झज्जर के झासवा गांव में नहीं हुआ होलिका दहन:सालों पहले ग्रामीणों ने खाई थी कसम, गोवंश की हुई थी मौत

झज्जर के झासवा गांव में नहीं हुआ होलिका दहन:सालों पहले ग्रामीणों ने खाई थी कसम, गोवंश की हुई थी मौत हरियाणा के झज्जर में एक गांव होली के पावन पर्व पर होलिका दहन नहीं किया गया। सालों पहले ग्रामीणों ने इस पर्व पर होलिका दहन न करने की कसम खाई थी, जिस पर आज तक ग्रामीण कायम हैं। गांव में कई साल पहले हुई घटना के कारण यह त्योहार फीका रहा। देशभर में होली पर्व पूरे धूम-धाम से मनाया जाता है और इस पर लोग भगवान प्रहलाद की पूजा करते हैं। वहीं समाज के लोग इकट्ठा होकर शाम के समय में होलिका दहन करते हैं। झज्जर जिले में एक ऐसा गांव भी है जहां पर होली के दिन पूजा तो की जाती है लेकिन शाम के समय में होलिका दहन नहीं किया जाता। गोवंश के झुलसे बंद हुआ होलिका दहन
जिले के झासवां गांव में लोग कई सालों से होली पूजन के बाद होलिका दहन नहीं करते। पूरे भारत वर्ष की तरह झासवां में होली का पर्व पूरे रीति रिवाजों के साथ धूमधाम से मनाया जाता था। कुछ साल पहले गांव में होली के दिन ही बड़ी घटना घटित हुई थी। गांव में होली का दिन था, लोगों ने शाम को पूजा कर होलिका दहन के लिए सभी तैयारियां की हुई थी। उसी दिन त्योहार में शाम के समय में होलिका दहन किया गया। लेकिन दहन होने के बाद वहां पर दो गोवंशों के बीच अचानक झड़प हो गई और वे आपस में लड़ते हुए उस धधकती हुई आग में जा गिरे थे। गांव के लोगों ने उन्हें बचाने का काफी प्रयास भी किया था लेकिन दो गोवंशों में से एक की अधिक झुलसने के कारण मौत हो गई। अगले दिन गांव में डुल्हेंडी का पर्व भी फीका पड़ गया और लोगों ने इस त्योहार पर होलिका दहन न करने की कसम खा ली। उसके बाद से ही आज तक गांव झासवा में होली पूजन के बाद दहन नहीं किया जाता। दहन न करने का प्रण लिया
ग्रामीणों ने बताया कि आज भी बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि गांव के लोगों के सामने ही एक गौवंश उस आग में झुलस गया था। ग्रामीणों ने बताया कि होलीका दहन में भगवान भगत सांकेतिक प्रहलाद को ही जब आग के बीचों बीच से निकाल लिया जाता है और उस आग में नहीं जलने दिया जाता। लेकिन गांव झासवा में उस साल की होली के पर्व पर लोगों के सामने ही एक गौ वंश की जलकर मौत हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि जब यह हादसा हुआ तो एक पंचायत का आयोजन किया गया और होली के पर्व पर होलिका दहन न करने का प्रण लिया गया था। ग्रामीणों ने कहा कि कई सौ साल पुरानी बात है, जो होली पर्व आते ही फिर से ताजा हो जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि होलिका दहन गांव में तब तक नहीं होगा, जब तक कोई गाय इसी दिन बछड़ा पैदा न कर ले। वहीं अगर गांव में होली के दिन अगर किसी घर में बेटा पैदा होता है या गाय बछड़ा देती है तो होलिका दहन फिर मनाना शुरू कर दिया जाएगा।

महेंद्रगढ़ में श्याम प्रेमियों द्वारा फूलों की होली खेली जाएगी:डीजे समेत नाचते हुए नगर परिक्रमा की जाएगी, झांकी निकलेगी

महेंद्रगढ़ में श्याम प्रेमियों द्वारा फूलों की होली खेली जाएगी:डीजे समेत नाचते हुए नगर परिक्रमा की जाएगी, झांकी निकलेगी हरियाणा के महेंद्रगढ़ में होली के बाद दुल्हंडी वाले दिन श्याम प्रेमियों के द्वारा श्याम की झांकी, डीजे के साथ निकाली जाएगी, जिसमें काफी संख्या में महिला व पुरुष नाचते-गाते फूलों की होली खेलते हुए नगर परिक्रमा करेंगे। उसके बाद श्याम मंदिर में भंडारा होगा। इसके बारे में जानकारी देते हुए पंकज व पवन तायल ने बताया कि उनकी यह 15वीं श्याम बाबा की झांकी निकाली जाएगी। 9 बजे श्री श्याम मंदिर नजदीक खादी भंडार से श्याम मंडल के द्वारा फाग के अवसर पर श्याम प्रेमियों के द्वारा श्याम बाबा की झांकी डीजे के साथ निकाली जाएगी, जिसमें श्याम प्रेमी महिला व पुरुष नाचते गाते हुए फूलों से होली खेलते हुए नगर की परिक्रमा करेंगे। यह झांकी खादी भंडार मंदिर से शुरू होकर नगर के भगवान परशुराम चौक, सब्जी मंडी रोड, बालाजी चौक, सिनेमा रोड, माता मसानी चौक होते हुए वापस श्री श्याम मंदिर प्रांगण में पहुंचेंगी। इस ध्वज यात्रा में नगर के सैकड़ों श्याम प्रेमी बाबा के निशान के साथ होली महोत्सव को मनाएंगे। श्री श्याम मंदिर खादी भंडार पर श्याम प्रेमियों के लिए भंडारे का आयोजन किया जाएगा। वही रास्ते में कई स्थानों पर ठंडाई, शरबत व पानी का इंतजाम किया जाएगा, जिससे झांकी में चलने वाले श्याम प्रेमियों को किसी प्रकार की कोई असुविधा न हो। श्याम प्रेमी के द्वारा फूलों की होली खेली जाएगी
उन्होंने बताया कि हर वर्ष शहर व आसपास के श्याम प्रेमियों के द्वारा श्याम बाबा की झांकी डीजे के साथ निकाली जाएगी, जिसमें श्याम प्रेमी श्याम के भजनों पर महिला, पुरुष व बच्चे नाचते गाते हुए दुल्हंडी का उत्सव मनाते हैं। फूलों की होली खेलते हैं।

