पार्टनर की नींद उड़ा रहे हैं खर्राटे? रोजमर्रा की इन आदतों में बदलाव से मिल सकती है राहत

पार्टनर की नींद उड़ा रहे हैं खर्राटे? रोजमर्रा की इन आदतों में बदलाव से मिल सकती है राहत

रात में सोते समय खर्राटे लेना एक सामान्य समस्या मानी जाती है, लेकिन कई मामलों में यह केवल नींद के दौरान होने वाली आवाज नहीं होती, बल्कि शरीर की कुछ स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों का संकेत भी हो सकती है। लगातार और तेज खर्राटे न केवल स्वयं व्यक्ति की नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं, बल्कि उसके साथ सोने वाले परिवार के सदस्य या पार्टनर की नींद भी बाधित कर सकते हैं।

अधिकांश लोग खर्राटों को उम्र, थकान या गहरी नींद से जोड़कर नज़रअंदाज कर देते हैं। हालांकि यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, बहुत तेज आवाज के साथ हो या इसके साथ सांस रुकने जैसी स्थिति महसूस हो, तो चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक हो सकता है। कई बार खर्राटे ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea) जैसी गंभीर स्थिति का भी संकेत हो सकते हैं।

अच्छी बात यह है कि सामान्य कारणों से होने वाले खर्राटों को कई मामलों में जीवनशैली में सुधार, सही सोने की आदतों और कुछ घरेलू उपायों की मदद से काफी हद तक कम किया जा सकता है।

खर्राटे क्यों आते हैं?

जब सोते समय हवा का प्रवाह नाक, मुंह या गले से सामान्य रूप से नहीं गुजर पाता, तब आसपास के ऊतकों में कंपन होने लगता है। यही कंपन खर्राटों की आवाज के रूप में सुनाई देता है। सांस का रास्ता जितना अधिक संकरा होगा, खर्राटों की आवाज उतनी ही तेज हो सकती है।

खर्राटों की समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है, हालांकि बढ़ती उम्र, अधिक वजन, धूम्रपान, शराब का सेवन और नाक से जुड़ी समस्याओं में इसका जोखिम अधिक माना जाता है।

किन कारणों से बढ़ सकती है समस्या?

खर्राटों के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें मोटापा, नाक बंद रहना, एलर्जी, साइनस की समस्या, धूम्रपान, शराब का सेवन, गलत सोने की स्थिति, थकान, पर्याप्त नींद न लेना और कुछ मामलों में गले की संरचना से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हो सकती हैं।

यदि व्यक्ति को रात में बार-बार सांस रुकने, सुबह सिरदर्द, दिनभर अत्यधिक नींद आने या लगातार थकान रहने की शिकायत हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित रहता है।

नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है असर

लगातार खर्राटे आने से गहरी और आरामदायक नींद प्रभावित हो सकती है। कई बार व्यक्ति को स्वयं इसका एहसास नहीं होता, लेकिन सुबह उठने पर थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और दिनभर सुस्ती महसूस हो सकती है।

यदि समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो यह दैनिक जीवन, कार्य क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डाल सकती है।

खर्राटे कम करने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय। कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है?

वजन नियंत्रित रखना सबसे महत्वपूर्ण कदम

विशेषज्ञों के अनुसार अधिक वजन खर्राटों का एक प्रमुख कारण हो सकता है। जब शरीर में अतिरिक्त चर्बी बढ़ जाती है, विशेष रूप से गर्दन के आसपास, तो सोते समय श्वसन मार्ग पर दबाव बढ़ सकता है। इससे हवा के प्रवाह में रुकावट आती है और खर्राटों की संभावना बढ़ जाती है।

संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर वजन नियंत्रित रखने से कई लोगों में खर्राटों की समस्या में सुधार देखा जा सकता है।

सोने की सही स्थिति अपनाएं

पीठ के बल सोने पर जीभ और गले की मांसपेशियां पीछे की ओर खिसक सकती हैं, जिससे सांस का रास्ता कुछ हद तक संकरा हो जाता है। इस स्थिति में खर्राटे आने की संभावना बढ़ जाती है।

कई विशेषज्ञ करवट लेकर सोने की सलाह देते हैं क्योंकि इससे श्वसन मार्ग अपेक्षाकृत खुला रहता है और हवा का प्रवाह बेहतर हो सकता है।

