नकली चांदी का बढ़ता कारोबार! बाजार में बिक रहे मिलावटी सिक्के और गहने, BIS ने दी चेतावनी

नकली चांदी का बढ़ता कारोबार! बाजार में बिक रहे मिलावटी सिक्के और गहने, BIS ने दी चेतावनी

चांदी की शुद्धता पर बढ़ी चिंता: बढ़ती कीमतों के बीच क्यों जरूरी हो गया है BIS हॉलमार्क की जांच

हाल के वर्षों में देश में चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। निवेश, आभूषण, धार्मिक उपयोग और औद्योगिक मांग बढ़ने के कारण चांदी की खरीदारी में भी तेजी आई है। ऐसे समय में उपभोक्ताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जो चांदी वे खरीद रहे हैं, क्या वह वास्तव में उतनी ही शुद्ध है जितना दावा किया जा रहा है। बाजार में बढ़ती कीमतों के साथ गुणवत्ता की जांच पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में कुछ स्थानों पर ऐसी चांदी भी बेची जा रही है जो निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती। कई मामलों में चांदी के सिक्कों, बर्तनों, गहनों और धार्मिक उपयोग की वस्तुओं में दूसरी धातुओं का मिश्रण अधिक मात्रा में किया जा सकता है। यदि ग्राहक केवल कीमत या डिजाइन देखकर खरीदारी करते हैं और प्रमाणन की जांच नहीं करते, तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बाजार में बढ़ती मांग का फायदा उठाकर कुछ असंगठित विक्रेता बिना उचित प्रमाणन वाले उत्पाद भी बेच सकते हैं। इसलिए खरीदारी करते समय केवल कीमत की तुलना करना पर्याप्त नहीं है। उत्पाद की शुद्धता, हॉलमार्क और विक्रेता की विश्वसनीयता की जांच करना भी उतना ही आवश्यक माना जाता है।

देश में लगातार बढ़ रही है चांदी की मांग

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां चांदी का उपयोग केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है। इसका प्रयोग धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा सामग्री, सिक्कों, बर्तनों, उपहारों, निवेश और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में भी व्यापक रूप से किया जाता है। त्योहारों, शादी-विवाह और शुभ अवसरों पर चांदी की खरीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलती है।

चांदी को निवेश के एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में भी देखा जाता है। कई निवेशक लंबे समय के लिए चांदी खरीदना पसंद करते हैं, जबकि कुछ लोग सिक्के और बार खरीदकर सुरक्षित निवेश करना उचित मानते हैं। यही कारण है कि बाजार में मांग बढ़ने के साथ गुणवत्ता को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

चांदी की शुद्धता को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल

विशेषज्ञों का कहना है कि सभी चांदी उत्पाद समान गुणवत्ता वाले नहीं होते। कुछ मामलों में चांदी में तांबा, निकेल या अन्य धातुओं का मिश्रण अपेक्षा से अधिक किया जा सकता है। यदि किसी उत्पाद को 999 प्योरिटी बताकर बेचा जा रहा है लेकिन उसकी वास्तविक शुद्धता कम है, तो ग्राहक को उसकी कीमत के अनुरूप गुणवत्ता नहीं मिलती।

विशेष रूप से चांदी के सिक्के, पूजा सामग्री, बर्तन और आभूषण खरीदते समय ग्राहकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। प्रमाणित उत्पाद खरीदने से गुणवत्ता को लेकर भरोसा बढ़ता है।

BIS हॉलमार्किंग क्यों है जरूरी और खरीदारी के समय किन बातों का रखें ध्यान

सितंबर 2025 से लागू हुआ हॉलमार्किंग नियम

जानकारों के अनुसार, ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) ने सितंबर 2025 से चांदी से बने विभिन्न उत्पादों के लिए हॉलमार्किंग को अनिवार्य किया था। इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्राहकों को प्रमाणित गुणवत्ता उपलब्ध कराना और बाजार में मिलावटी या गलत दावों वाले उत्पादों पर रोक लगाना है।

इसके बावजूद कुछ स्थानों पर बिना प्रमाणित हॉलमार्क वाले उत्पाद मिलने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसे में ग्राहकों को खरीदारी से पहले उत्पाद पर मौजूद हॉलमार्क और उसकी शुद्धता से संबंधित जानकारी को ध्यान से देखना चाहिए।