हरियाणा के एक गांव में होली,2 में होलिका दहन नहीं:साधु का श्राप-बाबा का नियम और गोवंश जलना कारण; एक जगह दूसरे दिन मनती होली

हरियाणा के एक गांव में होली,2 में होलिका दहन नहीं:साधु का श्राप-बाबा का नियम और गोवंश जलना कारण; एक जगह दूसरे दिन मनती होली हरियाणा में 3 ऐसे गांव हैं, जहां होलिका दहन नहीं होता है। हालांकि 2 गांवों में तो रंगों की होली खेली जाती है, लेकिन एक गांव में बिल्कुल भी रंग नहीं उड़ाया जाता है। तीनों गांवों में होलिका दहन न करने के अलग-अलग कारण हैं। वहीं एक गांव में त्योहार के अगले दिन होली खेली जाती है। कैथल के गांव में 300 सालों से होली नहीं मनाई जा रही है। यहां होलिका दहन के दिन मजाक करने से गुस्से हुए साधु ने आग में कूदकर जान दे दी थी। उस वक्त साधु ने श्राप दिया था कि जो होली मनाएगा उसके साथ अनहोनी होगी। तब से यहां होली नहीं मनाई जा रही। रेवाड़ी के गांव में 500 साल से होलिका दहन नहीं हुआ। यहां एक बाबा ने होलिका दहन न करने का नियम बनाया था। जिसे लोग मानते हैं, लेकिन अगले दिन होली खेलते हैं। झज्जर के भी एक गांव में कई सालों से होलिका दहन नहीं हुआ। यहां होलिका दहन के दौरान एक गोवंश की आग में झुलसकर मौत हो गई थी। तब से यहां पूजा तो की जाती है, लेकिन होलिका दहन नहीं किया जाता। अब विस्तार से चारों गांवों की कहानियां पढ़िए…. कैथल: 300 साल पहले साधु ने दिया था श्राप
कैथल के दुसेरपुर गांव में 300 साल से होली का त्योहार नहीं मनाया जा रहा। ग्रामीण बताते हैं कि यहां 300 साल पहले होली दहन के लिए गांव के लोग सूखी लकड़ियां, उपले और अन्य चीजें इकट्ठा कर रहे थे। इस बीच कुछ युवाओं ने समय से पहले ही होलिका दहन कर दिया। ऐसा होता देख गांव के स्नेही राम साधु ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं माने। बात मानना तो दूर उन युवकों ने साधु के छोटे कद का मजाक उड़ाया। इससे साधु गुस्सा हो गए। वह जलती हुई होलिका में कूद गए। जलते हुए उन्होंने श्राप दिया कि आज के बाद इस गांव में होली नहीं मनेगी। जो भी होली मनाएगा, उसके साथ अनहोनी होना शुरू हो जाएगी। इस सूचना पर गांव के मौजिज व्यक्ति मौके पर पहुंच गए और साधु से श्राप मुक्ति के लिए प्रार्थना की। श्राप से मुक्ति का उपाय भी बताया
ग्रामीणों को गिड़गिड़ाते देख साधु ने कहा कि अगर गांव में होली के दिन कोई गाय बछड़े को जन्म दे या किसी घर में बच्चा पैदा हो जाए तो इस श्राप से मुक्ति मिल जाएगी। 300 साल हो चुके हैं, मगर न तो कोई बछड़ा होली के दिन पैदा हुआ और न ही बच्चा। इस गांव के लोग आज भी पर्व मनाने के लिए घरों से बाहर नहीं निकलते। रेवाड़ी: बाबा ने होलिका दहन न करने का नियम बनाया
रेवाड़ी के टीकला गांव में 500 साल से होलिका दहन नहीं हो रहा। बाबा भगवानदास ने होलिका दहन नहीं करने का नियम बनाया था, जिस पर ग्रामीण आज भी कायम हैं। इस गांव में बाबा भगवानदास ने तपस्या की थी और यहीं पर समाधि ली। यहां समाधि स्थल पर मंदिर बनाया गया है। बाबा ने तपस्या के समय ग्रामीणों को अनावश्यक खर्च से बचाने को नियम बनाया था कि वह केवल धुलेंडी (फाग) का त्योहार ही मनाएंगें। होलिका दहन नहीं होगा। इस दिन भी बाजार से मिठाई लाने की बजाए घर पर ही लोग खीर-हलवा और चूरमा बना सकते हैं। उसके बाद से लोग बाबा का नियम मानते हुए केवल धुलेंडी के दिन धूमधाम से फाग खेलते हैं। लोग हुक्का-बीड़ी नहीं पीते
