सावन के पहले सोमवार पर भोलेनाथ की पूजा कैसे करें? जानें जलाभिषेक की सही विधि, जरूरी सामग्री और व्रत का महत्व

भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना शुरू होते ही देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने लगती है। इस वर्ष 3 अगस्त को सावन का पहला सोमवार पड़ रहा है, जिसे शिव आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव का जलाभिषेक, व्रत और पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। यही कारण है कि सावन के सोमवार का इंतजार पूरे वर्ष श्रद्धालु बड़ी आस्था के साथ करते हैं। अगर आप भी इस…

सावन में कांवड़ यात्रा पर नहीं जा पा रहे हैं? घर बैठे भी पा सकते हैं शिव कृपा, जानिए पूजा का संपूर्ण तरीका

सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र और शुभ समय माना जाता है। इस पूरे माह में देशभर के शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख, सुल्तानगंज, देवघर और अन्य पवित्र तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर पैदल कांवड़ यात्रा करते हैं और अपने-अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि संयम, तपस्या, सेवा, अनुशासन और अटूट श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है। कांवड़ यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालु कई दिनों तक कठिन मार्ग…

सावन 2026: इस दिन से शुरू होगा भगवान शिव का प्रिय महीना, जानें चारों सावन सोमवार की तिथियां, व्रत का महत्व और संपूर्ण पूजा-विधि

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और शुभ समय माना जाता है। इस पूरे मास में देशभर के शिव मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं और श्रद्धालु बड़ी संख्या में भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि सावन के दौरान सच्चे मन से की गई शिव भक्ति व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आती है। यही कारण है कि इस महीने का इंतजार शिव भक्त पूरे वर्ष करते हैं। सावन के आते ही मंदिरों में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और कांवड़ यात्रा जैसी…

अधिक मास का विशेष शुक्र प्रदोष व्रत आज, शिव-आराधना से मिलेगा पुण्य फल; जानें शुभ समय, पूजा नियम और महत्वपूर्ण मंत्र

सनातन परंपरा में भगवान शिव की उपासना के लिए प्रदोष व्रत का विशेष स्थान माना गया है। प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाने वाला यह व्रत भक्तों को आध्यात्मिक शांति और शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है। जब त्रयोदशी शुक्रवार के दिन पड़ती है, तब इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। वर्ष 2026 में अधिक मास के दौरान आने वाला यह व्रत कई शुभ योगों के कारण और भी खास माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार अधिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून 2026 को सायं 7 बजकर 36 मिनट…