सावन की कालाष्टमी कब मनाई जाएगी? 5 या 6 अगस्त को लेकर भ्रम दूर, जानें पूजा का महत्व

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। हिंदू धर्म में इस पूरे महीने को भक्ति, उपवास और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है। सावन के प्रत्येक सोमवार के साथ-साथ इस महीने में आने वाली विभिन्न तिथियों और पर्वों का भी अपना अलग धार्मिक महत्व है। इन्हीं महत्वपूर्ण अवसरों में सावन मास की कालाष्टमी भी शामिल है। यह पर्व भगवान शिव के उग्र, रक्षक और न्यायकारी स्वरूप माने जाने वाले भगवान काल भैरव को समर्पित होता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। हालांकि, सावन महीने…

गुरु पूर्णिमा 2026: क्यों कहा जाता है कि गुरु का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी? जानिए धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, सम्मान और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। पंचांग के अनुसार आज यह पावन पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध को विशेष रूप से याद किया जाता है। मान्यता है कि गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने से जीवन में सुख, शांति और सही दिशा का मार्ग खुलता है। इसलिए देशभर में लोग अपने गुरु का सम्मान करते हैं और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु को केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं…

हरियाली, कजरी और हरतालिका तीज 2026: जानें कब रखा जाएगा व्रत, क्या है पूजा का शुभ समय और धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में तीज के व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से सुहागन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और पति की लंबी आयु की कामना से जुड़ा हुआ है। वहीं अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए श्रद्धा और नियमपूर्वक तीज का व्रत करती हैं। वर्षभर में तीज के तीन प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं। हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज, तीनों व्रत माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना को समर्पित होते हैं, लेकिन धार्मिक दृष्टि से हरतालिका तीज को सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। साल 2026…

सावन में कांवड़ यात्रा पर नहीं जा पा रहे हैं? घर बैठे भी पा सकते हैं शिव कृपा, जानिए पूजा का संपूर्ण तरीका

सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र और शुभ समय माना जाता है। इस पूरे माह में देशभर के शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख, सुल्तानगंज, देवघर और अन्य पवित्र तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर पैदल कांवड़ यात्रा करते हैं और अपने-अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि संयम, तपस्या, सेवा, अनुशासन और अटूट श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है। कांवड़ यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालु कई दिनों तक कठिन मार्ग…

चातुर्मास का शुभारंभ, चार महीने तक शिव संभालेंगे सृष्टि का संचालन

Chaturmas 2026: देवशयनी एकादशी से शुरू हुआ चातुर्मास, जानिए धार्मिक महत्व, किन कार्यों पर रहती है रोक और किन नियमों का पालन करना माना जाता है शुभ सनातन धर्म में चातुर्मास को आध्यात्मिक साधना, आत्मसंयम, तप, जप और सात्विक जीवन का विशेष काल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से इस पवित्र अवधि की शुरुआत होती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी तक विश्राम करते हैं। इस अवधि को केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन, संयम और आत्मचिंतन का अवसर भी…

गुरु पूर्णिमा 2026: इस दिन मनाया जाएगा पावन पर्व, जानें शुभ तिथि, धार्मिक महत्व और क्या करें इस खास अवसर पर

सनातन धर्म में गुरु का स्थान अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार गुरु वह मार्गदर्शक होते हैं, जो अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान के समान ही नहीं, बल्कि कई स्थानों पर उनसे भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। गुरु पूर्णिमा का पर्व इसी गुरु-शिष्य परंपरा को सम्मान देने और अपने जीवन में ज्ञान देने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। हर वर्ष आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाई…

सावन 2026 में प्रदोष व्रत की दो अहम तिथियां, जानिए पूजा का सही समय, महत्व और व्रत से जुड़े नियम

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और फलदायी माना जाता है। इस पूरे माह में शिव भक्त विशेष श्रद्धा के साथ भोलेनाथ का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और व्रत-उपवास करते हैं। मान्यता है कि इस महीने में श्रद्धापूर्वक की गई शिव पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। सावन के दौरान आने वाले प्रत्येक सोमवार का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन इसके साथ ही प्रदोष व्रत भी अत्यंत शुभ माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक माह दो बार त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है…

कांवड़ यात्रा पर निकलने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, छोटी सी चूक भी कर सकती है आपकी तपस्या अधूरी

