मानसून सत्र की शुरुआत आज से, संसद में सरकार-विपक्ष आमने-सामने; पेपर लीक से वंदेमातरम बिल तक कई मुद्दों पर घमासान के आसार

मानसून सत्र की शुरुआत आज से, संसद में सरकार-विपक्ष आमने-सामने; पेपर लीक से वंदेमातरम बिल तक कई मुद्दों पर घमासान के आसार

संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है और पहले ही दिन से राजनीतिक तापमान बढ़ने की संभावना है। विपक्ष जहां सरकार को कई बड़े मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है, वहीं केंद्र सरकार भी अपने एजेंडे के साथ सदन में उतरने जा रही है। NEET-UG पेपर लीक, सोनम वांगचुक का आंदोलन, महंगाई, SIR प्रक्रिया और राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े विवाद जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार से जवाब मांग सकता है।

25 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में लोकसभा और राज्यसभा की कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। 18वीं लोकसभा का यह नौवां सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। सत्र के दौरान सरकार कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष ने साफ संकेत दिए हैं कि वह जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सदन में सरकार को घेरने की कोशिश करेगा।

पीएम मोदी करेंगे सत्र की शुरुआत से पहले संबोधन

संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद भवन के हंस द्वार पर मीडिया को संबोधित करेंगे। इसके बाद दोनों सदनों में औपचारिक कार्यवाही शुरू होगी।

सरकार की ओर से इस सत्र में कुल 7 विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है। इनमें कुछ पुराने लंबित प्रस्तावों को आगे बढ़ाया जाएगा, जबकि कुछ नए कानूनों को सदन के सामने रखा जाएगा।

वहीं विपक्ष का कहना है कि वह सरकार से कई मुद्दों पर जवाब मांगेगा। विपक्षी दलों की रणनीति में NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक मामलों, बढ़ती महंगाई, चुनावी प्रक्रिया से जुड़े SIR मुद्दे और धार्मिक स्थलों से जुड़े विवाद शामिल हैं।

राज्यसभा में आएगा राष्ट्रीय सम्मान कानून में बदलाव का प्रस्ताव

मानसून सत्र में राज्यसभा में केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण कानून में संशोधन से जुड़ा बिल सदन में रखेंगे। मौजूदा कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान को अपराध माना जाता है। इसमें दोषी पाए जाने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

सरकार अब इस कानून के दायरे में राष्ट्रगीत वंदेमातरम को भी शामिल करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित बदलाव के बाद वंदेमातरम के अपमान या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने जैसी गतिविधियों को भी कानूनी अपराध माना जा सकता है।

इस संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रगीत को भी राष्ट्रगान के समान कानूनी सुरक्षा देना बताया जा रहा है। हालांकि इस मुद्दे पर सदन में राजनीतिक बहस होने की संभावना है।

लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक

लोकसभा में सरकार सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक पेश करेगी। इस प्रस्ताव के तहत सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने का प्रावधान है। अभी सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 34 न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या है। सरकार इसे बढ़ाकर 38 करने का प्रस्ताव ला रही है।

यह विधेयक पहले जारी किए गए अध्यादेश की जगह लेगा। अध्यादेश लागू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में नए न्यायाधीशों की नियुक्ति भी की जा चुकी है। इस बदलाव के लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं होगी। इसे संसद में साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है।

सरकार का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना जरूरी है।

TMC के बागी सांसद पहली बार अलग पहचान के साथ दिखेंगे

इस मानसून सत्र में तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसद भी चर्चा में रहेंगे। TMC से अलग होकर बनाई गई नई पार्टी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया पहली बार संसद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगी।

TMC छोड़कर भाजपा में शामिल हुए कई सांसदों को अब सदन में अलग बैठने की व्यवस्था दी गई है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कई सांसदों की सीटों में बदलाव किया है।

सूत्रों के मुताबिक कुल 39 सांसदों की सीटें बदली गई हैं ताकि राजनीतिक रूप से अलग हुए सांसदों को अलग स्थान दिया जा सके।

