इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के संस्थापक ललित मोदी के भारत लौटने की संभावना अब पहले से ज्यादा मजबूत दिखाई दे रही है। करीब 16 वर्षों से विदेश में रह रहे ललित मोदी ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि वह इस वर्ष के अंत तक या फिर अगले साल की शुरुआत में भारत वापस आ सकते हैं। यह बयान उस समय सामने आया है, जब विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े एक पुराने मामले में अपीलीय ट्रिब्यूनल ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा लगाया गया जुर्माना निरस्त कर दिया।
ललित मोदी लंबे समय से लंदन में रह रहे हैं और उनके खिलाफ विभिन्न कानूनी मामलों के चलते भारत वापसी को लेकर लगातार अटकलें लगती रही हैं। लेकिन हालिया फैसले ने उनके लिए एक बड़ी कानूनी राहत का रास्ता खोल दिया है। हालांकि, उनके खिलाफ मौजूद अन्य मामलों पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
परिवार में आने वाली नई खुशी के बाद बनाएंगे भारत आने का कार्यक्रम
फैसले के बाद मीडिया से बातचीत में ललित मोदी ने कहा कि उनकी बेटी अक्टूबर महीने में मां बनने वाली हैं। परिवार में नए सदस्य के आने के बाद वह भारत लौटने की योजना बना रहे हैं। उनके मुताबिक, अब तक जो कानूनी अड़चनें थीं, उनमें से एक महत्वपूर्ण बाधा दूर हो चुकी है, इसलिए वापसी की संभावना पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है।
IPL 2009 को दक्षिण अफ्रीका ले जाने से जुड़ा था विवाद
पूरा मामला साल 2009 के IPL सीजन से जुड़ा हुआ है। उस समय देश में लोकसभा चुनाव हो रहे थे और सुरक्षा एजेंसियों ने एक साथ चुनाव और IPL जैसे बड़े आयोजन को लेकर चिंता जताई थी। ऐसे में BCCI ने टूर्नामेंट को भारत के बजाय दक्षिण अफ्रीका में आयोजित करने का फैसला लिया।
इस आयोजन के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने दक्षिण अफ्रीका में लगभग 243.45 करोड़ रुपये भेजे थे। बाद में ED ने दावा किया कि इतनी बड़ी राशि विदेश भेजने से पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी, जिससे FEMA के नियमों का उल्लंघन हुआ। इसी आधार पर जांच शुरू हुई और बाद में ललित मोदी सहित कुछ अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए।
ED ने लगाया था करोड़ों रुपये का जुर्माना
इस मामले की जांच कई वर्षों तक चलती रही। आखिरकार वर्ष 2018 में ED ने ललित मोदी पर 10.65 करोड़ रुपये का आर्थिक दंड लगाया। एजेंसी का कहना था कि विदेश में धन भेजने की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं थी।
ललित मोदी ने इस आदेश को स्वीकार नहीं किया और इसके खिलाफ अपील दायर कर दी। अब अपीलीय ट्रिब्यूनल ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद ED के आदेश में बड़ा बदलाव करते हुए उनके खिलाफ लगाया गया जुर्माना समाप्त कर दिया है।
ट्रिब्यूनल ने क्यों दी राहत?
फैसले के बाद ललित मोदी ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने ED की उस प्रमुख दलील को ही स्वीकार नहीं किया, जिस पर पूरा मामला आधारित था। उनके अनुसार, अदालत ने माना कि दक्षिण अफ्रीका भेजी गई रकम को “करंट अकाउंट ट्रांजैक्शन” माना जाएगा।
कानूनी दृष्टि से करंट अकाउंट ट्रांजैक्शन के लिए हर स्थिति में RBI की पूर्व मंजूरी आवश्यक नहीं होती। जबकि ED इसे “कैपिटल अकाउंट ट्रांजैक्शन” मानकर कार्रवाई कर रही थी। ट्रिब्यूनल ने इस व्याख्या को स्वीकार नहीं किया और कहा कि इस मामले में पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य नहीं था। इसके साथ ही यह भी माना गया कि इस लेन-देन के लिए ललित मोदी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
2010 से भारत से बाहर रह रहे हैं ललित मोदी
ललित मोदी वर्ष 2010 में भारत छोड़कर लंदन चले गए थे। उसी समय IPL से जुड़े कई विवाद सामने आए थे और विभिन्न एजेंसियों ने उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी थी। इसके बाद वह लगातार ब्रिटेन में रह रहे हैं और भारत नहीं लौटे।