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इसी दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं और पवित्र नदियों से जल लाकर अपने आराध्य भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री, गोमुख और अन्य तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने शहरों और गांवों की ओर पैदल यात्रा करते हैं। यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि संयम, अनुशासन, श्रद्धा और तपस्या का प्रतीक भी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक होता…

16 जुलाई से शुरू होगी जगन्नाथ रथ यात्रा, ऐसे करें तीनों दिव्य रथों की सही पहचान

पुरी की विश्वप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का इंतजार देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालु पूरे वर्ष करते हैं। इस बार यह पावन यात्रा 16 जुलाई, गुरुवार से प्रारंभ होने जा रही है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर निकलने वाली इस भव्य यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करते हैं। इस दौरान तीनों देवताओं के लिए अलग-अलग विशाल रथ तैयार किए जाते हैं, जिन्हें लाखों श्रद्धालु मोटी रस्सियों की सहायता से खींचते हैं। मान्यता है कि…

सावन 2026: इस दिन से शुरू होगा भगवान शिव का प्रिय महीना, जानें चारों सावन सोमवार की तिथियां, व्रत का महत्व और संपूर्ण पूजा-विधि

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और शुभ समय माना जाता है। इस पूरे मास में देशभर के शिव मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं और श्रद्धालु बड़ी संख्या में भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि सावन के दौरान सच्चे मन से की गई शिव भक्ति व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आती है। यही कारण है कि इस महीने का इंतजार शिव भक्त पूरे वर्ष करते हैं। सावन के आते ही मंदिरों में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और कांवड़ यात्रा जैसी…

25 जुलाई से शुरू होगा चार महीने का विशेष आध्यात्मिक काल, जानिए क्यों रुक जाते हैं विवाह और अन्य शुभ कार्य

सनातन धर्म में वर्ष भर अनेक पर्व, व्रत और धार्मिक अवसर आते हैं, लेकिन कुछ विशेष काल ऐसे भी होते हैं जिन्हें केवल उत्सवों का समय नहीं बल्कि आत्मसंयम, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। इन्हीं पवित्र अवधियों में सबसे महत्वपूर्ण स्थान चातुर्मास का है। यह चार महीनों तक चलने वाला धार्मिक काल है, जिसमें भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने की मान्यता है और श्रद्धालु सांसारिक सुख-सुविधाओं की अपेक्षा ईश्वर भक्ति, व्रत, जप, तप, दान और धार्मिक अनुष्ठानों को अधिक महत्व देते हैं। वर्ष 2026 में चातुर्मास का आरंभ 25 जुलाई 2026, शनिवार को देवशयनी…

योगिनी एकादशी आज: भगवान विष्णु को अर्पित करें पीले वस्त्र, लक्ष्मी जी को चढ़ाएं सुहाग सामग्री, शिव पूजा से भी मिलेगा शुभ फल

आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाने वाली योगिनी एकादशी का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। इस वर्ष अधिकांश पंचांगों के अनुसार यह व्रत 10 जुलाई, शुक्रवार को रखा जा रहा है। हालांकि तिथियों के अंतर के कारण कुछ पंचांगों में इसे 11 जुलाई बताया गया है, लेकिन अधिकतर विद्वानों ने 10 जुलाई को ही व्रत और पूजा करने की सलाह दी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली अनेक बाधाएं दूर होती हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।…

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: दुर्लभ शुभ योगों के बीच होगी शुरुआत, जानें घटस्थापना का समय, पूजा विधि और पूरे नौ दिनों का महत्व

आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि इस वर्ष 15 जुलाई 2026 से प्रारंभ होकर 23 जुलाई 2026 तक चलेगी। नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व शक्ति उपासना, मंत्र-जप, साधना और आध्यात्मिक अनुशासन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेष रूप से शाक्त परंपरा और तांत्रिक साधना से जुड़े साधकों के लिए गुप्त नवरात्रि का समय अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। इस बार ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह पर्व खास माना जा रहा है क्योंकि शुरुआत कई दुर्लभ और शुभ योगों के बीच होगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष गुप्त नवरात्रि की शुरुआत ऐसे ग्रह-नक्षत्रों के संयोग में हो रही…

वट पूर्णिमा 2026: बरगद की पूजा से मिलेगा सौभाग्य का आशीर्वाद, जानें शुभ तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

