फतेहपुर-सीकरी देख सुनक बोले-इसे मैंने ‘परदेस’ फिल्म में देखा था:ब्रिटेन के पूर्व PM की सास सुधा मूर्ति ने पूछा-ताजमहल में कितने हिंदू साइन

फतेहपुर-सीकरी देख सुनक बोले-इसे मैंने ‘परदेस’ फिल्म में देखा था:ब्रिटेन के पूर्व PM की सास सुधा मूर्ति ने पूछा-ताजमहल में कितने हिंदू साइन ‘फतेहपुर सीकरी देखकर ब्रिटेन के पूर्व PM ऋषि सुनक बोले- अरे ! ये तो वही जगह है, जिसे मैंने सालों पहले परदेस फिल्म में देखा था। तब मैंने सोचा था कि अपने बच्चों को यह जगह दिखाऊंगा। इतने साल बाद आज मौका लगा है। अब ब्रिटेन जाकर अपने बच्चों को परदेस फिल्म भी दिखाऊंगा। उन्हें यहां शूट हुए एक-एक सीन को दिखाऊंगा।’ ये बातें ऋषि सुनक के गाइड शमशुद्दीन ने दैनिक भास्कर से शेयर कीं। उन्होंने कहा-पूर्व PM ऋषि सुनक की सास और राज्यसभा सदस्य सुधा नारायण मूर्ति ने ताजमहल देखकर पूछा था कि इसमें कितने हिंदू साइन हैं? पढ़िए, ऋषि सुनक और उनके परिवार ने अपने गाइड शमशुद्दीन से और क्या-क्या पूछा? सवाल : ब्रिटेन के पूर्व PM को विजिट कराने का कैसा अनुभव रहा?
जवाब : वाकई कमाल के हैं ब्रिटेन के पूर्व PM और उनका पूरा परिवार। बिल्कुल साधारण और सरल। एक पल के लिए भी नहीं लगा कि मैं किसी VVIP को विजिट करा रहा हूं। ऐसा लगा, जैसे सामान्य टूरिस्ट के साथ हूं। बहुत हंबल हैं सुनक जी। ताजमहल या फतेहपुर सीकरी में भ्रमण के दौरान कभी मेरे कंधे पर हाथ रख देते, तो कभी मुस्कुरा कर कोई सवाल पूछते। एक बात और…किसी अन्य टूरिस्ट की तरह ये परिवार नहीं था। लगभग सभी सदस्य इतिहास के जानकार के थे। सवाल : फतेहपुर सीकरी में कोई यादगार लम्हा?
जवाब : फतेहपुर सीकरी में जैसे ही हम शेख सलीम चिश्ती की दरगाह के सामने पहुंचे, अचानक सुनक जी बोले-अरे! ये तो वही जगह है, जिसे मैंने सालों पहले परदेस फिल्म में देखा था। वह मूवी मुझे बहुत अच्छी लगी थी। फिल्म में इस जगह पर कव्वाली शूट हुई थी। तब मैंने सोचा था कि अपने बच्चों को यह जगह दिखाऊंगा। इतने साल बाद आज मौका लगा है। अब ब्रिटेन जाकर अपने बच्चों को परदेस फिल्म भी दिखाऊंगा। उन्होंने अपनी बेटियों को यहां की पच्चीकारी के बारे में बताया था। इसी बीच बच्चों की नानी (ऋषि सुनक की सास) सुधा नारायण मूर्ति ने कहा कि परदेस फिल्म के बहुत से सीन यहां शूट हुए हैं। फिल्म के आखिर की पूरी फाइट यहीं शूट हुई थी। सवाल : क्या उन्होंने दरगाह पर चादर चढ़ाई?
जवाब : हां, सुधा नारायण मूर्ति और उनके साथ परिजनों ने शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पर चादर चढ़ाई थी। इसके साथ उन्होंने मन्नत का धागा भी बांधा। यहां पहुंचे तो एक और नई चीज पता चली, जो सुधा जी ने मुझे बताया। दरगाह पर पहुंचकर उन्होंने बताया कि जब उनकी बेटी अक्षता (ऋषि सुनक की पत्नी) 4 साल की थीं, तब वह उन्हें लेकर यहां आई थीं। मैंने उनसे पूछा कि आप पीर को मानती हैं, तो वह कहने लगीं कि मैं सूफी संतों को बहुत मानती हूं। उनका मैसेज मानवता होता है। सवाल : क्या ऋषि सुनक को हिंदी आती है?
जवाब : मुझे तो ताज्जुब हुआ, जब ये पता चला कि ब्रिटेन के पूर्व PM ऋषि सुनक और उनकी पत्नी अक्षता को हिंदी बहुत अच्छे तरीके से आती है। वे हिंदी में बातचीत करने के दौरान काफी सहज दिखे। ब्रिटेन में रहने के बाद भी उन्होंने हिंदी काे नहीं छोड़ा। उन्होंने हिंदी में बातचीत करना ज्यादा प्रिफर किया। हां, उनकी बेटियां जरूर अंग्रेजी में बात कर रही थीं। सवाल: क्या सुनक पहले भी ताजमहल देख चुके थे?
जवाब : हां, उन्होंने मुझे बताया कि 18-20 साल पहले वह ताजमहल देखने आए थे। मगर, तब ऐसी व्यवस्थाएं नहीं थीं। अब काफी बदलाव को देखकर वह चौंक रहे थे। इस बार उन्होंने पूर्वी गेट से ताजमहल में प्रवेश किया। पहले वे पश्चिमी गेट से आए थे। तब इतनी सिक्योरिटी नहीं थी, इतने बैरियर नहीं थे। सवाल : सुधा जी ने क्या कुछ पूछा आपसे?
जवाब : सुधा नारायण मूर्ति ने इतिहास को लेकर काफी टफ सवाल किए। उनका एक सवाल था कि ताजमहल में कितने हिंदू साइन हैं? तब मैंने उनसे पूछा कि आपको कैसे पता? तब उन्होंने बताया कि मैंने इतिहासकार पीएन ओक की किताब पढ़ी थी। उसमें ताजमहल पर बने सिंबल के बारे में लिखा था। तब मैंने उनको ताजमहल में बने कलश का साइन दिखाया…ओम का साइन दिखाया। इनको मैंने एक्सप्लेन भी किया। बताया कि हिंदुस्तान में नॉर्मली ये साइन कॉमन हैं। मुगलिया आर्केटेक्चर के माध्यम से तब के राजा चाहते कि सबको खुश रखा जाए। राजा चाहते थे कि इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सबकी झलक दिखाई दे, जिससे कि उन्हें लगे कि मैं सबकी नुमाइंदगी करता हूं। सवाल: ब्रिटिश पीरियड में स्मारकों के रख-रखाव को लेकर सुनक ने कुछ कहा?
जवाब : मैंने उनसे साफ कहा कि ब्रिटिशर्स ने स्मारकों को नुकसान पहुंचाया। लार्ड कर्जन को सैल्यूट करते हैं, ही वॉज द ओनली मैन, हू किव ए न्यू लाइफ ऑल मॉन्यूमेंट। इस पर ब्रिटेन के पूर्व PM ने कहा कि समबडी इज देयर टू लुक ऑफ्टर इट। ————————– यह खबर भी पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से डरे यूपी के विधायक-सांसद, यहां सबसे ज्यादा दागी; अगर सजा हुई तो एक तिहाई सीटें खाली होंगी ‘अगर किसी सरकारी कर्मचारी को दोषी ठहराया जाता है तो वह जीवन भर के लिए नौकरी से बाहर हो जाता है। फिर दोषी व्यक्ति संसद में कैसे लौट सकता है? इस टिप्पणी के बाद अपराधी छवि और केस में फंसे विधायक और सांसद परेशान हैं। सबसे ज्यादा दागी विधायक किस पार्टी में हैं? किन मामलों में केस है? अब तक कितनों ने विधायकी गंवाई? पढ़िए पूरी स्टोरी…

फतेहपुर-सीकरी देख सुनक बोले-इसे मैंने ‘परदेस’ फिल्म में देखा था:ब्रिटेन के पूर्व PM की सास सुधा मूर्ति ने पूछा-ताजमहल में कितने हिंदू साइन

