रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की राहत जारी, पेट्रोल-डीजल के दामों पर मिल सकता है असर

रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की राहत जारी, पेट्रोल-डीजल के दामों पर मिल सकता है असर

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर राहत की उम्मीद, रूस से तेल खरीद की अनुमति बढ़ने से कच्चे तेल बाजार को मिल सकता है सहारा

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद आम उपभोक्ताओं के लिए राहत से जुड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका ने कुछ देशों को रूस से समुद्री रास्ते के जरिए कच्चा तेल खरीदने की अनुमति को फिलहाल एक महीने के लिए आगे बढ़ा दिया है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव का सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने या घटने का असर पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों की कीमतों पर दिखाई देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की सप्लाई बनी रहती है और भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो आने वाले समय में ईंधन कीमतों पर दबाव कुछ कम हो सकता है। हालांकि, तेल बाजार अभी भी कई वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर है।

मिडिल ईस्ट तनाव के कारण बढ़ी थी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी

हाल के दिनों में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर देखने को मिला। मिडिल ईस्ट क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति क्षेत्रों में शामिल है। यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है।

होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक माना जाता है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई होती है। ऐसे में क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने की आशंका से बाजार में आपूर्ति बाधित होने की चिंता बढ़ गई थी, जिसके कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।

हालांकि बाद में अमेरिका की ओर से मिडिल ईस्ट में संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर नरम संकेत मिलने के बाद बाजार में कुछ स्थिरता आई। निवेशकों को उम्मीद है कि तनाव बढ़ने की स्थिति नहीं बनती है तो तेल की कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है।

रूस से तेल खरीद के लिए 30 दिन की मिली अतिरिक्त अनुमति

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि कुछ जरूरी देशों को रूस से समुद्री रास्ते के माध्यम से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिन का अस्थायी जनरल लाइसेंस दिया जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य वैश्विक तेल सप्लाई को बनाए रखना और बाजार में अचानक आने वाली अस्थिरता को कम करना बताया गया है।

अमेरिका की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से बाजार में तेल की उपलब्धता बनी रहेगी और कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि इस नीति का एक उद्देश्य चीन जैसे देशों द्वारा सस्ते रूसी तेल का अत्यधिक भंडारण करने की संभावना को सीमित करना भी है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है रूस से कच्चे तेल की खरीद?

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में तेल विदेशों से खरीदा जाता है। रूस पिछले कुछ वर्षों में भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया है।

आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में भारत ने रूस से प्रतिदिन करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। वहीं अप्रैल में यह मात्रा लगभग 16 लाख बैरल प्रतिदिन रही। रूस से मिलने वाला तेल भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और आयात लागत दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

अमेरिका ने पहली बार मार्च में रूस से तेल खरीद को लेकर कुछ राहत दी थी, जिसे बाद में अप्रैल में आगे बढ़ाया गया। अब इस अनुमति को एक महीने और बढ़ाने से भारत समेत अन्य तेल आयातक देशों को कुछ राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।

तेल कंपनियों पर बना हुआ है कीमतों का दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू तेल कंपनियों पर दबाव बना हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री में कंपनियों को लागत और बिक्री मूल्य के बीच अंतर के कारण नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

इसी वजह से पिछले कुछ समय में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की विनिमय दर और अन्य लागतों के आधार पर कीमतों में बदलाव करती हैं।

आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि इनके बढ़ने का असर परिवहन लागत, खाद्य पदार्थों की कीमतों और कई अन्य सेवाओं पर पड़ सकता है।

भारतीय ऑयल बास्केट की कीमतों में आई कुछ नरमी

कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय ऑयल बास्केट की औसत कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली है। मई में इसकी औसत कीमत पहले के मुकाबले कम हुई है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अभी भी कई कारक कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।

फिलहाल ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं भारतीय ऑयल बास्केट भी इसी स्तर के आसपास बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में तेल की दिशा मिडिल ईस्ट की स्थिति, वैश्विक मांग और प्रमुख तेल उत्पादक देशों की नीतियों पर निर्भर करेगी।

आने वाले दिनों में किन बातों पर रहेगी नजर?

तेल बाजार में आगे की चाल कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से तय होगी। इनमें मिडिल ईस्ट में सुरक्षा स्थिति, रूस से तेल सप्लाई से जुड़े फैसले, अमेरिका की नीतियां और वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति प्रमुख हैं।

यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम रहता है और कच्चे तेल की सप्लाई सामान्य बनी रहती है, तो कीमतों में स्थिरता आने की संभावना बढ़ सकती है। वहीं किसी नए भू-राजनीतिक संकट की स्थिति में बाजार में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।

भारत जैसे आयात आधारित देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण है। इससे न केवल ईंधन कीमतों पर असर पड़ता है, बल्कि महंगाई और आर्थिक गतिविधियों पर भी इसका प्रभाव दिखाई देता है।

फोटो स्रोत: AI Generated