वट पूर्णिमा हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है, जिसे विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए करती हैं। यह व्रत न केवल दांपत्य जीवन को मजबूत बनाने का प्रतीक माना जाता है, बल्कि परिवार की खुशहाली, समृद्धि और अखंड सौभाग्य का भी संदेश देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन बरगद (वट) के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे त्रिदेवों का स्वरूप माना गया है। साल 2026 में वट पूर्णिमा का व्रत 29 जून, सोमवार को रखा जाएगा। इस बार…

निर्जला एकादशी 2026: भगवान विष्णु को समर्पित इस कठिन व्रत का जानिए महत्व, पूजा विधि और धार्मिक मान्यताएं

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित होती है। इन सभी एकादशियों में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को सबसे अधिक पुण्यदायी और प्रभावशाली माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो श्रद्धालु इस व्रत को पूरी श्रद्धा, नियम और संयम के साथ करते हैं, उन्हें वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है। वर्ष 2026 में मनाई जा रही निर्जला एकादशी के अवसर पर देशभर के मंदिरों में…

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026: 28 या 29 जून में कब रखा जाएगा व्रत? उज्जैन के ज्योतिषाचार्य ने बताया सही दिन और पूजा का शुभ समय

हिंदू पंचांग में ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन को कई जगहों पर जेठ पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान, व्रत, पूजा और दान करने से जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की आराधना करने की परंपरा है। माना जाता है कि विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-शांति, धन और समृद्धि का आगमन होता है। इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस…

आषाढ़ मास 2026: भक्ति, व्रत और दान का पावन समय, जानिए कब शुरू होगा और क्यों है इतना महत्वपूर्ण

हिंदू पंचांग में आषाढ़ मास को आध्यात्मिक जागरण, तपस्या और ईश्वर भक्ति का विशेष काल माना जाता है। जैसे-जैसे वर्षा ऋतु का आगमन होता है, वैसे-वैसे धार्मिक वातावरण भी अधिक सक्रिय हो जाता है। मंदिरों में पूजा-अर्चना, व्रत, कथा और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला तेज हो जाता है। मान्यता है कि इस महीने में श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए जप, तप, दान और पूजा से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से आगे बढ़ता है। साल 2026 का आषाढ़ मास भी कई महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों से भरपूर रहने वाला है। इस अवधि में भगवान विष्णु की…

अधिक मास का विशेष शुक्र प्रदोष व्रत आज, शिव-आराधना से मिलेगा पुण्य फल; जानें शुभ समय, पूजा नियम और महत्वपूर्ण मंत्र

सनातन परंपरा में भगवान शिव की उपासना के लिए प्रदोष व्रत का विशेष स्थान माना गया है। प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाने वाला यह व्रत भक्तों को आध्यात्मिक शांति और शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है। जब त्रयोदशी शुक्रवार के दिन पड़ती है, तब इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। वर्ष 2026 में अधिक मास के दौरान आने वाला यह व्रत कई शुभ योगों के कारण और भी खास माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार अधिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून 2026 को सायं 7 बजकर 36 मिनट…

परमा एकादशी 11 जून को: अधिक मास में मिलने वाला दुर्लभ व्रत, तीन साल बाद 2029 में आएगा यह अवसर

11 जून, गुरुवार को अधिक ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पड़ रही है। इस विशेष एकादशी को परमा एकादशी, पुरुषोत्तमी एकादशी और कमला एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह तिथि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसका संबंध अधिक मास से होता है। अधिक मास हर तीन वर्ष के आसपास आता है, इसलिए यह एकादशी भी सामान्य एकादशी की तरह हर वर्ष नहीं आती। इस बार के बाद श्रद्धालुओं को इस व्रत के लिए वर्ष 2029 तक इंतजार करना होगा, जब 9 अप्रैल को पुनः परमा एकादशी का संयोग बनेगा। हिंदू धर्मग्रंथों…

अधिक मास की कालाष्टमी और कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष संयोग: व्रत और पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान, भूलकर भी न करें ये गलतियां

सनातन धर्म में अधिक मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह ऐसा विशेष समय होता है जब साधना, पूजा-पाठ, जप, तप, दान और आत्मचिंतन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसी कारण अधिक मास में आने वाले प्रत्येक व्रत, पर्व और धार्मिक तिथि का महत्व सामान्य महीनों की तुलना में अधिक माना जाता है। इस वर्ष अधिक मास के दौरान कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष संयोग श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का…