फतेहपुर-सीकरी देख सुनक बोले-इसे मैंने ‘परदेस’ फिल्म में देखा था:ब्रिटेन के पूर्व PM की सास सुधा मूर्ति ने पूछा-ताजमहल में कितने हिंदू साइन ‘फतेहपुर सीकरी देखकर ब्रिटेन के पूर्व PM ऋषि सुनक बोले- अरे ! ये तो वही जगह है, जिसे मैंने सालों पहले परदेस फिल्म में देखा था। तब मैंने सोचा था कि अपने बच्चों को यह जगह दिखाऊंगा। इतने साल बाद आज मौका लगा है। अब ब्रिटेन जाकर अपने बच्चों को परदेस फिल्म भी दिखाऊंगा। उन्हें यहां शूट हुए एक-एक सीन को दिखाऊंगा।’ ये बातें ऋषि सुनक के गाइड शमशुद्दीन ने दैनिक भास्कर से शेयर कीं। उन्होंने कहा-पूर्व PM ऋषि सुनक की सास और राज्यसभा सदस्य सुधा नारायण मूर्ति ने ताजमहल देखकर पूछा था कि इसमें कितने हिंदू साइन हैं? पढ़िए, ऋषि सुनक और उनके परिवार ने अपने गाइड शमशुद्दीन से और क्या-क्या पूछा? सवाल : ब्रिटेन के पूर्व PM को विजिट कराने का कैसा अनुभव रहा?
जवाब : वाकई कमाल के हैं ब्रिटेन के पूर्व PM और उनका पूरा परिवार। बिल्कुल साधारण और सरल। एक पल के लिए भी नहीं लगा कि मैं किसी VVIP को विजिट करा रहा हूं। ऐसा लगा, जैसे सामान्य टूरिस्ट के साथ हूं। बहुत हंबल हैं सुनक जी। ताजमहल या फतेहपुर सीकरी में भ्रमण के दौरान कभी मेरे कंधे पर हाथ रख देते, तो कभी मुस्कुरा कर कोई सवाल पूछते। एक बात और…किसी अन्य टूरिस्ट की तरह ये परिवार नहीं था। लगभग सभी सदस्य इतिहास के जानकार के थे। सवाल : फतेहपुर सीकरी में कोई यादगार लम्हा?
जवाब : फतेहपुर सीकरी में जैसे ही हम शेख सलीम चिश्ती की दरगाह के सामने पहुंचे, अचानक सुनक जी बोले-अरे! ये तो वही जगह है, जिसे मैंने सालों पहले परदेस फिल्म में देखा था। वह मूवी मुझे बहुत अच्छी लगी थी। फिल्म में इस जगह पर कव्वाली शूट हुई थी। तब मैंने सोचा था कि अपने बच्चों को यह जगह दिखाऊंगा। इतने साल बाद आज मौका लगा है। अब ब्रिटेन जाकर अपने बच्चों को परदेस फिल्म भी दिखाऊंगा। उन्होंने अपनी बेटियों को यहां की पच्चीकारी के बारे में बताया था। इसी बीच बच्चों की नानी (ऋषि सुनक की सास) सुधा नारायण मूर्ति ने कहा कि परदेस फिल्म के बहुत से सीन यहां शूट हुए हैं। फिल्म के आखिर की पूरी फाइट यहीं शूट हुई थी। सवाल : क्या उन्होंने दरगाह पर चादर चढ़ाई?
जवाब : हां, सुधा नारायण मूर्ति और उनके साथ परिजनों ने शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पर चादर चढ़ाई थी। इसके साथ उन्होंने मन्नत का धागा भी बांधा। यहां पहुंचे तो एक और नई चीज पता चली, जो सुधा जी ने मुझे बताया। दरगाह पर पहुंचकर उन्होंने बताया कि जब उनकी बेटी अक्षता (ऋषि सुनक की पत्नी) 4 साल की थीं, तब वह उन्हें लेकर यहां आई थीं। मैंने उनसे पूछा कि आप पीर को मानती हैं, तो वह कहने लगीं कि मैं सूफी संतों को बहुत मानती हूं। उनका मैसेज मानवता होता है। सवाल : क्या ऋषि सुनक को हिंदी आती है?
जवाब : मुझे तो ताज्जुब हुआ, जब ये पता चला कि ब्रिटेन के पूर्व PM ऋषि सुनक और उनकी पत्नी अक्षता को हिंदी बहुत अच्छे तरीके से आती है। वे हिंदी में बातचीत करने के दौरान काफी सहज दिखे। ब्रिटेन में रहने के बाद भी उन्होंने हिंदी काे नहीं छोड़ा। उन्होंने हिंदी में बातचीत करना ज्यादा प्रिफर किया। हां, उनकी बेटियां जरूर अंग्रेजी में बात कर रही थीं। सवाल: क्या सुनक पहले भी ताजमहल देख चुके थे?
जवाब : हां, उन्होंने मुझे बताया कि 18-20 साल पहले वह ताजमहल देखने आए थे। मगर, तब ऐसी व्यवस्थाएं नहीं थीं। अब काफी बदलाव को देखकर वह चौंक रहे थे। इस बार उन्होंने पूर्वी गेट से ताजमहल में प्रवेश किया। पहले वे पश्चिमी गेट से आए थे। तब इतनी सिक्योरिटी नहीं थी, इतने बैरियर नहीं थे। सवाल : सुधा जी ने क्या कुछ पूछा आपसे?
जवाब : सुधा नारायण मूर्ति ने इतिहास को लेकर काफी टफ सवाल किए। उनका एक सवाल था कि ताजमहल में कितने हिंदू साइन हैं? तब मैंने उनसे पूछा कि आपको कैसे पता? तब उन्होंने बताया कि मैंने इतिहासकार पीएन ओक की किताब पढ़ी थी। उसमें ताजमहल पर बने सिंबल के बारे में लिखा था। तब मैंने उनको ताजमहल में बने कलश का साइन दिखाया…ओम का साइन दिखाया। इनको मैंने एक्सप्लेन भी किया। बताया कि हिंदुस्तान में नॉर्मली ये साइन कॉमन हैं। मुगलिया आर्केटेक्चर के माध्यम से तब के राजा चाहते कि सबको खुश रखा जाए। राजा चाहते थे कि इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सबकी झलक दिखाई दे, जिससे कि उन्हें लगे कि मैं सबकी नुमाइंदगी करता हूं। सवाल: ब्रिटिश पीरियड में स्मारकों के रख-रखाव को लेकर सुनक ने कुछ कहा?
जवाब : मैंने उनसे साफ कहा कि ब्रिटिशर्स ने स्मारकों को नुकसान पहुंचाया। लार्ड कर्जन को सैल्यूट करते हैं, ही वॉज द ओनली मैन, हू किव ए न्यू लाइफ ऑल मॉन्यूमेंट। इस पर ब्रिटेन के पूर्व PM ने कहा कि समबडी इज देयर टू लुक ऑफ्टर इट। ————————– यह खबर भी पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से डरे यूपी के विधायक-सांसद, यहां सबसे ज्यादा दागी; अगर सजा हुई तो एक तिहाई सीटें खाली होंगी ‘अगर किसी सरकारी कर्मचारी को दोषी ठहराया जाता है तो वह जीवन भर के लिए नौकरी से बाहर हो जाता है। फिर दोषी व्यक्ति संसद में कैसे लौट सकता है? इस टिप्पणी के बाद अपराधी छवि और केस में फंसे विधायक और सांसद परेशान हैं। सबसे ज्यादा दागी विधायक किस पार्टी में हैं? किन मामलों में केस है? अब तक कितनों ने विधायकी गंवाई? पढ़िए पूरी स्टोरी…

UP में गंगा समेत 11 नदियों में चलेंगे क्रूज-कार्गो:ट्रेन से भी 30 पैसे सस्ती होगी माल ढुलाई, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

