पनीर भारतीय खान-पान का ऐसा हिस्सा है, जिसे प्रोटीन और पोषण का अच्छा स्रोत माना जाता है। घर की सब्जी से लेकर रेस्टोरेंट की ग्रेवी और पार्टी के स्टार्टर तक, पनीर का इस्तेमाल खूब होता है। यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग भी लगातार बनी रहती है। लेकिन क्या हर सफेद और नरम चीज, जो देखने में पनीर जैसी लगे, वास्तव में दूध से बना पनीर ही होती है? जवाब है—जरूरी नहीं।
बाजार में एक ऐसा उत्पाद भी इस्तेमाल किया जाता रहा है, जो देखने, स्वाद और बनावट में पनीर से काफी मिलता-जुलता है, लेकिन इसे पारंपरिक तरीके से दूध से तैयार नहीं किया जाता। इसे एनालॉग पनीर कहा जाता है। नाम भले ही आम लोगों के लिए नया हो, लेकिन खाद्य क्षेत्र में इसका इस्तेमाल और इसकी संरचना को लेकर चर्चा लंबे समय से होती रही है।
एनालॉग पनीर को सामान्य पनीर समझकर खाने पर सबसे बड़ी समस्या यह हो सकती है कि उपभोक्ता जिस पोषण की उम्मीद कर रहा है, उसे वह उसी मात्रा में न मिले। खासतौर पर अगर कोई व्यक्ति पनीर को अपनी डाइट में प्रोटीन के प्रमुख स्रोत के तौर पर शामिल करता है, तो उसके लिए उत्पाद की सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी समझना जरूरी हो जाता है।
महाराष्ट्र में एनालॉग पनीर को लेकर सख्ती
एनालॉग पनीर को लेकर महाराष्ट्र में रोक लगाए जाने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इसके बाद दूसरे राज्यों में भी खाद्य सुरक्षा को लेकर निगरानी बढ़ाने की बात सामने आई है।
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने भी कहा कि खाद्य उत्पादों की लगातार जांच कराई जा रही है। उनके मुताबिक पनीर समेत अलग-अलग खाद्य वस्तुओं के सैंपलों की जांच की जा रही है। फूड सेफ्टी विभाग को इस मामले पर नजर रखने, आवश्यक सैंपल लेने और उनकी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान यदि किसी उत्पाद में नियमों का उल्लंघन मिलता है तो उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
इसका मतलब साफ है कि उपभोक्ताओं को भी बाजार से पनीर खरीदते समय केवल उसके रंग, आकार या कीमत के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए। पैकिंग पर लिखी जानकारी को देखना भी उतना ही जरूरी है।
आखिर क्या होता है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि पारंपरिक पनीर कैसे अलग होता है। सामान्य पनीर दूध से बनाया जाता है। दूध में मौजूद प्रोटीन और फैट के साथ कैल्शियम जैसे कई पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। यही कारण है कि पनीर को भोजन में पौष्टिक डेयरी विकल्प माना जाता है।
इसके विपरीत एनालॉग पनीर में दूध की जगह या दूध के कुछ हिस्सों के स्थान पर दूसरे घटकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें वेजिटेबल फैट, वनस्पति तेल, वेजिटेबल प्रोटीन और स्टार्च जैसी सामग्री शामिल हो सकती है। यानी इसकी शक्ल पनीर जैसी होने के बावजूद इसकी मूल संरचना पारंपरिक पनीर से अलग होती है।
गंगाराम अस्पताल के गैस्ट्रोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. अनिल अरोड़ा के मुताबिक असली पनीर और एनालॉग पनीर में पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण अंतर हो सकता है। दूध से बने पनीर में मिल्क प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व होते हैं, जबकि एनालॉग उत्पाद में इनकी जगह वनस्पति स्रोतों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
यही वजह है कि किसी उत्पाद का सिर्फ पनीर जैसा दिखना यह साबित नहीं करता कि वह वास्तविक दूध से बना पनीर है।
सस्ता विकल्प होने की वजह से हो सकता है इस्तेमाल
एनालॉग पनीर का मुद्दा केवल स्वाद या दिखावट तक सीमित नहीं है। इसकी कीमत और उत्पादन लागत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। डेयरी आधारित पनीर तैयार करने में दूध की जरूरत होती है, जबकि एनालॉग उत्पाद में अलग-अलग वनस्पति आधारित सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।
ऐसे में उपभोक्ता के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वह किसी होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट या खुले बाजार में इस्तेमाल किए जा रहे उत्पाद की वास्तविक संरचना आसानी से नहीं जान पाता। सामने आने पर यह बिल्कुल सामान्य पनीर जैसा दिखाई दे सकता है।
इसलिए यदि किसी डिश में पनीर इस्तेमाल किया गया है तो केवल देखकर यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि वह दूध से बना पारंपरिक पनीर है या किसी दूसरे आधार से तैयार उत्पाद।
पैकेट वाला पनीर खरीदते समय लेबल पढ़ना जरूरी
डायटिशियन अंजली भोला के अनुसार पैकेट बंद खाद्य उत्पाद खरीदते समय उपभोक्ता को सबसे पहले उसका लेबल देखना चाहिए। पैकेट के पीछे आमतौर पर सामग्री की सूची और पोषण संबंधी जानकारी दी जाती है। इसे पढ़कर उत्पाद के बारे में काफी हद तक जानकारी हासिल की जा सकती है।
यदि किसी उत्पाद में दूध के बजाय वेजिटेबल फैट, वनस्पति तेल या वेजिटेबल प्रोटीन जैसी सामग्री प्रमुख रूप से मौजूद है, तो उसे सामान्य दूध से बने पनीर के बराबर नहीं समझना चाहिए।
कई बार लोग केवल पैकेट के सामने लिखे बड़े अक्षरों या तस्वीर को देखकर उत्पाद खरीद लेते हैं। लेकिन वास्तविक जानकारी अक्सर पीछे दी गई सामग्री की सूची में होती है। इसलिए खरीदारी करते समय कुछ सेकंड निकालकर लेबल पढ़ना बेहतर है।
असली पनीर और एनालॉग पनीर में क्या अंतर है?
