गर्दन की गंभीर परेशानी से जूझ रहे सोनू निगम, दर्द और दवाओं के बीच किया परफॉर्म; संघर्ष से सुपरस्टार बनने तक का सफर

गर्दन की गंभीर परेशानी से जूझ रहे सोनू निगम, दर्द और दवाओं के बीच किया परफॉर्म; संघर्ष से सुपरस्टार बनने तक का सफर

देश के मशहूर गायक Sonu Nigam इन दिनों स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपने प्रशंसकों के साथ एक वीडियो साझा कर बताया कि उनकी गर्दन की नसों पर दबाव पड़ गया है, जिसके कारण उन्हें लगातार दर्द झेलना पड़ रहा है। इस समस्या की वजह से उन्हें कई चिकित्सकीय जांचों से गुजरना पड़ा और इलाज अभी भी जारी है।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में सोनू निगम ने बताया कि पिछले कई दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं चल रही है। उन्होंने कहा कि गर्दन की नस दबने के कारण उन्हें काफी तकलीफ हो रही है। डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने एमआरआई और सीटी स्कैन सहित कई मेडिकल टेस्ट कराए हैं। साथ ही फिजियोथेरेपी और दवाओं का भी सहारा लेना पड़ रहा है।

सोनू ने बताया कि दर्द कम करने के लिए उन्हें पेनकिलर दवाएं लेनी पड़ रही हैं, लेकिन इन दवाओं का असर उनकी आवाज पर भी पड़ रहा है। उनका गला पहले जैसा नहीं लग रहा और आवाज कुछ भारी महसूस हो रही है। इसके बावजूद उन्होंने अपने कार्यक्रमों को पूरा करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद मंच पर लौटना उनके लिए आसान नहीं था और इस स्थिति ने उनके आत्मविश्वास को भी प्रभावित किया है।

गायक ने वीडियो में यह भी कहा कि करीब एक महीने से अधिक समय बाद वह किसी बड़े मंच पर प्रस्तुति देने जा रहे थे। ऐसे में मन में घबराहट भी थी कि कहीं स्वास्थ्य संबंधी परेशानी उनके प्रदर्शन को प्रभावित न कर दे। हालांकि उन्होंने भगवान पर भरोसा जताते हुए कहा कि मंच पर जाने के बाद उन्हें हमेशा नई ऊर्जा मिलती है।

सोनू निगम की इस पोस्ट के सामने आने के बाद संगीत जगत के कई कलाकारों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रसिद्ध गायिका Kavita Seth, गायक Roop Kumar Rathod और Alisha Chinai समेत कई कलाकारों ने उनके लिए शुभकामनाएं भेजीं। प्रशंसकों ने भी सोशल मीडिया पर लगातार उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई और शीघ्र स्वस्थ होने की दुआ की।

आज करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करने वाले सोनू निगम का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। सफलता उन्हें आसानी से नहीं मिली। उनके पिता Agam Kumar Nigam स्वयं एक गायक थे, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। घर चलाने के लिए उन्हें विभिन्न कार्यक्रमों, शादियों और स्टेज शो में गाना पड़ता था।

इसी माहौल में सोनू निगम का बचपन बीता। संगीत उनके घर का हिस्सा था और बहुत छोटी उम्र से ही उनका झुकाव गायन की ओर होने लगा था। कहा जाता है कि जब वह महज चार साल के थे, तब एक कार्यक्रम के दौरान उनके पिता मंच पर प्रस्तुति दे रहे थे। अचानक सोनू ने भी गाने की इच्छा जताई। शुरुआत में परिवार को आश्चर्य हुआ, लेकिन लोगों के आग्रह पर उन्हें मंच पर मौका दिया गया।

पहली बार मंच पर पहुंचकर उन्होंने महान गायक Mohammed Rafi का लोकप्रिय गीत “क्या हुआ तेरा वादा” प्रस्तुत किया। उनकी आवाज सुनकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। उसी दिन परिवार को एहसास हुआ कि सोनू के भीतर असाधारण प्रतिभा छिपी हुई है।

इसके बाद उन्होंने अपने पिता के साथ विभिन्न आयोजनों में गाना शुरू कर दिया। बचपन और किशोरावस्था के दौरान उन्होंने अनेक स्टेज शो किए। हालांकि एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने वैज्ञानिक बनने का सपना देखा, लेकिन संगीत से उनका रिश्ता इतना गहरा था कि अंततः उन्होंने गायन को ही अपना भविष्य चुना।

