दिल्ली के सत्य निकेतन में भरभराकर गिरी पांच मंजिला इमारत, PG में रह रहे छात्रों पर टूटा कहर; मालिक पर FIR, न्यायिक जांच के आदेश

दिल्ली के सत्य निकेतन में भरभराकर गिरी पांच मंजिला इमारत, PG में रह रहे छात्रों पर टूटा कहर; मालिक पर FIR, न्यायिक जांच के आदेश

नई दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के वक्त इमारत के भीतर कई लोग मौजूद थे, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग मलबे में फंस गए। राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक 11 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है। हादसे में पांच लोगों की मौत की शुरुआती जानकारी सामने आई है, जबकि कई घायलों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। तीन घायलों की हालत गंभीर बताई गई है और उन्हें एम्स ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है।

घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस, दमकल विभाग, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबे में दबे लोगों की तलाश शुरू की। रविवार का दिन होने के कारण PG में रहने वाले ज्यादातर छात्र अपने कमरों में थे। यही वजह है कि इमारत गिरने के बाद कई छात्रों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई।

हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। वहीं पुलिस ने भवन मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

बेसमेंट में चल रहा था काम, तभी ढह गई पूरी इमारत

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि हादसे के समय इमारत के बेसमेंट में मरम्मत या निर्माण से जुड़ा काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक इमारत का ढांचा कमजोर पड़ा और देखते ही देखते पूरी संरचना मलबे में बदल गई।

यह इमारत करीब 40 से 50 साल पुरानी बताई जा रही है। इसमें बेसमेंट के अलावा पांच ऊपरी मंजिलें थीं। पुलिस के मुताबिक, भवन का इस्तेमाल छात्रों के लिए PG के तौर पर किया जा रहा था।

अब जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि बेसमेंट में किस तरह का काम कराया जा रहा था और क्या इसके लिए जरूरी अनुमति ली गई थी। साथ ही इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा और उसमें किए गए बदलावों की भी जांच की जा रही है।

छुट्टी के दिन PG में थे छात्र

हादसे की गंभीरता बढ़ने की एक बड़ी वजह यह भी रही कि रविवार को छुट्टी थी। सामान्य दिनों की तुलना में इस दिन PG में रहने वाले अधिकतर छात्र अपने कमरों में मौजूद थे। जैसे ही इमारत गिरी, कई लोग मलबे के नीचे दब गए।

मौके पर पहुंचे बचावकर्मियों ने मलबे को हटाकर एक-एक व्यक्ति को बाहर निकालना शुरू किया। राहत कार्य के दौरान घटनास्थल से सामने आए दृश्यों में मलबे के नीचे एक व्यक्ति का पैर फंसा हुआ भी दिखाई दिया। दमकलकर्मियों ने काफी सावधानी से मलबा हटाकर उसे निकालने का प्रयास किया।

स्थानीय लोगों ने भी बचाव अभियान में मदद की। शुरुआती समय में आसपास मौजूद लोगों ने अपने स्तर पर मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की। बाद में दमकल, पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें पूरी तैयारी के साथ अभियान में जुट गईं।

‘हॉस्टल डेज’ के नाम से चल रहा था PG

जानकारी के मुताबिक, जिस इमारत का एक हिस्सा हादसे की चपेट में आया, उसमें ‘हॉस्टल डेज’ नाम से PG संचालित किया जा रहा था। यह मुख्य रूप से लड़कों के रहने के लिए इस्तेमाल होता था और यहां दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े छात्रों के रहने की जानकारी सामने आई है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत में रहने वाले छात्र हादसे के समय अपने कमरों में थे। अचानक इमारत गिरने के कारण उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला।

हादसे के बाद PG के संचालन से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में आ गए हैं। पुलिस यह पता कर रही है कि भवन में PG चलाने की अनुमति थी या नहीं और वहां रहने वाले छात्रों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम किए गए थे या नहीं।

मालिक हरिओम बंसल और भाई आनंद की तलाश

पुलिस ने भवन मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, इमारत के मालिक हरिओम बंसल और उनके भाई आनंद बंसल बताए जा रहे हैं। दोनों के गुरुग्राम में रहने की बात सामने आई है।

जानकारी के अनुसार, दोनों के कई PG भी संचालित होते हैं। हादसे के बाद पुलिस उनकी तलाश कर रही है और भवन के स्वामित्व तथा संचालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

चश्मदीदों ने यह भी दावा किया है कि इमारत के बेसमेंट में काफी समय से काम चल रहा था। कुछ लोगों के अनुसार करीब एक महीने पहले इमारत को लेकर नोटिस भी दिया गया था। वहीं यह जानकारी भी सामने आई है कि करीब एक साल पहले इमारत को खाली कराया गया था और बाद में इसमें PG दोबारा शुरू किया गया।

हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

एक साल पहले खाली हुई थी बिल्डिंग?