UP में गंगा समेत 11 नदियों में चलेंगे क्रूज-कार्गो:ट्रेन से भी 30 पैसे सस्ती होगी माल ढुलाई, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा गंगा के बाद अब प्रदेश की राजधानी के बीच से निकली गोमती, यमुना, घाघरा (सरयू), बेतवा, चंबल सहित 10 और नदियों में क्रूज और माल वाहक जहाज दिखें तो आश्चर्य नहीं होगा। प्रदेश में हाईवे और एक्सप्रेस-वे के नेटवर्क के बाद सरकार नदियों को जल परिवहन के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। इससे पर्यटन को तो बढ़ावा मिलेगा ही, सड़क मार्ग की तुलना में 1.20 रुपए और ट्रेन की तुलना में 30 पैसे प्रति टन, प्रति किलोमीटर माल ढुलाई सस्ती पड़ेगी। पिछले दिनों प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) ने 23 जनवरी, 2025 को वाराणसी में अपने मौजूदा उप-कार्यालय को पूर्ण क्षेत्रीय कार्यालय बनाने की मंजूरी दी है। इसी क्षेत्रीय कार्यालय के तहत प्रदेश की सभी नदियों के जलमार्ग आएंगे। देश के पहले जलमार्ग गंगा का प्रोजेक्ट कितना सफल हुआ? सड़क व ट्रेन की तुलना में नदियों के रास्ते माल ढुलाई कितना सस्ता पड़ेगा? प्राधिकरण बनाने से क्या फर्क पड़ेगा? पढ़िए ये रिपोर्ट… क्रूज पर्यटन के साथ माल ढुलाई का खुलेगा नया विकल्प यूपी सरकार ने पहले चरण में गंगा के बाद 10 और नदियों को जलमार्ग के तौर पर विकसित करने का निर्णय लिया है। प्रदेश में ऐसी 30 नदियां हैं, जिन्हें जल मार्ग के तौर पर विकसित किया जा सकता है। इस बजट में जलमार्गों के विकास और प्राधिकरण के लिए अलग से बजट की घोषणा हो सकती है। जलमार्गों के विकास के लिए विश्व बैंक भी सहयोग दे रहा है। इसके अलावा नदियों के माध्यम से माल ढुलाई करने पर केंद्र सरकार ने भी 35 प्रतिशत की सब्सिडी देने का निर्णय लिया है। यूपी के कई प्रमुख शहर और धार्मिक स्थल नदियों के तट पर हैं। जलमार्ग का विकास होने पर इन नदियों में क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देकर रोजगार के नए अवसर तलाशे जाएंगे। इसके अलावा एक शहर से दूसरे शहर में माल की सस्ती ढुलाई की जा सकेगी। यही कारण है कि प्रदेश की मौजूदा भाजपा सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी। इसका गजट नोटिफिकेशन भी जारी हो गया है। अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण में कौन होगा? प्राधिकरण में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, वित्त, लोक निर्माण, परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति, सिंचाई एवं जल संसाधन, वन एवं पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव पदेन सदस्य होंगे। एक अन्य सदस्य भारतीय अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) का प्रतिनिधि होगा, जिसे IWAI का अध्यक्ष नामित किया जाएगा। परिवहन आयुक्त, यूपी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी होंगे। अध्यक्ष मुख्यमंत्री या परिवहन मंत्री को नामित किया जाएगा। अंतर्देशीय जलमार्ग, प्लेस्टेशन एवं नेवीगेशन, पोर्टस, मैरीटाइम अफेयर्स से संबंधित मामलों में विशेषज्ञता रखने वाला कोई व्यक्ति भी इसका अध्यक्ष बन सकता है। जबकि उपाध्यक्ष राज्य सरकार की ओर से नामित इंटरनेशनल जलमार्ग, प्लेस्टेशन एवं नेविगेशन, पोर्ट्स, मैरीटाइम अफेयर्स से संबंधित विशेषज्ञों में से कोई एक होगा। प्राधिकरण ही जलमार्ग के विकास से लेकर व्यापारिक गतिविधियों, बैठकें, प्राधिकरण के कोरम, लेखापरीक्षा से संबंधित मामले, प्राधिकरण की वार्षिक लेखा रिपोर्ट, प्राधिकरण के स्वामित्व और भूमि संपत्ति संबंधित सब कुछ उसके अधिकार क्षेत्र में होगा। नदियों को जलमार्ग के तौर पर विकसित करने के फायदे सवाल… नदियों में कितना पानी हो कि कार्गो चलाया जा सके इसे वाराणसी से हल्दिया के बीच विकसित किए गए राष्ट्रीय जलमार्ग–1 के उदाहरण से समझा जा सकता है। किसी भी नदी में 300 मीट्रिक टन की क्षमता वाले कार्गो के लिए नदी की गहराई कम से कम 1.20 मीटर से अधिक होनी चाहिए। प्रयागराज से हल्दिया वाले गंगा राष्ट्रीय जलमार्ग के अलग–अलग हिस्सों में अलग–अलग गहराई है। बारिश के दिनों में गंगा में 16 से 25 मीटर तक की गहराई रहती है। अभी गंगा को 1500 से 2000 मीट्रिक टन क्षमता वाले जहाजों को चलाने के लिए विकसित किया गया है। तब 3000 मीट्रिक टन तक सामान से लदे जहाज आसानी से चल सकते है। ऐसे में माल ढुलाई और सस्ती पड़ेगी। गर्मियों के सीजन में जब गंगा का जलस्तर घट जाता है। तब भी प्रयागराज से चुनार के बीच (370 किमी) 1.20 से 1.50 मीटर न्यूनतम गहराई रहती है। बाढ़ से गाजीपुर के बीच (290 किमी) के बीच 2 मीटर, बाढ़ से फरक्का के बीच (400 किमी) और फरक्का से हल्दिया के बीच (560 किमी) 3 मीटर की गहराई रहती है। प्रदेश में पहले चरण के लिए चुनी गई 10 नदियों बेतवा, चंबल, गोमती, टोंस, वरुणा और गंडक, घाघरा, कर्मनाशा और यमुना में दो मीटर से अधिक गहराई में पानी रहता है। प्रदेश की 20 और नदियों में भी इसी तरह की गहराई है। उसे अगले चरण में जलमार्ग के तौर पर विकसित करने की कवायद होगी। प्रदेश की नदियों में एक बड़ी समस्या गर्मियों में आती है, जब जलस्तर घटने लगता है। तब कई जगह नदी के बीच में टीले आ जाते हैं। नदी में क्रूज या कार्गों को चलाने के लिए कम से कम 50 मीटर की चौड़ाई में एक मीटर से अधिक पानी रहना चाहिए। गंगा चैनल को तैयार करने के लिए 2024 में हैदराबाद की धरती ड्रेजिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी को ठेका दिया गया था। इस कंपनी को रेत निकाल कर ढाई मीटर गहरा और 50 मीटर चौड़ा करने का काम सौंपा गया था। गंगा चैनल में माल ढुलाई 22 प्रतिशत की दर से बढ़ रही कोलकाता के हल्दिया से पेप्सिको 300 टन चिप्स 16 कंटेनर के साथ मालवाहक जहाज वाराणसी आ चुका है। वापसी में इस जहाज से इलाहाबाद से इफको का उर्वरक भेजा गया था। कार्गों से 40 टन धान की भूसी भी इलाहाबाद से कोलकाता भेजी जा चुकी है। इसके अलावा कोयला, जिप्सम, सीमेंट, रेत आदि की ढुलाई हो चुकी है। बिजली कंपनियों की मशीनरी भी कोलकाता से यहां तक लाई गई है। हल्दिया से वाराणसी के बीच ये जहाज 7 नॉटिकल माइल प्रति घंटे की रफ्तार से 1420 किमी की दूरी 8 दिन में तय कर लेते हैं। गंगा चैनल के माध्यम से अप्रैल से नवंबर 2023 के बीच 82 लाख 21 हजार 960 मीट्रिक टन माल की ढुलाई हुई थी। अप्रैल से नवंबर 2024 में ये आंकड़ा बढ़कर 1 करोड़, 53 हजार 605 मीट्रिक टन पहुंच गया। मतलब सीधे तौर पर 22 प्रतिशत माल ढुलाई बढ़ गई। गंगा चैनल में क्रूज पर्यटन और जलमार्ग से माल ढुलाई आसान बनाने के लिए 3 मल्टी-मॉडल टर्मिनल वाराणसी, साहिबगंज और हल्दिया में बनाए गए हैं। इसके अलावा कालूघाट में एक इंटर-मॉडल टर्मिनल और पश्चिम बंगाल के फरक्का में एक नया नौवहन लॉक बनाया गया है। स्थानीय यात्रियों, छोटे और सीमांत किसानों, कारीगरों और मछुआरा समुदायों की सुविधा के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के चार राज्यों में 60 सामुदायिक जेट्‌टी (जहां से जहाज में माल लोड–अपलोड किया जाता है) बनाए जा रहे हैं। वाराणसी के रामनगर में मल्टी मॉडल टर्मिनल को ट्रेन से जोड़ने की तैयारी वाराणसी के रामनगर में 220 मीटर लंबे मल्टी मॉडल टर्मिनल का निर्माण किया गया है। इसमें चार मालवाहक जहाज एक साथ खड़े होकर माल का लदान और उतार कर सकते हैं। यहां जर्मनी की कंपनी के दो क्रेन लगे हैं। 150 फीट ऊंची ये क्रेन इतनी ताकतवर हैं कि टर्मिनल से खड़े–खड़े गंगा नदी के भीतर 34 मीटर की दूरी से 70 टन सामान उठा सकते हैं। एक क्रेन कंटेनर उठाने व रखने के लिए, जबकि दूसरा खुला सामान जैसे कोयला, रेत की ढुलाई या लदान करता है। इस टर्मिनल को ट्रेन से जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए जिवननाथपुर रेलवे स्टेशन से रामनगर मल्टी टर्मिनल तक 10 किमी की रेलवे लाइन बिछाने की तैयारी है। इसका खाका पिछले दिनों जल परिवहन और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अधिकारियों की बैठक में खींचा गया है। इससे माल की ढुलाई का और सशक्त नेटवर्क तैयार हाे जाएगा। पर्यटन के लिए अभी रिवर क्रूज चलाया जा रहा है वाराणसी से हल्दिया के बीच जय गंगा विलास सहित कई पर्यटन क्रूज चलते रहते हैं। इसके अलावा वाराणसी में असि से नमोघाट तक रोज शाम को गंगा आरती के समय क्रूज का संचालन किया जाता है। अलखनंदा क्रूज 80 सीटर है। जबकि विवेकानंद क्रूज की क्षमता 100 सीटर है। इसका किराया 900 से 1000 रुपए के बीच का है। इसके अलावा वाराणसी से चुनार के बीच भी पर्यटकों की मांग पर क्रूज का संचालन किया जाता है। इसका किराया 1800 से 2000 रुपए का है। जबकि हल्दिया से वाराणसी के बीच पर्यटन क्रूज का संचालन बुकिंग के आधार पर होता है। इसका पैकेज 15 से 31 दिनों का है। किराया 4 से 6 लाख के बीच है। प्रदेश में गंगा के अलावा अन्य 10 नदियों में भी पर्यटकों की बुकिंग के अनुसार क्रूज का संचालन यूपी टूरिज्म विभाग के सहयोग से किया जाएगा। —————– ये खबर भी पढ़ें… 7 एक्सपर्ट ने बताया कैसा हो यूपी का बजट:कृषि-कारोबार पर फोकस, घरेलू महिलाओं को ट्रेनिंग; किसानों को मिले फ्री बिजली 20 फरवरी को प्रदेश का बजट पेश होगा। इस बार बजट का आकार करीब 8.50 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। बजट किसी भी सरकार की आर्थिक नीति का विश्लेषण है कि वह कितना जल्द डेवलपमेंट स्टेट बनना चाहता है। बजट इसका एक रोडमैप है। विशेषज्ञों की राय में उत्तर प्रदेश जैसे राज्य को आगे बढ़ना है तो बजट में 3 सेक्टर कृषि, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) और कैपिटल स्ट्रक्चर पर फोकस करना चाहिए। तभी हम प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अगले दो साल में 1 ट्रिलियन डालर तक ले जा पाएंगे। पढ़ें पूरी खबर…

