विजिलेंस के सामने फिर पेश हुए सुधीर शर्मा, आय से अधिक संपत्ति मामले में करीब पौने दो घंटे चली पूछताछ

विजिलेंस के सामने फिर पेश हुए सुधीर शर्मा, आय से अधिक संपत्ति मामले में करीब पौने दो घंटे चली पूछताछ

हिमाचल प्रदेश में आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले की जांच के बीच भाजपा विधायक सुधीर शर्मा शुक्रवार को एक बार फिर राज्य विजिलेंस के शिमला स्थित मुख्यालय पहुंचे। धर्मशाला विजिलेंस थाने में चल रही जांच के सिलसिले में उनसे करीब पौने दो घंटे तक पूछताछ की गई। सुधीर शर्मा के साथ भाजपा के कई विधायक और पार्टी नेता भी विजिलेंस मुख्यालय पहुंचे और उन्होंने विधायक के प्रति अपना समर्थन जताया।

जानकारी के अनुसार, सुधीर शर्मा शुक्रवार शाम करीब चार बजे विजिलेंस मुख्यालय पहुंचे थे। जांच अधिकारियों ने उनसे आय, संपत्ति, निवेश और जमीन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर दोबारा जानकारी ली। पूछताछ में उनके धर्मशाला के रक्कड़ स्थित आवास के निर्माण और उसकी साज-सज्जा पर हुए खर्च से संबंधित विवरण भी मांगा गया।

विजिलेंस की जांच मुख्य रूप से उस अवधि के वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्तियों पर केंद्रित है, जिसे जांच के दायरे में रखा गया है। अधिकारियों ने सुधीर शर्मा से उनकी आय के स्रोत, संपत्तियों की खरीद-फरोख्त, भूमि से जुड़े लेनदेन, बैंक खातों, निवेश, शेयर और डिमैट खातों से संबंधित जानकारी मांगी। इसके अलावा मकान निर्माण में काम करने वाले ठेकेदारों और सामग्री उपलब्ध कराने वाले आपूर्तिकर्ताओं के बारे में भी विवरण लेने की कोशिश की गई।

विजिलेंस के अनुसार, पूछताछ के दौरान सुधीर शर्मा मकान निर्माण से जुड़े ठेकेदारों के नाम और उनका पूरा विवरण उपलब्ध नहीं करा सके। जांच टीम ने उनसे निर्माण कार्य की प्रकृति, उस पर आई अनुमानित और वास्तविक लागत, बिलों, भुगतान की रकम, भुगतान की तारीख और भुगतान के माध्यम के बारे में जानकारी मांगी। संबंधित बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा हैं।

इससे पहले 18 अगस्त को भी विजिलेंस अधिकारियों ने धर्मशाला में सुधीर शर्मा से पूछताछ की थी। उस पूछताछ के बाद भाजपा विधायक ने सरकार और विजिलेंस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष की आवाज को कमजोर करने और जनता से जुड़े मुद्दों से ध्यान हटाने के उद्देश्य से जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।

हालांकि सुधीर शर्मा ने यह भी कहा था कि वह कानून और जांच प्रक्रिया का सम्मान करते हैं। उनके मुताबिक, विजिलेंस की ओर से जो भी जानकारी मांगी जा रही है, उसे उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने दावा किया था कि जांच से संबंधित कई दस्तावेज और तथ्य पहले ही एजेंसी को दिए जा चुके हैं और आगे भी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

शुक्रवार को शिमला रवाना होने से पहले भी सुधीर शर्मा का रुख यही रहा कि जांच से जुड़े तथ्य समय आने पर सार्वजनिक हो जाएंगे। उन्होंने यह सवाल जरूर उठाया कि जब मामला धर्मशाला से संबंधित है और अधिकांश संबंधित दस्तावेज भी वहीं मौजूद हैं, तो उन्हें इतनी जल्दी पूछताछ के लिए शिमला बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

सुधीर शर्मा के साथ भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और विधायक विजिलेंस मुख्यालय पहुंचे। इनमें विपिन सिंह परमार, सतपाल सिंह सत्ती, बलबीर वर्मा, डॉ. जनक राज, इंद्रदत्त लखनपाल, राकेश जम्वाल और त्रिलोक जम्वाल सहित अन्य नेता शामिल रहे। लोकेंद्र कुमार, दीप राज, आशीष शर्मा और पूर्ण चंद ठाकुर भी वहां पहुंचे और सुधीर शर्मा के प्रति समर्थन जताया।

भाजपा नेताओं की मौजूदगी को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधानसभा सत्र के दौरान विपक्षी भाजपा लगातार सरकार पर विभिन्न मुद्दों को लेकर हमलावर है। ऐसे में पार्टी के एक प्रमुख विधायक का विजिलेंस जांच के सिलसिले में मुख्यालय पहुंचना राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