यही नहीं बाबा ने ग्रामीणों से हुक्का, बीड़ी और शराब से दूरी बनाने का आह्वान किया था। बाबा के आदेश को मानते हुए इतने साल बाद भी हुक्का-बीड़ी काे ग्रामीण हाथ नहीं लगा रहे। ज्यादातर ग्रामीण शराब भी नहीं पीते। इतना ही नहीं, आसपास के कुछ गांवों में भी बाबा की मान्यता है। बाबा का आदेश बन गया नियम
टीकला पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि बिरेंद्र टोकस ने बताया कि 500 साल से गांव में बाबा भगवानदास का नियम चला आ रहा है। जिसके कारण होलिका दहन नहीं होता। बाबा फिजूलखर्ची के सख्त खिलाफ थे, इसी वजह से यहां केवल धुलेंडी का त्योहार मनाया जाता है। झज्जर: जलती होलिका में गिर गए थे 2 गोवंश
झज्जर के झासंवा गांव में होली के दिन पूजा तो की जाती है, लेकिन शाम के समय में होलिका दहन नहीं किया जाता। बुजुर्गों के मुताबिक जब गांव में होलिका पूजन के बाद होलिका दहन किया जा रहा था तो उसी समय 2 गोवंश आपस में लड़ते हुए जलती हुई होलिका में गिर पड़े। लोगों ने उन्हें बचाने का काफी प्रयास किया, लेकिन एक की ज्यादा झुलसने के कारण मौत हो गई। इसके बाद ग्रामीणों ने मिलकर फैसला किया कि अब होलिका दहन नहीं किया जाएगा। हर साल गांव में होलिका पूजन होता है, लेकिन कभी होलिका दहन नहीं किया जाता। ग्रामीणों ने बताया कि होलिका दहन गांव में तब तक नहीं होगा, जब तक कोई गाय इसी दिन बछड़ा पैदा न कर ले। वहीं अगर गांव में होली के दिन अगर किसी घर में बेटा पैदा होता है या गाय बछड़ा देती है तो होलिका दहन फिर मनाना शुरू कर दिया जाएगा। दादरी: 167 साल से अगले दिन मनाई जाती है धुलेंडी
चरखी दादरी जिले के गांव चांदवास में 167 साल से होली का त्योहार फाग के दूसरे दिन मनाया जाता है। ग्रामीण रामभगत ने बताया कि वे पूर्वजों से सुनते आ रहे हैं कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद जींद रियासत अंग्रेजों ने एक सरदार को सौंपी थी। उसने गांव से अनुसूचित वर्ग के लोगों को निकालकर पास में अलग से बसाया था। उन लोगों ने वहां अपनी झोपड़ियां बनाई हुई थीं। रामभगत के अनुसार 1858 में रात को होलिका दहन हुआ था और अगले दिन वहां रहने वाले लोग गांव में धुलेंडी खेलने के लिए गए हुए थे। उस दौरान तेज आंधी आ गई और जहां होलिका दहन हुआ था वहां से चिंगारी निकली और झोपड़ियों में आग लग गई। फाग खेल रहे लोगों ने आग की लपटें देखी तो वहां पहुंचे और अपने स्तर पर आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन आग फैल चुकी थी और आंधी चलने के कारण काबू नहीं पाया जा सका। इस आग में वहां रह रहे 15 से 20 परिवारों की झोपड़ियों के साथ घरेलू सामान, गाय, बकरी व दो से तीन छोटे बच्चे जल गए थे। बाद में ग्रामीणों ने होलिका दहन का स्थान बदला। उसके बाद से ग्रामीण धुलेंडी दूसरे दिन खेलते हैं। झज्जर के प्रसाद गिरी मंदिर में होली पर चढ़ते हैं पंखे
झज्जर के बाबा प्रसाद गिरी मंदिर में होली के दिन पंखे चढ़ाए जाते हैं। जिन लोगों की मन्नतें पूरी हो जाती हैं वे यहां पंखे दान करते हैं। यह परंपरा 300 सालों से चली आ रही है। हर साल की तरह इस बार भी समारोह और भंडारे की तैयारी है। मंदिर के महंत परमानंद महाराज ने बताया कि पहले के जमाने में लोग कागज के पंखे दान करते थे। आज कल लोग मोटर के पंखे, कूलर और एसी दान करने लगे हैं। जिन भक्तों की मन्नतें पूरी होती हैं वे मंदिर में दान देते हैं।

