मानसून में वायरल संक्रमण का बढ़ा खतरा, फ्लू और कोविड जैसे लक्षण दिखें तो देरी करना पड़ सकता है भारी

मानसून में वायरल संक्रमण का बढ़ा खतरा, फ्लू और कोविड जैसे लक्षण दिखें तो देरी करना पड़ सकता है भारी

बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी लेकर आता है। इन दिनों अस्पतालों और क्लीनिकों में सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने और लोगों के लंबे समय तक बंद स्थानों में रहने के कारण वायरस तेजी से फैलते हैं। यही वजह है कि इस मौसम में इन्फ्लुएंजा-ए, कोविड-19 और एच1एन1 जैसे वायरल संक्रमण के मामले अधिक देखने को मिलते हैं।

अक्सर लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य सर्दी-जुकाम या मौसम बदलने का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर संक्रमण का कारण बन सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सही पहचान और इलाज शुरू कर दिया जाए तो इन बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है। इसलिए किसी भी असामान्य लक्षण को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में संक्रमण फैलने की रफ्तार सामान्य दिनों की तुलना में अधिक हो सकती है। हवा में मौजूद नमी वायरस को लंबे समय तक सक्रिय बनाए रखने में मदद करती है। इसके अलावा बारिश के कारण लोग अधिक समय तक घरों, दफ्तरों, स्कूलों, मॉल और सार्वजनिक परिवहन जैसी बंद जगहों में रहते हैं, जहां पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं होता। ऐसी स्थिति में यदि कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या बात करता है, तो उसके जरिए वायरस आसपास मौजूद लोगों तक आसानी से पहुंच सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि कई बार संक्रमित व्यक्ति में शुरुआती दिनों में हल्के लक्षण ही दिखाई देते हैं, लेकिन वह दूसरों को संक्रमण फैलाने में सक्षम होता है। यही कारण है कि परिवार, कार्यालय और स्कूलों में एक व्यक्ति से कई लोगों तक संक्रमण तेजी से फैल जाता है। यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती जाए तो यह स्थिति सामुदायिक संक्रमण का रूप भी ले सकती है।

इन्फ्लुएंजा-ए, कोविड-19 और एच1एन1 जैसी बीमारियों के शुरुआती लक्षण काफी हद तक एक जैसे होते हैं। इनमें तेज या लगातार बुखार, गले में खराश, लगातार खांसी, नाक बंद होना या बहना, शरीर में दर्द, सिरदर्द और अत्यधिक कमजोरी प्रमुख हैं। कुछ मरीजों में ठंड लगना, भूख कम लगना और पूरे शरीर में थकावट भी महसूस होती है। कई मामलों में उल्टी, दस्त या पेट से जुड़ी परेशानियां भी सामने आती हैं।

अगर संक्रमण अधिक गंभीर हो जाए तो मरीज को सांस लेने में दिक्कत, सीने में जकड़न या भारीपन महसूस हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। विशेष रूप से यदि बुखार और खांसी दो दिन से अधिक समय तक बनी रहे या लगातार बढ़ती जाए, तो केवल घरेलू उपचार या बिना सलाह के दवाएं लेने के बजाय चिकित्सकीय जांच करवानी चाहिए।

डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग मेडिकल स्टोर से खुद दवा लेकर इलाज शुरू कर देते हैं। इससे अस्थायी राहत तो मिल सकती है, लेकिन बीमारी की सही पहचान नहीं हो पाती। कई बार संक्रमण शरीर में बढ़ता रहता है और मरीज को इसकी गंभीरता का अंदाजा भी नहीं होता। इसलिए जरूरत पड़ने पर कोविड-19 या फ्लू से संबंधित जांच कराना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज शुरू करना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

हालांकि ये वायरल संक्रमण किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन कुछ लोगों में इनके गंभीर होने की संभावना अधिक रहती है। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग, मधुमेह से पीड़ित मरीज, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी, किडनी या अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोग विशेष जोखिम की श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा वे मरीज जो लंबे समय से इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं ले रहे हैं या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को भी इस मौसम में संक्रमण से बचाव के उपायों का पालन करना चाहिए, क्योंकि इनकी प्रतिरक्षा प्रणाली अपेक्षाकृत अधिक संवेदनशील हो सकती है। ऐसे लोगों में मामूली संक्रमण भी गंभीर रूप ले सकता है।

संक्रमण से बचने के लिए सबसे प्रभावी उपायों में टीकाकरण को महत्वपूर्ण माना जाता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि जिन लोगों को इन्फ्लुएंजा या कोविड-19 की वैक्सीन लेने की जरूरत है, वे समय पर टीकाकरण जरूर करवाएं। वैक्सीन संक्रमण के जोखिम को पूरी तरह खत्म नहीं करती, लेकिन गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने और जटिलताओं की संभावना को काफी हद तक कम कर सकती है।

इसके अलावा व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोना चाहिए। यदि पानी उपलब्ध न हो तो अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है। बार-बार आंख, नाक और मुंह को बिना हाथ साफ किए छूने से भी बचना चाहिए।

भीड़भाड़ वाले इलाकों, अस्पतालों, सार्वजनिक परिवहन और बंद स्थानों पर मास्क पहनना संक्रमण के खतरे को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को खांसी या जुकाम है, तो उसे भी मास्क पहनना चाहिए ताकि संक्रमण दूसरों तक न फैले। साथ ही, खांसते या छींकते समय रूमाल या कोहनी का इस्तेमाल करना अच्छी आदत मानी जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ पीने की भी सलाह देते हैं। शरीर में पानी की कमी नहीं होने देने से रिकवरी बेहतर होती है और शरीर संक्रमण से लड़ने में अधिक सक्षम रहता है। संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम भी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

यदि परिवार का कोई सदस्य बीमार है, तो उसके साथ अनावश्यक संपर्क से बचना चाहिए। उसके लिए अलग तौलिया, बर्तन और अन्य व्यक्तिगत सामान का उपयोग करना बेहतर रहता है। कमरे में ताजी हवा आने-जाने की व्यवस्था बनाए रखने से भी संक्रमण फैलने की संभावना कम हो सकती है।

डॉक्टरों का कहना है कि हर खांसी या बुखार कोविड-19 या इन्फ्लुएंजा नहीं होता, लेकिन बिना जांच के यह मान लेना भी सही नहीं है कि यह केवल मौसम बदलने का असर है। इसलिए यदि लक्षण लगातार बने रहें, तेज हो जाएं या सांस लेने में परेशानी महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

मानसून के दौरान थोड़ी-सी सावधानी और समय पर इलाज गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकता है। लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय सही समय पर डॉक्टर से संपर्क करना, स्वच्छता बनाए रखना, टीकाकरण करवाना और आवश्यक सावधानियां अपनाना ही इस मौसम में स्वस्थ रहने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।

(Photo : AI Generated)