मौसम का बिगड़ा मिजाज: यूपी के 72 जिलों में बारिश का अलर्ट, केदारनाथ में हेलमेट के बिना यात्रा पर रोक; बिहार की 5 नदियां खतरे के निशान से ऊपर

मौसम का बिगड़ा मिजाज: यूपी के 72 जिलों में बारिश का अलर्ट, केदारनाथ में हेलमेट के बिना यात्रा पर रोक; बिहार की 5 नदियां खतरे के निशान से ऊपर

देश के कई हिस्सों में मानसून का असर अब भी बना हुआ है। उत्तर भारत से लेकर पहाड़ी राज्यों तक बारिश और उससे जुड़ी परेशानियां सामने आ रही हैं। कहीं नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात हैं, तो कहीं भूस्खलन के कारण आवाजाही प्रभावित हो रही है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और बिहार समेत कई राज्यों में मौसम विभाग ने बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। वहीं, पहाड़ों पर सफर करने वाले लोगों के लिए सुरक्षा इंतजामों को सख्त किया गया है।

उत्तराखंड में केदारनाथ यात्रा दोबारा शुरू कर दी गई है, लेकिन चीरवासा के पास क्षतिग्रस्त रास्ते पर यात्रियों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। बिहार में बाढ़ का असर 15 जिलों के लाखों लोगों पर पड़ा है। दूसरी तरफ सिक्किम में भारी बारिश और लैंडस्लाइड के बाद प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। हिमाचल प्रदेश में अगले तीन दिन मानसून सक्रिय रहने का अनुमान है, जबकि मध्य प्रदेश में अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है।

केदारनाथ यात्रा फिर शुरू, चीरवासा के डेंजर जोन में हेलमेट अनिवार्य

उत्तराखंड में मौसम की चुनौती के बीच केदारनाथ धाम की यात्रा एक बार फिर शुरू हो गई है। चीरवासा के पास रास्ता क्षतिग्रस्त होने के कारण यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से हर बार 200-200 यात्रियों को सुरक्षित रास्ते से आगे भेजने की व्यवस्था की गई है।

यात्रियों की सुरक्षा के लिए इस हिस्से में बिना हेलमेट किसी को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। चीरवासा में करीब 100 मीटर का इलाका संवेदनशील माना जा रहा है। यहां पहाड़ी से पत्थर गिरने और अचानक लैंडस्लाइड होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं को प्रशासन के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

क्षतिग्रस्त रास्ते के कारण इस क्षेत्र में सामान्य आवाजाही की जगह नियंत्रित व्यवस्था अपनाई जा रही है। यात्रियों को एक साथ बड़ी संख्या में आगे भेजने के बजाय छोटे समूहों में रवाना किया जा रहा है, ताकि जोखिम वाले हिस्से को पार करते समय सुरक्षा पर नजर रखी जा सके।

केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह व्यवस्था खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि पहाड़ी रास्तों पर बारिश के बाद जमीन खिसकने का खतरा बढ़ सकता है। यात्रा शुरू होने के बावजूद संवेदनशील हिस्से में सावधानी बरतना जरूरी है।

बिहार में 49.67 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित

बिहार में लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण कई जिलों में बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। राज्य के 15 जिलों में 49.67 लाख से अधिक लोग प्रभावित बताए गए हैं। पांच नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मौसम विभाग ने बिहार के 22 जिलों के लिए आज यलो अलर्ट जारी किया है। बारिश की संभावना के बीच नदियों के जलस्तर पर नजर रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की जरूरत है।

नदियों का पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने पर गांवों और निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने, जरूरी सामान तैयार रखने और मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। बिहार में बाढ़ का असर केवल खेतों और घरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सड़क संपर्क और रोजमर्रा की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है। प्रभावित जिलों में राहत और बचाव व्यवस्था पर लगातार नजर रखना जरूरी है।