महेंद्रगढ़ में 56 वां महामूर्ख सम्मेलन आज:सुप्रसिद्ध कवि देंगे अपनी रचनाओं की प्रस्तुति, घोड़े पर बैठकर आएंगे महामूर्खाधीश

महेंद्रगढ़ में 56 वां महामूर्ख सम्मेलन आज:सुप्रसिद्ध कवि देंगे अपनी रचनाओं की प्रस्तुति, घोड़े पर बैठकर आएंगे महामूर्खाधीश महेंद्रगढ़ में आज महामूर्ख सम्मेलन होगा, जिसमें में भारत के सुप्रसिद्ध कवि पहुंचेंगे और अपनी रचनाओं के द्वारा लोगों का मनोरंजन करेंगे। यह प्रोग्राम देर शाम तक चलेगा। महेंद्रगढ़ में मास्टर जयनारायण सांस्कृतिक मंच के द्वारा धुलेंडी वाले दिन 14 मार्च शुक्रवार को दोपहर दो बजे के बाद श्री रामलीला परिषद पुरानी रामलीला के प्रांगण में महामूर्ख सम्मेलन के तत्वाधान में एक विशाल हास्य कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। मंच के प्रधान नरेश जोशी ने बताया कि इस कार्यक्रम में सुधीर दीवान महामूर्खाधीश के पद पर सुशोभित होंगे। वहीं मुख्य अतिथि पूर्व शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा होंगे, जबकि अध्यक्षता कुलदीप यादव वरिष्ठ भाजपा नेता करेंगे। इस सम्मेलन में राष्ट्रीय कवि सुरेश मक्कड़ साहिल द्वारा लिखित हरियाणवी काव्य संग्रह गजब करे सै किताब का लोकार्पण भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह महामूर्ख सम्मेलन का कार्यक्रम अब भी देश के दो-तीन जगह ही आयोजित होता है। जयपुर, दिल्ली और महेंद्रगढ़ में। महामूर्ख सम्मेलन में ये कवि पहुंचेंगे मंच के प्रधान नरेश जोशी ने बताया कि यह सम्मेलन 1970 से शुरू हुआ था, जो अब 56 वां महामूर्ख सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें कवि अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों का मनोरंजन करेंगे। इस हास्य कवि सम्मेलन में भारत के सुप्रसिद्ध कवियों में ग्वालियर से तेज नारायण शर्मा, जबलपुर से मणिका दुबे, मध्यप्रदेश से दिनेश देशी घी, उतर प्रदेश बहराइच से शरफ नानपारवी, ब्यावरा एमपी से मनीष गोस्वामी और हरियाणवी भाषा के प्रतिष्ठित साहित्यकार सत्यवीर नाहड़िया रेवाड़ी अपनी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं का मनोरंजन करेंगे। महामूर्ख को घोड़े पर बिठाकर लाया जाता है प्रधान ने बताया कि महामूर्खाधीश को शहर के आजाद चौक से घोड़े पर बिठाकर डीजे के साथ लोगों के द्वारा डांस करते हुए प्रोग्राम स्थल तक लाया जाता है। उसके गले में विभिन्न प्रकार की सब्जियों की माला पहनाई जाती है। महामूर्ख मंच पर बैठा हुआ अलग ही दिखाई देता है। वह बीच में कभी-कभी अलग तरह की बात भी करता है लोगों के मनोरंजन के लिए। महामूर्ख सम्मेलन 1970 से शुरू हुआ था
प्रधान ने बताया कि महामूर्ख सम्मेलन 1970 में प्रोफेसर शिवराम शर्मा ने इस की शुरुआत की थी। उस समय यह आयोजन पूरे भारत देश में दो स्थानों पर दिल्ली और महेंद्रगढ़ में आयोजित किया जाता था। पहले यह कार्यक्रम निरंतर मुसद्दी लाल की धर्मशाला से शुरुआत होकर कभी लाल बंशीधर की धर्मशाला व कभी कमला भवन धर्मशाला में होते रहे। आज यह महामूर्ख सम्मेलन विशाल रूप में पिछले कई वर्षों से श्री रामलीला परिषद के प्रांगण में आयोजित हो रहा है। इसमें घीसाराम गौड महामूर्ख बने तो कभी रामजीलाल महाशय तो कभी ओम प्रकाश यादव एडवोकेट बने, फिर काफी लंबे अरसे तक मास्टर जय नारायण इस महामूर्ख के पद को सुशोभित करते रहे। मास्टर जयनारायण के परलोक गमन के बाद, राव कुलबीर बोहरा उसके बाद सुधीर दीवान महामूर्ख का पद सुशोभित करते आ रहे हैं। मास्टर जय नारायण सांस्कृतिक मंच गठन होने के बाद मुकेश लवानिया पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी भी इस पद को सुशोभित कर चुके हैं।

