मोबाइल ने बदली बच्चों की पढ़ाई की आदत, स्क्रीन बढ़ी तो रीडिंग के साथ मैथ्स-साइंस भी कमजोर

आज के दौर में स्मार्टफोन, टैबलेट और दूसरे डिजिटल उपकरण बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक, किशोरों का काफी समय स्क्रीन के सामने गुजर रहा है। लेकिन अब एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस बढ़ते स्क्रीन टाइम के शिक्षा पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर बच्चे डिजिटल डिवाइस पर जरूरत से ज्यादा समय बिताते हैं तो इसका सीधा असर उनकी एकाग्रता, पढ़ने की आदत और अकादमिक प्रदर्शन पर दिखाई दे सकता है। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन यानी ओईसीडी की ओर से जारी 2025…

रात को बिस्तर पर जाने से पहले मोबाइल से दूरी क्यों जरूरी है? ये बदलाव बदल सकता है आपकी नींद का तरीका

आज के समय में मोबाइल फोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का इतना जरूरी हिस्सा बन चुका है कि दिन खत्म होने के बाद भी इससे दूरी बनाना मुश्किल लगता है। काम, सोशल मीडिया, वीडियो, चैटिंग और न्यूज देखने के लिए लोग देर रात तक फोन की स्क्रीन पर नजरें टिकाए रहते हैं। कई लोगों की आदत तो ऐसी हो चुकी है कि बिस्तर पर जाने के बाद भी फोन हाथ से नहीं छूटता। सोने से पहले कुछ मिनट के लिए शुरू हुआ स्क्रीन टाइम कब आधे या एक घंटे में बदल जाता है, इसका पता भी नहीं चलता। इस आदत…

मोबाइल की ओवरयूज से बढ़ रहा मानसिक दबाव, डॉक्टरों ने दी स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह

लगातार मोबाइल चलाना और देर रात तक स्क्रीन देखना क्यों बन रहा है दिमाग के लिए खतरा? विशेषज्ञों ने बताया मानसिक थकान, नींद और फोकस पर पड़ने वाला असर स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। काम, पढ़ाई, मनोरंजन, बैंकिंग, खरीदारी और सामाजिक संपर्क जैसे अधिकांश कार्य अब डिजिटल माध्यमों से पूरे होने लगे हैं। तकनीक ने जीवन को पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके बढ़ते उपयोग ने मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को लेकर नई चुनौतियां भी पैदा की हैं। आज अधिकांश लोगों…