17 सितंबर को औजारों और वाहनों की पूजा क्यों? भगवान विश्वकर्मा से जुड़ी इस परंपरा का जानें महत्व

हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, वास्तुकला, शिल्प और तकनीकी कौशल का प्रतीक माना जाता है। हर साल भगवान विश्वकर्मा की जयंती के अवसर पर विश्वकर्मा पूजा का आयोजन किया जाता है। साल 2026 में यह पर्व 17 सितंबर को मनाया जाएगा। खासतौर पर कारखानों, वर्कशॉप, दुकानों, निर्माण स्थलों और तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े लोग इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं। इस दिन सिर्फ भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा नहीं होती, बल्कि काम में इस्तेमाल होने वाले औजार, मशीनें, वाहन और अन्य उपकरण भी पूजे जाते हैं। कई जगहों पर कर्मचारी और कारोबारी इस…

भाद्रपद अमावस्या इस बार दो दिन, 10 सितंबर को कुशग्रहणी और 11 को स्नान-दान: पितरों के लिए दोपहर में करें धूप-ध्यान

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष धार्मिक महत्व दिया गया है। इस दिन पूर्वजों का स्मरण करने, उनके निमित्त तर्पण करने और जरूरतमंद लोगों को दान देने की परंपरा रही है। इस बार भाद्रपद मास की अमावस्या को लेकर तिथि दो दिनों में पड़ रही है। पंचांग के अनुसार अमावस्या 10 सितंबर की सुबह 10 बजकर 33 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानी 11 सितंबर की सुबह 8 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। तिथि के इसी समय के कारण दोनों दिनों के धार्मिक कार्य अलग-अलग माने जा रहे हैं। 10 सितंबर को कुशग्रहणी अमावस्या मनाई जाएगी, जबकि…

जन्माष्टमी की आधी रात को ही क्यों हुआ श्रीकृष्ण का प्राकट्य, क्या है इस पावन रात की विशेष महिमा?

सनातन परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म, अज्ञान पर ज्ञान और निराशा पर आशा की विजय का प्रतीक माना जाता है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी से जुड़ी मान्यताओं में सबसे खास बात भगवान श्रीकृष्ण का मध्यरात्रि में प्रकट होना है। यही वजह है कि जन्माष्टमी की रात को अत्यंत पवित्र और मंगलकारी माना जाता है। शास्त्रों में श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का पूर्णावतार और परम पुरुषोत्तम बताया गया है। उनके अवतरण का उद्देश्य केवल कंस जैसे अत्याचारी का अंत करना नहीं था,…

जन्माष्टमी 2026: 3 या 4 सितंबर, कब रखा जाएगा व्रत? जानें पूजा का शुभ समय, तिथि और पारण की सही विधि

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व जन्माष्टमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है। देशभर में इस दिन मंदिरों से लेकर घरों तक विशेष सजावट की जाती है। भक्त बाल गोपाल का श्रृंगार करते हैं, उन्हें झूले में विराजमान करते हैं और आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास भी रखते हैं। हालांकि, हर साल की तरह इस बार भी लोगों के बीच व्रत की तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है कि आखिर जन्माष्टमी का व्रत 3 सितंबर को रखा जाएगा या 4…

Raksha Bandhan 2026: आज किस समय बांधें भाई को राखी? जानें शुभ मुहूर्त, पूर्णिमा तिथि, राहुकाल और सही विधि

रक्षाबंधन का त्योहार आज यानी 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को देशभर में मनाया जा रहा है। भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और सुरक्षा के इस पर्व पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके सुखी, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं। वहीं भाई भी बहनों की हर परिस्थिति में रक्षा करने का संकल्प लेते हैं और उन्हें उपहार देकर इस रिश्ते को और खास बनाते हैं। राखी बांधने से पहले ज्यादातर लोग पंचांग के अनुसार शुभ समय जानना चाहते हैं। धार्मिक मान्यताओं में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में अगर आप…

कृष्ण जन्माष्टमी 2026: 3 या 4 सितंबर, किस दिन रखा जाएगा व्रत? जानें पूजा और पारण का सही समय

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का इंतजार भक्तों को पूरे साल रहता है। हिंदू धर्म में जन्माष्टमी को बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस त्योहार को अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं मंदिरों में भव्य झांकियां सजती हैं तो कहीं आधी रात को कान्हा के जन्म के बाद विशेष अभिषेक और आरती होती है। हालांकि, हर साल की तरह इस बार भी जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस देखने को मिल रहा…

