फ्रांस के नीस शहर में भारत और फ्रांस के रिश्तों को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), व्यापार, शिक्षा, अंतरिक्ष और आर्थिक सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने भविष्य की साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प जताया।
बैठक के दौरान दोनों देशों ने कुल 13 महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनाई। इन समझौतों का उद्देश्य केवल मौजूदा सहयोग को बढ़ाना नहीं बल्कि आने वाले वर्षों में रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा देना भी है। भारत और फ्रांस ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए एक उच्चस्तरीय तंत्र और इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग शुरू करने का निर्णय लिया गया।
नीस में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम भी इस दौरे का प्रमुख आकर्षण रहा। इस मंच पर भारत, फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप्स, निवेशकों और वेंचर कैपिटल फंड्स ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने संयुक्त रूप से किया। इसका उद्देश्य भारतीय नवाचार क्षमता को वैश्विक निवेश और तकनीकी सहयोग से जोड़ना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस के संबंध केवल व्यापारिक हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरा विश्वास और साझा दृष्टिकोण है। उन्होंने कहा कि दोनों राष्ट्र वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए मिलकर काम कर रहे हैं और भविष्य में यह साझेदारी और मजबूत होगी।
प्रधानमंत्री ने भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारत आज दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप हब में से एक बन चुका है, जहां दो लाख से अधिक स्टार्टअप विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार भारतीय युवा नवाचार के जरिए न केवल घरेलू समस्याओं का समाधान कर रहे हैं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष तकनीक जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां दुनिया की दिशा तय करेंगी। भारत इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और फ्रांस के साथ सहयोग इस विकास को और गति देगा।
दूसरी ओर, राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत की तकनीकी क्षमता और नवाचार शक्ति की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक इनोवेशन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। उनके अनुसार हर वर्ष भारत जितने इंजीनियर तैयार करता है, उनकी संख्या यूरोप और अमेरिका के संयुक्त आंकड़े के बराबर है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया यह नहीं पूछ रही कि भारत नवाचार कर सकता है या नहीं, बल्कि यह जानना चाहती है कि भारत के साथ मिलकर नवाचार कैसे किया जाए।
मैक्रों ने AI के क्षेत्र में भी भारत और फ्रांस की समान सोच का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कुछ देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता को सीमित और नियंत्रित ढांचे में विकसित करना चाहते हैं, जबकि भारत और फ्रांस खुले, सहयोगी और बहुभाषी AI मॉडल के पक्षधर हैं। दोनों देश मिलकर ऐसे मॉडल विकसित करने की दिशा में काम कर सकते हैं जो दुनिया के अधिक से अधिक लोगों के लिए उपयोगी हों।
बैठक के दौरान रक्षा सहयोग भी चर्चा के केंद्र में रहा। विशेष रूप से भारतीय वायुसेना के लिए प्रस्तावित 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर दोनों पक्षों के बीच विस्तृत बातचीत हुई। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि इस विषय पर चर्चा सकारात्मक रही और दोनों देशों के बीच बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है।
भारत इस रक्षा सौदे को केवल विमान खरीद तक सीमित नहीं रखना चाहता। सरकार की प्राथमिकता है कि विमान निर्माण, डिजाइनिंग और तकनीकी विकास में भारतीय कंपनियों की भी भागीदारी हो। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत भारत तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन पर विशेष जोर दे रहा है।
करीब सवा तीन लाख करोड़ रुपये मूल्य के इस संभावित सौदे में भारत चाहता है कि विमान निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकों का ट्रांसफर भी किया जाए। इसके अलावा विमानों में भारतीय जरूरतों के अनुरूप हथियार प्रणालियों और मिसाइलों के एकीकरण के लिए आवश्यक तकनीकी अधिकारों पर भी चर्चा जारी है। हालांकि इस डील को अभी अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत और फ्रांस की साझेदारी विशेष महत्व रखती है। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर AI विकास मुख्य रूप से दो मॉडल्स के इर्द-गिर्द देखा जाता है। एक मॉडल निजी कंपनियों द्वारा संचालित अमेरिकी व्यवस्था है, जबकि दूसरा सरकारी नियंत्रण पर आधारित चीनी मॉडल माना जाता है। भारत और फ्रांस अब एक ऐसे ओपन-सोर्स और सहयोगी AI मॉडल पर विचार कर रहे हैं, जो पारदर्शिता, बहुभाषिकता और वैश्विक भागीदारी को बढ़ावा दे सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक समय था जब दुनिया भारत को केवल नई तकनीकों को अपनाने वाले देश के रूप में देखती थी, लेकिन आज भारत तकनीकी समाधान उपलब्ध कराने वाले देशों में शामिल हो चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय प्रतिभा और फ्रांसीसी विशेषज्ञता मिलकर नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।
दौरे के दौरान दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत गर्मजोशी भी देखने को मिली। ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति मैक्रों प्रधानमंत्री मोदी को नीस के निकट स्थित ऐतिहासिक स्थल विला केरीलोस लेकर गए। यह स्थान फ्रांस की प्रमुख सांस्कृतिक धरोहरों में गिना जाता है। यहां दोनों नेताओं ने कुछ समय साथ बिताया और मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक सेल्फी भी ली, जिसे बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया गया।
ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। मैक्रों ने कहा कि नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और फ्रांस के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। विशेष रूप से स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) जैसी आधुनिक परमाणु तकनीकों में दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का यह फ्रांस दौरा 13 जून से शुरू हुआ था, जिसके बाद उनका कार्यक्रम स्लोवाकिया में भी निर्धारित है। छह दिवसीय इस यात्रा का एक अहम पड़ाव 17 जून को फ्रांस के एवियान में होने वाला G7 शिखर सम्मेलन होगा। इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कई वैश्विक नेताओं से मुलाकात होने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार, जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच भी द्विपक्षीय बैठक हो सकती है। इस बैठक में व्यापारिक समझौतों, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और रणनीतिक सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
नीस में हुई मोदी-मैक्रों वार्ता ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत और फ्रांस आने वाले वर्षों में रक्षा, तकनीक, व्यापार, ऊर्जा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में अपने संबंधों को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों देशों की यह साझेदारी न केवल उनके आपसी हितों को मजबूत करेगी बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नई रणनीतिक संभावनाएं पैदा कर सकती है।



