जैन धर्म में अपरिग्रह का महत्व: क्यों सीमित रखना चाहिए धन-संपत्ति और भौतिक वस्तुओं का मोह?

आज के समय में ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं जुटाना और भविष्य के लिए जरूरत से अधिक चीजें इकट्ठा करना सामान्य जीवन का हिस्सा बन गया है। घर में कपड़े, सामान, पैसे और दूसरी वस्तुओं का संग्रह लगातार बढ़ता जाता है। लेकिन जैन धर्म जीवन को देखने का एक अलग नजरिया देता है। यहां सवाल केवल यह नहीं है कि किसी व्यक्ति के पास कितना धन या सामान है, बल्कि यह भी देखा जाता है कि उसका मन उन चीजों के प्रति कितना आसक्त है। इसी विचार से जुड़ा है अपरिग्रह, जिसे जैन धर्म के पांच महाव्रतों में महत्वपूर्ण स्थान दिया…

अष्टान्हिका महापर्व आज से शुरू, जबलपुर का नंदीश्वर द्वीप बनेगा जैन श्रद्धालुओं की साधना और आराधना का प्रमुख केंद्र

आज से जैन धर्म का पवित्र अष्टान्हिका महापर्व आरंभ होने जा रहा है। आठ दिनों तक चलने वाले इस विशेष धार्मिक आयोजन के दौरान देशभर के जैन श्रद्धालु उपवास, पूजा, संयम और आत्मचिंतन के माध्यम से आध्यात्मिक साधना करेंगे। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित पिसनहारी मढ़िया जैन तीर्थ में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां निर्मित नंदीश्वर द्वीप श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र रहेगा। पर्व के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे। जैन धर्म में अष्टान्हिका पर्व को अत्यंत प्राचीन और शाश्वत पर्व माना जाता है। यह केवल…