नाग पंचमी 2026: शिव पूजा से लेकर नाग देवता के अभिषेक तक, जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पर्व का धार्मिक महत्व

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इसी पवित्र महीने में आने वाली नाग पंचमी का पर्व भी हिंदू धर्म में खास स्थान रखता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने के साथ भगवान शिव की आराधना की जाती है। मान्यता है कि नाग पंचमी पर श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख-शांति आती है और नाग देवता की कृपा प्राप्त होती है। इस वर्ष नाग पंचमी का पर्व सावन के तीसरे सोमवार के साथ पड़ रहा है। सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ आना धार्मिक दृष्टि से विशेष…

दूर्वा विनायक चतुर्थी 2026: 16 अगस्त को रखा जाएगा व्रत, जानें पूजा का सही समय, महत्व और गणेशजी को दूर्वा चढ़ाने का तरीका

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ प्रथम पूज्य भगवान गणेश की उपासना के लिए भी खास माना जाता है। इस पवित्र महीने में आने वाली चतुर्थी का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। सावन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को दूर्वा विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है और उन्हें दूर्वा यानी दूब घास अर्पित की जाती है। हिंदू धर्म में दूर्वा को गणपति की प्रिय वस्तु माना गया है। इस वर्ष दूर्वा विनायक चतुर्थी की तारीख को लेकर काफी लोगों के मन में असमंजस बना हुआ…

सावन अमावस्या की तिथि, स्नान-दान का शुभ समय और पितृ तर्पण का सही मुहूर्त, जानिए पूरी जानकारी

सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे माह में पड़ने वाली अमावस्या का भी विशेष धार्मिक महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करने, दान-पुण्य करने और पितरों का तर्पण करने से जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं। साथ ही पितृ दोष से मुक्ति मिलने और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होने की भी मान्यता है। इस बार सावन अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र और व्यतीपात योग का विशेष संयोग बनने जा रहा है, जिसके कारण इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ गया है।…

सावन की कालाष्टमी कब मनाई जाएगी? 5 या 6 अगस्त को लेकर भ्रम दूर, जानें पूजा का महत्व

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। हिंदू धर्म में इस पूरे महीने को भक्ति, उपवास और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है। सावन के प्रत्येक सोमवार के साथ-साथ इस महीने में आने वाली विभिन्न तिथियों और पर्वों का भी अपना अलग धार्मिक महत्व है। इन्हीं महत्वपूर्ण अवसरों में सावन मास की कालाष्टमी भी शामिल है। यह पर्व भगवान शिव के उग्र, रक्षक और न्यायकारी स्वरूप माने जाने वाले भगवान काल भैरव को समर्पित होता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। हालांकि, सावन महीने…

गुरु पूर्णिमा 2026: क्यों कहा जाता है कि गुरु का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी? जानिए धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, सम्मान और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। पंचांग के अनुसार आज यह पावन पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध को विशेष रूप से याद किया जाता है। मान्यता है कि गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने से जीवन में सुख, शांति और सही दिशा का मार्ग खुलता है। इसलिए देशभर में लोग अपने गुरु का सम्मान करते हैं और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु को केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं…

हरियाली, कजरी और हरतालिका तीज 2026: जानें कब रखा जाएगा व्रत, क्या है पूजा का शुभ समय और धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में तीज के व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से सुहागन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और पति की लंबी आयु की कामना से जुड़ा हुआ है। वहीं अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए श्रद्धा और नियमपूर्वक तीज का व्रत करती हैं। वर्षभर में तीज के तीन प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं। हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज, तीनों व्रत माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना को समर्पित होते हैं, लेकिन धार्मिक दृष्टि से हरतालिका तीज को सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। साल 2026…

सावन में कांवड़ यात्रा पर नहीं जा पा रहे हैं? घर बैठे भी पा सकते हैं शिव कृपा, जानिए पूजा का संपूर्ण तरीका

सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र और शुभ समय माना जाता है। इस पूरे माह में देशभर के शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख, सुल्तानगंज, देवघर और अन्य पवित्र तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर पैदल कांवड़ यात्रा करते हैं और अपने-अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि संयम, तपस्या, सेवा, अनुशासन और अटूट श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है। कांवड़ यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालु कई दिनों तक कठिन मार्ग…

