पितृपक्ष में क्यों खास है उज्जैन का सिद्धवट? रामघाट से जुड़ी है भगवान राम के पिंडदान की मान्यता, जानें 2026 की सभी श्राद्ध तिथियां

पितृपक्ष शुरू होते ही देशभर में लोग अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण कर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। हिंदू धार्मिक परंपरा में इन दिनों को पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का समय माना जाता है। कई परिवार अपने घरों में ही श्राद्ध कर्म करते हैं, जबकि कुछ लोग धार्मिक और तीर्थ स्थलों पर जाकर पिंडदान और तर्पण की परंपरा निभाते हैं। मध्य प्रदेश का उज्जैन भी ऐसे प्रमुख धार्मिक स्थानों में गिना जाता है, जहां क्षिप्रा नदी के तट पर लंबे समय से पितृ कर्म किए जाने की परंपरा चली आ रही है। उज्जैन को आमतौर पर महाकाल…

पितृपक्ष 2026: गया जी में ही क्यों किया जाता है पिंडदान? जानिए पितरों के मोक्ष से जुड़ी धार्मिक मान्यता

पितृपक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों को समर्पित एक महत्वपूर्ण अवधि मानी जाती है। भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष के दौरान आने वाले इन 15 दिनों में लोग अपने दिवंगत परिजनों और पूर्वजों का स्मरण करते हैं। मान्यता है कि इस दौरान श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया गया श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान पितरों को संतुष्टि प्रदान करता है। यही वजह है कि पितृपक्ष के दौरान देशभर में लोग अपने पूर्वजों के निमित्त अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। हालांकि, पितरों के लिए किए जाने वाले कर्मकांडों में बिहार के गया धाम का विशेष स्थान माना जाता है। यहां पिंडदान करने के…