जुलाई 2026 के प्रमुख व्रत-पर्व: सावन से पहले आएंगे देवशयनी एकादशी, चातुर्मास और गुरु पूर्णिमा जैसे बड़े धार्मिक अवसर

जुलाई 2026 के प्रमुख व्रत-पर्व: सावन से पहले आएंगे देवशयनी एकादशी, चातुर्मास और गुरु पूर्णिमा जैसे बड़े धार्मिक अवसर

साल 2026 का जुलाई महीना धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस महीने में हिंदू पंचांग के अनुसार कई बड़े व्रत और पर्व मनाए जाएंगे। आषाढ़ मास के अंतिम दिनों से लेकर सावन की शुरुआत तक कई शुभ तिथियां आएंगी, जिनमें भगवान विष्णु, भगवान शिव, भगवान गणेश और देवी शक्ति की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

जुलाई में जहां एक ओर देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास की शुरुआत होगी, वहीं महीने के अंत में गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। इसके अगले ही दिन सावन मास का शुभारंभ हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पूरा समय पूजा, साधना, ध्यान और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए खास माना जाता है।

30 जुलाई से शुरू होगा सावन मास, शिव भक्ति का रहेगा विशेष समय

जुलाई का आखिरी दिन यानी 30 जुलाई 2026 से सावन मास शुरू हो जाएगा। भगवान शिव को समर्पित यह महीना भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। सावन में शिव पूजा, जलाभिषेक और बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा है।

मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। जो लोग विस्तार से पूजा नहीं कर पाते, वे भी शिवलिंग पर जल चढ़ाकर, बेलपत्र और चंदन अर्पित करके भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं।

29 जुलाई को मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा

जुलाई के धार्मिक आयोजनों में सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक गुरु पूर्णिमा भी है। इस साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि 29 जुलाई बुधवार को पड़ेगी। इस दिन गुरु के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने की परंपरा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु व्यक्ति को ज्ञान और सही मार्ग दिखाते हैं, इसलिए इस दिन गुरु पूजन किया जाता है। लोग अपने गुरु को सम्मान देते हैं, उन्हें वस्त्र या अन्य उपहार भेंट करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

25 जुलाई को देवशयनी एकादशी, शुरू होगा चातुर्मास

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी 25 जुलाई शनिवार को होगी। इस दिन से भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने की मान्यता है। इसी तिथि से चातुर्मास की शुरुआत भी मानी जाती है।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार चातुर्मास चार महीने का समय होता है, जिसमें पूजा-पाठ, व्रत, ध्यान और धार्मिक साधना का विशेष महत्व रहता है। इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, मुंडन और जनेऊ संस्कार के लिए शुभ मुहूर्त नहीं माने जाते।

देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा, अभिषेक और व्रत करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से पुण्य फल मिलता है। चातुर्मास का समापन 21 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ होगा, जब भगवान विष्णु के जागने की मान्यता है।

16 जुलाई को रथ यात्रा और कर्क संक्रांति

जुलाई महीने में 16 तारीख का दिन भी धार्मिक रूप से खास रहेगा। इसी दिन भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथ यात्रा निकाली जाएगी। इसके साथ ही कर्क संक्रांति भी होगी।

कर्क संक्रांति के दिन सूर्य देव कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन सूर्य पूजा करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुबह सूर्य को जल अर्पित करके दिन की शुरुआत करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

15 जुलाई से शुरू होगी गुप्त नवरात्रि

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की शुरुआत 15 जुलाई बुधवार से होगी और इसी दिन गुप्त नवरात्रि भी शुरू हो जाएगी। यह नवरात्रि 23 जुलाई तक चलेगी।

गुप्त नवरात्रि को साधना और आध्यात्मिक अभ्यास के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान तंत्र साधना करने वाले साधक देवी की दस महाविद्याओं की आराधना करते हैं। वहीं सामान्य श्रद्धालु मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं।

देवी उपासना के लिए यह समय विशेष फलदायी माना जाता है। भक्त इस दौरान व्रत रखते हैं और माता की पूजा करके सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या

आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष का अंतिम दिन यानी 14 जुलाई मंगलवार को अमावस्या रहेगी। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है।

इस दिन पितरों के लिए तर्पण, ध्यान और धार्मिक कार्य करने की परंपरा है। कई लोग नदी स्नान, दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता को भी शुभ मानते हैं। मान्यता है कि अमावस्या पर किए गए धार्मिक कार्यों से पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

12 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत

जुलाई में प्रदोष व्रत भी दो बार आएगा। पहला रवि प्रदोष व्रत 12 जुलाई रविवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व होता है।

प्रदोष काल यानी शाम के समय शिव पूजा करना शुभ माना जाता है। भक्त इस दिन शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और भगवान शिव से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

दूसरा रवि प्रदोष व्रत 26 जुलाई रविवार को होगा। इस दिन भी शिव आराधना, अभिषेक और पूजा करने की परंपरा रहेगी।

10 जुलाई को योगिनी एकादशी व्रत

आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी योगिनी एकादशी 10 जुलाई शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत करने से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और मंत्र जाप करने की परंपरा है।

3 जुलाई को संकष्टी चतुर्थी

जुलाई महीने की शुरुआत में ही गणेश भक्तों के लिए विशेष दिन आएगा। 3 जुलाई शुक्रवार को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा।

इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और शाम को चंद्र दर्शन के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं। मान्यता है कि गणपति की पूजा करने से परेशानियां दूर होती हैं और जीवन में सफलता मिलती है।

जुलाई में आषाढ़ मास और धार्मिक गतिविधियों का क्रम

पंचांग के अनुसार 14 जुलाई तक आषाढ़ मास का कृष्ण पक्ष रहेगा। इसके बाद 15 जुलाई से आषाढ़ शुक्ल पक्ष शुरू होगा, जो 29 जुलाई तक चलेगा। इसी अवधि में गुप्त नवरात्रि, देवशयनी एकादशी और गुरु पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्व आएंगे।

कुल मिलाकर जुलाई 2026 धार्मिक दृष्टि से बेहद खास महीना रहेगा। महीने की शुरुआत गणेश पूजा और एकादशी व्रत से होगी, मध्य में देवी आराधना और भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा जैसे आयोजन होंगे, जबकि अंत में देवशयनी एकादशी, चातुर्मास और गुरु पूर्णिमा के बाद सावन का शुभ आगमन होगा।

(Photo : AI Generated)