रोजगार और शिक्षा पर युवाओं को साधने में जुटे राहुल गांधी, चेन्नई से दक्षिण भारत में शुरू करेंगे नया अभियान

रोजगार और शिक्षा पर युवाओं को साधने में जुटे राहुल गांधी, चेन्नई से दक्षिण भारत में शुरू करेंगे नया अभियान

कांग्रेस नेता राहुल गांधी शनिवार को चेन्नई में युवाओं और विद्यार्थियों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं, अपेक्षाओं और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत आयोजित होने वाला यह छठा कार्यक्रम कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए राहुल गांधी पहली बार दक्षिण भारत में इस पहल को आगे बढ़ाएंगे। इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज, पुणे और इंदौर में इस अभियान के कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। अब चेन्नई के जरिए कांग्रेस की कोशिश दक्षिण भारत के युवाओं तक अपनी बात पहुंचाने और उनकी चिंताओं को राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनाने की होगी।

इस कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था, रोजगार के अवसर, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं और पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों पर बढ़ने वाले मानसिक दबाव जैसे विषय प्रमुखता से उठाए जा सकते हैं। युवाओं से सीधे बातचीत करने की इस पहल का उद्देश्य उनकी समस्याओं को समझना और उनके विचारों को सामने लाना है। राहुल गांधी लगातार युवाओं से जुड़े सवालों को अपनी राजनीतिक गतिविधियों में जगह देते रहे हैं। चेन्नई में होने वाला कार्यक्रम इसी रणनीति का अगला हिस्सा होगा। आयोजन शाम 4:30 बजे शुरू होगा। कार्यक्रम में भाग लेने के लिए इच्छुक लोगों के पंजीकरण की व्यवस्था क्यूआर कोड के माध्यम से की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभियान के पिछले पांच कार्यक्रमों में लगभग 1.54 लाख लोगों ने हिस्सा लिया था।

दक्षिण भारत के 7.5 करोड़ युवाओं तक पहुंचने की कोशिश

चेन्नई में कार्यक्रम आयोजित करने के पीछे दक्षिण भारत की बड़ी युवा आबादी भी एक अहम वजह है। ‘यूथ इन इंडिया 2022’ रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण भारत में 15 से 29 वर्ष की आयु के करीब 7.5 करोड़ युवा रहते हैं। यह ऐसा आयु वर्ग है, जिसकी शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और सामाजिक अवसरों से जुड़ी जरूरतें राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हैं। राहुल गांधी का इस क्षेत्र में विद्यार्थियों के साथ संवाद करना कांग्रेस की पहुंच बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

युवाओं की समस्याएं केवल नौकरी मिलने तक सीमित नहीं हैं। स्कूल और कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता, उच्च शिक्षा का खर्च, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और रोजगार के अनुरूप कौशल हासिल करना भी उनके सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इसके अलावा, परीक्षा परिणामों को लेकर अनिश्चितता और भविष्य की चिंता विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव बढ़ा सकती है। ऐसे मुद्दों पर सीधे बातचीत के जरिए राजनीतिक नेतृत्व युवाओं के अनुभवों और अपेक्षाओं को समझने की कोशिश करता है।

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी इन विषयों पर विद्यार्थियों की राय सुनेंगे और उनके सवालों का सामना करेंगे। इस तरह का संवाद कांग्रेस को यह समझने का अवसर भी देगा कि युवा किस तरह की नीतियों और बदलावों की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, कार्यक्रम में उठाए जाने वाले सभी मुद्दों और घोषणाओं का अंतिम स्वरूप आयोजन के दौरान ही स्पष्ट होगा।

प्रधानमंत्री मोदी के तमिलनाडु दौरे से पहले राहुल का कार्यक्रम

चेन्नई में राहुल गांधी का कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित हो रहा है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तमिलनाडु दौरा भी प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री 11 अक्टूबर को राज्य पहुंचेंगे। उनके कार्यक्रम में चेन्नई मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण के कॉरिडोर-4 का उद्घाटन शामिल है। इस कारण राज्य में दोनों नेताओं की गतिविधियां राजनीतिक और विकास संबंधी चर्चाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

एक तरफ प्रधानमंत्री का कार्यक्रम बुनियादी ढांचे और शहरी परिवहन परियोजना से जुड़ा है, वहीं राहुल गांधी का चेन्नई दौरा विद्यार्थियों, युवाओं और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। दोनों कार्यक्रमों का स्वरूप अलग है, लेकिन इनके आसपास होने से तमिलनाडु की राजनीतिक गतिविधियों पर लोगों का ध्यान बढ़ना स्वाभाविक है।