म्यांमार से छूटे हरियाणा के युवक की कहानी:थाइलैंड में नौकरी के बहाने चीन के ठगों को सौंपा; 18 घंटे काम कराते, टॉर्चर करते थे

म्यांमार से छूटे हरियाणा के युवक की कहानी:थाइलैंड में नौकरी के बहाने चीन के ठगों को सौंपा; 18 घंटे काम कराते, टॉर्चर करते थे म्यांमार में चीन के साइबर माफिया के चंगुल से छूटकर लौटे 540 भारतीयों में जींद के भी 3 युवक हैं। इनमें एक जींद शहर तो 2 सफीदों से हैं। इन युवाओं को थाइलैंड में डेटा एंट्री ऑपरेटर की जॉब का लालच दिया गया। मगर, थाइलैंड से इन्हें म्यांमार के पहाड़ी क्षेत्र में बनी बड़ी बिल्डिंग में बंधक बनाकर साइबर ठगी कराई गई। म्यांमार से लौटे जींद के नवीन ने दैनिक भास्कर से बातचीत में इसके बारे में चौंकाने वाले खुलासे किए। ऑफ कैमरा नवीन ने बताया कि वह 150 दिन उस बिल्डिंग में रहा। उनसे 18-18 घंटे काम कराते थे। खूबसूरत लड़कियों की फोटो लगा उनसे सोशल मीडिया अकाउंट बनवाए जाते। इसके बाद साइबर स्कैम के लिए बाकायदा स्क्रिप्ट देते थे। इसके बाद अमेरिका समेत दूसरे देशों के लोगों से मैसेंजर में ट्रेडिंग और दोगुने रुपए कमाने का झांसा देकर ठगी कराते थे। जो युवक मना करते, उनके साथ मारपीट की जाती थी। उसके बाल-नाखून नोचे जाते। टॉयलेट जाने पर पानी नहीं देते थे। सही काम करने पर इन्सेंटिव देते तो ड्यूटी पर एक मिनट भी लेट होने और टारगेट पूरा न करने पर जुर्माना लगाने के साथ टार्चर करते थे। जींद के युवक की जुबानी, पूरी कहानी 1. एजेंट ने कहा- थाइलैंड में नौकरी मिलेगी, वहां चीनी ठगों को सौंपा
म्यांमार से लौटे जींद के नवीन ने बताया कि उसका करनाल के गगसीना गांव के एजेंट से संपर्क हुआ था। उसने बताया कि थाइलैंड में एक कंपनी में डेटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी है। वहां पर 60 हजार रुपए प्रति माह वेतन दिया जाएगा। एजेंट ने उससे डेढ़ लाख रुपए लेकर उनको टूरिस्ट वीजा पर 23 सितंबर 2024 को थाइलैंड भेज दिया। थाइलैंड पहुंचने पर एजेंट ने उसे चीन के साइबर ठगों को सौंप दिया। 2. 50 एकड़ में बनी बिल्डिंग में ले गए, स्टॉक मार्केट का काम बताया
इसके बाद वह लोग उनको कियान सिटी से दूर थाइलैंड व म्यांमार की सीमा पर बनी नदी पार करवाकर पहाड़ी क्षेत्र में लगभग 50 एकड़ में बने क्षेत्र में ले गए। यहां बनी बिल्डिंगों के चारों तरफ काफी ऊंची चारदीवारी बनी हुई है। शुरुआत में उनको बताया कि उनकी कंपनी स्टॉक मार्केट में काम करती है और पूरे विश्व के लोगों से निवेश करवाने का काम करती है। इस काम के लिए 60 हजार रुपए महीना वेतन दिया जाएगा। 3. आधी सेलरी दी, डॉलर डलवाकर हड़प लेते, फिर ID चेंज कर देते
एक माह तक 60 हजार रुपए महीने सैलरी देने के बाद टारगेट पूरा नहीं होने की बात कहकर सैलरी को घटाकर 30 हजार रुपए महीना कर दिया। मुझे कुछ ही दिन में ये एहसास हो गया था कि यह लोग साइबर ठगी का काम करते हैं। मैं जिन लोगों के पास काम रहा था, वह क्रिप्टो करेंसी में निवेश का काम करवाते थे। उनको सोशल मीडिया पर अमेरिका के लोगों से संपर्क किया जाता था। जब सामने वाला व्यक्ति निवेश करने के लिए तैयार हो जाता था तो ठगी करने वाले लोग अपने वॉलेट में यूएसडीटी (डिजिटल करेंसी) डॉलर डलवा लेते और उस राशि को हड़प लेते। एक बार फ्रॉड करने के बाद तुरंत आईडी चेंज कर दी जाती और उन्हें दूसरा टास्क दे दिया जाता। 4. झपकी भी आई तो सारी सैलरी काट जुर्माना लगा देते
अगर उनके पास कोई कर्मचारी ऐसा करने से मना करता तो उसके साथ मारपीट की जाती। उसे प्रताड़ित किया जाता। मेरे साथ भी कई बार मारपीट की गई। शुरुआत में एक छुट्टी दी गई और 12 घंटे काम लिया गया लेकिन बाद में 18-18 घंटे काम लेने लगे। एक मिनट भी लेट होने, काम करते समय नींद की झपकी आने पर पूरे महीने की सेलरी काट फाइन लगा देते। 5. काम छोड़ने वाले से 6 लाख मांगते, मोबाइल जमा करा लेते
अगर कोई काम नहीं करना चाहता और वहां से जाना चाहता तो उससे 6 लाख रुपए मांगे जाते। कंपनी में लगभग 500 से अधिक भारतीयों को बंधक बनाया हुआ था। कंपनी में कंप्यूटर सिस्टम दिया हुआ था, उसी पर फेसबुक के जरिए लोगों को फंसवाते। ज्यादा लोगों के साथ फ्रॉड करने पर इन्सेंटिव देते और टारगेट पूरा नहीं होने पर फाइन करते। उनका मोबाइल जमा करवा लिया जाता था। उनका फोन टेप किया जाता था। वह फंसे हुए हैं, इसकी जानकारी देने वालों को जाने से मारने की धमकी देते थे। बाहर कैसे निकले, डेढ़ माह चली प्लानिंग, शाह से भी बात हुई
नवीन ने बताया कि हम लोगों के साथ साइबर फ्रॉड नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने बाहर निकलने की प्लानिंग बनानी शुरू की। डेढ़ माह तक वह मिलकर बाहर निकलने का प्लान बनाते रहे। उसी दौरान उनका संपर्क हैदराबाद के मधुकर रेड्डी से हुआ। उसके एंबेसी से लेकर राजनीति में अच्छे लिंक थे, इसलिए मधुकर की मदद से इंडियन एंबेसी से संपर्क साधा गया। 10 फरवरी को गृह मंत्री अमित शाह के साथ भी उनके ग्रुप के लोगों की बात हुई। इंडियन एंबेसी ने कहा कि उनकी मदद की जाएगी, कुछ दिन इंतजार करें। इससे वह हौंसले में आ गए। 20 फरवरी को उनके पास मैसेज आया कि अब उन्हें रेस्क्यू करने के लिए आ रहे हैं। 20 फरवरी की शाम को उन्होंने काम छोड़ दिया और बिल्डिंग के बाहर बैठ गए। इस पर वहां की प्राइवेट आर्मी ने उन्हें प्राइवेट जेल में डाल दिया। 21 को सुबह आर्मी आ गई और उनका रेस्क्यू शुरू कर दिया गया। 22 फरवरी तक रेस्क्यू चला। इसके बाद आर्मी के जहाज की सहायता से बार्डर पर लाया गया। यहां दस्तावेज जांचने के बाद उन्हें गाजियाबाद लाया गया। यहां से जींद तक गाड़ी में लाया गया।

