ऑटिज्म को समझना है जरूरी, बदलना नहीं: शुरुआती पहचान और सही सहयोग से संवर सकता है बच्चों का भविष्य
ऑटिज्म को लेकर समाज में आज भी कई तरह की भ्रांतियां और गलत धारणाएं मौजूद हैं। अक्सर लोग इसे बीमारी, मानसिक कमजोरी या बच्चे की परवरिश में कमी का परिणाम मान लेते हैं। कई परिवार इस विषय पर खुलकर बात करने से भी बचते हैं क्योंकि उन्हें सामाजिक आलोचना या गलतफहमी का डर रहता है। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि ऑटिज्म कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसे सामान्य दवा से ठीक किया जा सके, बल्कि यह मस्तिष्क के विकास और जानकारी को समझने तथा प्रतिक्रिया देने के एक अलग तरीके को दर्शाता है। समय के साथ ऑटिज्म…
