भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन बनाने वाली फैक्ट्री का 71 साल का सफर: साधारण कोच से वंदे भारत और अब ग्रीन रेल तक की कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली यह ट्रेन भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करती है, जहां हाइड्रोजन ईंधन से रेल संचालन संभव हो चुका है। जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका के बाद अब भारत भी इस तकनीक का उपयोग करने वाला पांचवां देश बन गया है। इस उपलब्धि के पीछे जिस संस्थान की सबसे बड़ी भूमिका रही है, वह है चेन्नई के पेरम्बूर स्थित इंटीग्रल कोच…

हाइड्रोजन ट्रेन बनाम वंदे भारत: क्या भविष्य में बदलेगा भारतीय रेलवे का चेहरा? जानिए दोनों ट्रेनों की तकनीक, उद्देश्य और बड़ा अंतर

भारतीय रेलवे लगातार आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी सेवाओं को नई दिशा दे रहा है। हाई-स्पीड, सेमी हाई-स्पीड और इलेक्ट्रिक ट्रेनों के बाद अब देश ने हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक की ओर भी कदम बढ़ा दिया है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर इस नई तकनीक की शुरुआत की। इसके साथ ही रेलवे के भविष्य को लेकर एक नई चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर यह ट्रेन क्या है, कैसे काम करती है और क्या आने वाले समय में यह वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों की जगह ले सकती…