दोनों के बीच अंतर को आसान भाषा में समझें तो असली पनीर का आधार दूध है, जबकि एनालॉग पनीर में वनस्पति आधारित सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।
पारंपरिक पनीर में दूध से मिलने वाले प्रोटीन, फैट और कैल्शियम प्रमुख पोषक तत्व होते हैं। वहीं एनालॉग पनीर में वेजिटेबल फैट, वेजिटेबल प्रोटीन और स्टार्च जैसी सामग्री इस्तेमाल हो सकती है।
यानी दोनों का रंग और टेक्सचर एक जैसा होने के बावजूद शरीर को मिलने वाला पोषण अलग हो सकता है। खासकर वे लोग जो अपनी डाइट में पनीर को प्रोटीन की वजह से शामिल करते हैं, उनके लिए यह अंतर समझना महत्वपूर्ण है।
यहां एक बात ध्यान देने वाली है कि हर वनस्पति आधारित उत्पाद अपने आप में जहरीला नहीं होता। असली चिंता यह है कि उपभोक्ता को उत्पाद की सही जानकारी मिले और उसे किसी दूसरे खाद्य पदार्थ के नाम पर गलत तरीके से न बेचा जाए। खाद्य सुरक्षा के नियमों और लेबलिंग का पालन इसलिए महत्वपूर्ण है।
घर पर पनीर की जांच के लिए बताया गया तरीका
असली और मिलावटी या अलग संरचना वाले पनीर को लेकर कई घरेलू जांच के तरीके बताए जाते हैं। अंजली भोला ने एक तरीका बताते हुए कहा कि पनीर का छोटा टुकड़ा लेकर उसे कुछ मिनट तक उबाला जा सकता है। इसके बाद उसे ठंडा करके उस पर 2-3 बूंदें आयोडीन डाली जाती हैं।
यदि पनीर का रंग नीला या काला पड़ जाता है तो इसमें स्टार्च की मौजूदगी का संकेत मिल सकता है। हालांकि इस तरह के घरेलू टेस्ट को अंतिम या वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। किसी उत्पाद की सही संरचना और खाद्य सुरक्षा की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला जांच अधिक भरोसेमंद होती है।
इसलिए घर पर किए गए किसी एक टेस्ट के आधार पर उत्पाद को पूरी तरह सुरक्षित या असुरक्षित घोषित करना उचित नहीं है।
रेस्टोरेंट में पनीर खाते समय भी रहें सतर्क
बाहर खाना खाते समय उपभोक्ता के पास पैकेट का लेबल देखने का विकल्प अक्सर नहीं होता। ऐसे में किसी डिश में इस्तेमाल किए गए पनीर की वास्तविक संरचना का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। खासकर जब उत्पाद पहले से काटकर, पकाकर या मसालेदार ग्रेवी में परोसा गया हो।
ऐसी स्थिति में भरोसेमंद और साफ-सफाई के मानकों का पालन करने वाले प्रतिष्ठानों से खाना लेना बेहतर विकल्प है। यदि किसी खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो तो उसे खाने से बचना चाहिए और जरूरत पड़ने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत की जा सकती है।
सिर्फ सस्ता देखकर पनीर न खरीदें
पनीर खरीदते समय बहुत कम कीमत देखकर तुरंत फैसला करना सही नहीं है। कीमत कई चीजों पर निर्भर करती है, लेकिन यदि कोई उत्पाद सामान्य बाजार दर की तुलना में असामान्य रूप से सस्ता है तो उसकी गुणवत्ता और सामग्री के बारे में जानकारी लेना जरूरी है।
खरीदते समय पैकेट की सील, एक्सपायरी डेट, सामग्री की सूची, पोषण संबंधी जानकारी और निर्माता की जानकारी जरूर देखें। खुले में बिक रहे पनीर के मामले में भी उसकी ताजगी और स्वच्छता पर ध्यान देना चाहिए।
आखिरकार पनीर को प्रोटीन और पोषण के लिए खाने वाले लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि वे जिस चीज को पनीर समझकर खरीद रहे हैं, वह वास्तव में क्या है। दिखने में पनीर जैसा होना और पोषण की दृष्टि से पनीर होना दो अलग बातें हैं। इसलिए अगली बार पनीर खरीदने से पहले सिर्फ उसका रंग और कीमत नहीं, बल्कि उसकी सामग्री और गुणवत्ता भी जरूर जांचें।