वहीं विजिलेंस की जांच में एजेंसी वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड को खंगाल रही है। जांच अधिकारियों की ओर से संबंधित अवधि के दौरान सुधीर शर्मा की आय और उनके खर्च के बीच संबंध की पड़ताल की जा रही है। इसमें चल-अचल संपत्तियों के अलावा बैंक खातों, निवेश और जमीन के सौदों को भी शामिल किया गया है।

रक्कड़ स्थित आवास को लेकर भी जांच टीम कई बिंदुओं पर जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों ने मकान के निर्माण में शामिल ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और अन्य संबंधित लोगों की पहचान से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। निर्माण में किए गए कार्य, उसकी लागत, जारी किए गए बिल और भुगतान के तरीके की जानकारी को भी रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जा रहा है।

इसके अलावा जमीन की खरीद और बिक्री, संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज तथा बैंकिंग लेनदेन की भी जांच की जा रही है। शेयर और डिमैट खातों में किए गए निवेश को लेकर भी रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी यह देख रही है कि संबंधित अवधि में विधायक की घोषित आय और संपत्तियों तथा उनके वित्तीय लेनदेन के बीच क्या संबंध रहा।

सुधीर शर्मा लंबे समय से हिमाचल की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और पहले कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थामा और वर्तमान में भाजपा विधायक हैं। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण उनके खिलाफ चल रही जांच को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज है।

इस मामले की चर्चा 2016 में भाजपा की ओर से तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ पेश की गई चार्जशीट से भी जुड़ रही है। 24 दिसंबर 2016 को भाजपा ने तत्कालीन वीरभद्र सिंह सरकार के खिलाफ 75 पन्नों की चार्जशीट तत्कालीन राज्यपाल आचार्य देवव्रत को सौंपी थी। उस समय सुधीर शर्मा राज्य सरकार में शहरी विकास मंत्री थे।

भाजपा की उस चार्जशीट में शहरी विकास विभाग, हिमुडा, बिल्डरों के पंजीकरण और अन्य मामलों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। हालांकि वर्तमान में चल रही आय से अधिक संपत्ति की विजिलेंस जांच और वर्ष 2016 में भाजपा द्वारा सौंपी गई राजनीतिक चार्जशीट को अलग-अलग कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। दोनों को एक ही मामला समझना उचित नहीं है।

वर्तमान विजिलेंस जांच का दायरा सुधीर शर्मा की आय और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड पर केंद्रित है। जांच में रक्कड़ स्थित मकान के अलावा जमीन के लेनदेन, बैंक खातों, शेयर बाजार में निवेश, डिमैट खातों और अन्य वित्तीय संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।

सुधीर शर्मा का कहना है कि उन्होंने जांच में सहयोग किया है और विजिलेंस की ओर से मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों और जांच से जुड़े वास्तविक तथ्य समय के साथ सामने आएंगे। उन्होंने यह भी कहा है कि कानून से उन्हें कोई परेशानी नहीं है और वह जांच प्रक्रिया का सम्मान करते हैं।

दूसरी ओर, विजिलेंस की पूछताछ से संकेत मिलता है कि जांच एजेंसी अभी भी कई बिंदुओं पर अतिरिक्त जानकारी हासिल करना चाहती है। खास तौर पर मकान निर्माण में खर्च, ठेकेदारों और सप्लायरों की भूमिका तथा भुगतान के स्रोत और माध्यम से संबंधित जानकारी पर एजेंसी का ध्यान है।

आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसियां आम तौर पर संबंधित व्यक्ति की घोषित आय और संपत्तियों के बीच वित्तीय संतुलन की जांच करती हैं। इसी क्रम में बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति दस्तावेज, निवेश और खर्च से जुड़े प्रमाणों का मिलान किया जाता है। सुधीर शर्मा से की जा रही पूछताछ में भी ऐसे ही विभिन्न वित्तीय पहलुओं को शामिल किया गया है।

फिलहाल शुक्रवार की पूछताछ के बाद जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। विजिलेंस की ओर से आगे भी दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर पूछताछ किए जाने की संभावना बनी हुई है। वहीं भाजपा इस कार्रवाई को राजनीतिक मुद्दे के रूप में भी उठा रही है और विधायक के साथ पार्टी नेताओं की मौजूदगी से यह संकेत मिला है कि आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ सकता है।

ऐसे में सुधीर शर्मा के खिलाफ चल रही जांच अब केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि हिमाचल की राजनीति में भी इसका असर दिखाई दे रहा है। एक तरफ विजिलेंस वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्तियों से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा इसे विधानसभा सत्र और विपक्ष की भूमिका से जोड़कर सरकार पर सवाल उठा रही है। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े नए दस्तावेज या तथ्य सामने आने के बाद इस मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।