UP में गंगा समेत 11 नदियों में चलेंगे क्रूज-कार्गो:ट्रेन से भी 30 पैसे सस्ती होगी माल ढुलाई, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

UP में गंगा समेत 11 नदियों में चलेंगे क्रूज-कार्गो:ट्रेन से भी 30 पैसे सस्ती होगी माल ढुलाई, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा गंगा के बाद अब प्रदेश की राजधानी के बीच से निकली गोमती, यमुना, घाघरा (सरयू), बेतवा, चंबल सहित 10 और नदियों में क्रूज और माल वाहक जहाज दिखें तो आश्चर्य नहीं होगा। प्रदेश में हाईवे और एक्सप्रेस-वे के नेटवर्क के बाद सरकार नदियों को जल परिवहन के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। इससे पर्यटन को तो बढ़ावा मिलेगा ही, सड़क मार्ग की तुलना में 1.20 रुपए और ट्रेन की तुलना में 30 पैसे प्रति टन, प्रति किलोमीटर माल ढुलाई सस्ती पड़ेगी। पिछले दिनों प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) ने 23 जनवरी, 2025 को वाराणसी में अपने मौजूदा उप-कार्यालय को पूर्ण क्षेत्रीय कार्यालय बनाने की मंजूरी दी है। इसी क्षेत्रीय कार्यालय के तहत प्रदेश की सभी नदियों के जलमार्ग आएंगे। देश के पहले जलमार्ग गंगा का प्रोजेक्ट कितना सफल हुआ? सड़क व ट्रेन की तुलना में नदियों के रास्ते माल ढुलाई कितना सस्ता पड़ेगा? प्राधिकरण बनाने से क्या फर्क पड़ेगा? पढ़िए ये रिपोर्ट… क्रूज पर्यटन के साथ माल ढुलाई का खुलेगा नया विकल्प यूपी सरकार ने पहले चरण में गंगा के बाद 10 और नदियों को जलमार्ग के तौर पर विकसित करने का निर्णय लिया है। प्रदेश में ऐसी 30 नदियां हैं, जिन्हें जल मार्ग के तौर पर विकसित किया जा सकता है। इस बजट में जलमार्गों के विकास और प्राधिकरण के लिए अलग से बजट की घोषणा हो सकती है। जलमार्गों के विकास के लिए विश्व बैंक भी सहयोग दे रहा है। इसके अलावा नदियों के माध्यम से माल ढुलाई करने पर केंद्र सरकार ने भी 35 प्रतिशत की सब्सिडी देने का निर्णय लिया है। यूपी के कई प्रमुख शहर और धार्मिक स्थल नदियों के तट पर हैं। जलमार्ग का विकास होने पर इन नदियों में क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देकर रोजगार के नए अवसर तलाशे जाएंगे। इसके अलावा एक शहर से दूसरे शहर में माल की सस्ती ढुलाई की जा सकेगी। यही कारण है कि प्रदेश की मौजूदा भाजपा सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी। इसका गजट नोटिफिकेशन भी जारी हो गया है। अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण में कौन होगा? प्राधिकरण में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, वित्त, लोक निर्माण, परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति, सिंचाई एवं जल संसाधन, वन एवं पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव पदेन सदस्य होंगे। एक अन्य सदस्य भारतीय अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) का प्रतिनिधि होगा, जिसे IWAI का अध्यक्ष नामित किया जाएगा। परिवहन आयुक्त, यूपी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी होंगे। अध्यक्ष मुख्यमंत्री या परिवहन मंत्री को नामित किया जाएगा। अंतर्देशीय जलमार्ग, प्लेस्टेशन एवं नेवीगेशन, पोर्टस, मैरीटाइम अफेयर्स से संबंधित मामलों में विशेषज्ञता रखने वाला कोई व्यक्ति भी इसका अध्यक्ष बन सकता है। जबकि उपाध्यक्ष राज्य सरकार की ओर से नामित इंटरनेशनल जलमार्ग, प्लेस्टेशन एवं नेविगेशन, पोर्ट्स, मैरीटाइम अफेयर्स से संबंधित विशेषज्ञों में से कोई एक होगा। प्राधिकरण ही जलमार्ग के विकास से लेकर व्यापारिक गतिविधियों, बैठकें, प्राधिकरण के कोरम, लेखापरीक्षा से संबंधित मामले, प्राधिकरण की वार्षिक लेखा रिपोर्ट, प्राधिकरण के स्वामित्व और भूमि संपत्ति संबंधित सब कुछ उसके अधिकार क्षेत्र में होगा। नदियों को जलमार्ग के तौर पर विकसित करने के फायदे सवाल… नदियों में कितना पानी हो कि कार्गो चलाया जा सके इसे वाराणसी से हल्दिया के बीच विकसित किए गए राष्ट्रीय जलमार्ग–1 के उदाहरण से समझा जा सकता है। किसी भी नदी में 300 मीट्रिक टन की क्षमता वाले कार्गो के लिए नदी की गहराई कम से कम 1.20 मीटर से अधिक होनी चाहिए। प्रयागराज से हल्दिया वाले गंगा राष्ट्रीय जलमार्ग के अलग–अलग हिस्सों में अलग–अलग गहराई है। बारिश के दिनों में गंगा में 16 से 25 मीटर तक की गहराई रहती है। अभी गंगा को 1500 से 2000 मीट्रिक टन क्षमता वाले जहाजों को चलाने के लिए विकसित किया गया है। तब 3000 मीट्रिक टन तक सामान से लदे जहाज आसानी से चल सकते है। ऐसे में माल ढुलाई और सस्ती पड़ेगी। गर्मियों के सीजन में जब गंगा का जलस्तर घट जाता है। तब भी प्रयागराज से चुनार के बीच (370 किमी) 1.20 से 1.50 मीटर न्यूनतम गहराई रहती है। बाढ़ से गाजीपुर के बीच (290 किमी) के बीच 2 मीटर, बाढ़ से फरक्का के बीच (400 किमी) और फरक्का से हल्दिया के बीच (560 किमी) 3 मीटर की गहराई रहती है। प्रदेश में पहले चरण के लिए चुनी गई 10 नदियों