भारत को खेलों की दुनिया में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और आने वाले वर्षों के लिए मजबूत खिलाड़ी तैयार करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को विशेष जोर दिया। ‘खेलो इंडिया संवाद- खेल की बात, PM के साथ’ कार्यक्रम के जरिए उन्होंने देशभर के युवाओं, खिलाड़ियों और खेल से जुड़े लोगों से वर्चुअल संवाद किया। यह कार्यक्रम 1,500 से अधिक स्थानों पर आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया।
प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि भारत को केवल उन खेलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, जिनमें देश की पारंपरिक रूप से मजबूत मौजूदगी रही है। ओलंपिक के 20 से अधिक ऐसे खेल हैं, जिनमें भारत की भागीदारी बहुत कम रही है या देश प्रतिनिधित्व तक नहीं कर पाया है। ऐसे में भारत को अपनी खेल नीति और प्रतिभा खोजने की प्रक्रिया को व्यापक बनाना होगा। उन्होंने कहा कि 2036 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए खिलाड़ियों की तैयारी अभी से शुरू करनी होगी।
मोदी ने युवाओं को खेलों से जोड़ने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि आज के दौर में बच्चों और युवाओं का बढ़ता स्क्रीन टाइम चिंता का विषय है। उनका मानना है कि युवाओं को मोबाइल और अन्य स्क्रीन के बजाय अधिक खेल के मैदान, स्पोर्ट्स सेंटर और खेलने के अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने दोहराया कि खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि स्वस्थ, आत्मविश्वासी और अनुशासित समाज बनाने की ताकत भी रखते हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने पुराने संदेश को दोहराते हुए कहा, “जो खेले, वो खिले।” उनके अनुसार, खेल युवाओं के व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। मैदान पर हार और जीत दोनों से सीख मिलती है। खेल व्यक्ति को अनुशासन, धैर्य, टीमवर्क और संघर्ष की भावना सिखाते हैं। यही गुण आगे चलकर व्यक्ति को जीवन के दूसरे क्षेत्रों में भी बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। देश का लगभग हर जिला किसी न किसी खेल में प्रतिभाशाली युवाओं से भरा हुआ है। जरूरत इस बात की है कि इन प्रतिभाओं को समय पर पहचाना जाए, उन्हें उचित प्रशिक्षण मिले और आधुनिक सुविधाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित की जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को उन खेलों में भी आगे बढ़ने की जरूरत है, जिन पर अभी तक अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया गया है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के पास लंबी समुद्री तटरेखा है, इसके बावजूद सर्फिंग जैसे खेलों में देश अभी उस स्तर तक नहीं पहुंच पाया है, जहां उसकी प्राकृतिक संभावनाएं उसे पहुंचा सकती हैं। दूसरे देश इन खेलों में लगातार पदक जीत रहे हैं। इसलिए भारत को अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय संसाधनों को ध्यान में रखकर नई खेल प्रतिभाओं को तैयार करना होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त को देश के सामने रखे गए स्पोर्ट्स विजन का उद्देश्य केवल अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतना नहीं है। यह विकसित भारत की व्यापक सोच का हिस्सा है। खेलों में भारत की शक्ति बढ़ाना, युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करना और एक मजबूत स्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार करना इस विजन का महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि खेलों की दुनिया तेजी से बदल रही है। नई तकनीक ने प्रशिक्षण, प्रदर्शन विश्लेषण और खिलाड़ियों की तैयारी के तरीकों को बदल दिया है। अब खेल केवल मैदान में खेलने तक सीमित नहीं हैं। स्पोर्ट्स साइकोलॉजी, न्यूट्रिशन, डेटा एनालिसिस, फिटनेस, स्पोर्ट्स साइंस और आधुनिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी युवाओं के लिए नए करियर के अवसर बन रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे इन नए अवसरों को समझें और खेलों के क्षेत्र में अपनी भूमिका को केवल खिलाड़ी बनने तक सीमित न रखें। कोई युवा कोच बन सकता है, कोई न्यूट्रिशन विशेषज्ञ, कोई स्पोर्ट्स एनालिस्ट या कोई तकनीक के जरिए खेलों को नई दिशा दे सकता है। उनका कहना था कि भारत को खेल शक्ति बनाने के लिए मैदान के अंदर और बाहर, दोनों जगह मजबूत व्यवस्था तैयार करनी होगी।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने पैरा एथलीट्स की उपलब्धियों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दिव्यांग खिलाड़ियों की सफलता केवल खेल उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। ऐसे खिलाड़ियों ने साबित किया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और सही अवसर मिलने पर कठिन परिस्थितियों को भी पीछे छोड़ा जा सकता है।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर की खिलाड़ी शीतल के आर्चरी में हासिल किए गए पदक और पैरालंपिक निशानेबाज अवनी लेखरा की उपलब्धियों का उल्लेख किया। मोदी ने कहा कि इन खिलाड़ियों ने न केवल अपने परिवारों और राज्यों को गौरवान्वित किया है, बल्कि देश के युवाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। उन्होंने झंडू कुमार समेत अन्य पैरा एथलीट्स की उपलब्धियों को भी सराहा।
प्रधानमंत्री ने फिटनेस की मिसाल रहे फौजा सिंह का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फौजा सिंह ने 100 वर्ष की आयु पार करने के बाद भी जिस तरह फिटनेस और सक्रिय जीवन का उदाहरण पेश किया, वह बताता है कि खेल और शारीरिक गतिविधियां जीवन के हर चरण में महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, खेल को केवल बच्चों और पेशेवर खिलाड़ियों तक सीमित नहीं समझना चाहिए।