हरियाणा में आज कोड़े मार-डाट होली:डॉक्टर रंग नहीं मिट्‌टी लगाएंगे, महामूर्खों का सम्मेलन, नूंह में जुमा के चलते 1000 पुलिसकर्मी तैनात

हरियाणा में आज कोड़े मार-डाट होली:डॉक्टर रंग नहीं मिट्‌टी लगाएंगे, महामूर्खों का सम्मेलन, नूंह में जुमा के चलते 1000 पुलिसकर्मी तैनात हरियाणा में आज कोरड़ा (कोड़े) मार और डाट होली मनाई जाएगी। कोड़े मार होली मुख्य तौर पर हिसार, रोहतक, भिवानी, झज्जर और रेवाड़ी में खेली जाएगी। जिसमें देवर के रंग डालने पर भाभी उसे कोड़े मारती दिखेगी। वहीं डाट होली पानीपत के नौल्था गांव में खेली जाएगी, जिसमें गांव के लोग दीवारों पर खड़े होकर एक-दूसरे पर रंग डालेंगे। महेंद्रगढ़ में महामूर्खों का सम्मेलन हाेगा, इसमें देशभर के 7 कवि आएंगे। पचंकूला में डॉक्टरों की संस्था ऑल इंडिया मेडिकल एंड रिसर्च एसोसिएशन के सदस्य इकट्‌ठा होंगे। जहां वे शरीर पर चिकनी मिट्‌टी लगाकर होली मनाएंगे। वह इसके फायदे भी बताएंगे। वहीं नूंह में होली और जुमा एक साथ होने की वजह से पुलिस अलर्ट पर है। यहां मस्जिदों के बाहर पुलिस के करीब एक हजार जवान तैनात किए गए हैं। इसके अलावा एक बटालियन भी रिजर्व रखी गई है। डाट और कोड़े मार होली की पूरी कहानी… पानीपत में साल 1288 से खेली जा रही डाट होली
पानीपत के नौल्था गांव में डाट होली खेली जाती है। इस बार 907वीं बार यह होली खेली जाएगी। गांव में साल 1288 से चली आ रही परंपरा के मुताबिक यह होली खेली जाती है। ग्रामीणों के अनुसार बाबा लाठे वाले, 907 साल पहले फाग के दौरान मथुरा के दाऊजी गांव गए थे। वहां फाग उत्सव में लोगों का आपसी प्रेम और भाईचारा देख कर प्रभावित हुए। उन्होंने गांव आकर उत्सव को मनाने का फैसला लिया और तभी से नौल्था में हर साल डाट होली उत्सव मनाया जा रहा है। गांव के लोग इस ऐतिहासिक परंपरा के लिए अंग्रेजों तक से लोहा ले चुके हैं। दीवार पर खड़े होकर रंग डालते हैं, जो पीछे हटा, वह हार जाता है
होली के त्योहार पर अमूमन देखने को मिलता है कि किसी पर रंग लगाए तो वो भागने लगता है, लेकिन इन दोनों गांव के युवा एक दीवार के साथ लगकर बैठ जाते हैं। जितना चाहे रंग डालो, पीछे नहीं हटते। इसी तरह दो टोलियां एक-दूसरे के सामने हो जाती हैं। ऊपर से रंग बरसाया जाता है। जो टोली, दूसरी टोली को पीछे धकेल देती है, वो जीत जाती है। गांव की महिलाएं भी घरों की छत पर बैठकर युवाओं पर कढ़ाई में गर्म किया रंग डालती हैं। इस होली में डाट का मतलब सपोर्ट देना है। इसीलिए इसमें 2 समूह बनकर अपने–अपने साथियों को सपोर्ट करते हैं। बेटे की मौत पर भी टूटने नहीं दी थी परंपरा
ग्रामीणों के अनुसार अंग्रेजों के समय में गांव में एक धूमन जैलदार होता था, जिसका एक बेटा सरदारा था। गांव में होली की पूरी तैयारी थी, लेकिन उसी समय धूमन के बेटे की मौत हो गई। गांव में शोक था और किसी ने होली नहीं खेली। धूमन ने गांव की परंपरा टूटती देखी तो चौपाल से एक बाल्टी रंग की भरी और बेटे की अर्थी पर डाल दी। सभी गांव वालों को कहा कि भगवान की मर्जी से आना-जाना होता है। त्योहार भुलाए नहीं जा सकते। तब से हर वर्ष इसी तरीके से होली खेली जाती है। एक बार नहीं मनाई थी होली, भुगतना पड़ा था खामियाजा
नौल्था के मौजिज व्यक्तियों ने बताया कि परंपरा ऐतिहासिक है। वे अपील करते हैं कि प्रशासन भी गांव नौल्था आकर विश्वभर में विख्यात इस पर्व को देखे और मनाए। गांववालों ने अब तक के इतिहास में एक बार यह पर्व इस तरह नहीं मनाया था। इसका खामियाजा पूरे गांव को किसी न किसी रूप में भरना पड़ा था, इसलिए पर्व को ग्रामीण मनाने से नहीं चूकते हैं। महामूर्ख सम्मेलन 1970 साल पुराना, महामूर्खाधीश घोड़े पर आएगा
महेंद्रगढ़ में मास्टर जयनारायण सांस्कृतिक मंच महामूर्ख सम्मेलन करा रहा है। यह एक विशाल हास्य कवि सम्मेलन होगा। मंच के प्रधान नरेश जोशी ने बताया कि यह सम्मेलन 1970 से शुरू हुआ था। इस बार 56वां महामूर्ख सम्मेलन कराया जा रहा है। पहले यह सिर्फ महेंद्रगढ़ और दिल्ली में होता था। अब इसे जयपुर में भी कराया जा रहा है। इस कार्यक्रम में ग्वालियर से तेज नारायण शर्मा, जबलपुर से मणिका दुबे, मध्यप्रदेश से दिनेश देसी घी, उतर प्रदेश बहराइच से शरफ नान पारवी, मध्यप्रदेश से मनीष गोस्वामी और हरियाणवी भाषा के प्रतिष्ठित साहित्यकार सत्यवीर नाहड़िया रेवाड़ी अपनी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं का मनोरंजन करेंगे। इस सम्मेलन में महामूर्खाधीश को घोड़े पर बिठाकर डीजे के साथ लाया जाता है। उसके गले में सब्जियों की माला पहनाई जाती है। हिसार-रोहतक की कोरड़े मार होली, देवर रंग डालता है, भाभी कोड़े से मारती है
यह परंपरा काफी समय से चली आ रही है। इसमें होली के दिन सुबह होते ही गांव के सार्वजनिक चौक पर बड़े-बड़े कड़ाहों में रंग और पानी मिलाकर रख देते हैं। जहां गांव की महिलाएं अपने हाथों में कपड़े के गुथे हुए कोरड़े (कोड़े) लेकर आती हैं। इसके बाद देवर भाभी पर रंग डालता है और भाभी उसे कोड़े से मारती है। हिसार के कुलेरी गांव के पूर्व सरपंच राजेंद्र मिठारवाल ने बताया कि सार्वजनिक रूप से मनाए जाने वाले फाग उत्सव से आपसी भाईचारा बना रहता है। जहां गांव में लोग आपसी गिले शिकवे भुलाकर आत्मिक रूप से फाग खेलते हैं। इस दौरान फाग उत्सव में भाग लेनी वाली सभी महिलाओं को समिति की तरफ से सम्मानित भी किया जाता रहा है, जिससे कि उनमें उत्साह बना रहे और हमारी संस्कृति बचाई जा सके और आने वाली पीढ़ियां भाईचारे के इस पर्व और परंपरा को जीवित रख सके। ग्राम कुलेरी की पूर्व सरपंच मनीषा ने बताया कि गांव में होली के पावन पर्व पर सामूहिक कार्यक्रम का आयोजन होता है, जिसमें ग्रामीण महिलाएं, पुरुष, युवा तथा बच्चे हिस्सा लेते हैं। फाग खेलने के लिए आसपास के दूसरे गांव से भी लोग पहुंचते हैं और फाग पर्व को बडे़ उत्साह के साथ मनाते भी हैं।

रोहतक में 2 युवकों पर फायरिंग:रंजिश में दिया वारदात को अंजाम, हमलावरों के साथ काम को लेकर चल रहा था विवाद