इस बदलाव में TMC नेता अभिषेक बनर्जी की सीट भी बदली गई है। इसके अलावा YSR कांग्रेस के पीवी मिथुन रेड्डी और शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल की सीट में भी बदलाव किया गया है।

बड़े राजनीतिक बिलों पर अभी बनी हुई है अनिश्चितता

मानसून सत्र के लिए सरकार ने जिन विधेयकों की सूची जारी की है, उसमें कुछ बड़े राजनीतिक प्रस्ताव शामिल नहीं हैं। इनमें 30 दिन तक जेल में रहने वाले प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को पद से हटाने वाला विधेयक, केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक, एक देश-एक चुनाव प्रस्ताव और परिसीमन व महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल शामिल हैं।

इनमें से कई प्रस्ताव अभी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास विचाराधीन हैं।

जेल जाने पर जनप्रतिनिधियों की कुर्सी से जुड़ा बिल

30 दिन तक जेल में रहने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्रियों को हटाने से जुड़े प्रस्ताव पर JPC विचार कर रही है। समिति ने अभी अपनी अंतिम रिपोर्ट को आगे नहीं बढ़ाया है। कई बिंदुओं पर और चर्चा की जरूरत बताई गई है, इसलिए इसके मानसून सत्र में आने की संभावना कम है।

केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक

केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े कानून में बदलाव वाला प्रस्ताव भी फिलहाल समिति के पास है। इसमें संबंधित पक्षों से बातचीत जारी है। इस कारण सरकार इसे तुरंत सदन में लाने से बच सकती है।

एक देश-एक चुनाव प्रस्ताव

लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की योजना वाला बिल भी JPC के पास भेजा गया है। समिति अभी विभिन्न पक्षों की राय ले रही है। इस वजह से मानसून सत्र में इसके पेश होने की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है।

परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर सरकार की नजर

परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल को लेकर सरकार की रणनीति अलग है। ये ऐसे प्रस्ताव हैं जिन्हें कभी भी संसद में लाया जा सकता है। हालांकि इन्हें पारित कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। मौजूदा राजनीतिक स्थिति में यह आसान चुनौती नहीं है।

संविधान संशोधन के लिए लोकसभा में सरकार को पर्याप्त समर्थन जुटाना होगा। विपक्षी दलों के सहयोग के बिना यह संख्या हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

बहुमत जुटाने के लिए सरकार का सियासी गणित

परिसीमन जैसे बड़े संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए सरकार अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर सकती है।लोकसभा में सरकार के सामने पहला विकल्प विपक्षी सांसदों का समर्थन हासिल करना हो सकता है। दूसरा विकल्प मतदान के समय विपक्षी सांसदों की गैरमौजूदगी हो सकता है।

राजनीतिक समीकरणों के अनुसार अगर कुछ विपक्षी सांसद मतदान से दूर रहते हैं तो दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा कम हो सकता है। सरकार की नजर उन दलों पर भी हो सकती है जो कुछ मुद्दों पर एनडीए के साथ सहयोग कर चुके हैं।

राज्यसभा में भी समर्थन जुटाना बड़ी चुनौती

राज्यसभा में संविधान संशोधन बिल पास कराने के लिए भी सरकार को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। मौजूदा संख्या बल के हिसाब से एनडीए के पास पर्याप्त संख्या नहीं है कि वह अकेले दो-तिहाई बहुमत हासिल कर सके।

ऐसे में सरकार को अन्य दलों का समर्थन लेना पड़ सकता है या फिर मतदान के दौरान विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति का फायदा उठाना पड़ सकता है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक सरकार क्षेत्रीय दलों के साथ बातचीत कर रही है ताकि बड़े विधेयकों को पारित कराने के लिए जरूरी समर्थन जुटाया जा सके।

मानसून सत्र में टकराव तय

कुल मिलाकर संसद का यह मानसून सत्र राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। सरकार जहां न्याय व्यवस्था, राष्ट्रीय सम्मान और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति बना रहा है।

सत्र के दौरान कितनी बार हंगामा होता है और कितने विधेयक बिना बाधा के पारित हो पाते हैं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल संसद के दोनों सदनों में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के संकेत मिल रहे हैं।