कांवड़ यात्रा पर निकलने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, छोटी सी चूक भी कर सकती है आपकी तपस्या अधूरी

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इसी दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं और पवित्र नदियों से जल लाकर अपने आराध्य भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री, गोमुख और अन्य तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने शहरों और गांवों की ओर पैदल यात्रा करते हैं। यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि संयम, अनुशासन, श्रद्धा और तपस्या का प्रतीक भी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक होता…

इस तारीख से शुरू होगी कांवड़ यात्रा, जानिए कब भरेंगे गंगाजल और कब होगा जलाभिषेक

भगवान शिव के भक्त पूरे वर्ष जिस पवित्र महीने का सबसे अधिक इंतजार करते हैं, वह है श्रावण मास, जिसे आमतौर पर सावन भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस महीने का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि सावन के दौरान भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक, व्रत और गंगाजल से जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी कारण इस पूरे महीने देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। सावन की शुरुआत के साथ ही उत्तर भारत में सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल कांवड़ यात्रा भी प्रारंभ हो…