अमृतसर सूरमाज ने रचा इतिहास, लुधियाना लायंस को हराकर पहली बार जीती शेर-ए-पंजाब टी20 ट्रॉफी

अमृतसर सूरमाज ने रचा इतिहास, लुधियाना लायंस को हराकर पहली बार जीती शेर-ए-पंजाब टी20 ट्रॉफी

शेर-ए-पंजाब टी20 लीग के पहले ही सीजन में अमृतसर सूरमाज ने ट्रॉफी अपने नाम कर ली। फाइनल मुकाबले में टीम ने लुधियाना लायंस को 8 विकेट से हराकर शानदार अंदाज में खिताब पर कब्जा जमाया। अमृतसर की इस जीत की खास बात यह रही कि टीम के नियमित कप्तान अभिषेक शर्मा फाइनल में मैदान पर मौजूद नहीं थे। वह राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारियों के चलते मुकाबले का हिस्सा नहीं बन सके। उनकी अनुपस्थिति में नमन धीर ने टीम की कमान संभाली और खिलाड़ियों ने कप्तान के भरोसे पर खरा उतरते हुए टीम को चैंपियन बना दिया।

अमृतसर सूरमाज ने 143 रनों के लक्ष्य को बेहद आसानी से हासिल कर लिया। टीम ने 16.4 ओवर में केवल दो विकेट गंवाकर 144 रन बनाए और मुकाबला अपने नाम कर लिया। लक्ष्य का पीछा करते हुए अमृतसर के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही लुधियाना के गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। सहज धवन और राहुल कुमार ने जिस तरह से पारी को संभाला, उससे लुधियाना की टीम वापसी का मौका तलाशती रह गई।

धवन की तूफानी पारी ने बदला मैच का रुख

अमृतसर की जीत में सहज धवन सबसे बड़े नायकों में शामिल रहे। उन्होंने दबाव वाले फाइनल में जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी करते हुए 63 रनों की बेहतरीन पारी खेली। उनकी पारी में सात चौके और एक छक्का शामिल रहा। धवन ने शुरुआत में संभलकर बल्लेबाजी की और फिर खराब गेंदों को बाउंड्री के बाहर भेजते हुए रनगति को तेज कर दिया।

उनकी बल्लेबाजी ने अमृतसर के लक्ष्य का पीछा करने की नींव मजबूत कर दी। शुरुआती विकेट गिरने के बाद भी धवन ने रन बनाने की रफ्तार कम नहीं होने दी। उन्होंने विपक्षी गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा और टीम को लक्ष्य के काफी करीब पहुंचा दिया।

धवन के आउट होने के बाद भी अमृतसर की पारी पर कोई खास असर नहीं पड़ा। राहुल कुमार ने मोर्चा संभालते हुए शानदार अंदाज में बल्लेबाजी की और अंत तक नाबाद रहे। राहुल ने 30 गेंदों में 42 रन बनाए। उनकी पारी में दो चौके और दो छक्के शामिल रहे। उन्होंने धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया और टीम को जीत की मंजिल तक पहुंचाया।

कप्तान नमन धीर ने भी दिखाया दम

फाइनल में अमृतसर की कप्तानी कर रहे नमन धीर ने भी बल्ले से महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने महज 12 गेंदों का सामना करते हुए 29 रन ठोक दिए। नमन की पारी में चार छक्के शामिल थे। उनकी तेजतर्रार बल्लेबाजी ने लुधियाना के गेंदबाजों पर दबाव और बढ़ा दिया।

नमन ने आते ही बड़े शॉट खेलने शुरू कर दिए। उनके आक्रामक अंदाज का फायदा टीम को रनगति के रूप में मिला और लक्ष्य और भी आसान हो गया। यही वजह रही कि अमृतसर ने 20 ओवर तक इंतजार करने के बजाय 16.4 ओवर में ही मुकाबला खत्म कर दिया।

पहले गेंदबाजी का फैसला रहा सही

फाइनल में टॉस अमृतसर सूरमाज के पक्ष में गया। टीम ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। कप्तान नमन धीर का यह निर्णय काफी हद तक सही साबित हुआ। लुधियाना लायंस के बल्लेबाज शुरुआत से ही खुलकर नहीं खेल सके और टीम को लगातार अंतराल पर झटके लगते रहे।

लुधियाना की पारी में अभिजीत गर्ग ने सबसे ज्यादा संघर्ष किया। उन्होंने 32 गेंदों पर 37 रन बनाए और पारी को संभालने की कोशिश की। हालांकि, दूसरे छोर से उन्हें पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पाया। अमृतसर के गेंदबाजों ने लुधियाना के बल्लेबाजों को बड़े शॉट खेलने की ज्यादा गुंजाइश नहीं दी।

नतीजा यह रहा कि लुधियाना लायंस की पूरी टीम 20 ओवर में 142 रन ही बना सकी। फाइनल जैसे अहम मुकाबले में यह स्कोर अमृतसर की मजबूत बल्लेबाजी के सामने पर्याप्त साबित नहीं हुआ।

मयंक मार्कंडे ने गेंद से बरपाया कहर

अमृतसर के गेंदबाजी विभाग में मयंक मार्कंडे का प्रदर्शन बेहद प्रभावी रहा। उन्होंने चार ओवर के अपने स्पेल में केवल 17 रन खर्च किए और तीन महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। उनकी कसी हुई गेंदबाजी ने लुधियाना के बल्लेबाजों को खुलकर रन बनाने से रोके रखा।