BIS हॉलमार्क क्या दर्शाता है

हॉलमार्क किसी भी कीमती धातु की गुणवत्ता का प्रमाण माना जाता है। जब किसी उत्पाद पर BIS हॉलमार्क मौजूद होता है, तो यह संकेत मिलता है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसकी जांच और प्रमाणन किया गया है। इससे ग्राहक को उत्पाद की शुद्धता के बारे में अधिक भरोसा मिलता है।

हालांकि खरीदारी करते समय केवल हॉलमार्क देखना ही पर्याप्त नहीं है। ग्राहकों को बिल लेना, विक्रेता की विश्वसनीयता जांचना और उत्पाद से जुड़ी जानकारी भी सुरक्षित रखना चाहिए।

999 प्योरिटी का क्या मतलब होता है

बाजार में अक्सर 999 प्योरिटी वाली चांदी का उल्लेख किया जाता है। सामान्य रूप से इसका अर्थ अत्यधिक शुद्ध चांदी से होता है। हालांकि किसी भी उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता की पुष्टि प्रमाणित परीक्षण और हॉलमार्क के आधार पर ही की जानी चाहिए। केवल मौखिक दावा या पैकेजिंग पर लिखा विवरण पर्याप्त नहीं माना जाता।

किन शहरों में होता है बड़ा चांदी कारोबार

भारत के कई शहर चांदी निर्माण और व्यापार के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। इनमें जयपुर, राजकोट, आगरा, कोल्हापुर, सलेम और कटक जैसे शहर शामिल हैं। यहां बड़ी मात्रा में चांदी के आभूषण, धार्मिक सामग्री, बर्तन और सजावटी उत्पाद तैयार किए जाते हैं।

बढ़ते कारोबार के कारण इन बाजारों में गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ताओं की जागरूकता बढ़ने से प्रमाणित उत्पादों की मांग में भी वृद्धि होगी।

हॉलमार्किंग सेंटरों की संख्या क्यों बनी चिंता का विषय

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत में हर वर्ष लगभग 7 हजार टन चांदी की खपत होती है। इसके मुकाबले चांदी की जांच और प्रमाणन के लिए लगभग 286 अस्सेयिंग और हॉलमार्किंग सेंटर उपलब्ध हैं। वहीं सोने की सालाना खपत लगभग 800 से 850 टन के बीच होने के बावजूद उसके लिए 1,595 हॉलमार्किंग सेंटर कार्यरत हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चांदी की मांग लगातार बढ़ती रहती है, तो गुणवत्ता जांच की व्यवस्था को भी उसी अनुपात में मजबूत करना आवश्यक होगा ताकि उपभोक्ताओं को समय पर प्रमाणित उत्पाद उपलब्ध हो सकें।

चांदी खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें

खरीदारी हमेशा विश्वसनीय और प्रतिष्ठित ज्वेलर या विक्रेता से करें। उत्पाद पर BIS हॉलमार्क की जांच करें और शुद्धता संबंधी जानकारी अवश्य देखें। खरीदारी के बाद पक्का बिल लेना न भूलें, क्योंकि भविष्य में एक्सचेंज, बिक्री या किसी शिकायत की स्थिति में यही सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है।

यदि किसी उत्पाद की कीमत बाजार दर से असामान्य रूप से कम हो, तो उसकी गुणवत्ता की अतिरिक्त जांच करना उचित माना जाता है। बिना बिल या बिना प्रमाणन वाले उत्पाद खरीदने से बचना चाहिए।

जागरूक ग्राहक ही कर सकते हैं सुरक्षित खरीदारी

कीमती धातुओं की खरीदारी में जागरूकता सबसे बड़ा सुरक्षा उपाय है। बाजार में उपलब्ध विकल्पों की तुलना करें, शुद्धता प्रमाणन को समझें, हॉलमार्क की जांच करें और केवल भरोसेमंद विक्रेताओं से खरीदारी करें। इससे न केवल आर्थिक नुकसान से बचाव हो सकता है बल्कि भविष्य में उत्पाद की बिक्री या विनिमय के समय भी किसी प्रकार की परेशानी की संभावना कम रहती है।