दिल्ली जल बोर्ड (DJB) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत छह आरोपियों को बुधवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने इन सभी को एक दिन पहले गिरफ्तार किया था। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने अधिकांश आरोपियों को 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की, जबकि एक आरोपी के लिए पुलिस कस्टडी की मांग रखी गई।
यह मामला दिल्ली जल बोर्ड में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स से संबंधित काम के लिए जारी किए गए चार टेंडरों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर की शर्तों में इस तरह बदलाव किए गए, जिससे एक विशेष कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया जा सके और दूसरी कंपनियों के बीच प्रभावी प्रतिस्पर्धा सीमित हो जाए।
कौन-कौन आरोपी कोर्ट में हुए पेश
ACB ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें सत्येंद्र जैन के अलावा दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव, एएन एंटरप्राइजेज के मालिक नागेंद्र यादव, यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राजा कुमार कुर्रा और सृजनहार के मालिक पंकज वर्मा शामिल हैं। मामले में पूर्व DJB CEO उदित प्रकाश राय का नाम भी जांच से जुड़ा है।
अदालत में जांच एजेंसी ने सत्येंद्र जैन और अन्य आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का अनुरोध किया। वहीं अंकित श्रीवास्तव को लेकर ACB ने अलग रुख अपनाते हुए उनकी पुलिस हिरासत मांगी, ताकि जांच के दौरान उनसे पूछताछ की जा सके और मामले से जुड़े कथित लेन-देन तथा अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा सके।
अदालत में आरोपियों की पेशी के दौरान उनके वकीलों ने गिरफ्तारी की परिस्थितियों और जांच एजेंसी की कार्रवाई पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि मामले की FIR काफी पहले दर्ज हो चुकी थी, लेकिन आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई अब की गई है।
सत्येंद्र जैन ने गिरफ्तारी को पंजाब चुनाव से जोड़ा
कोर्ट में पेश किए जाने से पहले सत्येंद्र जैन ने अपनी गिरफ्तारी पर राजनीतिक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी गिरफ्तारी का संबंध पंजाब चुनाव से है। जैन के मुताबिक, मौजूदा कार्रवाई राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित है।
जैन के वकील ने भी अदालत के सामने गिरफ्तारी की टाइमलाइन को लेकर सवाल उठाया। बचाव पक्ष ने बताया कि दिल्ली जल बोर्ड मामले में FIR 11 मई 2024 को दर्ज की गई थी, लेकिन जैन को पहली बार 5 अगस्त 2026 को पूछताछ के लिए बुलाया गया। इसके बाद मंगलवार को फोन के माध्यम से दोबारा बुलाए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
वकील का तर्क था कि इतनी अवधि बीतने के बाद गिरफ्तारी करने के लिए जांच एजेंसी को ठोस और स्पष्ट आधार दिखाना चाहिए। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जैन के खिलाफ गिरफ्तारी की जरूरत को पर्याप्त तरीके से स्थापित नहीं किया गया है।
पूर्व DJB CEO उदित प्रकाश राय की ओर से पेश वकील ने भी उनकी गिरफ्तारी को लेकर आपत्ति जताई। अदालत को बताया गया कि राय वर्तमान में मिजोरम सरकार में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। बचाव पक्ष ने इस तथ्य को भी गिरफ्तारी की परिस्थितियों के संदर्भ में रखा।
केजरीवाल ने अमित शाह पर लगाया बड़ा आरोप
सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद आम आदमी पार्टी की ओर से केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई के आरोप लगाए गए। AAP के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लेते हुए दावा किया कि गिरफ्तारी से पहले घटनाक्रम में अचानक बदलाव आया।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि बुधवार सुबह तक ACB की ओर से जैन को गिरफ्तार करने की कोई योजना नहीं थी। उनके मुताबिक बाद में अमित शाह की ओर से कथित तौर पर फोन आने के बाद जांच एजेंसी ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की।
केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा समय में जांच एजेंसियों की कार्रवाई इस सवाल पर आधारित नहीं रह गई है कि किसी व्यक्ति ने अपराध किया है या नहीं, बल्कि पहले यह तय किया जा रहा है कि किसे गिरफ्तार करना है। हालांकि, ये आरोप AAP की ओर से लगाए गए हैं और मामले में जांच एजेंसी तथा अन्य संबंधित पक्षों का अपना पक्ष है।