संवाद के दौरान खेल भावना यानी स्पोर्ट्समैन स्पिरिट को लेकर भी प्रधानमंत्री ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज और मजबूत परिवार के निर्माण में खेल भावना की बड़ी भूमिका है। खेल हमें केवल जीतना नहीं सिखाते, बल्कि हार को स्वीकार करना और दोबारा बेहतर तैयारी के साथ वापसी करना भी सिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि एक अच्छा खिलाड़ी बनने के साथ-साथ अच्छा प्रतियोगी बनना भी जरूरी है। खेलों के जरिए व्यक्ति अपने प्रतिद्वंद्वी का सम्मान करना सीखता है। मैदान पर कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद खेल भावना बनाए रखना जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यही संस्कार परिवार और समाज को भी मजबूत बनाते हैं।
29 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय खेल दिवस का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को याद किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेल दिवस देश के युवाओं को भारत के गौरवशाली खेल इतिहास से जोड़ने का अवसर है। ध्यानचंद का जीवन और उनकी उपलब्धियां आज भी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा हैं।
मोदी ने भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों का भी जिक्र करते हुए हॉकी के इतिहास से जुड़ी एक पुरानी घटना को याद किया। उन्होंने बताया कि करीब एक सदी पहले भारतीय सेना की हॉकी टीम न्यूजीलैंड गई थी और उस टीम में मेजर ध्यानचंद भी शामिल थे। आज भारत और न्यूजीलैंड अपने संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
इस कार्यक्रम का आयोजन खेल मंत्रालय की पहल ‘खेलो इंडिया संवाद- खेल की बात, PM के साथ’ के तहत किया गया। इसका उद्देश्य युवाओं को भारत की खेल यात्रा से सीधे जोड़ना और उन्हें खेल नीति, गवर्नेंस तथा विकसित भारत से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखने का मंच देना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार एक मजबूत खेल व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इस अभियान में युवाओं की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने युवाओं से खेलों को बेहतर बनाने के लिए नए सुझाव देने की अपील की। उनके अनुसार, युवा पीढ़ी के विचार और अनुभव देश की खेल व्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं।
कार्यक्रम में देश के कई दिग्गज और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके खिलाड़ी भी शामिल हुए। भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा ने भी इसमें भाग लिया। उनके अलावा टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा, जिमनास्ट दीपा करमाकर, बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल और कोच पुलेला गोपीचंद भी कार्यक्रम से जुड़े।
इनके साथ ही निशानेबाज गगन नारंग, हॉकी खिलाड़ी पीआर श्रीजेश, बॉक्सिंग की दिग्गज मैरी कॉम, फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया, एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज, भारोत्तोलक कर्णम मल्लेश्वरी और मीराबाई चानू जैसे नाम भी संवाद का हिस्सा बने। मौजूदा और पूर्व खिलाड़ियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को खेल जगत के अनुभव और युवा सोच के संगम के रूप में पेश किया।
वहीं केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार युवाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में खेलों के प्रति देश की सोच में बड़ा बदलाव आया है। बदलाव केवल नए स्टेडियम बनने या सुविधाएं बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि अब परिवारों और समाज में भी खेल को करियर के रूप में अधिक स्वीकार्यता मिल रही है।
मांडविया के अनुसार, एक ओर भारत के वे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराकर देश का नाम रोशन किया है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं जो भविष्य में पोडियम पर पहुंचने का सपना देख रहे हैं। सरकार का प्रयास इन दोनों के बीच की दूरी कम करना और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए जरूरी मंच उपलब्ध कराना है।
उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं से संवाद और उनकी भागीदारी का असर सरकार की नीतियों में भी दिखाई दे रहा है। खेल और युवा शक्ति को विकास की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री इससे पहले 9 अगस्त को कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों से भी मुलाकात कर चुके हैं। उस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों के साथ बातचीत की थी और मुलाकात से जुड़ी एक रील अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की थी। अब खेलो इंडिया संवाद के जरिए उन्होंने देशभर के युवाओं और खिलाड़ियों तक एक साथ पहुंचने की कोशिश की।
प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन का केंद्र भारत को भविष्य की बड़ी खेल शक्ति बनाने पर रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर भारत को 2036 और उसके बाद होने वाले ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर अधिक प्रभावशाली प्रदर्शन करना है, तो तैयारी अंतिम समय में नहीं की जा सकती। प्रतिभाओं की पहचान, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं, पोषण, मानसिक मजबूती और खेल संस्कृति को अभी से मजबूत बनाना होगा।
प्रधानमंत्री का संदेश साफ था कि भारत की युवा शक्ति को स्क्रीन की दुनिया से निकालकर मैदानों तक अधिक अवसर देने होंगे। जब हर जिले और हर क्षेत्र की प्रतिभा को सही मंच मिलेगा, तभी भारत अधिक खेलों में अपनी भागीदारी दर्ज करा सकेगा और दुनिया के सामने एक मजबूत खेल राष्ट्र के रूप में उभर सकेगा।



