भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को सकारात्मक रुख के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती सत्र में घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी और चुनिंदा सेक्टरों में तेजी के चलते प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ खुले। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 200 अंकों की तेजी के साथ 77,350 के स्तर के आसपास पहुंच गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 50 से अधिक अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए 24,150 के करीब कारोबार करता दिखाई दिया।
शुरुआती कारोबार में सबसे अधिक मजबूती ऑटोमोबाइल और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली। इन दोनों सेक्टरों में हुई खरीदारी ने बाजार की धारणा को मजबूत बनाए रखा और प्रमुख सूचकांकों को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा और कंपनियों के तिमाही नतीजों से जुड़ी उम्मीदें फिलहाल बाजार को सहारा दे रही हैं।
कारोबार की शुरुआत में दिखा सकारात्मक माहौल
सप्ताह के कारोबारी दिन बाजार ने मजबूती के साथ शुरुआत की। शुरुआती मिनटों में ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में पहुंच गए। निवेशकों ने बैंकिंग, ऑटो, आईटी और कुछ चुनिंदा लार्जकैप शेयरों में खरीदारी दिखाई, जिससे बाजार का व्यापक रुख सकारात्मक बना रहा।
विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में घरेलू निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ी है। यही कारण है कि विदेशी निवेशकों की सीमित बिकवाली के बावजूद भारतीय शेयर बाजार अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है।
ऑटो सेक्टर में रही अच्छी खरीदारी
शुरुआती कारोबार में ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। वाहन बिक्री के बेहतर आंकड़ों, मांग में सुधार और आने वाले महीनों में उद्योग की संभावनाओं को लेकर निवेशकों का विश्वास बढ़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारी सीजन से पहले ऑटो सेक्टर को लेकर बाजार में सकारात्मक धारणा बनी हुई है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन, प्रीमियम सेगमेंट और निर्यात बाजार में बढ़ती संभावनाओं ने भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ाई है।
ऑटो कंपनियों के शेयरों में खरीदारी का असर सीधे तौर पर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर दिखाई दिया, क्योंकि इस सेक्टर की कई बड़ी कंपनियां प्रमुख सूचकांकों का हिस्सा हैं।
आईटी शेयरों में लौटी मजबूती
आईटी सेक्टर ने भी बाजार को अच्छी मजबूती प्रदान की। शुरुआती कारोबार में कई प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़ी उम्मीदों ने आईटी शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ाई है। भारतीय आईटी कंपनियों का बड़ा कारोबार विदेशों से जुड़ा होने के कारण वैश्विक आर्थिक संकेतों का इस सेक्टर पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
इसके अलावा तिमाही नतीजों के मौसम में निवेशकों की नजर आईटी कंपनियों के प्रदर्शन पर भी बनी हुई है। बेहतर परिणामों की उम्मीद में कई निवेशक इस सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते दिखाई दिए।
घरेलू निवेशकों का भरोसा बना सबसे बड़ा सहारा
हाल के समय में भारतीय शेयर बाजार की मजबूती के पीछे घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की सक्रिय भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले सात कारोबारी दिनों के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 9,177 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है। वहीं पिछले 30 दिनों में उनकी कुल नेट खरीदारी 41,028 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और अन्य संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार में निवेश कर रहे हैं। इससे बाजार को स्थिरता मिलने के साथ-साथ विदेशी निवेशकों की बिकवाली का प्रभाव भी काफी हद तक संतुलित हो रहा है।
घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी यह संकेत भी देती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाओं को लेकर निवेशकों का भरोसा अभी मजबूत बना हुआ है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
जहां घरेलू निवेशकों का रुख सकारात्मक बना हुआ है, वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) की ओर से बिकवाली का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है।
ताजा कारोबारी आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने लगभग 740 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। पिछले सात दिनों में उनकी कुल नेट बिकवाली 1,731 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले 30 दिनों के दौरान विदेशी निवेशकों ने करीब 2,027 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं।
हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहने के बावजूद बाजार पर इसका बड़ा असर देखने को नहीं मिला। इसका प्रमुख कारण घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी रही, जिसने बाजार को संतुलित बनाए रखा।
एशियाई बाजारों का प्रदर्शन रहा मिला-जुला
भारतीय बाजार की शुरुआत भले ही सकारात्मक रही, लेकिन एशियाई शेयर बाजारों का प्रदर्शन मिश्रित रहा।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स शुरुआती कारोबार में कमजोरी के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। जापान का निक्केई इंडेक्स भी दबाव में रहा और उसमें गिरावट दर्ज की गई।
इसके विपरीत हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। चीन और हांगकांग के बाजारों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे एशियाई बाजारों का समग्र रुख मिश्रित बना रहा।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक संकेत, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और विभिन्न देशों के आर्थिक आंकड़े एशियाई बाजारों की दिशा तय कर रहे हैं।
अमेरिकी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत
भारतीय बाजार को अमेरिका से भी सकारात्मक संकेत मिले।
15 जुलाई के कारोबारी सत्र में वॉल स्ट्रीट के तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए थे। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज, एसएंडपी 500 और नैस्डैक में अच्छी तेजी दर्ज की गई।
अमेरिकी बाजारों की मजबूती का असर अक्सर एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिलता है। निवेशकों का मानना है कि वैश्विक बाजारों में स्थिरता बनी रहने से भारतीय इक्विटी बाजारों को भी समर्थन मिल सकता है।
तिमाही नतीजों पर रहेगी बाजार की नजर
विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में कंपनियों के तिमाही वित्तीय परिणाम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कई बड़ी कंपनियां अपने अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी कर रही हैं। यदि कंपनियों के परिणाम उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार में और मजबूती देखने को मिल सकती है।
इसके विपरीत यदि आय और मुनाफे के आंकड़े अनुमान से कमजोर रहते हैं तो चुनिंदा शेयरों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
निवेशक फिलहाल बैंकिंग, आईटी, ऑटो, एफएमसीजी और फार्मा सेक्टर की प्रमुख कंपनियों के नतीजों पर विशेष नजर बनाए हुए हैं।
वैश्विक घटनाक्रम भी करेंगे बाजार को प्रभावित
शेयर बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि केवल घरेलू कारक ही नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम भी भारतीय बाजार की चाल तय करेंगे।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर इंडेक्स की चाल, वैश्विक महंगाई के आंकड़े और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक घटनाएं निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं।
यदि वैश्विक बाजारों में स्थिरता बनी रहती है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है तो भारतीय शेयर बाजार को आगे भी मजबूती मिल सकती है।
पिछले कारोबारी सत्र में भी रही थी तेजी
गुरुवार की सकारात्मक शुरुआत से पहले बुधवार को भी भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ था।
पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स करीब 130 अंक मजबूत होकर 77,185 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी भी लगभग 26 अंकों की तेजी के साथ 24,079 पर बंद हुआ था।
बाजार में लगातार दूसरे दिन देखने को मिली मजबूती से यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा अभी भी कायम है और वे गिरावट आने पर चुनिंदा शेयरों में खरीदारी कर रहे हैं।
किन बातों पर निवेशकों को रखनी होगी नजर
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों को कई प्रमुख संकेतकों पर नजर बनाए रखनी होगी। इनमें विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां, कंपनियों के तिमाही नतीजे, वैश्विक बाजारों का रुख, कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की चाल और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े प्रमुख रहेंगे।
यदि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी जारी रहती है और वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा नकारात्मक संकेत सामने नहीं आता है, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल आगे भी बना रह सकता है। हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव निवेश का स्वाभाविक हिस्सा है, इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले जोखिम का आकलन करना और वित्तीय सलाहकार की सलाह लेना महत्वपूर्ण माना जाता है।