मार्कंडे ने अपनी गेंदबाजी से लुधियाना की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। उन्होंने अहम मौकों पर विकेट निकालकर विपक्षी टीम को बड़े स्कोर की ओर बढ़ने से रोक दिया। उनके अलावा नमन धीर और जौहल ने भी एक-एक विकेट हासिल किया।

अमृतसर के गेंदबाजों ने मिलकर लुधियाना को 142 रन तक सीमित कर दिया। फाइनल में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम के लिए यह स्कोर चुनौतीपूर्ण नहीं था, खासकर तब जब अमृतसर की बल्लेबाजी लाइनअप में बड़े शॉट लगाने वाले खिलाड़ी मौजूद थे।

लक्ष्य का पीछा करते हुए नहीं दिखा ज्यादा दबाव

143 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी अमृतसर सूरमाज की शुरुआत पूरी तरह परफेक्ट नहीं रही। टीम ने शुरुआती दौर में एक विकेट गंवा दिया। हालांकि, इसके बाद बल्लेबाजों ने स्थिति को संभाल लिया। सहज धवन ने एक छोर संभाला, जबकि उनके साथियों ने रनगति बनाए रखने की कोशिश की।

धीरे-धीरे अमृतसर की टीम मुकाबले पर पूरी तरह हावी होती चली गई। धवन की शानदार पारी और बाद में राहुल कुमार की नाबाद पारी ने लुधियाना के गेंदबाजों को लगातार परेशानी में रखा। नमन धीर के कुछ बड़े छक्कों ने मुकाबले का रोमांच जरूर बढ़ाया, लेकिन अमृतसर की जीत अब लगभग तय नजर आने लगी थी।

आखिरकार 16.4 ओवर में अमृतसर ने 144 रन बनाकर लक्ष्य हासिल कर लिया। टीम ने सिर्फ दो विकेट गंवाए। इस तरह उसे फाइनल में 8 विकेट से शानदार जीत मिली और लीग के पहले सीजन की ट्रॉफी भी उसके नाम हो गई।

कप्तान अभिषेक शर्मा फाइनल में रहे बाहर

अमृतसर सूरमाज की इस खिताबी जीत को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि टीम के नियमित कप्तान अभिषेक शर्मा फाइनल में नहीं खेल सके। अभिषेक उस समय भारतीय टीम के साथ अंतरराष्ट्रीय ड्यूटी पर थे। इसी वजह से उन्हें शेर-ए-पंजाब टी20 लीग के निर्णायक मुकाबले से बाहर रहना पड़ा।

दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन अमृतसर सूरमाज फाइनल खेल रहा था, उसी दिन भारतीय टीम का अफगानिस्तान के खिलाफ पहला टी20 मुकाबला भी हुआ। इस मैच में अभिषेक शर्मा ने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया और 82 रनों की प्रभावशाली पारी खेली।

यानी एक तरफ उनकी फ्रेंचाइजी टीम पंजाब की टी20 लीग में खिताब के लिए मैदान पर थी, तो दूसरी तरफ अभिषेक भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में अपना योगदान दे रहे थे। वह खुद फाइनल में टीम के साथ मैदान पर नहीं उतर सके, लेकिन उनकी कप्तानी वाली अमृतसर सूरमाज ने ट्रॉफी जीतकर सीजन का शानदार अंत किया।

अभिषेक की गैरमौजूदगी में नमन ने संभाली जिम्मेदारी

अभिषेक की अनुपस्थिति में टीम की जिम्मेदारी नमन धीर को सौंपी गई। नमन ने कप्तानी के साथ बल्लेबाजी में भी प्रभाव छोड़ा। फाइनल में 12 गेंदों पर 29 रन की उनकी पारी ने टीम की जीत को आसान बनाने में अहम भूमिका निभाई।

कप्तान के तौर पर नमन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया और उनके गेंदबाजों ने लुधियाना को 142 रन पर रोक दिया। इसके बाद बल्लेबाजों ने लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लिया। इस तरह नमन के लिए बतौर कार्यवाहक कप्तान यह फाइनल यादगार बन गया।

पहले ही सीजन में ट्रॉफी पर कब्जा

शेर-ए-पंजाब टी20 लीग के उद्घाटन सत्र में अमृतसर सूरमाज का चैंपियन बनना टीम के लिए बड़ी उपलब्धि है। टूर्नामेंट के पहले ही संस्करण में ट्रॉफी जीतकर अमृतसर ने अपनी मजबूत दावेदारी साबित कर दी है।

फाइनल में टीम का प्रदर्शन तीनों विभागों में संतुलित रहा। गेंदबाजों ने लुधियाना को 142 रन तक सीमित किया, जबकि बल्लेबाजों ने लक्ष्य का पीछा करते हुए सिर्फ दो विकेट गंवाए। मयंक मार्कंडे की कसी हुई गेंदबाजी, सहज धवन की अर्धशतकीय पारी, राहुल कुमार की नाबाद पारी और नमन धीर के आक्रामक 29 रन ने टीम की जीत की कहानी लिखी।

अमृतसर सूरमाज ने इस तरह अपने पहले ही सीजन को खिताब के साथ खत्म किया। वहीं लुधियाना लायंस को फाइनल में हार के साथ उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा। अमृतसर के लिए यह जीत इसलिए भी यादगार रहेगी क्योंकि नियमित कप्तान अभिषेक शर्मा मैदान से बाहर होने के बावजूद टीम के अभियान का हिस्सा रहे और उनकी गैरमौजूदगी में टीम ने नमन धीर की अगुवाई में ट्रॉफी अपने नाम कर ली।