श्रीकृष्ण के 108 नामों का क्या रहस्य है? हर नाम में छिपी है कान्हा की लीला और स्वरूप की अलग कहानी

श्रीकृष्ण को भारतीय धार्मिक परंपरा में प्रेम, करुणा, नीति, ज्ञान और भक्ति का अद्भुत संगम माना जाता है। बाल गोपाल से लेकर योगेश्वर तक उनका स्वरूप अलग-अलग नामों में दिखाई देता है। यही वजह है कि भगवान कृष्ण के नाम केवल उन्हें पुकारने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि उनके व्यक्तित्व, शक्तियों, लीलाओं और दिव्य स्वरूप को समझने का एक रास्ता भी माने जाते हैं। श्रीकृष्ण के अनेक नाम प्रचलित हैं और अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों व परंपराओं में उनके नामों की संख्या भी अलग मिलती है। हालांकि पूजा-पाठ और नाम-जप की परंपरा में उनके 108 नामों यानी अष्टोत्तरशतनामावली का विशेष महत्व…

दही-हांडी सिर्फ मटकी फोड़ने का खेल नहीं, जानिए कृष्ण की लीला से महाराष्ट्र के बड़े उत्सव तक का पूरा सफर

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर देशभर में अलग-अलग तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन्हीं में दही-हांडी का उत्सव खास आकर्षण का केंद्र रहता है। इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है और इसके अगले दिन कई शहरों में दही-हांडी के आयोजन होंगे। खासतौर पर महाराष्ट्र में इस पर्व का उत्साह देखने लायक होता है। मुंबई, ठाणे, पुणे और आसपास के इलाकों में बड़ी-बड़ी हांड़ियां ऊंचाई पर लटकाई जाती हैं और उन्हें फोड़ने के लिए गोविंदा पथक मानव पिरामिड बनाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर दही-हांडी की यह परंपरा शुरू…

अधिक मास की कालाष्टमी और कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष संयोग: व्रत और पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान, भूलकर भी न करें ये गलतियां

सनातन धर्म में अधिक मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह ऐसा विशेष समय होता है जब साधना, पूजा-पाठ, जप, तप, दान और आत्मचिंतन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसी कारण अधिक मास में आने वाले प्रत्येक व्रत, पर्व और धार्मिक तिथि का महत्व सामान्य महीनों की तुलना में अधिक माना जाता है। इस वर्ष अधिक मास के दौरान कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष संयोग श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का…