चंडीगढ़ नगर निगम का बड़ा फैसला: अग्निवीरों के लिए फायर विभाग में 20% आरक्षण, सदन में मुफ्त पानी और सड़कों को लेकर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

चंडीगढ़ नगर निगम का बड़ा फैसला: अग्निवीरों के लिए फायर विभाग में 20% आरक्षण, सदन में मुफ्त पानी और सड़कों को लेकर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

चंडीगढ़ नगर निगम की शुक्रवार को हुई सदन बैठक कई अहम फैसलों और राजनीतिक बहसों के कारण चर्चा में रही। बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय भारतीय सेना की अग्निवीर योजना के तहत सेवा पूरी कर चुके युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया। नगर निगम ने फायर एंड रेस्क्यू सर्विस विभाग में सीधी भर्ती के दौरान अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस निर्णय के बाद सेना में चार वर्ष की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के लिए नगर निगम के अग्निशमन विभाग में रोजगार के अवसर बढ़ जाएंगे।

नगर निगम प्रशासन के अनुसार यह फैसला केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। इसके लिए फायर एंड रेस्क्यू सर्विस विभाग के भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन किए गए हैं, ताकि आगामी भर्तियों में आरक्षण का लाभ दिया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल रोजगार उपलब्ध कराने का कदम नहीं है, बल्कि सेना में प्रशिक्षित युवाओं के अनुभव का लाभ नागरिक सुरक्षा सेवाओं में लेने की भी पहल है।

प्रशासन का मानना है कि अग्निवीरों को सैन्य सेवा के दौरान अनुशासन, शारीरिक दक्षता, आपदा प्रबंधन, बचाव अभियान और आपातकालीन परिस्थितियों में कार्य करने का व्यावहारिक अनुभव मिलता है। ऐसे प्रशिक्षित युवाओं की नियुक्ति से फायर एंड रेस्क्यू विभाग की कार्यक्षमता बढ़ेगी और आग, दुर्घटनाओं तथा अन्य आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे।

सदन में मौजूद कई पार्षदों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अग्निवीर योजना के तहत सेवा समाप्त होने के बाद युवाओं के सामने भविष्य की नौकरी एक बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे में स्थानीय निकायों द्वारा आरक्षण की व्यवस्था करना उनके पुनर्वास और करियर को नई दिशा देने वाला कदम है। पार्षदों ने कहा कि इससे युवाओं में सेना में भर्ती होने का उत्साह भी बढ़ेगा और उन्हें सेवा के बाद रोजगार को लेकर अधिक भरोसा मिलेगा।

हालांकि बैठक का केंद्र केवल अग्निवीर आरक्षण नहीं रहा। शहर की बुनियादी सुविधाओं, विकास कार्यों और नागरिक समस्याओं को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी हुई। कई मुद्दों पर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए और सदन का माहौल राजनीतिक रंग में रंगा नजर आया।

कांग्रेस पार्षदों ने शहरवासियों को प्रतिदिन 20 हजार लीटर मुफ्त पानी उपलब्ध कराने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उनका कहना था कि चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादों को लागू करना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। कांग्रेस ने मांग की कि नगर निगम इस संबंध में स्पष्ट नीति घोषित करे ताकि लोगों को किए गए आश्वासन का लाभ मिल सके। विपक्ष का आरोप था कि चुनावी घोषणाएं अब तक केवल दावों तक सीमित हैं और आम जनता को अपेक्षित राहत नहीं मिली है।

दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने शहर की जर्जर सड़कें, अधूरे विकास कार्य और खराब बुनियादी ढांचे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में सड़कें लंबे समय से टूटी हुई हैं, जिससे वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से मरम्मत कार्यों में तेजी लाने और नई परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग की।

इन आरोपों पर जवाब देते हुए मेयर ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 20 हजार लीटर मुफ्त पानी का सवाल उनसे पूछने के बजाय कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी से पूछा जाना चाहिए, क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान यह वादा उनकी ओर से किया गया था। मेयर ने कहा कि यदि जनता से कोई आश्वासन दिया गया है तो उसकी जवाबदेही भी उसी नेतृत्व की होनी चाहिए जिसने यह घोषणा की थी।

मेयर ने यह भी कहा कि संबंधित सांसद नगर निगम की बैठकों में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते, जबकि शहर के विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर उनकी भागीदारी आवश्यक है। उनके अनुसार यदि सांसद सक्रिय रूप से बैठकों में शामिल हों और सुझाव दें तो कई विकास परियोजनाओं में तेजी लाई जा सकती है।

राजनीतिक माहौल उस समय और अधिक गर्म हो गया जब मेयर ने आम आदमी पार्टी पर कांग्रेस को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष एक-दूसरे से सवाल पूछने के बजाय केवल राजनीतिक बयानबाजी करेगा तो इसका नुकसान दोनों दलों को उठाना पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले चुनाव में भी राजनीतिक समीकरणों का लाभ कांग्रेस को मिला था।

बैठक के दौरान पार्षदों ने शहर की सफाई व्यवस्था, सीवरेज और जल निकासी प्रणाली, पार्कों के रखरखाव, स्ट्रीट लाइटों की स्थिति, ट्रैफिक प्रबंधन और लंबित विकास परियोजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की। कई सदस्यों ने विभिन्न वार्डों में लंबित कार्यों का मुद्दा उठाते हुए अधिकारियों से समयबद्ध कार्रवाई की मांग की। अधिकारियों ने सदन को बताया कि अनेक परियोजनाओं पर काम जारी है और जिन कार्यों में देरी हुई है, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

नगर निगम प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि अग्निवीर आरक्षण संबंधी निर्णय की औपचारिक अधिसूचना जल्द जारी की जाएगी। इसके बाद भविष्य में निकाली जाने वाली भर्ती अधिसूचनाओं में 20 प्रतिशत आरक्षण का स्पष्ट प्रावधान शामिल रहेगा। इससे अग्निवीर योजना के तहत सेवा पूरी कर चुके युवाओं को स्थानीय स्तर पर सरकारी नौकरी पाने का अवसर मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि देशभर में विभिन्न राज्य सरकारें और सरकारी संस्थान अग्निवीरों को रोजगार में प्राथमिकता देने की दिशा में लगातार कदम उठा रहे हैं। चंडीगढ़ नगर निगम का यह निर्णय भी उसी नीति की कड़ी माना जा रहा है। इससे एक ओर सेना में सेवा देने वाले युवाओं के लिए भविष्य के रोजगार की संभावनाएं मजबूत होंगी, वहीं दूसरी ओर नगर निगम के फायर एंड रेस्क्यू विभाग को प्रशिक्षित, अनुशासित और आपात परिस्थितियों में काम करने का अनुभव रखने वाला मानव संसाधन उपलब्ध होगा।

शुक्रवार की यह सदन बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि इसमें एक ओर युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा निर्णय लिया गया, जबकि दूसरी ओर शहर के विकास, बुनियादी सुविधाओं और चुनावी वादों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि अग्निवीर आरक्षण का लाभ कब से लागू होता है और सदन में उठाए गए पानी, सड़क, सफाई तथा अन्य जनहित के मुद्दों पर नगर निगम प्रशासन कितनी तेजी से अमल करता है।