अंतरिक्ष में लंबे समय से भटक रहा स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट का एक निष्क्रिय हिस्सा बुधवार को चंद्रमा से टकराने वाला है। यह टक्कर किसी नियोजित मिशन का हिस्सा नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष में छोड़े गए रॉकेट स्टेज की अनियंत्रित यात्रा का परिणाम है। वैज्ञानिकों के अनुसार भारतीय समयानुसार दोपहर करीब 12:05 बजे यह टक्कर चंद्रमा की सतह पर होगी। इस घटना से वहां एक नया क्रेटर बनेगा और बड़ी मात्रा में चंद्र धूल अंतरिक्ष में उछलेगी। हालांकि पृथ्वी से इस दृश्य को साफ-साफ देख पाना आसान नहीं होगा, फिर भी दुनिया भर के खगोलविद और अंतरिक्ष प्रेमी इस पल पर नजर बनाए हुए हैं।
यह रॉकेट स्टेज जनवरी 2025 में लॉन्च किए गए एक मिशन का हिस्सा था, जिसने दो निजी लूनर लैंडर्स को चंद्रमा की दिशा में भेजा था। मिशन पूरा होने के बाद इसका ऊपरी हिस्सा अंतरिक्ष में अनियंत्रित अवस्था में घूमता रहा और अंततः उसकी कक्षा ऐसी बनी कि वह सीधे चंद्रमा की ओर बढ़ने लगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसे पहले ही किसी सुरक्षित सौर कक्षा में भेज दिया जाता तो इस टक्कर से बचा जा सकता था।
जानकारी के मुताबिक टक्कर चंद्रमा के पश्चिमी हिस्से में स्थित आइंस्टीन क्रेटर के आसपास होने की संभावना है। यह इलाका पृथ्वी से सामान्य परिस्थितियों में आसानी से दिखाई नहीं देता, लेकिन जिस समय टक्कर होगी उस दौरान सूर्य का प्रकाश उस क्षेत्र पर पड़ रहा होगा। इसी वजह से टक्कर के बाद उठने वाली धूल कुछ समय के लिए सूर्य की रोशनी को परावर्तित कर सकती है। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी चमक बहुत कम होगी और आम लोग इसे बिना विशेष उपकरणों के नहीं देख पाएंगे।
रॉकेट का यह हिस्सा करीब 12 मीटर लंबा और लगभग 4 से 4.5 टन वजनी बताया गया है। अनुमान है कि यह लगभग 8,700 किलोमीटर प्रति घंटे यानी करीब 5,400 मील प्रति घंटे की गति से चंद्रमा की सतह से टकराएगा। इतनी तेज रफ्तार से होने वाली इस भिड़ंत में लगभग तीन टन टीएनटी विस्फोट के बराबर ऊर्जा निकलेगी। यही ऊर्जा चंद्रमा की सतह पर एक नया गड्ढा बनाने और बड़ी मात्रा में धूल उड़ाने के लिए पर्याप्त होगी।
वैज्ञानिकों के अनुसार इस टक्कर से बनने वाला क्रेटर लगभग 27 मीटर चौड़ा और करीब 5 मीटर गहरा हो सकता है। यह आकार पृथ्वी से दिखाई देने के लिए बहुत छोटा होगा, लेकिन चंद्रमा की परिक्रमा कर रहे ऑर्बिटर्स इसकी तस्वीरें लेकर इसका विस्तृत अध्ययन करेंगे। अमेरिका का लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) और दक्षिण कोरिया का डानुरी लूनर ऑर्बिटर टक्कर से पहले और बाद की तस्वीरें जुटाने की तैयारी में हैं, जिससे वैज्ञानिक यह समझ सकेंगे कि चंद्रमा की सतह इस तरह की टक्करों पर कैसी प्रतिक्रिया देती है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि टक्कर के बाद उठने वाला धूल का गुबार लगभग 100 किलोमीटर तक ऊपर जा सकता है। चंद्रमा पर वातावरण न होने के कारण वहां धूल का व्यवहार पृथ्वी से बिल्कुल अलग होता है। हवा नहीं होने के कारण धूल केवल टक्कर से मिली ऊर्जा और चंद्रमा के कम गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में फैलती है। यही वजह है कि वैज्ञानिक इस पूरे घटनाक्रम का बारीकी से अध्ययन करना चाहते हैं।
स्पेस ट्रैकिंग विशेषज्ञ बिल ग्रे ने बताया कि यह घटना अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे की समस्या की भी याद दिलाती है। उनके अनुसार पृथ्वी और चंद्रमा के आसपास लगातार बढ़ रहे निष्क्रिय रॉकेट स्टेज और अन्य अंतरिक्ष कचरे पर भविष्य में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होगी। अभी यह टक्कर किसी प्रकार का बड़ा खतरा नहीं है, लेकिन यदि आने वाले वर्षों में चंद्रमा पर स्थायी बेस बनाए जाते हैं तो इस तरह का अनियंत्रित मलबा वहां मौजूद उपकरणों और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
