भारतीय पुरुष हॉकी टीम का वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल तक पहुंचने का सपना टूट गया है। एम्सटेलवीन के वेगनर स्टेडियम में खेले गए अहम मुकाबले में अर्जेंटीना ने भारत को 5-3 से शिकस्त दी। भारतीय टीम को अंतिम-4 में पहुंचने की उम्मीद बनाए रखने के लिए सिर्फ जीत ही नहीं, बल्कि कम से कम दो गोल के अंतर से जीत दर्ज करना जरूरी था। ऐसे दबाव वाले मुकाबले में टीम शुरुआत से ही पिछड़ गई और फिर अर्जेंटीना ने मैच पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी।
भारत ने मैच के आखिरी चरण में गोल करके स्कोरलाइन को कुछ बेहतर जरूर बनाया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। सुखजीत सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो गोल किए और हार्दिक सिंह ने भी एक गोल जोड़ा, लेकिन अर्जेंटीना की तेज शुरुआत और भारतीय डिफेंस की गलतियों ने टीम की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
अब भारतीय टीम का सफर पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन सेमीफाइनल और पदक की रेस से वह बाहर हो चुकी है। टीम अब टूर्नामेंट में 7वें और 8वें स्थान के लिए होने वाले क्लासिफिकेशन मुकाबले में बेल्जियम के सामने उतरेगी। इससे एक दिन पहले भारतीय महिला हॉकी टीम भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ खेलने के बाद टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी। ऐसे में पुरुष और महिला, दोनों भारतीय टीमों के लिए यह वर्ल्ड कप निराशाजनक साबित हुआ।
जीत के साथ बड़े अंतर की भी थी जरूरत
अर्जेंटीना के खिलाफ भारत के सामने बेहद मुश्किल समीकरण था। टीम को सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए कम से कम दो गोल के अंतर से मुकाबला जीतना था। इसका मतलब था कि भारतीय खिलाड़ियों को शुरुआत से ही आक्रामक हॉकी खेलनी होगी और साथ ही अपने गोलपोस्ट की मजबूत सुरक्षा भी करनी होगी।
लेकिन मैच की पहली सीटी बजने के साथ ही भारत की योजना को बड़ा झटका लग गया। अर्जेंटीना ने बेहद तेज शुरुआत की और भारतीय डिफेंस को संभलने का मौका ही नहीं दिया। शुरुआती गोल के बाद भारत पर दबाव बढ़ गया, क्योंकि अब उसे सिर्फ मुकाबले में वापसी नहीं करनी थी बल्कि बड़े अंतर से जीतने का लक्ष्य भी हासिल करना था।
भारतीय टीम ने कुछ मौकों पर आक्रामक खेल दिखाया और गोल करने में भी सफलता पाई, लेकिन डिफेंस में बार-बार हुई चूक ने टीम को पीछे धकेल दिया। पूरे टूर्नामेंट में भारतीय रक्षा पंक्ति का प्रदर्शन चिंता का विषय रहा और अर्जेंटीना के खिलाफ यह कमजोरी एक बार फिर साफ दिखाई दी।
पहले ही मिनट में लगा भारत को झटका
मुकाबले की शुरुआत भारत के लिए किसी बुरे सपने जैसी रही। अर्जेंटीना ने पहले ही मिनट में गोल करके 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। जोआक्विन टोस्कानी ने भारतीय डिफेंस में बनी जगह का फायदा उठाते हुए फील्ड गोल दाग दिया।
इतनी जल्दी गोल खाने के बाद भारतीय टीम पर दबाव बढ़ गया। भारत के खिलाड़ियों ने गेंद पर नियंत्रण बनाने और खेल को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश की, लेकिन अर्जेंटीना ने शुरुआती बढ़त के बाद भी अपना आक्रामक रवैया जारी रखा।
छठे मिनट में अर्जेंटीना को पेनल्टी कॉर्नर मिला और निकोलस डेला टोरे ने इस अवसर को गोल में बदल दिया। देखते ही देखते अर्जेंटीना 2-0 से आगे हो गया। भारतीय टीम के सामने अब दोहरी चुनौती थी। एक तरफ उसे पहले स्कोर बराबर करना था और दूसरी तरफ सेमीफाइनल की उम्मीद बनाए रखने के लिए बड़े अंतर से जीत दर्ज करनी थी।
