क्या महात्मा गांधी आरक्षण के विरोधी थे? 1932 के पूना पैक्ट ने कैसे बदल दी भारत की राजनीतिक दिशा
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई ऐसे ऐतिहासिक घटनाक्रम हुए, जिन्होंने देश की राजनीति, समाज और संविधान की दिशा तय की। इन्हीं में से एक था वर्ष 1932 का पूना पैक्ट, जिसे लेकर आज भी अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या महात्मा गांधी आरक्षण के खिलाफ थे? इस सवाल का जवाब इतिहास के तथ्यों में छिपा है। दरअसल, गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के बीच मतभेद आरक्षण की अवधारणा को लेकर नहीं, बल्कि दलितों के लिए अलग निर्वाचन व्यवस्था यानी सेपरेट इलेक्टोरेट को लेकर था। दोनों नेताओं का उद्देश्य दलित समाज का उत्थान था, लेकिन उस लक्ष्य तक…