चेन्नई जैसे बड़े शहर में रोजगार, शिक्षा, परिवहन और आर्थिक अवसरों से जुड़े मुद्दे पहले से ही सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा हैं। ऐसे में राहुल गांधी का युवाओं से संवाद करना कांग्रेस के लिए अपने विचार रखने और नई पीढ़ी के साथ संपर्क मजबूत करने का अवसर होगा। वहीं, प्रधानमंत्री के दौरे में मेट्रो परियोजना का उद्घाटन शहरी परिवहन के विस्तार को लेकर केंद्र और राज्य की विकास संबंधी प्राथमिकताओं को चर्चा में ला सकता है।

तमिलनाडु में कांग्रेस की नई राजनीतिक स्थिति

राहुल गांधी के इस कार्यक्रम का महत्व केवल युवाओं से संवाद तक सीमित नहीं है। तमिलनाडु में कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति भी इस दौरे को खास बनाती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राज्य में कांग्रेस करीब 59 साल बाद सत्ता में भागीदार बनी है। मुख्यमंत्री थलपति विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार में कांग्रेस के दो विधायक मंत्री हैं। इस राजनीतिक बदलाव के बाद राज्य में कांग्रेस की भूमिका पहले की तुलना में अलग हो गई है।

इससे पहले कांग्रेस तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कषगम यानी डीएमके के साथ गठबंधन में थी। लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी ने डीएमके से अलग होकर तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) को समर्थन दिया। इस घटनाक्रम ने राज्य में कांग्रेस की राजनीतिक दिशा और गठबंधन संबंधों को बदल दिया है।

ऐसे माहौल में राहुल गांधी का चेन्नई पहुंचना पार्टी के लिए संगठनात्मक और राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा सकता है। युवाओं के बीच कार्यक्रम आयोजित करने से कांग्रेस को अपने मुद्दों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का मौका मिलेगा। साथ ही, इससे राज्य में पार्टी की नई राजनीतिक भूमिका को भी मजबूती देने का प्रयास किया जा सकता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी मुख्यमंत्री विजय से भी मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि, इस मुलाकात को लेकर अंतिम कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि अलग से देखी जानी होगी। यदि दोनों नेताओं की बैठक होती है, तो इसमें राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों और कांग्रेस-टीवीके संबंधों को लेकर चर्चा की संभावनाएं भी रहेंगी।

देश की आबादी में हर चौथा व्यक्ति युवा वर्ग से

भारत में युवाओं की बड़ी आबादी राजनीतिक दलों के लिए लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में देश में 15 से 29 वर्ष की आयु के युवाओं की संख्या लगभग 36.74 करोड़ रहने का अनुमान है। यह कुल आबादी का करीब 26 प्रतिशत हिस्सा है। इतनी बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी के कारण शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और आर्थिक अवसर चुनावी चर्चाओं में प्रमुख स्थान रखते हैं।

राजनीतिक दलों के लिए युवा केवल वर्तमान मतदाता नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीतिक दिशा तय करने वाला वर्ग भी हैं। पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों से लेकर कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों तक, नई पीढ़ी की प्राथमिकताएं चुनावी रणनीतियों को प्रभावित कर सकती हैं। यही वजह है कि विभिन्न पार्टियां युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने और उनके सवालों को समझने के लिए कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं।

राहुल गांधी का अभियान भी इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा सकता है। विद्यार्थियों से बातचीत के माध्यम से कांग्रेस शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रक्रिया और नौकरी की उपलब्धता जैसे विषयों पर अपनी राजनीतिक स्थिति सामने रख सकती है। हालांकि, किसी अभियान की वास्तविक सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि संवाद में उठाए गए सवालों को आगे नीतिगत चर्चा और ठोस कदमों से कितना जोड़ा जाता है।

लोकसभा चुनाव 2024 में युवा मतदाताओं की अहम भूमिका

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 के लोकसभा चुनाव में 18 से 29 वर्ष की आयु के मतदाताओं की हिस्सेदारी कुल मतदाताओं में 22.78 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि मतदाता सूची में इस आयु वर्ग की भागीदारी काफी महत्वपूर्ण है। हालांकि, 15 से 29 वर्ष की आबादी और 18 से 29 वर्ष के मतदाताओं के आंकड़ों में अंतर है, क्योंकि 15 से 17 वर्ष के किशोर मतदान के पात्र नहीं होते।