सुखजीत ने जगाई वापसी की उम्मीद
दो गोल से पिछड़ने के बावजूद भारतीय टीम ने हार नहीं मानी। 10वें मिनट में सुखजीत सिंह ने शानदार फील्ड गोल करते हुए भारत की वापसी कराई। इस गोल के साथ स्कोर 2-1 हो गया और भारतीय खेमे में उम्मीद की किरण दिखाई दी।
सुखजीत के गोल के बाद भारत ने कुछ समय तक बेहतर तालमेल के साथ खेल दिखाया। मिडफील्ड से गेंद को आगे पहुंचाने और अर्जेंटीना के डिफेंस पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। भारतीय खिलाड़ी बराबरी का गोल तलाशते रहे, लेकिन अर्जेंटीना ने अपनी रक्षा पंक्ति को मजबूत रखा।
पहले हाफ के अंत तक भारत एक गोल से पीछे था। स्कोर 2-1 था और मुकाबला अभी भी खुला हुआ नजर आ रहा था। हालांकि भारतीय टीम के सामने यह स्पष्ट था कि केवल एक गोल से जीत या बराबरी से उसका लक्ष्य पूरा नहीं होगा। टीम को लगातार गोल करने के साथ-साथ अर्जेंटीना को आगे बढ़ने से रोकना भी जरूरी था।
दूसरे हाफ में अर्जेंटीना ने बदला मैच का रुख
दूसरे हाफ में भारत से मजबूत वापसी की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन अर्जेंटीना ने 33वें मिनट में गोल करके भारतीय टीम को फिर मुश्किल में डाल दिया। टॉमस डोमेने ने गोल करते हुए अर्जेंटीना की बढ़त 3-1 कर दी।
इस गोल ने भारत की रणनीति पर बड़ा असर डाला। अब टीम को सिर्फ दो गोल की कमी पूरी नहीं करनी थी, बल्कि तीन गोल से पिछड़ने की स्थिति से भी बाहर निकलना था। इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रमण तेज किया, लेकिन तेज खेल के बीच डिफेंस में खाली जगहें बनने लगीं।
मैच के 45वें मिनट में डोमेने ने एक बार फिर भारत को झटका दिया। इस बार उन्होंने पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में बदल दिया और अर्जेंटीना की बढ़त 4-1 हो गई। इस गोल के साथ मुकाबले का पलड़ा लगभग पूरी तरह अर्जेंटीना के पक्ष में झुक गया।
भारत के लिए सेमीफाइनल की राह पहले ही कठिन थी, लेकिन अब जीत की संभावना भी बेहद कम होती दिखाई देने लगी। भारतीय टीम को कम समय में लगातार गोल करने की जरूरत थी, जबकि दूसरी तरफ अर्जेंटीना हर मौके पर भारत की गलतियों का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा था।
53वें मिनट में पांचवां गोल, भारत की मुश्किल बढ़ी
अर्जेंटीना ने भारतीय टीम को राहत देने के बजाय अपना दबाव जारी रखा। मैच के 53वें मिनट में लुकास टोस्कानी ने गोल करते हुए अर्जेंटीना को 5-1 की मजबूत बढ़त दिला दी।
इस गोल के बाद भारतीय टीम के सामने स्थिति लगभग असंभव हो गई थी। समय तेजी से निकल रहा था और टीम को वापसी के लिए चार गोल की जरूरत थी। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने अंतिम मिनटों तक संघर्ष जारी रखा।
भारत ने लगातार आक्रमण करने की कोशिश की और आखिरी कुछ मिनटों में उसकी मेहनत का असर भी दिखाई दिया। हालांकि शुरुआत और दूसरे हाफ में खाए गए गोल इतने ज्यादा थे कि अंतिम चरण की वापसी भी टीम को हार से नहीं बचा सकी।
अंतिम मिनटों में सुखजीत और हार्दिक के गोल
मैच के 58वें मिनट में सुखजीत सिंह ने अपना दूसरा गोल दागा। उन्होंने भारत को 2-5 तक पहुंचाया और टीम की तरफ से अंत तक संघर्ष करने का संदेश दिया। सुखजीत इस मुकाबले में भारत के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल रहे।
इसके तुरंत बाद भारत को एक और मौका मिला। 59वें मिनट में हार्दिक सिंह ने पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में बदल दिया। स्कोर 3-5 हो गया और भारतीय टीम ने अंतिम क्षणों में दो गोल करके अर्जेंटीना पर दबाव बनाने की कोशिश की।
