गया है। इसलिए जिन लोगों ने सुबह का समय गंवा दिया है, वे इन अवधियों को छोड़कर बाकी उपलब्ध समय में रक्षाबंधन की रस्म पूरी कर सकते हैं।

इसका मतलब यह हुआ कि सुबह का मुख्य मुहूर्त निकल जाने के बाद भी पूरे दिन को लेकर निराश होने की आवश्यकता नहीं है। परिवार अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार उपयुक्त समय चुन सकते हैं।

सुबह का मुहूर्त इतना खास क्यों माना जाता है?

रक्षाबंधन के लिए श्रावण पूर्णिमा तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि में भद्रा रहित समय देखकर राखी बांधने की परंपरा है। इसलिए पंचांग में तिथि और शुभ समय की गणना की जाती है।

इस बार सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक का समय राखी बांधने के लिए बताया गया है। यह समय सूर्योदय से लेकर पूर्णिमा तिथि समाप्त होने तक की गणना के आधार पर बताया गया है। इसी कारण सुबह के इस अंतराल को लेकर लोगों में ज्यादा उत्सुकता है।

हालांकि हर परिवार की परिस्थितियां एक जैसी नहीं होतीं। किसी के घर में भाई बाहर नौकरी करता है, तो किसी की बहन दूसरे शहर में रहती है। कई लोगों को बस, ट्रेन या अन्य साधनों से सफर करना पड़ता है। ऐसे में सुबह के कुछ घंटों में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना हमेशा संभव नहीं होता।

दूर रहने वाले भाई-बहनों के लिए क्या करें?

आज के समय में बड़ी संख्या में भाई और बहनें अलग-अलग शहरों या राज्यों में रहते हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर घर लौटने के लिए लोग पहले से यात्रा की योजना बनाते हैं। लेकिन लंबी दूरी और परिवहन की स्थिति के कारण हर व्यक्ति सुबह 9:48 बजे तक अपने भाई या बहन के पास पहुंच जाए, यह जरूरी नहीं है।

ऐसे लोगों के लिए ज्योतिषाचार्या की सलाह राहत देने वाली है। अगर सुबह के शुभ समय में राखी नहीं बांधी जा सकी, तो राहुकाल और यमगंड से बचते हुए बाद में यह रस्म की जा सकती है। इसलिए केवल मुहूर्त खत्म होने की वजह से त्योहार की खुशी को प्रभावित करने की जरूरत नहीं है।

परिवार चाहें तो पहले से यात्रा का समय तय कर सकते हैं और कोशिश कर सकते हैं कि सुबह के शुभ समय में राखी बांधी जाए। अगर ऐसा संभव न हो तो बाद के समय के लिए पंचांग देखकर उपयुक्त अवधि चुनी जा सकती है।

रक्षाबंधन में मुहूर्त के साथ भावना भी महत्वपूर्ण

रक्षाबंधन का धार्मिक महत्व अपनी जगह है, लेकिन इस त्योहार का सबसे बड़ा आधार भाई-बहन का आपसी स्नेह माना जाता है। राखी बांधते समय बहन अपने भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करती है। भाई भी बहन की सुरक्षा, सम्मान और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेता है।

इसलिए अगर किसी कारण से सुबह का निर्धारित समय निकल जाए तो इसे लेकर मन में डर या चिंता रखने की जरूरत नहीं है। धार्मिक परंपराओं में शुभ समय का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए उपलब्ध शुभ समय का उपयोग किया जा सकता है।

रक्षाबंधन के दिन भाई-बहन एक-दूसरे के घर जाकर राखी बांधते हैं, मिठाई खिलाते हैं और उपहार देते हैं। कई परिवारों में यह त्योहार सुबह से लेकर शाम तक चलता है। ऐसे में सुबह 9:48 बजे के बाद भी उचित समय देखकर रस्म निभाने का विकल्प उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है, जो मुख्य मुहूर्त में साथ नहीं आ पाते।

क्या है इस बार का पूरा समय-सार?

28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन श्रावण पूर्णिमा तिथि सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी। सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का विशेष समय बताया गया है। इस दौरान कुल 3 घंटे 51 मिनट का समय मिलेगा।

अगर इस अवधि में राखी बांधना संभव नहीं हो पाए तो सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहने वाले राहुकाल से बचना होगा। इसके बाद उपलब्ध समय में रक्षाबंधन की रस्म की जा सकती है। वहीं दोपहर 3:35 बजे से शाम 5:11 बजे तक यमगंड रहेगा, इसलिए इस अवधि को भी छोड़ने की सलाह दी गई है।

इस तरह 2026 के रक्षाबंधन पर सुबह का मुख्य मुहूर्त सीमित जरूर है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि 9:48 बजे के बाद भाई-बहन राखी नहीं बांध सकते। जो लोग सुबह के समय में नहीं मिल पाते, वे राहुकाल और यमगंड को छोड़कर दिन में बाद में भी त्योहार मना सकते हैं।

रक्षाबंधन के दिन सुबह के शुभ मुहूर्त को प्राथमिकता देना अच्छा रहेगा। लेकिन यात्रा, नौकरी या किसी अन्य मजबूरी के कारण ऐसा संभव न हो तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। ज्योतिषाचार्या स्वाति सक्सेना के अनुसार, उपयुक्त समय देखकर बाद में भी राखी बांधी जा सकती है। इस तरह भाई-बहन अपने प्रेम और रिश्ते की इस खास परंपरा को पूरे उत्साह के साथ निभा सकते हैं।

(Photo : AI Generated)