चातुर्मास का शुभारंभ, चार महीने तक शिव संभालेंगे सृष्टि का संचालन

Chaturmas 2026: देवशयनी एकादशी से शुरू हुआ चातुर्मास, जानिए धार्मिक महत्व, किन कार्यों पर रहती है रोक और किन नियमों का पालन करना माना जाता है शुभ सनातन धर्म में चातुर्मास को आध्यात्मिक साधना, आत्मसंयम, तप, जप और सात्विक जीवन का विशेष काल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से इस पवित्र अवधि की शुरुआत होती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी तक विश्राम करते हैं। इस अवधि को केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन, संयम और आत्मचिंतन का अवसर भी…

गुरु पूर्णिमा 2026: इस दिन मनाया जाएगा पावन पर्व, जानें शुभ तिथि, धार्मिक महत्व और क्या करें इस खास अवसर पर

सनातन धर्म में गुरु का स्थान अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार गुरु वह मार्गदर्शक होते हैं, जो अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान के समान ही नहीं, बल्कि कई स्थानों पर उनसे भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। गुरु पूर्णिमा का पर्व इसी गुरु-शिष्य परंपरा को सम्मान देने और अपने जीवन में ज्ञान देने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। हर वर्ष आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाई…

सावन 2026 में प्रदोष व्रत की दो अहम तिथियां, जानिए पूजा का सही समय, महत्व और व्रत से जुड़े नियम

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और फलदायी माना जाता है। इस पूरे माह में शिव भक्त विशेष श्रद्धा के साथ भोलेनाथ का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और व्रत-उपवास करते हैं। मान्यता है कि इस महीने में श्रद्धापूर्वक की गई शिव पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। सावन के दौरान आने वाले प्रत्येक सोमवार का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन इसके साथ ही प्रदोष व्रत भी अत्यंत शुभ माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक माह दो बार त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है…

कांवड़ यात्रा पर निकलने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, छोटी सी चूक भी कर सकती है आपकी तपस्या अधूरी

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इसी दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं और पवित्र नदियों से जल लाकर अपने आराध्य भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री, गोमुख और अन्य तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने शहरों और गांवों की ओर पैदल यात्रा करते हैं। यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि संयम, अनुशासन, श्रद्धा और तपस्या का प्रतीक भी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक होता…

16 जुलाई से शुरू होगी जगन्नाथ रथ यात्रा, ऐसे करें तीनों दिव्य रथों की सही पहचान

पुरी की विश्वप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का इंतजार देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालु पूरे वर्ष करते हैं। इस बार यह पावन यात्रा 16 जुलाई, गुरुवार से प्रारंभ होने जा रही है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर निकलने वाली इस भव्य यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करते हैं। इस दौरान तीनों देवताओं के लिए अलग-अलग विशाल रथ तैयार किए जाते हैं, जिन्हें लाखों श्रद्धालु मोटी रस्सियों की सहायता से खींचते हैं। मान्यता है कि…

सावन 2026: इस दिन से शुरू होगा भगवान शिव का प्रिय महीना, जानें चारों सावन सोमवार की तिथियां, व्रत का महत्व और संपूर्ण पूजा-विधि

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और शुभ समय माना जाता है। इस पूरे मास में देशभर के शिव मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं और श्रद्धालु बड़ी संख्या में भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि सावन के दौरान सच्चे मन से की गई शिव भक्ति व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आती है। यही कारण है कि इस महीने का इंतजार शिव भक्त पूरे वर्ष करते हैं। सावन के आते ही मंदिरों में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और कांवड़ यात्रा जैसी…

25 जुलाई से शुरू होगा चार महीने का विशेष आध्यात्मिक काल, जानिए क्यों रुक जाते हैं विवाह और अन्य शुभ कार्य

सनातन धर्म में वर्ष भर अनेक पर्व, व्रत और धार्मिक अवसर आते हैं, लेकिन कुछ विशेष काल ऐसे भी होते हैं जिन्हें केवल उत्सवों का समय नहीं बल्कि आत्मसंयम, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। इन्हीं पवित्र अवधियों में सबसे महत्वपूर्ण स्थान चातुर्मास का है। यह चार महीनों तक चलने वाला धार्मिक काल है, जिसमें भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने की मान्यता है और श्रद्धालु सांसारिक सुख-सुविधाओं की अपेक्षा ईश्वर भक्ति, व्रत, जप, तप, दान और धार्मिक अनुष्ठानों को अधिक महत्व देते हैं। वर्ष 2026 में चातुर्मास का आरंभ 25 जुलाई 2026, शनिवार को देवशयनी…