अमेरिकी सीनेट में ईरान युद्ध रोकने का प्रस्ताव गिरा, ट्रंप के साथ खड़े रहे रिपब्लिकन

अमेरिकी सीनेट में ईरान युद्ध रोकने का प्रस्ताव गिरा, ट्रंप के साथ खड़े रहे रिपब्लिकन

अमेरिका में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर रोक लगाने की कोशिश नाकाम हो गई है। अमेरिकी सीनेट ने उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसका मकसद राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों पर लगाम लगाना था। यह प्रस्ताव 47 के मुकाबले 53 वोटों से गिर गया। इस वोटिंग के बाद साफ हो गया कि ईरान मुद्दे पर अमेरिकी राजनीति गहराई से पार्टी लाइनों में बंटी हुई है। रिपब्लिकन सांसदों ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के रुख का समर्थन किया, जबकि डेमोक्रेट्स ने इस सैन्य अभियान पर सवाल उठाए।


क्या था वॉर पावर्स रेजोल्यूशन?

जिस बिल को सीनेट में पेश किया गया था, उसे वॉर पावर्स रेजोल्यूशन कहा जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अमेरिका अगर ईरान के खिलाफ कोई भी बड़ी सैन्य कार्रवाई करे, तो उससे पहले कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य हो। हालांकि United States Senate में यह प्रस्ताव जरूरी समर्थन जुटाने में नाकाम रहा। यह 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद इस मुद्दे पर पहली औपचारिक वोटिंग थी।


पार्टी लाइन पर बंटे सांसद

वोटिंग के दौरान ज्यादातर डेमोक्रेट सांसद प्रस्ताव के समर्थन में दिखे। उनका तर्क था कि बिना कांग्रेस की सहमति के युद्ध छेड़ना संविधान की भावना के खिलाफ है। वहीं रिपब्लिकन पार्टी ने राष्ट्रपति के सैन्य अधिकारों का बचाव किया। इस बीच कुछ अपवाद भी दिखे, केंटकी के रिपब्लिकन सीनेटर Rand Paul ने बिल के पक्ष में वोट दिया, जबकि पेंसिलवेनिया से डेमोक्रेट सीनेटर John Fetterman ने इसके खिलाफ मतदान किया।


कांग्रेस को साधने में जुटा ट्रंप प्रशासन

ईरान पर अचानक किए गए हमलों के बाद ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस को भरोसे में लेने की कोशिशें तेज कर दी हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी इस हफ्ते कैपिटल हिल में लगातार मौजूद रहे, ताकि सांसदों को यह विश्वास दिलाया जा सके कि हालात नियंत्रण में हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने संकेत दिए हैं कि यह युद्ध आठ हफ्तों तक खिंच सकता है, जबकि इससे पहले इसे चार हफ्तों में खत्म होने वाला अभियान बताया गया था। जमीनी हमलों को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।


डेमोक्रेट्स का आरोप: बेवजह की जंग

डेमोक्रेटिक सांसदों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन देश को एक अनावश्यक और खतरनाक युद्ध में धकेल रहा है। उनके मुताबिक, बिना ठोस रणनीति और कांग्रेस की मंजूरी के सैन्य कार्रवाई अमेरिका के लिए भारी पड़ सकती है।


ईरान में अमेरिका–इजरायल का सैन्य अभियान

28 फरवरी को अमेरिका और Israel ने मिलकर Iran पर हवाई हमले शुरू किए। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में भीषण बमबारी की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में 1,000 से अधिक लोगों की मौत हुई, जिनमें देश के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने की खबरें भी सामने आईं। स्कूलों पर हुए हमलों में बड़ी संख्या में बच्चों की जान जाने की बात भी कही जा रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।


परमाणु हथियारों को लेकर विवाद

अमेरिका और इजरायल का दावा है कि ईरान परमाणु बम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी आधार पर पहले भी सैन्य कार्रवाई की जा चुकी है। दूसरी ओर, ईरान लगातार इस आरोप से इनकार करता रहा है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु निगरानी एजेंसियों की रिपोर्ट्स में भी अब तक ईरान के परमाणु बम बनाने के पुख्ता सबूत सामने नहीं आए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ अमेरिकी राजनीति में तनाव बढ़ाया है, बल्कि मध्य-पूर्व में हालात और ज्यादा अस्थिर कर दिए हैं।