भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement – ITA) को लेकर होने वाली महत्वपूर्ण बैठक फिलहाल स्थगित कर दी गई है। यह बैठक 23 से 26 फरवरी के बीच अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में आयोजित होने वाली थी, जिसमें दोनों देशों के अधिकारी समझौते के अंतिम पहलुओं पर चर्चा करने वाले थे। हालांकि, अमेरिका की बदली हुई टैरिफ नीति और वैश्विक व्यापार नियमों में आए नए बदलावों के बाद दोनों पक्षों ने आगे की बातचीत से पहले पूरे मामले की समीक्षा करने का फैसला किया है।
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से व्यापार संबंधों को और मजबूत करने के लिए बातचीत चल रही है। अंतरिम व्यापार समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बाजार पहुंच बढ़ाना, कुछ उत्पादों पर शुल्क कम करना और द्विपक्षीय व्यापार को नई दिशा देना था। लेकिन अमेरिका की नई टैरिफ व्यवस्था ने इस प्रक्रिया को कुछ समय के लिए धीमा कर दिया है।
टैरिफ बदलाव के कारण टली महत्वपूर्ण बैठक
भारत और अमेरिका के बीच ITA के तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति बनी थी। इस प्रस्ताव को दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा था।
इसी बीच अमेरिका की टैरिफ नीति में अचानक बदलाव देखने को मिला। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा वैश्विक टैरिफ से जुड़े फैसले के बाद व्यापारिक समीकरण बदल गए। इसके बाद अमेरिका प्रशासन की ओर से पहले 10 प्रतिशत नया वैश्विक टैरिफ घोषित किया गया और कुछ ही समय बाद इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया।
अब नई स्थिति यह है कि अमेरिका द्वारा लागू किया जा रहा 15 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ ITA में प्रस्तावित 18 प्रतिशत टैरिफ से कम है। इसी अंतर को लेकर दोनों देशों ने समझौते के प्रभाव और शर्तों की दोबारा समीक्षा करने का निर्णय लिया है।
भारत पर 15 प्रतिशत या 18 प्रतिशत टैरिफ को लेकर असमंजस
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में टैरिफ दर को लेकर अभी अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। एक ओर अमेरिकी नेतृत्व की ओर से संकेत दिए गए हैं कि भारत के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा और बातचीत जारी रहेगी।
वहीं दूसरी ओर कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका के नए सेक्शन 122 टैरिफ नियमों के तहत उन देशों पर भी वैश्विक टैरिफ लागू हो सकता है, जिनके साथ अमेरिका व्यापार समझौते की प्रक्रिया में है।
अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो भारत पर प्रभावी टैरिफ दर 18 प्रतिशत की जगह 15 प्रतिशत रह सकती है। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय दोनों देशों के बीच होने वाली अगली बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगा।
ITA के तहत अब तक किन मुद्दों पर बनी थी सहमति
अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर भारत और अमेरिका के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी थी। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया था कि दोनों देशों का लक्ष्य व्यापार को आसान बनाना और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
समझौते के तहत कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार थे:
भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच देने की योजना बनाई गई थी। कुछ उत्पादों पर शून्य टैरिफ की सुविधा प्रस्तावित थी।
भारत ने अपने कृषि और डेयरी क्षेत्र को सुरक्षा देते हुए अमेरिकी उत्पादों के लिए बड़े स्तर पर बाजार खोलने से परहेज किया।
भारत ने अगले कुछ वर्षों में अमेरिका से बड़ी मात्रा में उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई थी, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन बेहतर हो सके।
रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाए गए अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क को हटाने पर भी चर्चा हुई थी।
समझौते में देरी से क्या असर पड़ सकता है
भारत और अमेरिका की योजना थी कि फरवरी के अंत तक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाए और मार्च में इसे औपचारिक रूप से मंजूरी दी जाए। इसके बाद अप्रैल से इसे लागू करने की तैयारी थी।
अब बैठक टलने के कारण इस समयसीमा में बदलाव संभव है। हालांकि दोनों देशों की ओर से यह संकेत दिए गए हैं कि यह केवल अस्थायी देरी है और बातचीत पूरी तरह रुकी नहीं है।
व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, टैरिफ से जुड़े नए बदलावों को समझना दोनों देशों के लिए जरूरी है, क्योंकि किसी भी समझौते का सीधा प्रभाव निर्यातकों, आयातकों और उद्योगों पर पड़ता है।
भारत को ITA से मिलने वाले संभावित फायदे
यदि यह समझौता लागू होता है तो भारत के कई क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।
संभावित लाभों में शामिल हैं:
अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर कम शुल्क
दवा उद्योग, रत्न एवं आभूषण और विमान उपकरण जैसे क्षेत्रों को बेहतर प्रतिस्पर्धात्मक अवसर
MSME कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार तक आसान पहुंच
टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, केमिकल और हस्तशिल्प उद्योगों को निर्यात बढ़ाने का मौका
भारतीय कंपनियों के लिए दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक में विस्तार की संभावना
कृषि और डेयरी सेक्टर को रखा गया सुरक्षित
भारत ने इस व्यापार समझौते में अपने कृषि और डेयरी क्षेत्र को लेकर सावधानी बरती है। सरकार का कहना है कि किसानों के हितों और देश की खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन क्षेत्रों में कोई बड़ी रियायत नहीं दी गई है।
मक्का, गेहूं, चावल, दूध, पनीर, पोल्ट्री और अन्य संवेदनशील कृषि उत्पादों पर अमेरिका को विशेष छूट नहीं दी गई। इससे घरेलू किसानों और कृषि बाजार को सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, कुछ चुनिंदा अमेरिकी उत्पादों जैसे ड्राई फ्रूट्स, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स पर आयात शुल्क में बदलाव को लेकर बातचीत हुई है।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर नजर
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देश तकनीक, रक्षा, ऊर्जा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
अंतरिम व्यापार समझौते को भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ नीति में बदलाव के कारण फिलहाल प्रक्रिया धीमी हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहने की संभावना है।
अब आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समीक्षा के बाद भारत और अमेरिका किस टैरिफ व्यवस्था पर सहमत होते हैं और व्यापार समझौते को किस समयसीमा में आगे बढ़ाया जाता है।




