केंद्र सरकार द्वारा आयोजित देश के सबसे बड़े शहरी स्वच्छता मूल्यांकन कार्यक्रम स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 (Swachh Survekshan 2024-25) के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। इस वर्ष भी देशभर के हजारों शहरों के बीच स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, नागरिक सुविधाओं और जनभागीदारी के आधार पर रैंकिंग जारी की गई।
नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वच्छ सर्वेक्षण के विजेता शहरों और नगर निकायों को सम्मानित किया। कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा किया गया, जिसमें देशभर से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
स्वच्छ सर्वेक्षण का उद्देश्य केवल शहरों की सफाई व्यवस्था को आंकना नहीं है, बल्कि यह देखना भी है कि शहर कचरा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक सुविधाओं और लोगों की भागीदारी के क्षेत्र में कितना बेहतर काम कर रहे हैं।
इस बार भी कई शहरों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का ध्यान आकर्षित किया है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के शहरों ने स्वच्छता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।
उत्तर प्रदेश की बड़ी उपलब्धि, लखनऊ बना 7-Star Garbage Free City
स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में उत्तर प्रदेश ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य की राजधानी लखनऊ ने पहली बार 7-Star Garbage Free City (GFC) का दर्जा हासिल किया है।
यह उपलब्धि लखनऊ के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि उत्तर प्रदेश में यह दर्जा प्राप्त करने वाला यह पहला शहर बन गया है।
कचरा मुक्त शहर का दर्जा पाने के लिए शहरों को कचरा संग्रहण, कचरे के वैज्ञानिक निपटान, रिसाइक्लिंग, सफाई व्यवस्था और नागरिक भागीदारी जैसे कई मानकों पर खरा उतरना होता है।
लखनऊ ने न केवल इस श्रेणी में शानदार प्रदर्शन किया, बल्कि 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की कैटेगरी में तीसरा स्थान भी प्राप्त किया।
इस उपलब्धि के लिए लखनऊ को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया।
इंदौर ने लगातार आठवीं बार हासिल किया पहला स्थान
मध्य प्रदेश का इंदौर एक बार फिर देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित हुआ है।
इंदौर ने लगातार आठवीं बार स्वच्छ सर्वेक्षण में पहला स्थान हासिल कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है।
पिछले कई वर्षों से इंदौर ने कचरा प्रबंधन, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, सूखे और गीले कचरे के अलग-अलग निपटान, नागरिक जागरूकता और सफाई व्यवस्था में लगातार सुधार किया है।
इंदौर मॉडल को देश के कई अन्य शहरों के लिए उदाहरण के रूप में देखा जाता है। यहां नगर निगम और आम नागरिकों की भागीदारी से स्वच्छता अभियान को मजबूत बनाया गया है।
सूरत और नवी मुंबई ने भी बनाई जगह
10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में इंदौर के बाद अन्य शहरों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया।
इस कैटेगरी में:
- सूरत ने दूसरा स्थान हासिल किया।
- नवी मुंबई तीसरे स्थान पर रहा।
दोनों शहर लंबे समय से बेहतर शहरी प्रबंधन और आधुनिक कचरा निपटान प्रणाली के लिए जाने जाते हैं।
सूरत ने सफाई व्यवस्था के साथ-साथ डिजिटल मॉनिटरिंग और कचरा प्रबंधन में कई प्रभावी कदम उठाए हैं।
वहीं नवी मुंबई ने योजनाबद्ध शहरी विकास और पर्यावरण के अनुकूल व्यवस्थाओं के कारण अच्छी रैंक हासिल की।
3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों में नोएडा नंबर वन
स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में मध्यम आकार के शहरों की श्रेणी में भी कई शहरों ने शानदार प्रदर्शन किया।
3 लाख से 10 लाख आबादी वाले शहरों की कैटेगरी में:
- नोएडा ने पहला स्थान प्राप्त किया।
- चंडीगढ़ दूसरे स्थान पर रहा।
- मैसूरु (Mysuru) ने तीसरा स्थान हासिल किया।