बेतवा, चंबल, गोमती, टोंस, वरुणा और गंडक, घाघरा, कर्मनाशा और यमुना में दो मीटर से अधिक गहराई में पानी रहता है। प्रदेश की 20 और नदियों में भी इसी तरह की गहराई है। उसे अगले चरण में जलमार्ग के तौर पर विकसित करने की कवायद होगी। प्रदेश की नदियों में एक बड़ी समस्या गर्मियों में आती है, जब जलस्तर घटने लगता है। तब कई जगह नदी के बीच में टीले आ जाते हैं। नदी में क्रूज या कार्गों को चलाने के लिए कम से कम 50 मीटर की चौड़ाई में एक मीटर से अधिक पानी रहना चाहिए। गंगा चैनल को तैयार करने के लिए 2024 में हैदराबाद की धरती ड्रेजिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी को ठेका दिया गया था। इस कंपनी को रेत निकाल कर ढाई मीटर गहरा और 50 मीटर चौड़ा करने का काम सौंपा गया था। गंगा चैनल में माल ढुलाई 22 प्रतिशत की दर से बढ़ रही कोलकाता के हल्दिया से पेप्सिको 300 टन चिप्स 16 कंटेनर के साथ मालवाहक जहाज वाराणसी आ चुका है। वापसी में इस जहाज से इलाहाबाद से इफको का उर्वरक भेजा गया था। कार्गों से 40 टन धान की भूसी भी इलाहाबाद से कोलकाता भेजी जा चुकी है। इसके अलावा कोयला, जिप्सम, सीमेंट, रेत आदि की ढुलाई हो चुकी है। बिजली कंपनियों की मशीनरी भी कोलकाता से यहां तक लाई गई है। हल्दिया से वाराणसी के बीच ये जहाज 7 नॉटिकल माइल प्रति घंटे की रफ्तार से 1420 किमी की दूरी 8 दिन में तय कर लेते हैं। गंगा चैनल के माध्यम से अप्रैल से नवंबर 2023 के बीच 82 लाख 21 हजार 960 मीट्रिक टन माल की ढुलाई हुई थी। अप्रैल से नवंबर 2024 में ये आंकड़ा बढ़कर 1 करोड़, 53 हजार 605 मीट्रिक टन पहुंच गया। मतलब सीधे तौर पर 22 प्रतिशत माल ढुलाई बढ़ गई। गंगा चैनल में क्रूज पर्यटन और जलमार्ग से माल ढुलाई आसान बनाने के लिए 3 मल्टी-मॉडल टर्मिनल वाराणसी, साहिबगंज और हल्दिया में बनाए गए हैं। इसके अलावा कालूघाट में एक इंटर-मॉडल टर्मिनल और पश्चिम बंगाल के फरक्का में एक नया नौवहन लॉक बनाया गया है। स्थानीय यात्रियों, छोटे और सीमांत किसानों, कारीगरों और मछुआरा समुदायों की सुविधा के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के चार राज्यों में 60 सामुदायिक जेट्‌टी (जहां से जहाज में माल लोड–अपलोड किया जाता है) बनाए जा रहे हैं। वाराणसी के रामनगर में मल्टी मॉडल टर्मिनल को ट्रेन से जोड़ने की तैयारी वाराणसी के रामनगर में 220 मीटर लंबे मल्टी मॉडल टर्मिनल का निर्माण किया गया है। इसमें चार मालवाहक जहाज एक साथ खड़े होकर माल का लदान और उतार कर सकते हैं। यहां जर्मनी की कंपनी के दो क्रेन लगे हैं। 150 फीट ऊंची ये क्रेन इतनी ताकतवर हैं कि टर्मिनल से खड़े–खड़े गंगा नदी के भीतर 34 मीटर की दूरी से 70 टन सामान उठा सकते हैं। एक क्रेन कंटेनर उठाने व रखने के लिए, जबकि दूसरा खुला सामान जैसे कोयला, रेत की ढुलाई या लदान करता है। इस टर्मिनल को ट्रेन से जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए जिवननाथपुर रेलवे स्टेशन से रामनगर मल्टी टर्मिनल तक 10 किमी की रेलवे लाइन बिछाने की तैयारी है। इसका खाका पिछले दिनों जल परिवहन और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अधिकारियों की बैठक में खींचा गया है। इससे माल की ढुलाई का और सशक्त नेटवर्क तैयार हाे जाएगा। पर्यटन के लिए अभी रिवर क्रूज चलाया जा रहा है वाराणसी से हल्दिया के बीच जय गंगा विलास सहित कई पर्यटन क्रूज चलते रहते हैं। इसके अलावा वाराणसी में असि से नमोघाट तक रोज शाम को गंगा आरती के समय क्रूज का संचालन किया जाता है। अलखनंदा क्रूज 80 सीटर है। जबकि विवेकानंद क्रूज की क्षमता 100 सीटर है। इसका किराया 900 से 1000 रुपए के बीच का है। इसके अलावा वाराणसी से चुनार के बीच भी पर्यटकों की मांग पर क्रूज का संचालन किया जाता है। इसका किराया 1800 से 2000 रुपए का है। जबकि हल्दिया से वाराणसी के बीच पर्यटन क्रूज का संचालन बुकिंग के आधार पर होता है। इसका पैकेज 15 से 31 दिनों का है। किराया 4 से 6 लाख के बीच है। प्रदेश में गंगा के अलावा अन्य 10 नदियों में भी पर्यटकों की बुकिंग के अनुसार क्रूज का संचालन यूपी टूरिज्म विभाग के सहयोग से किया जाएगा। —————– ये खबर भी पढ़ें… 7 एक्सपर्ट ने बताया कैसा हो यूपी का बजट:कृषि-कारोबार पर फोकस, घरेलू महिलाओं को ट्रेनिंग; किसानों को मिले फ्री बिजली 20 फरवरी को प्रदेश का बजट पेश होगा। इस बार बजट का आकार करीब 8.50 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। बजट किसी भी सरकार की आर्थिक नीति का विश्लेषण है कि वह कितना जल्द डेवलपमेंट स्टेट बनना चाहता है। बजट इसका एक रोडमैप है। विशेषज्ञों की राय में उत्तर प्रदेश जैसे राज्य को आगे बढ़ना है तो बजट में 3 सेक्टर कृषि, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) और कैपिटल स्ट्रक्चर पर फोकस करना चाहिए। तभी हम प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अगले दो साल में 1 ट्रिलियन डालर तक ले जा पाएंगे। पढ़ें पूरी खबर…