दिल्ली में रहते हुए सोनू निगम को स्थानीय स्तर पर पहचान मिलने लगी थी। उनके कार्यक्रमों की संख्या बढ़ रही थी और लोग उनकी गायकी की सराहना करने लगे थे। लेकिन बड़े सपने पूरे करने के लिए उन्हें मायानगरी मुंबई का रुख करना पड़ा। वर्ष 1991 में वह अपने पिता के साथ मुंबई आ गए।

मुंबई आने से पहले उन्होंने शास्त्रीय संगीत की बुनियादी शिक्षा भी प्राप्त की थी, जिससे उनकी गायकी और निखरी। हालांकि मुंबई पहुंचने के बाद उनके लिए रास्ता आसान नहीं था। कई संगीत निर्देशकों और प्रोड्यूसर्स से मिलने के बावजूद उन्हें काम नहीं मिला। अक्सर यह कहकर उन्हें लौटा दिया जाता था कि उनकी आवाज को और नियंत्रित करने की जरूरत है।

करीब चार वर्षों तक उन्हें कोई बड़ा अवसर नहीं मिला। इस दौरान आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए वह स्टेज शो में मोहम्मद रफी के गीत गाते रहे। संघर्ष इतना कठिन था कि कई बार उन्हें रिकॉर्डिंग स्टूडियो तक में मौका नहीं मिलता था। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने सपनों का पीछा करते रहे।

उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उनकी मुलाकात टी-सीरीज के संस्थापक Gulshan Kumar से हुई। गुलशन कुमार को उनकी आवाज बेहद पसंद आई और उन्होंने सोनू को गाने का अवसर दिया। इसके बाद एक म्यूजिक एल्बम में उन्होंने मोहम्मद रफी के लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज दी। इस काम ने उन्हें संगीत जगत में पहचान दिलानी शुरू कर दी।

धीरे-धीरे उन्हें भजन, एल्बम और विज्ञापनों में भी काम मिलने लगा। आर्थिक स्थिति में सुधार आया और परिवार के बाकी सदस्यों को भी मुंबई बुला लिया गया। इसी दौरान उन्होंने फिल्मों के लिए भी गाने रिकॉर्ड किए, हालांकि शुरुआती प्रोजेक्ट्स से उन्हें बड़ी पहचान नहीं मिल सकी।

वर्ष 1995 उनके करियर के लिए निर्णायक साबित हुआ। फिल्म बेवफा सनम में गाया गया उनका गीत “अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का” जबरदस्त हिट साबित हुआ। इस गाने ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बना दिया। उसी समय उन्होंने टेलीविजन पर एक संगीत आधारित कार्यक्रम की मेजबानी भी शुरू की, जिसने उनकी पहचान को और मजबूत कर दिया।

इसके बाद सफलता का सिलसिला लगातार आगे बढ़ता गया। 1997 में फिल्म Border का गीत “संदेशे आते हैं” दर्शकों के दिलों में बस गया। इस गीत में उनके साथ रूप कुमार राठौड़ की भी अहम भूमिका थी। गाना इतना लोकप्रिय हुआ कि आज भी देशभक्ति के प्रमुख गीतों में इसकी गिनती होती है।

उसी दौर में फिल्म Pardes का गीत “ये दिल दीवाना” भी सुपरहिट रहा। इन सफलताओं ने सोनू निगम को हिंदी फिल्म संगीत के शीर्ष गायकों की श्रेणी में पहुंचा दिया। इसके बाद उन्होंने रोमांटिक, सूफी, भक्ति, पॉप और देशभक्ति जैसे लगभग हर शैली में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

आज सोनू निगम भारतीय संगीत जगत के सबसे प्रतिष्ठित नामों में शामिल हैं। वह कई भारतीय भाषाओं में हजारों गीत रिकॉर्ड कर चुके हैं और दुनियाभर में उनके करोड़ों प्रशंसक हैं। हालांकि वर्तमान में स्वास्थ्य संबंधी चुनौती उनके सामने है, लेकिन उनके चाहने वालों को उम्मीद है कि वह जल्द ही पूरी तरह स्वस्थ होकर फिर से अपनी सुरीली आवाज से श्रोताओं का दिल जीतेंगे।