हालांकि समय बहुत कम बचा था। भारत ने आखिरी क्षणों तक गोल करने के लिए पूरी ताकत लगा दी। फाइनल हूटर से ठीक पहले हरमनप्रीत सिंह की गेंद अर्जेंटीना के खिलाड़ी के पैर से लगने के बाद भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला।
यह भारत के लिए स्कोर को और करीब लाने का अंतिम अवसर था। हरमनप्रीत सिंह ने ड्रैग-फ्लिक के जरिए गोल करने की कोशिश की, लेकिन अर्जेंटीना के गोलकीपर और डिफेंस ने इसे रोक दिया। इसके साथ ही अंतिम हूटर बजा और भारत को 5-3 की हार स्वीकार करनी पड़ी।
पूरे टूर्नामेंट में डिफेंस बना सबसे बड़ी चिंता
इस मुकाबले के बाद भारतीय टीम की सबसे बड़ी कमजोरी उसके डिफेंस के रूप में सामने आई। भारत ने टूर्नामेंट में पांच मैचों के दौरान कुल 16 गोल खाए। बड़े टूर्नामेंट में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ आक्रमण में गोल करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि मजबूत डिफेंस भी उतना ही जरूरी होता है।
अर्जेंटीना के खिलाफ भारत ने तीन गोल जरूर किए, लेकिन पांच गोल खा लिए। खासकर मैच की शुरुआत में मिली कमजोर शुरुआत और बाद में पेनल्टी कॉर्नर तथा पेनल्टी स्ट्रोक पर गोल खाने से टीम दबाव में आती चली गई।
भारत के पास आक्रमण में कई अच्छे खिलाड़ी मौजूद थे, लेकिन रक्षात्मक गलतियों ने टीम के प्रदर्शन को प्रभावित किया। सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए जिस तरह के अनुशासन और निरंतरता की जरूरत थी, भारतीय टीम वह पूरे टूर्नामेंट में नहीं दिखा सकी।
अब बेल्जियम से क्लासिफिकेशन मैच
सेमीफाइनल की रेस खत्म होने के बाद अब भारत बेल्जियम के खिलाफ क्लासिफिकेशन मुकाबला खेलेगा। इस मैच से तय होगा कि भारतीय टीम टूर्नामेंट में 7वें या 8वें स्थान पर अपना अभियान समाप्त करेगी।
हालांकि यह मुकाबला पदक की उम्मीद पूरी नहीं कर सकता, लेकिन टीम के लिए सम्मानजनक तरीके से टूर्नामेंट खत्म करने का मौका जरूर होगा। भारतीय खिलाड़ियों के पास अपने प्रदर्शन का विश्लेषण करने और टूर्नामेंट की गलतियों से सीख लेने का अवसर भी रहेगा।
टीम के लिए खासतौर पर रक्षात्मक संरचना और बड़े मैचों में दबाव से निपटने की क्षमता पर काम करना जरूरी होगा। अर्जेंटीना के खिलाफ मिली हार ने दिखाया कि विश्व स्तर पर छोटी-सी गलती भी मुकाबले का पूरा परिणाम बदल सकती है।
1975 के बाद भारत को नहीं मिला वर्ल्ड कप पदक
भारतीय हॉकी का वर्ल्ड कप इतिहास शानदार शुरुआत के बावजूद लंबे समय से पदक के इंतजार से जुड़ा रहा है। भारत ने पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप में अब तक सिर्फ एक बार खिताब जीता है। यह उपलब्धि 1975 में कुआलालंपुर में मिली थी।
उस फाइनल में भारतीय टीम ने पाकिस्तान को 2-1 से हराकर विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था। उस दौर में भारत विश्व हॉकी की सबसे मजबूत टीमों में शामिल था और शुरुआती तीन वर्ल्ड कप में लगातार पदक जीतने में सफल रहा।
भारत ने 1971 के वर्ल्ड कप में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद 1973 में टीम ने सिल्वर मेडल हासिल किया और फिर 1975 में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया। लेकिन इसके बाद भारतीय टीम वर्ल्ड कप में दोबारा पदक जीतने में सफल नहीं हो सकी।
इस बार भी भारतीय प्रशंसकों को टीम से बड़ी उम्मीदें थीं। लेकिन अर्जेंटीना के खिलाफ 5-3 की हार के साथ एक और वर्ल्ड कप अभियान बिना पदक के समाप्त होने की ओर बढ़ गया। अब बेल्जियम के खिलाफ क्लासिफिकेशन मैच भारत के लिए अंतिम चुनौती होगा, जहां टीम जीत के साथ टूर्नामेंट को बेहतर तरीके से समाप्त करने की कोशिश करेगी।