हादसे के बाद स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी ने इमारत के इतिहास को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया गया है कि करीब एक साल पहले इमारत को खाली कराया गया था। इसके बाद कुछ समय बाद यहां दोबारा गतिविधियां शुरू हुईं और लगभग दो महीने पहले PG का संचालन शुरू होने की बात कही जा रही है।

यदि यह जानकारी सही साबित होती है, तो जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी होगा कि इमारत को पहले क्यों खाली कराया गया था और बाद में उसमें दोबारा लोगों के रहने की अनुमति किस आधार पर दी गई।

इसके साथ ही बेसमेंट में चल रहे काम की प्रकृति भी जांच का अहम विषय है। आखिर काम किस उद्देश्य से किया जा रहा था और क्या उसके दौरान इमारत की सुरक्षा को ध्यान में रखा गया था, इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिलेंगे।

दमकल की आठ गाड़ियां मौके पर पहुंचीं

इमारत गिरने की सूचना मिलते ही दिल्ली अग्निशमन सेवा की करीब आठ गाड़ियां घटनास्थल पर भेजी गईं। इसके अलावा दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ, DDMA, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की टीमें भी राहत अभियान में शामिल हुईं।

पुलिस ने घटनास्थल की घेराबंदी कर दी, ताकि बचाव अभियान में किसी तरह की बाधा न आए। पास की एक इमारत को भी एहतियात के तौर पर खाली कराया गया, जिससे आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

बचावकर्मियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मलबे को इस तरह हटाना था कि अंदर फंसे लोगों को नुकसान न पहुंचे। इसलिए भारी मशीनरी के साथ-साथ कई जगहों पर हाथ से भी मलबा हटाया गया।

तीन घायलों की हालत गंभीर

हादसे के बाद बचाए गए लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। कई घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल तीन लोगों को एम्स ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया।

अस्पतालों में डॉक्टरों की टीम घायलों का इलाज कर रही है। मृतकों की पहचान और हादसे में प्रभावित सभी लोगों की पूरी जानकारी जुटाने का काम भी पुलिस की ओर से किया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की संभावना को खत्म करना और सभी संभावित पीड़ितों तक पहुंचना है।

PM मोदी और अमित शाह ने जताया दुख

सत्य निकेतन हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी दुख जताया है। प्रधानमंत्री ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने कहा कि अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता दी जा रही है।

गृह मंत्री अमित शाह ने भी हादसे पर दुख जताते हुए बताया कि उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री, पुलिस कमिश्नर और एनडीआरएफ के महानिदेशक से बात कर स्थिति की जानकारी ली है। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें मिलकर बड़े स्तर पर बचाव अभियान चला रही हैं और घायलों को जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

CM रेखा गुप्ता ने किया घटनास्थल का दौरा

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि बेसमेंट में काम चल रहा था और अगर किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने इससे पहले सोशल मीडिया के जरिए भी घटना पर दुख जताया था। उन्होंने कहा कि DDMA, NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की टीमें युद्ध स्तर पर राहत अभियान चला रही हैं।

सुरक्षा को देखते हुए आसपास की इमारतों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। प्रशासन का कहना है कि लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।

न्यायिक जांच से खुलेंगे हादसे के पीछे के राज

हादसे की न्यायिक जांच के आदेश के बाद अब यह पता लगाने की कोशिश होगी कि आखिर इतनी पुरानी इमारत में निर्माण या मरम्मत का काम किन परिस्थितियों में चल रहा था। क्या भवन में अतिरिक्त निर्माण हुआ था? क्या बेसमेंट में किए जा रहे काम की अनुमति थी? क्या PG संचालन के लिए सभी जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? और अगर पहले कोई नोटिस दिया गया था, तो उस पर क्या कार्रवाई हुई?

इन सवालों के जवाब जांच के दौरान सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल पुलिस ने भवन मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और उसकी तलाश जारी है। दूसरी ओर बचाव अभियान भी जारी है। सत्य निकेतन की यह घटना एक बार फिर दिल्ली में पुरानी इमारतों, अनधिकृत निर्माण और बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के चल रहे PG को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब निगाहें न्यायिक जांच और पुलिस की कार्रवाई पर हैं, जिससे हादसे की असली वजह और जिम्मेदारी तय हो सके।