महाकुंभ- संगम स्टेशन 26 फरवरी तक बंद:एयरपोर्ट पर जमीन पर लेटे यात्री, आज नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनेगा; अब तक 53 करोड़ ने स्नान किया

महाकुंभ- संगम स्टेशन 26 फरवरी तक बंद:एयरपोर्ट पर जमीन पर लेटे यात्री, आज नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनेगा; अब तक 53 करोड़ ने स्नान किया आज महाकुंभ का 36वां दिन है। 13 जनवरी से अब तक 53 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई है। वीकेंड पर अचानक श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई। प्रयागराज-रीवा हाईवे पर 15 किमी लंबा जाम लग गया। लखनऊ, कानपुर, जौनपुर के रास्तों पर भी गाड़ियों की लंबी कतार दिखी। भीड़ के दबाव के चलते संगम स्टेशन को 26 फरवरी तक के लिए बंद कर दिया गया है। रेलवे ने पहले 14 फरवरी, फिर 16 फरवरी तक स्टेशन को बंद रखने निर्णय लिया था। अन्य 7 स्टेशनों पर जबरदस्त भीड़ रही। मेले में अनाउंस करना पड़ा कि कुछ देर अभी स्टेशन न आएं। एयरपोर्ट पर भी लोग जमीन पर बैठे और लेटे दिखे। महाकुंभ में तैनात अफसरों की ड्यूटी 27 फरवरी तक बढ़ाई गई है। प्रशासन ने मेला क्षेत्र में वाहनों की एंट्री रोक दी है। साथ ही सभी तरह के पास भी रद्द कर दिए हैं। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहन भी संगम से 10–12 किमी पहले बनाई गई पार्किंग में रोके जा रहे हैं। पार्किंग और स्टेशन से करीब 10 से 15 किमी की दूरी लोगों का पैदल तय करनी पड़ रही है। आज हैंड प्रिंटिंग का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनेगा
गंगा पंडाल में 8 घंटे में करीब 10 हजार लोग हैंड प्रिंटिंग बनाकर इतिहास रचेंगे। यह भी एक बड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज होगा। साल 2019 के कुंभ में यह आंकड़ा 5 हजार था। 8वीं तक के स्कूल अब 20 फरवरी तक बंद
प्रयागराज में लगातार भीड़ और जाम की समस्या को देखते हुए जिलाधिकारी के 8वीं तक के स्कूलों में छुट्‌टी बढ़ा दी है। आज तक स्कूल बंद थे। अब इसे बढ़ा 20 फरवरी तक कर दिया गया है। BSA प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि इस दौरान ऑनलाइन कक्षाएं चलेंगी। आज इंटरनेशनल बर्ड फेस्टिवल का दूसरा दिन
महाकुंभ में इंटरनेशनल बर्ड फेस्टिवल का आज दूसरा दिन है। यह 18 फरवरी तक चलेगा। इसमें करीब 200 प्रजातियों के पक्षियों को दिखाया जा रहा है। इसमें लुप्तप्राय इंडियन स्कीमर, फ्लेमिंगो और साइबेरियन क्रेन आदि का दीदार कर सकते हैं। 10 किमी पैदल चलना पड़ेगा, VVIP पास रद्द
बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहन भी संगम से 10-12 किमी पहले बनाई गई पार्किंग में रोके जा रहे हैं। यहां से शटल बस की व्यवस्था की गई है। आगे के रास्ते पैदल चल रहे श्रद्धालुओं से भरे हैं। ऐसे में शटल बस अगर जा भी रही है, तो जाम में रेंग रही है। ट्रेन से जा रहे हैं, तो स्टेशन से लोगों को पैदल जाना पड़ रहा है। पार्किंग और स्टेशन से करीब 10 से 15 किमी की दूरी लोगों का पैदल तय करनी पड़ रही है। VVIP पास भी रद्द कर दिए गए हैं। पूरे शहर में आज वाहनों की एंट्री बंद
महाकुंभ में भीषण जाम के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने अफसरों से कड़े लहजे में कहा है- किसी भी स्थिति में जाम नहीं लगना चाहिए। ट्रैफिक प्लान बदला गया है। अब मेला क्षेत्र ही नहीं, पूरे शहर में वाहनों की एंट्री बैन है। सिर्फ प्रशासनिक अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के वाहन चलेंगे। एक दिन पहले क्या हुआ?
सीएम योगी भी रविवार को महाकुंभ पहुंचे। उन्होंने हेलिकॉप्टर से शहर के बार से लेकर मेला क्षेत्र तक का जायजा लिया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और धर्मेंद्र प्रधान ने संगम में डुबकी लगाई। मेले से पांच साल का एक बच्चा गायब हो गया। संगम में दो नावें टक्करा कर पलट गईं। NDRF ने डूब रहे 5 यात्रियों को बचा लिया। पढ़ें पूरी खबर…

महाकुंभ- संगम स्टेशन 26 फरवरी तक बंद:एयरपोर्ट पर जमीन पर लेटे यात्री, आज नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनेगा; अब तक 53 करोड़ ने स्नान किया

महाकुंभ- संगम स्टेशन 26 फरवरी तक बंद:एयरपोर्ट पर जमीन पर लेटे यात्री, आज नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनेगा; अब तक 53 करोड़ ने स्नान किया आज महाकुंभ का 36वां दिन है। 13 जनवरी से अब तक 53 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई है। वीकेंड पर अचानक श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई। प्रयागराज-रीवा हाईवे पर 15 किमी लंबा जाम लग गया। लखनऊ, कानपुर, जौनपुर के रास्तों पर भी गाड़ियों की लंबी कतार दिखी। भीड़ के दबाव के चलते संगम स्टेशन को 26 फरवरी तक के लिए बंद कर दिया गया है। रेलवे ने पहले 14 फरवरी, फिर 16 फरवरी तक स्टेशन को बंद रखने निर्णय लिया था। अन्य 7 स्टेशनों पर जबरदस्त भीड़ रही। मेले में अनाउंस करना पड़ा कि कुछ देर अभी स्टेशन न आएं। एयरपोर्ट पर भी लोग जमीन पर बैठे और लेटे दिखे। महाकुंभ में तैनात अफसरों की ड्यूटी 27 फरवरी तक बढ़ाई गई है। प्रशासन ने मेला क्षेत्र में वाहनों की एंट्री रोक दी है। साथ ही सभी तरह के पास भी रद्द कर दिए हैं। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहन भी संगम से 10–12 किमी पहले बनाई गई पार्किंग में रोके जा रहे हैं। पार्किंग और स्टेशन से करीब 10 से 15 किमी की दूरी लोगों का पैदल तय करनी पड़ रही है। आज हैंड प्रिंटिंग का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनेगा
गंगा पंडाल में 8 घंटे में करीब 10 हजार लोग हैंड प्रिंटिंग बनाकर इतिहास रचेंगे। यह भी एक बड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज होगा। साल 2019 के कुंभ में यह आंकड़ा 5 हजार था। 8वीं तक के स्कूल अब 20 फरवरी तक बंद
प्रयागराज में लगातार भीड़ और जाम की समस्या को देखते हुए जिलाधिकारी के 8वीं तक के स्कूलों में छुट्‌टी बढ़ा दी है। आज तक स्कूल बंद थे। अब इसे बढ़ा 20 फरवरी तक कर दिया गया है। BSA प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि इस दौरान ऑनलाइन कक्षाएं चलेंगी। आज इंटरनेशनल बर्ड फेस्टिवल का दूसरा दिन
महाकुंभ में इंटरनेशनल बर्ड फेस्टिवल का आज दूसरा दिन है। यह 18 फरवरी तक चलेगा। इसमें करीब 200 प्रजातियों के पक्षियों को दिखाया जा रहा है। इसमें लुप्तप्राय इंडियन स्कीमर, फ्लेमिंगो और साइबेरियन क्रेन आदि का दीदार कर सकते हैं। 10 किमी पैदल चलना पड़ेगा, VVIP पास रद्द
बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहन भी संगम से 10-12 किमी पहले बनाई गई पार्किंग में रोके जा रहे हैं। यहां से शटल बस की व्यवस्था की गई है। आगे के रास्ते पैदल चल रहे श्रद्धालुओं से भरे हैं। ऐसे में शटल बस अगर जा भी रही है, तो जाम में रेंग रही है। ट्रेन से जा रहे हैं, तो स्टेशन से लोगों को पैदल जाना पड़ रहा है। पार्किंग और स्टेशन से करीब 10 से 15 किमी की दूरी लोगों का पैदल तय करनी पड़ रही है। VVIP पास भी रद्द कर दिए गए हैं। पूरे शहर में आज वाहनों की एंट्री बंद
महाकुंभ में भीषण जाम के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने अफसरों से कड़े लहजे में कहा है- किसी भी स्थिति में जाम नहीं लगना चाहिए। ट्रैफिक प्लान बदला गया है। अब मेला क्षेत्र ही नहीं, पूरे शहर में वाहनों की एंट्री बैन है। सिर्फ प्रशासनिक अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के वाहन चलेंगे। एक दिन पहले क्या हुआ?
सीएम योगी भी रविवार को महाकुंभ पहुंचे। उन्होंने हेलिकॉप्टर से शहर के बार से लेकर मेला क्षेत्र तक का जायजा लिया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और धर्मेंद्र प्रधान ने संगम में डुबकी लगाई। मेले से पांच साल का एक बच्चा गायब हो गया। संगम में दो नावें टक्करा कर पलट गईं। NDRF ने डूब रहे 5 यात्रियों को बचा लिया। पढ़ें पूरी खबर…

