पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच रिश्तों में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। रविवार तड़के पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में हवाई कार्रवाई की, जिसके बाद दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। पाकिस्तान सेना का कहना है कि यह हमला आतंकवादी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया था, जबकि अफगानिस्तान ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
पाकिस्तानी सेना के अनुसार, यह अभियान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकी नेटवर्क के खिलाफ चलाया गया। इस्लामाबाद का दावा है कि कार्रवाई पूरी तरह खुफिया जानकारी के आधार पर की गई और इसका उद्देश्य उन ठिकानों को नष्ट करना था, जहां से पाकिस्तान विरोधी गतिविधियां संचालित होने की आशंका थी।
हालांकि, अफगान पक्ष ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। अफगान अधिकारियों का कहना है कि हवाई हमलों में आम नागरिकों को नुकसान पहुंचा और यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। दोनों देशों के अलग-अलग दावों के कारण सीमा क्षेत्र में स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
पाकिस्तान ने आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई का किया दावा
पाकिस्तान सेना ने दावा किया कि अफगानिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में मौजूद सात आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। सेना के मुताबिक, इन ठिकानों का इस्तेमाल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और इस्लामिक स्टेट से जुड़े समूहों द्वारा किया जा रहा था।
पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि कुछ आतंकी संगठन अफगान सीमा के पास से अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। इस्लामाबाद का कहना है कि इन संगठनों के कारण पाकिस्तान में सुरक्षा चुनौतियां बढ़ी हैं और कई हमलों में इनके नेटवर्क की भूमिका सामने आई है।
पाकिस्तान अधिकारियों ने यह भी कहा कि हाल के आत्मघाती हमलों और सुरक्षा बलों पर हुए हमलों के बाद यह कार्रवाई जरूरी हो गई थी। उनका कहना है कि देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आतंकी ढांचे को कमजोर करना प्राथमिकता है।
अफगानिस्तान ने कार्रवाई को बताया संप्रभुता का उल्लंघन
अफगान रक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अफगान सरकार का कहना है कि किसी भी देश को उसकी सीमा में बिना अनुमति सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।
अफगान अधिकारियों ने आरोप लगाया कि ड्रोन और हवाई हमलों में नागरिक इलाकों को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि सीमा पार हमले क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं और दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा सकते हैं।
अफगानिस्तान की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि वह इस कार्रवाई का जवाब देने के लिए उचित समय और तरीके का चुनाव करेगा।
नांगरहार में नागरिकों की मौत के दावे
अफगान मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नांगरहार प्रांत में एक घर को निशाना बनाया गया, जिसमें एक परिवार के लोग मौजूद थे। रिपोर्टों में दावा किया गया कि इस हमले में महिलाओं और बच्चों समेत कई लोगों की मौत हुई।
इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन की ओर से दावा किया गया कि हमले में 16 लोगों की जान गई। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
नागरिकों की मौत को लेकर दोनों देशों के बयान अलग-अलग हैं। अफगानिस्तान इसे आम लोगों को नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई बता रहा है, जबकि पाकिस्तान का कहना है कि उसका अभियान केवल आतंकी ठिकानों तक सीमित था।
पाकिस्तान में आतंकी घटनाओं के बाद बढ़ी कार्रवाई
पाकिस्तान का कहना है कि हाल के महीनों में देश में आतंकी गतिविधियों में वृद्धि हुई है। खैबर पख्तूनख्वा और बाजौर जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर हमले किए गए हैं।
इसके अलावा इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद पर हुए हमले ने भी सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया। पाकिस्तान इन घटनाओं के पीछे मौजूद आतंकी नेटवर्क को अफगान क्षेत्र से जुड़े होने का आरोप लगाता है।
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वह अपने नागरिकों और सुरक्षा बलों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी। वहीं अफगानिस्तान का कहना है कि समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से किया जाना चाहिए।
TTP को लेकर दोनों देशों में पुराना विवाद
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP को लेकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP से जुड़े लोगों को अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकाने मिल रहे हैं।
हालांकि, अफगान तालिबान इस आरोप को लगातार खारिज करता रहा है। उसका कहना है कि वह किसी भी संगठन को दूसरे देशों के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देता।
यह विवाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव का एक बड़ा कारण बना हुआ है। सीमा सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच कई बार बातचीत भी हुई है, लेकिन स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है।
दोहा समझौते को लेकर भी उठे सवाल
पाकिस्तान ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए 2020 के दोहा समझौते का भी हवाला दिया है। इस समझौते में यह बात कही गई थी कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाएगा।
इस्लामाबाद का कहना है कि यदि अफगान क्षेत्र से आतंकी गतिविधियां जारी रहती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर ध्यान देना चाहिए।
वहीं अफगानिस्तान का पक्ष है कि किसी भी समस्या का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक बातचीत और आपसी सहयोग से होना चाहिए।
सीमा पर तनाव का क्षेत्रीय असर
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद और सुरक्षा मुद्दे लंबे समय से चले आ रहे हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, राजनीतिक और सुरक्षा संबंधों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं।
हालिया एयरस्ट्राइक के बाद स्थिति और संवेदनशील हो गई है। सैन्य कार्रवाई, नागरिक नुकसान के दावे और दोनों देशों के कड़े बयानों ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक तनाव बने रहने से दोनों देशों के व्यापार, सीमा आवागमन और आम नागरिकों के जीवन पर भी असर पड़ सकता है।
आगे की स्थिति पर टिकी नजरें
फिलहाल पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों अपने-अपने रुख पर कायम हैं। पाकिस्तान इसे आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा अभियान बता रहा है, जबकि अफगानिस्तान इसे सीमा उल्लंघन के रूप में देख रहा है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि दोनों देशों के बीच आने वाले दिनों में बातचीत का रास्ता अपनाया जाता है या तनाव और बढ़ता है। सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और क्षेत्रीय शांति से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के अगले कदम बेहद महत्वपूर्ण होंगे।




