मानसून के दौरान कम हुई भीड़, लेकिन व्यवस्थाओं में नहीं होगी कोई कटौती
उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा में इन दिनों श्रद्धालुओं की संख्या पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। हर साल की तरह मानसून शुरू होने के बाद यात्रा की रफ्तार धीमी पड़ गई है, लेकिन प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को यथावत रखने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप के सभी ऑफलाइन पंजीकरण काउंटर फिलहाल संचालित रहेंगे। इसके साथ ही यहां बनाया गया अस्थायी अस्पताल भी यात्रा समाप्त होने तक लगातार सेवाएं देता रहेगा।
यात्रियों को बिना परेशानी मिलती रहेगी पंजीकरण सुविधा
चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। श्रद्धालु ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। हालांकि इन दिनों ऑफलाइन पंजीकरण कराने वालों की संख्या काफी कम हो गई है, लेकिन प्रशासन का मानना है कि जो यात्री बिना पूर्व पंजीकरण के पहुंच रहे हैं, उन्हें किसी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए। इसी कारण ट्रांजिट कैंप में बनाए गए सभी 24 ऑफलाइन पंजीकरण काउंटर अभी भी चालू रखे गए हैं।
आईएसबीटी में सीमित काउंटरों से हो रहा काम
ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप के अलावा आईएसबीटी परिसर में भी ऑफलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। यहां पहले छह काउंटर संचालित किए जा रहे थे, लेकिन वर्तमान में यात्रियों की संख्या बेहद कम होने के कारण केवल दो काउंटरों के माध्यम से ही पंजीकरण का कार्य किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त काउंटर दोबारा शुरू किए जा सकते हैं।
दिनभर खाली दिखाई दे रहे पंजीकरण केंद्र
मानसून के कारण यात्रा में आई गिरावट का असर पंजीकरण केंद्रों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जहां कुछ सप्ताह पहले लंबी कतारें देखने को मिलती थीं, वहीं अब अधिकांश समय काउंटरों पर सन्नाटा पसरा रहता है। बावजूद इसके, सभी आवश्यक व्यवस्थाएं बनाए रखी गई हैं ताकि अचानक यात्रियों की संख्या बढ़ने पर किसी प्रकार की दिक्कत न आए।
अस्थायी अस्पताल की सेवाएं भी रहेंगी जारी
यात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रांजिट कैंप में स्थापित अस्थायी अस्पताल को भी फिलहाल बंद नहीं किया जाएगा। यहां डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की टीम लगातार तैनात रहेगी ताकि किसी भी श्रद्धालु को यात्रा के दौरान चिकित्सकीय सहायता की जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज मिल सके। प्रशासन का कहना है कि यात्रा पूरी तरह समाप्त होने तक अस्पताल अपनी सेवाएं देता रहेगा।
बड़े टेंट हटाने का काम शुरू
श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आने के बाद ट्रांजिट कैंप में लगाए गए बड़े अस्थायी टेंटों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यात्रा के शुरुआती चरण में बड़ी संख्या में आने वाले यात्रियों के ठहरने और इंतजार की सुविधा के लिए तीन विशाल टेंट लगाए गए थे। अब मौजूदा स्थिति में परिसर के अंदर उपलब्ध स्थान ही पर्याप्त साबित हो रहा है, इसलिए अतिरिक्त टेंट हटाए जा रहे हैं।
अप्रैल से शुरू हुई थी चारधाम यात्रा
इस वर्ष चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल से हुई थी। यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 42 लाख से अधिक श्रद्धालु यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के दर्शन कर चुके हैं। शुरुआती ढाई महीनों के दौरान यात्रा में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचे।
जून तक रहा पहला चरण, अब मानसून का असर
चारधाम यात्रा का पहला प्रमुख चरण 30 जून तक माना जाता है। इसके बाद जुलाई और अगस्त में बारिश के कारण यात्रा अपेक्षाकृत धीमी हो जाती है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और मौसम की अनिश्चितता के चलते इस अवधि में श्रद्धालुओं की संख्या हर साल कम हो जाती है। प्रशासन भी इसी को ध्यान में रखते हुए यात्रा प्रबंधन में आवश्यक बदलाव करता है।
सितंबर में फिर बढ़ती है श्रद्धालुओं की आमद
अधिकारियों के अनुसार मानसून समाप्त होने के बाद सितंबर महीने से यात्रा दोबारा गति पकड़ लेती है। मौसम अनुकूल होने पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु चारधाम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसलिए प्रशासन अभी से सभी मूलभूत सुविधाओं को जारी रखे हुए है, ताकि आने वाले समय में यात्रियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
अधिकारियों ने व्यवस्थाएं जारी रखने का दिया भरोसा
चारधाम यात्रा प्रबंधन एवं नियंत्रण संगठन के विशेष कार्याधिकारी डॉ. प्रजापति नौटियाल ने बताया कि यात्रियों की संख्या कम होने के बावजूद फिलहाल सभी ऑफलाइन पंजीकरण केंद्र संचालित रहेंगे। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा प्रशासन की प्राथमिकता है और अस्थायी अस्पताल भी यात्रा समाप्त होने तक कार्यरत रहेगा। आवश्यकता के अनुसार अन्य व्यवस्थाओं की भी नियमित समीक्षा की जा रही है।
शुक्रवार को हुए इतने ऑफलाइन पंजीकरण
शुक्रवार को ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप में कुल 1531 श्रद्धालुओं ने ऑफलाइन पंजीकरण कराया। इनमें सबसे अधिक 513 पंजीकरण बदरीनाथ धाम के लिए दर्ज किए गए। केदारनाथ के लिए 478, गंगोत्री के लिए 258 और यमुनोत्री के लिए 254 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया। वहीं हेमकुंड साहिब जाने वाले 28 यात्रियों ने भी ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कराया।
हरिद्वार में भी जारी है पंजीकरण प्रक्रिया
ऋषिकेश के अलावा हरिद्वार में भी ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है। शुक्रवार को वहां कुल 782 श्रद्धालुओं ने अपना पंजीकरण कराया। पिछले कुछ दिनों से दोनों केंद्रों पर लगभग इसी स्तर के पंजीकरण दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे साफ है कि मानसून के दौरान यात्रा का दबाव काफी कम हो चुका है।
सुविधाओं में नहीं होगी कोई कमी
प्रशासन का कहना है कि भले ही इस समय यात्रियों की संख्या सीमित हो, लेकिन चारधाम यात्रा के दौरान आवश्यक सेवाओं में कोई कटौती नहीं की जाएगी। पंजीकरण, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं पहले की तरह उपलब्ध रहेंगी ताकि किसी भी श्रद्धालु को यात्रा के दौरान कठिनाई का सामना न करना पड़े। यात्रा के अंतिम चरण तक सभी व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और जरूरत के अनुसार उनमें बदलाव भी किए जाएंगे।