अब ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से कहा है कि भारत लौटने की उनकी योजना बन रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वापसी का अंतिम फैसला पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
यह राहत केवल एक मामले तक सीमित
हालांकि इस फैसले को ललित मोदी के लिए बड़ी कानूनी सफलता माना जा रहा है, लेकिन यह केवल IPL 2009 से जुड़े FEMA मामले तक सीमित है। उनके खिलाफ पहले से दर्ज अन्य मामलों पर इस आदेश का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया अलग-अलग स्तर पर जारी है।
ब्रॉडकास्ट राइट्स विवाद अभी भी बना हुआ है
ललित मोदी से जुड़ा सबसे चर्चित मामला IPL के मीडिया और ब्रॉडकास्ट अधिकारों का भी रहा है। जब IPL की शुरुआत हुई थी, तब टूर्नामेंट के प्रसारण अधिकार वर्ल्ड स्पोर्ट्स ग्रुप (WSG) को दिए गए थे। इसके बाद WSG ने भारतीय प्रसारण अधिकार सोनी नेटवर्क को सौंप दिए।
लेकिन 2009 में दूसरे सीजन से पहले प्रसारण व्यवस्था में बदलाव किया गया। आरोप लगाया गया कि बिना नई टेंडर प्रक्रिया अपनाए फिर से WSG के साथ समझौता किया गया, जिससे कंपनी को लगभग 425 करोड़ रुपये का लाभ मिला। ED ने इस पूरे मामले में FEMA और मनी लॉन्ड्रिंग कानूनों के उल्लंघन की आशंका जताई थी। इसी मामले में विशेष अदालत ने ललित मोदी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया था। इस प्रकरण में अभी अंतिम कानूनी निर्णय आना बाकी है।
BCCI ने भी की थी सख्त कार्रवाई
IPL से जुड़े विवाद केवल सरकारी एजेंसियों तक सीमित नहीं रहे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने भी ललित मोदी के खिलाफ आंतरिक जांच शुरू की थी। उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने लीग संचालन के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले नियमों के अनुरूप नहीं लिए। इनमें टीमों की नीलामी, मीडिया अधिकार, टेंडर प्रक्रिया और वित्तीय निर्णयों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए।
करीब तीन वर्षों तक चली जांच के बाद वर्ष 2013 में BCCI की अनुशासन समिति ने ललित मोदी को क्रिकेट से जुड़ी सभी गतिविधियों से आजीवन प्रतिबंधित कर दिया। यह फैसला आज भी प्रभावी है।
लंदन के पॉश इलाके में है निवास
ललित मोदी पिछले कई वर्षों से लंदन के बेलग्राविया-चेल्सी इलाके में रह रहे हैं। यह इलाका ब्रिटेन के सबसे महंगे और प्रतिष्ठित क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां कई विदेशी दूतावास, लग्जरी ब्रांड और बेहद महंगी रिहायशी संपत्तियां मौजूद हैं।
उनकी पत्नी मीनल मोदी का वर्ष 2018 में कैंसर के कारण निधन हो गया था। उनके परिवार में बेटी आलिया और बेटा रुचिर शामिल हैं। फिलहाल वह अपने परिवार के साथ ब्रिटेन में ही रह रहे हैं।
कारोबारी परिवार से रखते हैं संबंध
दिल्ली के प्रतिष्ठित कारोबारी परिवार में जन्मे ललित मोदी का संबंध मोदी एंटरप्राइजेज समूह से है। इस समूह की स्थापना उनके दादा गुजर मल मोदी ने वर्ष 1933 में की थी। ललित मोदी लंबे समय से इस समूह में नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं। कंपनी का कारोबार हेल्थकेयर, एफएमसीजी, रिटेल, फैशन, केमिकल, ट्रैवल, पर्सनल केयर, हॉस्पिटैलिटी और मनोरंजन जैसे कई क्षेत्रों में फैला हुआ है।
समूह के अंतर्गत कई प्रसिद्ध ब्रांड संचालित होते हैं, जिनमें मोदीकेयर, कलरबार, बीकन ट्रैवल्स, पान विलास पान मसाला, ईगो इटालियन रेस्तरां और गॉडफ्रे फिलिप्स जैसे नाम शामिल हैं।
हजारों करोड़ रुपये की बताई जाती है संपत्ति
विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार ललित मोदी की अनुमानित कुल संपत्ति लगभग 57 करोड़ अमेरिकी डॉलर यानी करीब 4,555 करोड़ रुपये आंकी जाती है। क्रिकेट प्रशासन के अलावा उन्होंने अपने पारिवारिक कारोबारी समूह के विस्तार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
फिलहाल, FEMA मामले में मिली राहत के बाद उनकी संभावित भारत वापसी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उनके खिलाफ लंबित अन्य मामलों की स्थिति भविष्य में उनकी वापसी की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इसलिए भारत लौटने का रास्ता पूरी तरह साफ हुआ है या नहीं, इसका अंतिम जवाब आने वाले समय में ही मिल पाएगा।




