बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत-इजरायल संबंधों की सराहना की, कहा- भारत में इजरायल के प्रति सबसे अधिक समर्थन देखने को मिलता है
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत और इजरायल के बीच लगातार मजबूत होते संबंधों की सराहना करते हुए कहा है कि भारत उन देशों में शामिल है, जहां इजरायल को व्यापक समर्थन और सकारात्मक दृष्टिकोण प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में इजरायल के प्रति जो सम्मान और सहयोग की भावना दिखाई देती है, वह कई अन्य देशों की तुलना में अलग अनुभव कराती है।
वेस्ट बैंक में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान नेतन्याहू ने दोनों देशों के संबंधों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार इज़राइल को आलोचना और विरोध का सामना करना पड़ता है, लेकिन भारत में स्थिति अलग दिखाई देती है। उनके अनुसार, भारतीय नागरिकों के बीच इज़राइल के प्रति सकारात्मक सोच और सहयोग की भावना लगातार मजबूत हुई है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और इजरायल के बीच रक्षा, कृषि, विज्ञान, तकनीक, व्यापार, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे अनेक क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों और संयुक्त परियोजनाओं पर काम किया है।
भारत और इज़राइल के संबंध पिछले तीन दशकों में तेजी से विकसित हुए हैं। वर्ष 1992 में पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक, सामरिक और तकनीकी सहयोग लगातार बढ़ा है। आज दोनों देश कई रणनीतिक क्षेत्रों में एक-दूसरे के महत्वपूर्ण साझेदार माने जाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान भारत को लेकर क्या बोले नेतन्याहू
अपने संबोधन में बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में इजरायल के प्रति अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती हैं, लेकिन भारत में उन्हें व्यापक समर्थन और सकारात्मक भावना का अनुभव होता है। उन्होंने दावा किया कि भारत में उनके सबसे अधिक समर्थक और फॉलोवर्स मौजूद हैं तथा भारतीय जनता इजरायल के साथ मजबूत संबंधों को महत्व देती है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय लोगों के बीच इजरायल के नागरिकों के प्रति अपनापन और सहयोग की भावना दिखाई देती है। उनके अनुसार, यही कारण है कि दोनों देशों की मित्रता केवल सरकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के स्तर पर भी लगातार मजबूत हो रही है।
नेतन्याहू ने भारत को एक महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दी है। उनका मानना है कि भविष्य में भी यह साझेदारी विभिन्न क्षेत्रों में और मजबूत होती रहेगी।
भारत और इजरायल के रिश्तों का लगातार हुआ विस्तार
भारत और इज़राइल के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उल्लेखनीय विस्तार देखने को मिला है। रक्षा और सुरक्षा सहयोग से शुरुआत करने वाले द्विपक्षीय रिश्ते अब व्यापार, कृषि, जल प्रबंधन, विज्ञान, डिजिटल तकनीक, शिक्षा, स्टार्टअप, स्वास्थ्य और नवाचार जैसे अनेक क्षेत्रों तक पहुंच चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों देशों के बीच सहयोग का सबसे महत्वपूर्ण आधार तकनीकी नवाचार और रणनीतिक साझेदारी है। इजरायल अपनी उन्नत तकनीक और अनुसंधान क्षमता के लिए जाना जाता है, जबकि भारत विशाल बाजार, तकनीकी प्रतिभा और विनिर्माण क्षमता के कारण वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय बैठकें, संयुक्त कार्य समूह और विभिन्न मंत्रालयों के बीच सहयोग की व्यवस्था भी स्थापित की गई है, जिससे कई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के बाद बढ़ी रणनीतिक साझेदारी
भारत और इज़राइल के संबंधों में नई गति उस समय देखने को मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इज़राइल का ऐतिहासिक दौरा किया। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक इजरायल यात्रा थी, जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया।
इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच कई दौर की वार्ता हुई, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने और भविष्य के सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने पर सहमति जताई।
इसके बाद दोनों देशों के बीच कई उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों का आदान-प्रदान हुआ और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए नई पहल शुरू की गई।