मां को गीता सुनाते-सुनाते बनीं संन्यासिनी, VIDEO:मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ी; जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर जय अंबानंद गिरि की कहानी

मां को गीता सुनाते-सुनाते बनीं संन्यासिनी, VIDEO:मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ी; जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर जय अंबानंद गिरि की कहानी मैं 5 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थी। मां पढ़ी-लिखी नहीं थीं। बचपन में मां अपने बगल में मुझे बैठाकर गीता और भागवत पुराण आदि सुनाने को कहती थीं। मैं पढ़ाई के साथ शास्त्रों का भी अध्ययन करती थी। पढ़ाई के बाद एक इंटरनेशनल कंपनी में मैनेजर बन गई, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया और संन्यास की तरफ बढ़ गई। यह कहना है श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर जय अंबानंद गिरि का। अंबानंद गिरि को 6 भाषाएं आती हैं। इनके इंस्टाग्राम पर 78 हजार, फेसबुक पर 3.50 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। देखिए वीडियो स्टोरी…

मां को गीता सुनाते-सुनाते बनीं संन्यासिनी, VIDEO:मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ी; जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर जय अंबानंद गिरि की कहानी

मां को गीता सुनाते-सुनाते बनीं संन्यासिनी, VIDEO:मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ी; जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर जय अंबानंद गिरि की कहानी मैं 5 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थी। मां पढ़ी-लिखी नहीं थीं। बचपन में मां अपने बगल में मुझे बैठाकर गीता और भागवत पुराण आदि सुनाने को कहती थीं। मैं पढ़ाई के साथ शास्त्रों का भी अध्ययन करती थी। पढ़ाई के बाद एक इंटरनेशनल कंपनी में मैनेजर बन गई, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया और संन्यास की तरफ बढ़ गई। यह कहना है श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर जय अंबानंद गिरि का। अंबानंद गिरि को 6 भाषाएं आती हैं। इनके इंस्टाग्राम पर 78 हजार, फेसबुक पर 3.50 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। देखिए वीडियो स्टोरी…

महाकुंभ में 14 बच्चों ने लिया जन्म:महिलाएं प्रेग्नेंसी के आखिरी समय आईं संगम नहाने; बच्चों के नाम रखे कुंभ, गंगा…

महाकुंभ में 14 बच्चों ने लिया जन्म:महिलाएं प्रेग्नेंसी के आखिरी समय आईं संगम नहाने; बच्चों के नाम रखे कुंभ, गंगा… महाकुंभ एक अनोखे संयोग के कारण भी ऐतिहासिक बन गया है। इस महापर्व के एक महीने में 14 नवजात का जन्म हुआ। इनमें 8 बेटे और 6 बेटियां हैं। सभी शिशुओं का जन्म सामान्य प्रसव से हुआ। किसी को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी। बच्चों के नाम भी धार्मिक नामों पर रखे गए हैं। कुंभ, गंगा, यमुना और नंदी जैसे नाम दिए गए हैं। ये सभी महिलाएं अपनी प्रेग्नेंसी के आखिरी दौर में महाकुंभ स्नान के लिए आई थीं। सभी बच्चों का जन्म महाकुंभ मेले में सेक्टर-2 में बनाए गए 100 बिस्तर के सेंट्रल हॉस्पिटल में हुआ है। यहां पर आईसीयू से लेकर डिलीवरी रूम तक की हाईटेक व्यवस्था है। सबसे पहले बच्चे का जन्म 29 दिसंबर 2024 को मेले की तैयारियों के दौरान हुआ था। उसका नाम कुंभ रखा गया। अगले ही दिन एक बच्ची ने जन्म लिया, नाम दिया गया गंगा। आध्यात्मिक और धार्मिक आधार पर रखे गए सभी के नाम
महाकुंभ में जन्म लेने वाले इन 14 शिशुओं को आध्यात्मिक और धार्मिक आधार पर नाम दिए गए हैं। परिवार वालों ने इनके नाम कुंभ, गंगा, बजरंगी, यमुना, सरस्वती, नंदी, बसंत, बसंती, अमृत, शंकर, कृष्णा, अमावस्या आदि रखे हैं। पहला बेटा हुआ तो कुंभ, दूसरी बेटी हुई तो गंगा नाम पड़ा
महाकुंभ शुरू होने से पहले 29 दिसंबर को मेले में सबसे पहले एक बच्चे का जन्म हुआ था, जिसका नाम कुंभ रखा गया था। अगले दिन बांदा जिले की शिवकुमारी (24) ने बेटी को जन्म दिया। शिवकुमारी और पति राजेश महाकुंभ में काम की तलाश में आए थे। इसी दौरान शिवकुमारी को प्रसव पीड़ा हुई और उसे सेंट्रल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। नर्स के कहने पर परिजनों ने उसका नाम गंगा रखा। अब तक 16 बच्चे जन्मे, इनमें से 14 एक महीने में
महाकुंभ मेला जब से सजा, तब से अब तक कुल 16 बच्चों का जन्म हुआ है। इनमें से 14 बच्चों का जन्म महाकुंभ शुरू होने यानी 13 जनवरी (पौष पूर्णिमा) से 12 फरवरी (माघी पूर्णिमा) के बीच हुआ। इसी एक महीने में साधु-संत और आम लोग संगम के तट पर कल्पवास करते हैं। कल्पवास पौष पूर्णिमा से शुरू होता है और माघी पूर्णिमा के दिन खत्म होता है। इसी एक महीने के दौरान संगम स्नान का विशेष महत्व है। सीएमओ बोले- सभी बच्चे और माताएं स्वस्थ
महाकुंभ केंद्रीय अस्पताल के सीएमओ डॉ. मनोज कौशिक ने बताया कि महाकुंभ में जन्म लेने वाले सभी 14 नवजात और उनकी माताएं पूरी तरह स्वस्थ हैं। सभी की डिलीवरी नॉर्मल हुई। जन्म के तीसरे दिन उन्हें घर भेज दिया गया। इस संयोग को ध्यान में रखते हुए बच्चों के परिवार और अस्पताल प्रशासन ने धार्मिक आधार पर नामकरण किया। पहले से ही नाम तय किए गए और जन्म के बाद परिवार वालों से नाम पर सहमति ली गई। हालांकि परिवार वालों से कहा गया कि वे घर जाकर दूसरा नामकरण कर सकते हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जैसे ही पहले बच्चे की डिलीवरी की खबर फैली, श्रद्धालुओं ने इसे ईश्वरीय आशीर्वाद मानते हुए नवजात को देखने के लिए अस्पताल का रुख करना शुरू कर दिया। 144 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग
महाकुंभ 2025 में हुआ यह संयोग 144 साल में पहली बार देखने को मिला है। यह न केवल एक धार्मिक घटना है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी इसे विशेष माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन से 14 रत्नों की उत्पत्ति हुई थी। इस मंथन में निकले अमृत को लेकर देवताओं और असुरों में युद्ध छिड़ गया। अमृत की बूंदें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरी थीं। इसलिए इन्हीं जगहों पर कुंभ लगता है। इस संयोग में महाकुंभ के दौरान 14 नवजातों का जन्म हुआ, जिसे श्रद्धालु एक अलौकिक घटना मान रहे हैं। —————— ये खबर भी पढ़ें… नाव से 550 KM की महाकुंभ जलयात्रा, सड़कें हुईं जाम, ट्रेनें फुल तो 7 लोगों ने बनाई जुगाड़ की नाव; 84 घंटे लगे बिहार और यूपी के 7 लोग मोटरबोट से पानी के रास्ते 275 किलोमीटर सफर करके महाकुंभ में पहुंचे। संगम में डुबकी लगाई और वापस उसी रास्ते बिहार में अपने गांव पहुंच गए। प्रयागराज में 8 और 9 फरवरी को प्रयागराज आने वाले हर रास्ते पर भीषण जाम के हालात थे। ट्रेनों में सीटें फुल थीं। लोग दो-दो दिन का सफर करके भी महाकुंभ नहीं पहुंच पा रहे थे। पढ़ें पूरी खबर…