नोएडा की उपलब्धि खास मानी जा रही है क्योंकि यह शहर तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में शामिल है। बेहतर सड़क सफाई, कचरा प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं में सुधार के कारण नोएडा ने शीर्ष स्थान हासिल किया।
4,500 से अधिक शहरों का हुआ मूल्यांकन
स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 का नौवां संस्करण था। इस बार देशभर के 4,500 से अधिक शहरों का मूल्यांकन किया गया।
शहरों की रैंकिंग तय करने के लिए कई महत्वपूर्ण मानकों को शामिल किया गया।
सर्वेक्षण में मुख्य रूप से इन क्षेत्रों का मूल्यांकन किया गया:
1. सफाई व्यवस्था
शहरों में नियमित सफाई, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता और कचरा उठाने की व्यवस्था को जांचा गया।
2. कचरा प्रबंधन
गीले और सूखे कचरे का अलग-अलग संग्रहण, कचरे का वैज्ञानिक निपटान और रिसाइक्लिंग व्यवस्था को प्रमुख आधार बनाया गया।
3. नागरिक सेवाएं
नगर निकायों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और शिकायत समाधान प्रणाली का भी मूल्यांकन किया गया।
4. जनभागीदारी
स्वच्छता अभियान में आम लोगों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया।
5. गार्बेज फ्री सिटी रेटिंग
शहरों को कचरा मुक्त बनाने के प्रयासों के आधार पर स्टार रेटिंग दी गई।
स्वच्छ सर्वेक्षण में 54 इंडिकेटर के आधार पर बनी Ranking
इस वर्ष शहरों की रैंकिंग तैयार करने के लिए कुल 10 प्रमुख पैरामीटर और 54 इंडिकेटर निर्धारित किए गए थे।
इनमें शामिल थे:
- कचरा संग्रहण की व्यवस्था
- कचरे का निपटान
- सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति
- सफाई कर्मचारियों की सुविधाएं
- जल निकासी व्यवस्था
- नागरिक शिकायतों का समाधान
- स्वच्छता के प्रति लोगों की जागरूकता
इन सभी मानकों पर शहरों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया और उसके बाद अंतिम रैंकिंग जारी की गई।
स्वच्छता में जनभागीदारी की अहम भूमिका
स्वच्छ सर्वेक्षण की सफलता केवल प्रशासनिक प्रयासों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसमें नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होती है।
कचरे को अलग-अलग करना, सार्वजनिक स्थानों पर सफाई बनाए रखना, प्लास्टिक के उपयोग को कम करना और स्वच्छता अभियानों में भाग लेना जैसे कदम शहरों को बेहतर रैंक दिलाने में मदद करते हैं।
कई शहरों ने नागरिक समूहों, स्कूलों, सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय संगठनों के साथ मिलकर स्वच्छता अभियान चलाए हैं।
सरकार का लक्ष्य: पूरी तरह कचरा मुक्त शहरों की ओर बढ़ना
केंद्र सरकार का उद्देश्य देश के अधिक से अधिक शहरों को गार्बेज फ्री सिटी बनाना है।
इसके लिए आधुनिक कचरा प्रबंधन तकनीक, रिसाइक्लिंग सिस्टम, कंपोस्टिंग यूनिट और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे उपायों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
स्वच्छ सर्वेक्षण के माध्यम से शहरों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है, जिससे नगर निकाय अपनी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
Swachh Survekshan 2024-25 की प्रमुख उपलब्धियां
- इंदौर लगातार आठवीं बार देश का सबसे स्वच्छ शहर बना।
- लखनऊ को पहली बार 7-Star Garbage Free City का दर्जा मिला।
- सूरत और नवी मुंबई ने टॉप शहरों में जगह बनाई।
- नोएडा ने 3 से 10 लाख की आबादी वाले शहरों में पहला स्थान हासिल किया।
- चंडीगढ़ और मैसूर ने भी अपनी श्रेणी में बेहतर प्रदर्शन किया।
- देशभर के 4,500 से ज्यादा शहरों को स्वच्छता के विभिन्न मानकों पर परखा गया।
स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 के परिणाम यह दिखाते हैं कि देश के कई शहर स्वच्छता और बेहतर शहरी प्रबंधन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। प्रशासनिक प्रयासों के साथ नागरिकों की भागीदारी भी इन उपलब्धियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

