पितृ पक्ष में इन बातों का रखें ध्यान, मान्यता है कि पितरों की कृपा से घर में आती है सुख-समृद्धि

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता व्यक्त करने की महत्वपूर्ण अवधि माना जाता है। यह समय केवल श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार की परंपराओं और अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने से भी जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान किए गए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि पूर्वजों की कृपा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने में सहायक होती है। यही वजह है कि इस अवधि में…

पितृपक्ष में क्यों खास है उज्जैन का सिद्धवट? रामघाट से जुड़ी है भगवान राम के पिंडदान की मान्यता, जानें 2026 की सभी श्राद्ध तिथियां

पितृपक्ष शुरू होते ही देशभर में लोग अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण कर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। हिंदू धार्मिक परंपरा में इन दिनों को पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का समय माना जाता है। कई परिवार अपने घरों में ही श्राद्ध कर्म करते हैं, जबकि कुछ लोग धार्मिक और तीर्थ स्थलों पर जाकर पिंडदान और तर्पण की परंपरा निभाते हैं। मध्य प्रदेश का उज्जैन भी ऐसे प्रमुख धार्मिक स्थानों में गिना जाता है, जहां क्षिप्रा नदी के तट पर लंबे समय से पितृ कर्म किए जाने की परंपरा चली आ रही है। उज्जैन को आमतौर पर महाकाल…

पितृपक्ष आज से शुरू, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या: जानें 16 दिनों की श्राद्ध तिथियां, तर्पण और पिंडदान के नियम

पितृपक्ष 2026 की शुरुआत हो चुकी है। भाद्रपद मास की पूर्णिमा के बाद आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से श्राद्ध पक्ष की शुरुआत मानी जाती है। इस बार 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा है, जबकि पूर्वजों के लिए पहला नियमित श्राद्ध 27 सितंबर को प्रतिपदा तिथि पर किया जाएगा। पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। सनातन परंपरा में पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और स्मरण का समय माना जाता है। इन दिनों परिवार अपने दिवंगत सदस्यों की आत्मिक शांति और तृप्ति के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान जैसे कर्म करते हैं। धार्मिक…

इस दिन से शुरू होगा पितृपक्ष, जानिए क्यों खास माने जाते हैं ये 16 दिन

हिंदू धार्मिक परंपरा में पितृपक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का विशेष समय माना जाता है। यह अवधि उन दिवंगत परिजनों को याद करने से जुड़ी है, जिनके प्रति परिवार अपनी कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करता है। पितृपक्ष के दौरान लोग अपनी पारिवारिक परंपरा और मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, दान और भोजन कराने जैसे कर्म करते हैं। हर साल पितृपक्ष की तिथियां हिंदू पंचांग के आधार पर निर्धारित होती हैं। वर्ष 2026 में भी इस अवधि को लेकर लोगों के बीच तारीखों को जानने की उत्सुकता है। कई लोग यह समझना चाहते हैं…