महाकुंभ में 14 बच्चों ने लिया जन्म:महिलाएं प्रेग्नेंसी के आखिरी समय आईं संगम नहाने; बच्चों के नाम रखे कुंभ, गंगा…

महाकुंभ में 14 बच्चों ने लिया जन्म:महिलाएं प्रेग्नेंसी के आखिरी समय आईं संगम नहाने; बच्चों के नाम रखे कुंभ, गंगा… महाकुंभ एक अनोखे संयोग के कारण भी ऐतिहासिक बन गया है। इस महापर्व के एक महीने में 14 नवजात का जन्म हुआ। इनमें 8 बेटे और 6 बेटियां हैं। सभी शिशुओं का जन्म सामान्य प्रसव से हुआ। किसी को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी। बच्चों के नाम भी धार्मिक नामों पर रखे गए हैं। कुंभ, गंगा, यमुना और नंदी जैसे नाम दिए गए हैं। ये सभी महिलाएं अपनी प्रेग्नेंसी के आखिरी दौर में महाकुंभ स्नान के लिए आई थीं। सभी बच्चों का जन्म महाकुंभ मेले में सेक्टर-2 में बनाए गए 100 बिस्तर के सेंट्रल हॉस्पिटल में हुआ है। यहां पर आईसीयू से लेकर डिलीवरी रूम तक की हाईटेक व्यवस्था है। सबसे पहले बच्चे का जन्म 29 दिसंबर 2024 को मेले की तैयारियों के दौरान हुआ था। उसका नाम कुंभ रखा गया। अगले ही दिन एक बच्ची ने जन्म लिया, नाम दिया गया गंगा। आध्यात्मिक और धार्मिक आधार पर रखे गए सभी के नाम
महाकुंभ में जन्म लेने वाले इन 14 शिशुओं को आध्यात्मिक और धार्मिक आधार पर नाम दिए गए हैं। परिवार वालों ने इनके नाम कुंभ, गंगा, बजरंगी, यमुना, सरस्वती, नंदी, बसंत, बसंती, अमृत, शंकर, कृष्णा, अमावस्या आदि रखे हैं। पहला बेटा हुआ तो कुंभ, दूसरी बेटी हुई तो गंगा नाम पड़ा
महाकुंभ शुरू होने से पहले 29 दिसंबर को मेले में सबसे पहले एक बच्चे का जन्म हुआ था, जिसका नाम कुंभ रखा गया था। अगले दिन बांदा जिले की शिवकुमारी (24) ने बेटी को जन्म दिया। शिवकुमारी और पति राजेश महाकुंभ में काम की तलाश में आए थे। इसी दौरान शिवकुमारी को प्रसव पीड़ा हुई और उसे सेंट्रल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। नर्स के कहने पर परिजनों ने उसका नाम गंगा रखा। अब तक 16 बच्चे जन्मे, इनमें से 14 एक महीने में
महाकुंभ मेला जब से सजा, तब से अब तक कुल 16 बच्चों का जन्म हुआ है। इनमें से 14 बच्चों का जन्म महाकुंभ शुरू होने यानी 13 जनवरी (पौष पूर्णिमा) से 12 फरवरी (माघी पूर्णिमा) के बीच हुआ। इसी एक महीने में साधु-संत और आम लोग संगम के तट पर कल्पवास करते हैं। कल्पवास पौष पूर्णिमा से शुरू होता है और माघी पूर्णिमा के दिन खत्म होता है। इसी एक महीने के दौरान संगम स्नान का विशेष महत्व है। सीएमओ बोले- सभी बच्चे और माताएं स्वस्थ
महाकुंभ केंद्रीय अस्पताल के सीएमओ डॉ. मनोज कौशिक ने बताया कि महाकुंभ में जन्म लेने वाले सभी 14 नवजात और उनकी माताएं पूरी तरह स्वस्थ हैं। सभी की डिलीवरी नॉर्मल हुई। जन्म के तीसरे दिन उन्हें घर भेज दिया गया। इस संयोग को ध्यान में रखते हुए बच्चों के परिवार और अस्पताल प्रशासन ने धार्मिक आधार पर नामकरण किया। पहले से ही नाम तय किए गए और जन्म के बाद परिवार वालों से नाम पर सहमति ली गई। हालांकि परिवार वालों से कहा गया कि वे घर जाकर दूसरा नामकरण कर सकते हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जैसे ही पहले बच्चे की डिलीवरी की खबर फैली, श्रद्धालुओं ने इसे ईश्वरीय आशीर्वाद मानते हुए नवजात को देखने के लिए अस्पताल का रुख करना शुरू कर दिया। 144 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग
महाकुंभ 2025 में हुआ यह संयोग 144 साल में पहली बार देखने को मिला है। यह न केवल एक धार्मिक घटना है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी इसे विशेष माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन से 14 रत्नों की उत्पत्ति हुई थी। इस मंथन में निकले अमृत को लेकर देवताओं और असुरों में युद्ध छिड़ गया। अमृत की बूंदें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरी थीं। इसलिए इन्हीं जगहों पर कुंभ लगता है। इस संयोग में महाकुंभ के दौरान 14 नवजातों का जन्म हुआ, जिसे श्रद्धालु एक अलौकिक घटना मान रहे हैं। —————— ये खबर भी पढ़ें… नाव से 550 KM की महाकुंभ जलयात्रा, सड़कें हुईं जाम, ट्रेनें फुल तो 7 लोगों ने बनाई जुगाड़ की नाव; 84 घंटे लगे बिहार और यूपी के 7 लोग मोटरबोट से पानी के रास्ते 275 किलोमीटर सफर करके महाकुंभ में पहुंचे। संगम में डुबकी लगाई और वापस उसी रास्ते बिहार में अपने गांव पहुंच गए। प्रयागराज में 8 और 9 फरवरी को प्रयागराज आने वाले हर रास्ते पर भीषण जाम के हालात थे। ट्रेनों में सीटें फुल थीं। लोग दो-दो दिन का सफर करके भी महाकुंभ नहीं पहुंच पा रहे थे। पढ़ें पूरी खबर…