रोहतक में 2 युवकों पर फायरिंग:रंजिश में दिया वारदात को अंजाम, हमलावरों के साथ काम को लेकर चल रहा था विवाद रोहतक जिले में हिसार बाईपास पर आज शाम करीब 7 बजे दो युवकों पर फायरिंग किए जाने का मामला सामने आया है। फायरिंग के दौरान एक युवक की कमर में गोली लगी, जबकि दूसरे की कनपटी को छूकर गोली निकल गई। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। घायलों की पहचान 19 वर्षीय सौरभ पुत्र उपदेश निवासी शुगर मिल कॉलोनी रोहतक तथा 26 वर्षीय साहिल पुत्र कबूल सिंह निवासी गांव बामडोला झज्जर के रूप में हुई। दोनों घायलों को पीजीआई के ट्रोमा सेंटर में भर्ती करवाया गया है। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। बातचीत करने गए थे, गोली मार दी
पीजीआई के ट्रोमा सेंटर में इलाज के लिए पहुंचे घायल साहिल ने बताया कि काम को लेकर उनका कुछ लोगो के साथ विवाद चल रहा है। इसी मामले में वह बातचीत करने गए थे, लेकिन आरोपियों ने बातचीत करने की बजाय उनके ऊपर गोली चला दी। फायरिंग में एक गोली सौरव की कमर में लगी हुई है, जबकि साहिल की कनपटी को छूते हुए निकल गई। पुलिस हमलावरों की तलाश में जुटी
सिटी थाने के जांच अधिकारी राज कुमार ने बताया कि उन्हें हिसार बाईपास पर गोली चलने की सूचना मिली थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तब तक घायलों को पीजीआई ट्रोमा सेंटर लेकर पहुंच गए थे। पुलिस ने घायलों के बयान पर हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

पानीपत में जिंदा जिला ट्रक ड्राइवर, क्लीनर कूदकर बचा; VIDEO:ट्रैक्टर-ट्रॉली के आगे आकर कट मारने से बिगड़ा संतुलन; पिल्लर से जा टकराया, यूपी का था रहने वाला

पानीपत में जिंदा जिला ट्रक ड्राइवर, क्लीनर कूदकर बचा; VIDEO:ट्रैक्टर-ट्रॉली के आगे आकर कट मारने से बिगड़ा संतुलन; पिल्लर से जा टकराया, यूपी का था रहने वाला पानीपत में हरिद्वार रोड पर यमुना पुल के नजदीक तूडे़ से भरी एक ट्रैक्टर-ट्राली के ट्रक के सामने अचानक कट मारने से ट्रक का संतुलन बिगड़ गया। ट्रैक्टर – ट्रॉली को बचाने के चक्कर में ट्रक सड़क पर पिलर से जा टकराया। जिससे ट्रक की तेल की टंकी में आग लग गई और ड्राइवर ट्रक में जिंदा ही जल गया। जबकि क्लीनर ने कूदकर अपनी जान बचाई। सूचना मिलते ही पुलिस व फायर बिग्रेड मौके पर पहुंची। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए श्री महाकाल जनसेवा दल के फाउंडर कपिल मल्होत्रा की एम्बुलेंस की मदद से शव को सिविल अस्पताल भिजवाया। जहां उसका पंचनामा भरवा कर शवगृह में रखवा दिया गया। आग का था विकराल रूप, मदद नहीं कर सके राहगीर जानकारी देते हुए क्लीनर उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर निवासी उसामा ने बताया कि वो करीब 32 वर्षीय ड्राइवर वसीम के साथ राजस्थान के निम्बोल से पत्थर का पाउडर भरकर रूड़की के पास लिबारेडी लेकर जा रहे थे। जैसे ही वे पानीपत-हरिद्वार रोड पर सनौली खुर्द यमुना पुल के पास पहुंचे तो आगे यूपी की ओर जा रहे तूड़े से भरे ट्रैक्टर-ट्राली ने अचानक कट मार दिया। जिस कारण उसे बचाने के चक्कर में उनका ट्रक सड़क पर खड़े पिलर से टकरा गया। ट्रक का संतुलन बिगड़ने से ट्रक में आग लग गई। आगे का शीशा टूटने के कारण वह बाहर निकल गया, लेकिन ड्राइवर वसीम अंदर ही फंस गया। देखते ही देखते अंदर जिंदा जल गया। जिसको राहगीरों ने निकालने का प्रयास किया, लेकिन आग का विकराल रूप होने के कारण नहीं निकाल पाए।

पानीपत से किडनैप बच्ची का शव सोनीपत में मिला:4 दिन पहले पड़ोसी ऑटो में बैठाकर ले गया; लोगों ने किया रोड जाम

पानीपत से किडनैप बच्ची का शव सोनीपत में मिला:4 दिन पहले पड़ोसी ऑटो में बैठाकर ले गया; लोगों ने किया रोड जाम हरियाणा के पानीपत में चार दिन से अपहरण की गई 10 साल की नाबालिग लड़की का शव मिला है। सोनीपत की नहर से बच्ची की डेड बॉडी पड़ी मिली। जिसकी सूचना पानीपत पुलिस को वहां से मिली। इसके बाद परिजनों के साथ शव की शिनाख्त करवाने के लिए पुलिस सोनीपत रवाना हो गई। इधर, बच्ची का शव मिलने की सूचना से ही लोगों ने 6 घंटे के भीतर दूसरी बार जाम लगा दिया है। गुस्साए परिजनों ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगा नारेबाजी कर जमकर कोसा। जाम से सड़क पर दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। SHO बोलें- पोस्टमॉर्टम में खुलेगा मौत का राज
इस बारे में किला थाना प्रभारी सुरेश का कहना है कि सोनीपत की पुलिस ने बच्ची का शव नहर से निकला है। पोस्टमॉर्टम सोनीपत में ही होगा। रेप के बाद हत्या है या मौत के अन्य कोई कारण है, इसका खुलासा पोस्टमॉर्टम के बाद ही होगा। पिता ने दो दिन पहले ही हत्या की जताई थी आशंका एसपी को दी शिकायत में पिता ने बताया था कि वह चार बच्चों का पिता है। उसकी एक बेटी 10 साल की है। जिसकी उसने 10 मार्च को किला थाना में गुमशुदगी दर्ज करवाई थी। लेकिन अब उसे पता लगा है कि उसकी बेटी का अपहरण संदीप निवासी राम नगर, बबैल रोड ने किया है। जोकि हाली कॉलोनी में अपनी फास्टफूड की दुकान भी चलाता है। इसी करीब उनका मकान भी है। वह मौका लगते ही उसकी बेटी को उठाकर ले गया। जोकि पिछले दो दिनों से लापता है। पिता ने कहा कि उसे आशंका है कि संदीप उसकी बेटी को जान से मार सकता है। इसलिए जल्द से जल्द उसकी बेटी को बरामद किया जाए व संदीप के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