रक्षा, तकनीक, कृषि और नवाचार सहित कई क्षेत्रों में बढ़ रहा है भारत-इजरायल सहयोग
भारत और इज़राइल के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार रहा है। रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, अनुसंधान, आधुनिक तकनीक, निगरानी प्रणाली, ड्रोन, मिसाइल रक्षा और सुरक्षा संबंधी परियोजनाओं में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है।
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में यह साझेदारी केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। दोनों देशों ने नई तकनीकों, डिजिटल नवाचार और औद्योगिक सहयोग पर भी विशेष ध्यान देना शुरू किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि बदलते वैश्विक आर्थिक और सामरिक माहौल में भारत और इज़राइल दोनों ही तकनीक आधारित सहयोग को भविष्य की प्राथमिकता मान रहे हैं।
तकनीक और डिजिटल क्षेत्र में नई संभावनाएं
दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, फिनटेक, बायोटेक्नोलॉजी और डिजिटल हेल्थ जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की है। इन क्षेत्रों में अनुसंधान, निवेश, स्टार्टअप सहयोग और तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में कई पहल की जा रही हैं।
भारत के बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम और इज़राइल की नवाचार क्षमता को देखते हुए विशेषज्ञ इन क्षेत्रों में भविष्य में और अधिक सहयोग की संभावना व्यक्त करते हैं। दोनों देशों की कंपनियां भी संयुक्त परियोजनाओं और तकनीकी साझेदारी में रुचि दिखा रही हैं।
कृषि और जल प्रबंधन में भी मजबूत साझेदारी
भारत और इज़राइल के बीच कृषि सहयोग भी लंबे समय से महत्वपूर्ण माना जाता है। जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई, ड्रिप इरिगेशन, आधुनिक खेती, बागवानी और कृषि अनुसंधान के क्षेत्रों में दोनों देशों ने कई संयुक्त परियोजनाएं विकसित की हैं।
देश के विभिन्न राज्यों में स्थापित उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य कम पानी में अधिक उत्पादन, बेहतर फसल गुणवत्ता और आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है।
व्यापार और निवेश के अवसर लगातार बढ़ रहे
भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय व्यापार में भी पिछले वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। दोनों देश निवेश, विनिर्माण, स्टार्टअप सहयोग, अनुसंधान एवं विकास तथा उच्च तकनीक उद्योगों में नए अवसर तलाश रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुक्त व्यापार समझौते और निवेश सहयोग जैसे विषय भविष्य में द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और गति दे सकते हैं। निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से दोनों देशों की कंपनियों के लिए नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं।
गाजा की स्थिति पर भी बनी रही चर्चा
भारत और इजरायल के बीच उच्चस्तरीय वार्ताओं के दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होती रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इजरायल दौरे और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद के महत्व पर जोर दिया है।
भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयास आवश्यक हैं। वहीं इजरायल के साथ रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भारत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने की बात भी करता रहा है।
लोगों के स्तर पर भी बढ़ा है संपर्क
दोनों देशों के बीच केवल सरकारी स्तर पर ही नहीं, बल्कि शिक्षा, पर्यटन, शोध, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से लोगों के बीच भी संपर्क बढ़ा है। भारतीय छात्र, शोधकर्ता और तकनीकी विशेषज्ञ इजरायल के विभिन्न संस्थानों के साथ सहयोग कर रहे हैं, जबकि इजरायली पर्यटक और निवेशक भी भारत के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों के बीच बढ़ता संपर्क, तकनीकी सहयोग, व्यापारिक साझेदारी और नियमित राजनीतिक संवाद भारत-इजरायल संबंधों को आने वाले वर्षों में और अधिक व्यापक बना सकता है। इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भारत के प्रति दिया गया सकारात्मक बयान दोनों देशों के मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों की एक और झलक माना जा रहा है।



