सावन में त्र्यंबकेश्वर में क्यों उमड़ती है कालसर्प दोष पूजा कराने वालों की भीड़? जानिए धार्मिक मान्यता, पूजा विधि और जरूरी नियम

सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे शुभ और पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान देश के प्रसिद्ध शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग भी इन्हीं प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है, जहां हर साल लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हालांकि इस मंदिर की पहचान केवल बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल होने तक सीमित नहीं है, बल्कि कालसर्प दोष शांति पूजा, राहु-केतु दोष निवारण, नारायण नागबली और पितृ दोष से जुड़े विशेष वैदिक अनुष्ठानों के कारण भी इसकी अलग धार्मिक प्रतिष्ठा है। विशेष रूप…

सावन की कालाष्टमी कब मनाई जाएगी? 5 या 6 अगस्त को लेकर भ्रम दूर, जानें पूजा का महत्व

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। हिंदू धर्म में इस पूरे महीने को भक्ति, उपवास और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है। सावन के प्रत्येक सोमवार के साथ-साथ इस महीने में आने वाली विभिन्न तिथियों और पर्वों का भी अपना अलग धार्मिक महत्व है। इन्हीं महत्वपूर्ण अवसरों में सावन मास की कालाष्टमी भी शामिल है। यह पर्व भगवान शिव के उग्र, रक्षक और न्यायकारी स्वरूप माने जाने वाले भगवान काल भैरव को समर्पित होता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। हालांकि, सावन महीने…

सावन में क्यों निकलती है कांवड़ यात्रा? जानिए इसकी पौराणिक कथा, धार्मिक महत्व और जलाभिषेक की पूरी परंपरा

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। जैसे ही इस महीने की शुरुआत होती है, देश के अलग-अलग हिस्सों में शिवभक्तों की आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। लाखों कांवड़िये पवित्र नदियों से जल भरकर कई किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं और अपने आराध्य भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। हर साल यह दृश्य करोड़ों लोगों की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक बन जाता है। हालांकि अधिकांश लोग कांवड़ यात्रा में शामिल होते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को यह जानकारी होती है कि आखिर इस परंपरा की शुरुआत…

सावन का पावन आरंभ आज: जानिए शिव आराधना की संपूर्ण विधि, शुभ समय, मंत्र, भोग और धार्मिक मान्यता

भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे पवित्र माने जाने वाले सावन मास का शुभारंभ आज, 30 जुलाई 2026, गुरुवार से हो गया है। यह पावन महीना 28 अगस्त 2026, शुक्रवार तक चलेगा। सावन की शुरुआत होते ही देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। सुबह से ही मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और शिव मंत्रों के जाप का सिलसिला जारी है। श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद पाने के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं। वहीं, बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में भी शिवलिंग की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं।…

सावन में कांवड़ यात्रा पर नहीं जा पा रहे हैं? घर बैठे भी पा सकते हैं शिव कृपा, जानिए पूजा का संपूर्ण तरीका

सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र और शुभ समय माना जाता है। इस पूरे माह में देशभर के शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख, सुल्तानगंज, देवघर और अन्य पवित्र तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर पैदल कांवड़ यात्रा करते हैं और अपने-अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि संयम, तपस्या, सेवा, अनुशासन और अटूट श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है। कांवड़ यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालु कई दिनों तक कठिन मार्ग…

सावन 2026 में प्रदोष व्रत की दो अहम तिथियां, जानिए पूजा का सही समय, महत्व और व्रत से जुड़े नियम

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और फलदायी माना जाता है। इस पूरे माह में शिव भक्त विशेष श्रद्धा के साथ भोलेनाथ का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और व्रत-उपवास करते हैं। मान्यता है कि इस महीने में श्रद्धापूर्वक की गई शिव पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। सावन के दौरान आने वाले प्रत्येक सोमवार का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन इसके साथ ही प्रदोष व्रत भी अत्यंत शुभ माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक माह दो बार त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है…

कांवड़ यात्रा पर निकलने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, छोटी सी चूक भी कर सकती है आपकी तपस्या अधूरी

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इसी दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं और पवित्र नदियों से जल लाकर अपने आराध्य भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री, गोमुख और अन्य तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने शहरों और गांवों की ओर पैदल यात्रा करते हैं। यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि संयम, अनुशासन, श्रद्धा और तपस्या का प्रतीक भी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक होता…

सावन में इन दिव्य मंदिरों की यात्रा बना सकती है आपका मानसून यादगार, प्रकृति और आस्था का अनोखा संगम

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। जैसे ही वर्षा ऋतु की शुरुआत होती है, देशभर के शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है। सोमवार के व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और कांवड़ यात्रा के बीच शिव मंदिरों का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। हालांकि भारत में हजारों प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिर हैं, लेकिन कुछ ऐसे धाम भी हैं जो बारिश के मौसम में अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण किसी स्वर्ग से कम नहीं दिखाई देते। चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ों को ढकते बादल, झरनों की आवाज और मंदिरों की…

सावन 2026: इस दिन से शुरू होगा भगवान शिव का प्रिय महीना, जानें चारों सावन सोमवार की तिथियां, व्रत का महत्व और संपूर्ण पूजा-विधि

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और शुभ समय माना जाता है। इस पूरे मास में देशभर के शिव मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं और श्रद्धालु बड़ी संख्या में भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि सावन के दौरान सच्चे मन से की गई शिव भक्ति व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आती है। यही कारण है कि इस महीने का इंतजार शिव भक्त पूरे वर्ष करते हैं। सावन के आते ही मंदिरों में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और कांवड़ यात्रा जैसी…

इस तारीख से शुरू होगी कांवड़ यात्रा, जानिए कब भरेंगे गंगाजल और कब होगा जलाभिषेक

भगवान शिव के भक्त पूरे वर्ष जिस पवित्र महीने का सबसे अधिक इंतजार करते हैं, वह है श्रावण मास, जिसे आमतौर पर सावन भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस महीने का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि सावन के दौरान भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक, व्रत और गंगाजल से जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी कारण इस पूरे महीने देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। सावन की शुरुआत के साथ ही उत्तर भारत में सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल कांवड़ यात्रा भी प्रारंभ हो…