धूम्रपान से दूरी बनाएं

धूम्रपान गले और श्वसन मार्ग में सूजन पैदा कर सकता है। इससे सांस लेने का रास्ता संकरा हो सकता है और खर्राटों की समस्या बढ़ सकती है।

धूम्रपान छोड़ने से केवल खर्राटों में ही नहीं बल्कि फेफड़ों और हृदय के स्वास्थ्य में भी सकारात्मक सुधार हो सकता है।

शराब का सेवन सीमित करें

सोने से पहले शराब पीने से गले की मांसपेशियां अधिक ढीली हो सकती हैं। इससे श्वसन मार्ग पर प्रभाव पड़ता है और खर्राटों की आवाज तेज हो सकती है।

यदि किसी व्यक्ति को नियमित रूप से खर्राटे आते हैं, तो सोने से पहले शराब के सेवन से बचना लाभकारी माना जाता है।

नाक बंद होने पर भाप लेना उपयोगी हो सकता है

यदि एलर्जी, सर्दी या नाक बंद रहने के कारण सांस लेने में कठिनाई हो रही है, तो सोने से पहले गर्म पानी की भाप लेना कुछ लोगों के लिए राहतदायक हो सकता है। इससे नाक के मार्ग खुलने में सहायता मिल सकती है और सांस लेना आसान हो सकता है।

हालांकि यदि नाक लंबे समय तक बंद रहती है, तो डॉक्टर से उचित उपचार कराना आवश्यक है।

पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है

शरीर में पानी की कमी होने पर नाक और गले में मौजूद म्यूकस अधिक गाढ़ा हो सकता है, जिससे सांस लेने में रुकावट महसूस हो सकती है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और शरीर को हाइड्रेट रखना लाभदायक माना जाता है।

गर्मियों में पानी, छाछ, नारियल पानी और अन्य स्वस्थ तरल पदार्थों का सेवन शरीर में पानी की कमी होने से बचाने में मदद करता है।

सही तकिए का चुनाव करें

बहुत अधिक ऊंचा या बहुत नीचे तकिया लगाने से गर्दन और श्वसन मार्ग की स्थिति प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञ सामान्यतः ऐसे तकिए का उपयोग करने की सलाह देते हैं जो सिर और गर्दन को उचित सहारा दे तथा सांस लेने में बाधा न बने।

मध्यम ऊंचाई वाला तकिया कई लोगों के लिए अधिक आरामदायक साबित हो सकता है।

नींद का नियमित समय बनाए रखें

अनियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद न लेने से शरीर अधिक थक जाता है। अत्यधिक थकान की स्थिति में सोते समय गले की मांसपेशियां अधिक ढीली हो सकती हैं, जिससे खर्राटों की संभावना बढ़ सकती है।

प्रतिदिन लगभग एक ही समय पर सोना और जागना स्वस्थ नींद की आदत विकसित करने में मदद करते हैं।

एलर्जी और नाक की समस्याओं का समय पर उपचार कराएं

यदि बार-बार एलर्जी, साइनस संक्रमण या नाक बंद रहने की समस्या होती है, तो इसका उचित उपचार कराना आवश्यक है। लंबे समय तक नाक बंद रहने से व्यक्ति मुंह से सांस लेने लगता है, जिससे खर्राटों की समस्या बढ़ सकती है।

डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लेने से श्वसन मार्ग बेहतर तरीके से कार्य कर सकता है।

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

यदि खर्राटे बहुत तेज हों, सोते समय सांस रुकने जैसी स्थिति महसूस हो, रात में बार-बार नींद खुलती हो, सुबह उठने पर सिरदर्द रहता हो, दिनभर अत्यधिक नींद आती हो या लगातार थकान महसूस होती हो, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

ऐसे मामलों में चिकित्सक आवश्यक जांच के आधार पर यह निर्धारित कर सकते हैं कि समस्या सामान्य खर्राटों की है या किसी अन्य स्वास्थ्य स्थिति, जैसे ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया, से जुड़ी हुई है।

स्वस्थ जीवनशैली से मिल सकता है लाभ

नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, वजन नियंत्रण, पर्याप्त नींद, धूम्रपान और शराब से दूरी, साथ ही नाक और श्वसन तंत्र की देखभाल जैसी आदतें कई लोगों में खर्राटों की समस्या को कम करने में मदद कर सकती हैं। यदि घरेलू उपाय अपनाने के बावजूद समस्या बनी रहती है, तो स्वयं उपचार करने के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।