यूपी के 72 जिलों में बारिश का अलर्ट, 26 जिलों में बाढ़ जैसे हालात

उत्तर प्रदेश में मानसून अभी पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है। मंगलवार को मौसम विभाग ने प्रदेश के 72 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया। कई इलाकों में बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है और बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। राज्य के 26 जिलों में बाढ़ की स्थिति बताई गई है। इससे करीब 4 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। फर्रुखाबाद में गंगा और रामगंगा नदियों के बढ़े जलस्तर के कारण 111 गांवों पर बाढ़ का असर पड़ा है। कुछ गांवों में पानी भरने से वे टापू जैसे नजर आ रहे हैं।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में सड़क मार्ग से आवाजाही मुश्किल हो गई है। कई जगहों पर लोगों को आने-जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। गांवों तक पहुंचने और जरूरी सामान पहुंचाने में भी परेशानी हो सकती है। बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर नदी किनारे बसे गांवों में जलस्तर बढ़ने पर सुरक्षित स्थानों की जानकारी रखना महत्वपूर्ण है।

उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता के कारण आने वाले दिनों में भी कुछ क्षेत्रों में बारिश जारी रह सकती है। स्थानीय स्तर पर मौसम में बदलाव और नदियों के जलस्तर की निगरानी जरूरी बनी हुई है।

राजस्थान में 17 सितंबर तक बारिश का अलर्ट, 20 जिलों में आज चेतावनी

राजस्थान में भी मानसून का असर बना हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर ने राज्य में 17 सितंबर तक बारिश का अलर्ट जारी किया है। आज 20 जिलों में बारिश को लेकर चेतावनी दी गई है। उदयपुर संभाग में 13 सितंबर की रात से 14 सितंबर की शाम 6 बजे तक भारी बारिश दर्ज की गई। इस दौरान कई इलाकों में मौसम का असर देखने को मिला। बारिश के कारण निचले क्षेत्रों में पानी भरने और स्थानीय आवाजाही प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है।

राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की तीव्रता अलग रह सकती है। कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश, जबकि अन्य स्थानों पर तेज बौछारें पड़ने की संभावना रहती है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग के स्थानीय अपडेट पर ध्यान देना चाहिए। राज्य में बारिश का दौर जारी रहने से तापमान में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। बारिश के दौरान सड़कों पर फिसलन और जलभराव जैसी समस्याओं से बचने के लिए सावधानी बरतना जरूरी है।

पंजाब में 18 जिलों में बारिश की संभावना, बठिंडा में 36 डिग्री तापमान

पंजाब के 18 जिलों में आज बारिश की संभावना जताई गई है। चंडीगढ़ में भी आसमान में बादल छाए रहने का अनुमान है। कुछ इलाकों में बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार पंजाब के अधिकतम तापमान में 1.3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बाद तापमान सामान्य के आसपास बना हुआ है। राज्य में सबसे अधिक तापमान बठिंडा में 36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

बारिश की संभावना के बीच पंजाब के लोगों को मौसम में होने वाले बदलाव के लिए तैयार रहना होगा। बादल छाने के साथ कुछ क्षेत्रों में तेज हवाएं और गरज-चमक भी देखने को मिल सकती है। चंडीगढ़ में भी दिनभर मौसम का मिजाज बदला हुआ रह सकता है। बारिश होने पर सड़कों पर पानी भरने और यातायात की रफ्तार प्रभावित होने की संभावना रहती है। लोगों को यात्रा के दौरान स्थानीय मौसम की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए।

हिमाचल प्रदेश में अगले तीन दिन सक्रिय रहेगा मानसून

हिमाचल प्रदेश में अगले तीन दिनों तक मानसून सक्रिय रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक राज्य के ज्यादातर हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी भी जिले में भारी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। इसका मतलब यह है कि राज्य में बारिश की संभावना बनी रहेगी, लेकिन भारी बारिश को लेकर विशेष चेतावनी नहीं दी गई है।

बारिश के कारण अगले 72 घंटे में हिमाचल प्रदेश के अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट आने का अनुमान है। इससे दिन के समय गर्मी में कमी महसूस हो सकती है।

पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं। इसके अलावा कुछ स्थानों पर अचानक पत्थर गिरने या छोटे भूस्खलन का खतरा भी रहता है। इसलिए पहाड़ों में सफर करने वाले लोगों को मौसम और सड़क की स्थिति के अनुसार यात्रा की योजना बनानी चाहिए।

राज्य में मानसून की सक्रियता के दौरान स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना जरूरी है। खासकर पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने वालों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

सिक्किम में लैंडस्लाइड के बाद 128 लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया

सिक्किम के ग्यालशिंग जिले में भारी बारिश और लैंडस्लाइड के बाद प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। रिंबी इलाके में 28 घरों के 128 लोगों को सुरक्षित जगह शिफ्ट किया गया। सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी SSDMA के मुताबिक, 14 सितंबर को भारी बारिश और बाढ़ के बाद इलाके का दोबारा जायजा लिया गया। इसके बाद प्रभावित लोगों को रिंबी ग्राम पंचायत केंद्र में पहुंचाया गया।

प्रभावित परिवारों की सुरक्षा को देखते हुए यह कदम उठाया गया। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के बाद भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए संवेदनशील इलाकों से लोगों को हटाना जरूरी हो जाता है। सिंगलिटाम में सात प्रभावित परिवारों के लिए राहत केंद्र भी बनाया गया है। यहां 33 से ज्यादा लोग रह रहे हैं। इनमें बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं। राहत केंद्र में रहने वाले लोगों की जरूरतों पर ध्यान देना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है।

सिक्किम में हुई बारिश और लैंडस्लाइड के बाद प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया गया। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

मध्य प्रदेश में अब तक 88% बारिश, 37 जिलों में सामान्य कोटा पूरा नहीं

मध्य प्रदेश में मानसूनी सीजन खत्म होने में अब करीब 15 दिन बाकी हैं, लेकिन राज्य में अब तक सामान्य बारिश का 88% ही पानी गिरा है। इसका मतलब है कि प्रदेश में बारिश का आंकड़ा अभी सामान्य स्तर से कम है। इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिलों में बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ है। वहीं, भोपाल और ग्वालियर सहित 18 जिले ऐसे हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

राज्य के अलग-अलग जिलों में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा। कुछ जगहों पर सामान्य से अधिक पानी गिरा, जबकि कई इलाकों में बारिश की कमी बनी हुई है। इसी वजह से प्रदेश के कुल बारिश के आंकड़े में भी अंतर दिखाई दे रहा है।

आलीराजपुर में सामान्य कोटे की आधी बारिश भी नहीं हुई है। इसके विपरीत निवाड़ी में सामान्य से 49% ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश में मानसून का असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रहा है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति पर नजर बनी रहेगी। जिन जिलों में बारिश कम हुई है, वहां मौसम के अगले दौर का महत्व बढ़ जाता है। वहीं, अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव और स्थानीय समस्याओं से बचने के लिए सावधानी जरूरी है।

कई राज्यों में बारिश से बदल रहा मौसम का मिजाज

उत्तर भारत के कई राज्यों में मानसून की सक्रियता अभी बनी हुई है। उत्तर प्रदेश और बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है। पहाड़ी राज्यों में बारिश के साथ भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। केदारनाथ में यात्रा शुरू होने के बावजूद चीरवासा के संवेदनशील हिस्से में सुरक्षा नियम लागू हैं। सिक्किम में प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। हिमाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश के साथ तापमान में गिरावट की संभावना है।

पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किए गए हैं। मौसम विभाग के अनुसार अलग-अलग राज्यों में बारिश की तीव्रता अलग रह सकती है। ऐसे में लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट के आधार पर अपनी दिनचर्या और यात्रा की योजना बनानी चाहिए।

मानसून के अंतिम दौर में बारिश का असर कई जगहों पर देखने को मिल रहा है। नदियों के बढ़ते जलस्तर, जलभराव और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन जैसी समस्याओं को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है। प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन और मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखना इस समय सबसे महत्वपूर्ण है।