हरियाणा के पहले एयरपोर्ट को लाइसेंस मिला:हिसार से 5 राज्यों के लिए शुरू होंगी उड़ानें; अगले हफ्ते से लैंडिंग ट्रायल

हरियाणा के पहले एयरपोर्ट को लाइसेंस मिला:हिसार से 5 राज्यों के लिए शुरू होंगी उड़ानें; अगले हफ्ते से लैंडिंग ट्रायल हरियाणा के इकलौते एयरपोर्ट को हवाई जहाज उड़ाने के लिए लाइसेंस मिल गया है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने गुरुवार देर शाम को यह लाइसेंस जारी किया है। जिसके बाद अब हिसार एयरपोर्ट से जल्द ही अयोध्या, जम्मू, जयपुर, दिल्ली और अहमदाबाद के लिए घरेलू उड़ानें शुरू हो जाएंगी। लाइसेंस मिलने के बाद अब हरियाणा सरकार प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क साधकर समय मांगेगी। सबकुछ ठीक रहा तो रामनवमी के दिन ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या जाने वाली फ्लाइट को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर सकते हैं। बता दें कि दैनिक भास्कर ने पहले ही बता दिया था कि हिसार एयरपोर्ट को इसी हफ्ते लाईसेंस मिल सकता है। उत्तर प्रदेश के जेवर एयरपोर्ट से पहले हरियाणा सरकार फ्लाइट शुरू करने की योजना पर पहले से ही काम कर रही थी। शुरुआत में 5 राज्यों से होगी कनेक्टिविटी
हिसार एयरपोर्ट से उड़ान शुरू करने के लिए सरकार एलायंस एयर से समझौता कर चुकी है। शुरू में यहां से 5 राज्यों के लिए उड़ानें शुरू की जाएंगी। जिनमें अयोध्या, जम्मू, जयपुर, दिल्ली और अहमदाबाद शामिल है। शुरू में यहां से 70 सीटर उड़ानें शुरू होंगी। अगर इतने पैसेंजर मिले तो ठीक वर्ना इसे घटाकर 40 सीटर उड़ान तक सीमित कर दिया जाएगा। इस मामले में 2 जनवरी को डीजीसीए नागरिक उड्डयन विभाग के सलाहकार नर हरि सिंह बांगर ने भी यहां का दौरा किया था। जेवर एयरपोर्ट से पहले शुरू करने की तैयारी में सरकार
हरियाणा सरकार की कोशिश है कि उत्तरप्रदेश के जेवर एयरपोर्ट से पहले वो राज्य का पहला एयरपोर्ट शुरू कर दे। हालांकि दोनों ही राज्य अपना-अपना एयरपोर्ट शुरू करने को लेकर सक्रिय हैं। UP के जेवर एयरपोर्ट से 17 अप्रैल से फ्लाइट शुरू करने की योजना है। इसी को लेकर हरियाणा सरकार के एविएशन मंत्रालय ने मॉनिटरिंग तेज कर दी थी। इसी का नतीजा है कि हिसार एयरपोर्ट को जेवर एयरपोर्ट से पहले लाईसेंस मिला है। हिसार को 6 महीने के लिए अभी घरेलू उड़ान के लिए लाईसेंस मिला है। हिसार एयरपोर्ट का समर शेड्यूल बन रहा
AAI से लाइसेंस मिलने से पहले ही हिसार एयरपोर्ट के हवाई संचालन के लिए समर शेड्यूल तैयार किया जा रहा है। यह शेड्यूल 31 मार्च तक बनकर तैयार हो जाएगा। एक अप्रैल से 30 सितंबर तक शेड्यूल लागू होगा। हिसार से शुरुआत में सप्ताह में एक बार फ्लाइट शुरू की जाएगी। इसके बाद ट्रैफिक को देखते हुए आगामी फैसला लिया जाएगा। हरियाणा सरकार का फ्लाइट के लिए भारत सरकार की एविएशन एयरलायंस के साथ समझौता हो चुका है। लाइसेंस मिलने के बाद समझौते के तहत एविएशन एयरलायंस यहां से ऑपरेशन शुरू करेगी। एयरपोर्ट को केंद्र सरकार ही संभालेगी
हरियाणा के इस पहले एयरपोर्ट को केंद्र सरकार ही संभालेगी। इसे एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) चलाएगी। इसके लिए एयरपोर्ट को AAI को हैंडओवर कर दिया गया है। इसका सबसे बड़ा असर ये पड़ेगा कि एयरपोर्ट के इन्फ्रास्ट्रक्चर, ऑपरेशन और मेंटिनेंस से लेकर नौकरियों पर फैसला भी केंद्र ही करेगा। हरियाणा सरकार के पास सिर्फ इस जमीन का मालिकाना हक रहेगा। इससे पहले एयरपोर्ट में डेवलपमेंट का सारा काम हरियाणा सरकार से ही कराया गया। इसकी सुरक्षा का जिम्मा भी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के पास रहेगा। अभी हरियाणा पुलिस की थर्ड बटालियन के 300 जवान इसकी सुरक्षा में तैनात हैं। इन्हें बाद में गेट के बाहर तैनात किया जा सकता है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा जारी लाइसेंस…