रिटायर्ड एस्ट्रोफिजिसिस्ट जोनाथन मैकडॉवेल का कहना है कि वर्तमान घटना से तत्काल कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन यह भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है। उनका मानना है कि अंतरिक्ष अभियानों के दौरान उपयोग किए गए रॉकेट स्टेज को इस तरह छोड़ने के बजाय सुरक्षित कक्षाओं में भेजने की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए ताकि आगे ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
यह पहली बार नहीं है जब किसी निष्क्रिय रॉकेट का हिस्सा चंद्रमा से टकराने जा रहा हो। इससे पहले वर्ष 2022 में चीन के एक रॉकेट के अवशेष चंद्रमा की सतह से टकराए थे। उस घटना में दो अलग-अलग क्रेटर बने थे, जिसने वैज्ञानिकों का ध्यान काफी आकर्षित किया था। मौजूदा घटना भी शोधकर्ताओं को चंद्र सतह पर टक्कर के प्रभावों का अध्ययन करने का एक और अवसर देगी।
खगोलविदों के मुताबिक इस बार की टक्कर का स्थान अपेक्षाकृत अनुकूल है क्योंकि यह चंद्रमा के उस हिस्से में होगी जो पृथ्वी की ओर मुख किए रहता है। हालांकि टक्कर से उत्पन्न होने वाली चमक एक सेकंड से भी कम समय तक रहेगी और संभव है कि वह इतनी हल्की हो कि अधिकांश लोगों को दिखाई ही न दे। लेकिन उच्च क्षमता वाले टेलीस्कोप और वैज्ञानिक उपकरणों के जरिए टक्कर के बाद अंतरिक्ष में फैले मलबे और धूल का अध्ययन किया जा सकेगा।
लॉस अलामोस नेशनल लेबोरेटरी से जुड़े वैज्ञानिक बेंजामिन फर्नांडो और उनकी टीम इस घटना पर विशेष नजर रखे हुए हैं। उनके अनुसार डानुरी ऑर्बिटर टक्कर से कुछ मिनट पहले उस स्थान के बेहद करीब होगा, जिससे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आंकड़े जुटाने की संभावना बढ़ जाएगी। इन आंकड़ों से यह समझने में मदद मिलेगी कि चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानें तेज गति वाली वस्तुओं के प्रभाव में कैसे व्यवहार करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में जब इंसान लंबे समय तक चंद्रमा पर रहना शुरू करेगा, तब इस तरह के शोध बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। चंद्र सतह पर उड़ने वाली धूल अंतरिक्ष यानों, वैज्ञानिक उपकरणों और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए कितनी चुनौती बन सकती है, इसका आकलन भी इसी प्रकार की घटनाओं से किया जाएगा।
वर्तमान समय में अमेरिका और चीन दोनों चंद्रमा पर मानव मिशनों को लेकर तेजी से तैयारी कर रहे हैं। नासा का आर्टेमिस कार्यक्रम आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष यात्रियों को दोबारा चंद्रमा की सतह पर भेजने की योजना पर काम कर रहा है। दूसरी ओर एलन मस्क की स्पेसएक्स और जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन भी चंद्र लैंडर विकसित करने की दौड़ में शामिल हैं। इन अभियानों का उद्देश्य भविष्य में चंद्रमा पर वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ाना और वहां दीर्घकालिक मानव उपस्थिति की दिशा में कदम बढ़ाना है।
ऐसे में स्पेसएक्स रॉकेट स्टेज की यह अनियोजित टक्कर केवल एक खगोलीय घटना नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए सीख के रूप में भी देखा जा रहा है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस घटना से प्राप्त आंकड़े चंद्रमा पर होने वाली प्राकृतिक और कृत्रिम टक्करों को समझने में मदद करेंगे। साथ ही अंतरिक्ष मलबे के बेहतर प्रबंधन और भविष्य के सुरक्षित मिशनों की योजना बनाने में भी यह जानकारी उपयोगी साबित हो सकती है।