क्या है दिल्ली जल बोर्ड टेंडर विवाद
ACB की जांच का मुख्य केंद्र दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के विस्तार और अपग्रेडेशन से जुड़े चार टेंडर हैं। एजेंसी के अनुसार, इन टेंडरों की प्रक्रिया में ऐसी गड़बड़ियां की गईं, जिनसे एक खास कंपनी को लाभ मिलने का रास्ता तैयार हुआ।
जांच एजेंसी का आरोप है कि तकनीकी मानकों और टेंडर की शर्तों में कथित तौर पर हेरफेर किया गया। इसके कारण प्रतिस्पर्धा कम हुई और अनुबंध हासिल करने वाली कंपनी को फायदा पहुंचा।
ACB ने जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, ई-मेल और अलग-अलग लोगों के बीच हुई बातचीत जैसे साक्ष्यों की जांच करने की बात कही है। एजेंसी का दावा है कि उसे ऐसे डिजिटल सबूत मिले हैं, जिनसे कथित अनियमितताओं की कड़ियां जोड़ने में मदद मिल सकती है।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू पैसों के कथित लेन-देन से भी जुड़ा है। ACB के मुताबिक, तत्कालीन DJB CEO उदित प्रकाश राय और उनके कुछ रिश्तेदारों के बैंक खातों में करीब 1.52 करोड़ रुपये पहुंचने के साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रकम का इस्तेमाल किसी संपत्ति की खरीदारी के लिए किया गया था या नहीं।
11 मई 2024 को दर्ज हुई थी FIR
इस पूरे मामले की शुरुआत दिल्ली सरकार के विजिलेंस निदेशालय की शिकायत के बाद हुई थी। शिकायत के आधार पर ACB ने 11 मई 2024 को FIR दर्ज की थी। इसमें टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितता, शर्तों में बदलाव और आपराधिक साजिश सहित कई आरोप लगाए गए थे।
जांच आगे बढ़ने पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इसी मामले से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच शुरू की। दिसंबर 2025 में ED ने 14 लोगों के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की थी।
ED ने अपनी जांच में करीब 17.70 करोड़ रुपये की कथित अपराध से जुड़ी रकम की पहचान करने का दावा किया था। इसके अलावा लगभग 6.73 करोड़ रुपये के कथित अवैध कमीशन के लेन-देन की भी जांच की गई। एजेंसी के अनुसार, कथित कमीशन से जुड़ी कुछ संपत्तियों को भी अटैच किया गया।
इस तरह मामला केवल टेंडर प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कथित रिश्वत, कमीशन और पैसों के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं तक जांच पहुंची।
पहले भी लंबी कानूनी मुश्किलों में फंसे थे सत्येंद्र जैन
सत्येंद्र जैन इससे पहले भी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें 30 मई 2022 को आय से अधिक संपत्ति से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था।
जैन को उस मामले में लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। करीब 872 दिन जेल में रहने के बाद अक्टूबर 2024 में उन्हें जमानत मिली थी। 18 अक्टूबर 2024 को दिल्ली की अदालत ने उन्हें जमानत प्रदान की थी।
जेल से बाहर आने के बाद तत्कालीन दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी उनसे मुलाकात की थी। अब दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े मामले में उनकी नई गिरफ्तारी ने एक बार फिर उन्हें कानूनी और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
आगे जांच और अदालत की कार्रवाई पर नजर
दिल्ली जल बोर्ड मामले में अब अदालत के सामने सबसे अहम सवाल आरोपियों की हिरासत को लेकर है। ACB जहां अधिकांश आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग कर रही है, वहीं अंकित श्रीवास्तव से आगे पूछताछ के लिए पुलिस कस्टडी चाहती है।
मामले में जांच एजेंसी कथित टेंडर अनियमितताओं, पैसों के लेन-देन, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और संभावित संपत्ति खरीद के बीच संबंध तलाश रही है। दूसरी ओर, आरोपियों के वकील गिरफ्तारी की प्रक्रिया और जांच एजेंसी के दावों को चुनौती दे रहे हैं।
इस मामले में आरोप अभी अदालत में विचाराधीन हैं और आरोपियों की दोषसिद्धि नहीं हुई है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और जांच से सामने आने वाले साक्ष्य यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि कथित टेंडर गड़बड़ी और वित्तीय लेन-देन में किसकी क्या भूमिका थी।