युवा मतदाताओं की पसंद और चुनावी भागीदारी राजनीतिक दलों के लिए अहम संकेत दे सकती है। रोजगार, महंगाई, शिक्षा, सरकारी भर्ती और तकनीकी कौशल जैसे विषय उनके राजनीतिक निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके साथ ही, डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल ने युवाओं तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने के तरीकों को भी बदल दिया है।

किसी राजनीतिक दल के लिए केवल युवाओं के बीच कार्यक्रम आयोजित करना पर्याप्त नहीं होता। उनकी वास्तविक समस्याओं को समझना, उन पर स्पष्ट नीतिगत रुख रखना और समाधान की दिशा में काम करना भी जरूरी होता है। चेन्नई में होने वाला संवाद कांग्रेस को युवाओं के मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं सामने रखने का अवसर देगा।

युवाओं में बेरोजगारी अब भी बड़ी चुनौती

रोजगार की स्थिति युवाओं के सामने मौजूद प्रमुख चिंताओं में शामिल है। पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) 2025 के मुताबिक, देश में 15 से 29 वर्ष की आयु के युवाओं की बेरोजगारी दर 9.9 प्रतिशत दर्ज की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 8.3 प्रतिशत थी, जबकि शहरी इलाकों में 13.6 प्रतिशत रही। आंकड़ों के अनुसार, पुरुष युवाओं में बेरोजगारी दर 9.3 प्रतिशत और महिला युवाओं में 11.3 प्रतिशत थी।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि रोजगार के अवसरों को लेकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अंतर मौजूद है। शहरों में शिक्षा और नौकरी के अधिक विकल्प होने के बावजूद रोजगार की तलाश करने वाले युवाओं को प्रतिस्पर्धा, योग्यता और उपलब्ध पदों के बीच तालमेल जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। दूसरी ओर, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार, प्रशिक्षण और बेहतर अवसरों तक पहुंच महत्वपूर्ण विषय बने रहते हैं।

महिला युवाओं में दर्ज बेरोजगारी दर भी रोजगार से जुड़े अवसरों और भागीदारी पर ध्यान देने की जरूरत को सामने लाती है। शिक्षा प्राप्त करने के बाद नौकरी हासिल करना, सुरक्षित कार्यस्थल मिलना और कौशल के अनुरूप काम उपलब्ध होना ऐसे विषय हैं, जिन पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर युवाओं की चिंताएं भी इसी मुद्दे से जुड़ी हैं। जब बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सीमित पदों के लिए तैयारी करते हैं, तो परीक्षा की पारदर्शिता, समय पर परिणाम और नियुक्ति प्रक्रिया का महत्व बढ़ जाता है। राहुल गांधी अपने अभियान में ऐसे विषयों को उठा रहे हैं, इसलिए चेन्नई में भी इन सवालों पर चर्चा की संभावना रहेगी।

क्या युवाओं से संवाद कांग्रेस को देगा नई दिशा?

चेन्नई में ‘छात्रों की गूंज’ का छठा कार्यक्रम कांग्रेस के युवा संपर्क अभियान का दक्षिण भारत में पहला पड़ाव होगा। यहां पार्टी के सामने एक ओर विद्यार्थियों की वास्तविक समस्याओं को समझने की चुनौती है, तो दूसरी ओर युवाओं के बीच अपने राजनीतिक संदेश को प्रभावी तरीके से पहुंचाने का अवसर भी है।

दक्षिण भारत में करोड़ों युवाओं की मौजूदगी, तमिलनाडु में कांग्रेस की बदली राजनीतिक भूमिका और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे के कारण इस कार्यक्रम पर विशेष ध्यान रहेगा। हालांकि, किसी कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी या उनके साथ संवाद अपने आप में चुनावी समर्थन की गारंटी नहीं होता। इसका असर इस बात से तय होगा कि उनकी समस्याओं को राजनीतिक बहस में कितनी जगह मिलती है और उनके समाधान के लिए क्या कदम सामने आते हैं।

राहुल गांधी के लिए चेन्नई का यह आयोजन युवाओं से सीधे जुड़ने, शिक्षा और रोजगार के सवालों को उठाने तथा कांग्रेस की राजनीतिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने का अवसर होगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण रहेगा कि इस अभियान से सामने आने वाले सुझावों और मांगों को पार्टी अपनी रणनीति और नीतियों में किस तरह शामिल करती है।