धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भले ही NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया हो, लेकिन विपक्ष का आक्रामक रुख अभी खत्म होता नहीं दिख रहा। संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी टक्कर देखने को मिल सकती है। विपक्ष का पूरा फोकस अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर रहने वाला है। विपक्षी दलों का आरोप है कि पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया, जिसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। दूसरी ओर केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल माफिया पर लगाम लगाने के लिए सख्त कानून वाला संशोधन विधेयक सदन में पेश करने की तैयारी कर चुकी है।
सूत्रों के अनुसार संसद का यह सत्र केवल पेपर लीक के मुद्दे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई भी राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बनने वाली है। कांग्रेस सहित INDIA गठबंधन के कई दल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति पहले ही तैयार कर चुके हैं। माना जा रहा है कि विपक्ष सदन के अंदर चर्चा की मांग के साथ-साथ गृह मंत्री अमित शाह से सीधे जवाब भी मांग सकता है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस पूरे मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखी थी तो उनके खिलाफ बल प्रयोग क्यों किया गया। विपक्ष का आरोप है कि राजधानी दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कठोर कार्रवाई की, जिसमें कई छात्र घायल हुए। विपक्ष यह भी सवाल उठा रहा है कि कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल और सादे कपड़ों में मौजूद लोगों की भूमिका की जांच क्यों नहीं कराई गई।
उधर INDIA गठबंधन की कई पार्टियां राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों में इस मामले पर तत्काल चर्चा कराने की मांग कर सकती हैं। विपक्ष का तर्क है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और यदि प्रदर्शनकारियों के साथ कठोर व्यवहार हुआ है तो सरकार को इस पर जवाब देना होगा। इसी मुद्दे को लेकर विभिन्न विपक्षी दलों ने अपने-अपने स्तर पर रणनीति तैयार कर ली है।
तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष पहले ही इस विषय पर विशेष चर्चा कराने के लिए नोटिस दे चुकी हैं। उन्होंने इस पूरे मामले को राष्ट्रीय महत्व का विषय बताते हुए सदन का नियमित कामकाज स्थगित कर तत्काल चर्चा की मांग की है। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठा रहे छात्रों के साथ कथित हिंसक कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उनका मानना है कि संसद में इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत चर्चा होना आवश्यक है ताकि तथ्यों को सामने लाया जा सके।
विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। कई विपक्षी नेताओं का दावा है कि बड़ी संख्या में छात्रों को चोटें आईं और कुछ पत्रकार भी इस कार्रवाई से प्रभावित हुए। इसी आधार पर विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह की जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है, इसलिए इस कार्रवाई पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
राहुल गांधी ने भी इस पूरे मामले को लेकर गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई तो उसका आदेश किस स्तर से दिया गया। राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि कथित तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल किसकी मंजूरी से किया गया और सादे कपड़ों में मौजूद लोग कौन थे। कांग्रेस का कहना है कि इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में घायल छात्रों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने दावा किया कि कुछ छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं और एक छात्र की आंख की रोशनी तक प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। कांग्रेस इस मुद्दे को केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि छात्रों के अधिकारों और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता से जुड़ा विषय बता रही है। पार्टी का कहना है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर कठोर कार्रवाई हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी भी इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए है। पार्टी के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा है कि यदि छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई के आरोप सही साबित होते हैं तो गृह मंत्री अमित शाह को भी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उनका कहना है कि सरकार एक ओर युवाओं के सम्मान की बात करती है और दूसरी ओर विरोध कर रहे छात्रों पर कार्रवाई के आरोप सामने आते हैं, जिससे कई सवाल खड़े होते हैं।
विपक्ष की रणनीति केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहने वाली है। माना जा रहा है कि विभिन्न दल संसद के भीतर सरकार को लगातार घेरने की कोशिश करेंगे, जिससे सदन की कार्यवाही भी प्रभावित हो सकती है। पिछले सप्ताह भी विपक्ष और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक के कारण संसद का कामकाज सुचारु रूप से नहीं चल पाया था। ऐसे में इस सप्ताह भी हंगामे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर केंद्र सरकार इस पूरे विवाद के बीच पेपर लीक के खिलाफ सख्त संदेश देने की तैयारी में है। सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली धांधली, पेपर लीक और संगठित नकल गिरोहों पर रोक लगाने के लिए मौजूदा कानून में संशोधन करने जा रही है। प्रस्तावित संशोधन के तहत दोषियों के लिए कड़ी सजा और भारी आर्थिक दंड का प्रावधान रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह लोकसभा में इस संशोधन विधेयक को पेश कर सकते हैं। प्रस्तावित कानून में पेपर लीक जैसे अपराधों के लिए अधिकतम 10 वर्ष तक की कैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। सरकार का कहना है कि संगठित अपराध के रूप में सामने आ रहे परीक्षा घोटालों पर काबू पाने के लिए कठोर कानूनी व्यवस्था आवश्यक है।
इसके अलावा केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और अनियमितताओं की रोकथाम के लिए विशेषज्ञों की एक टास्क फोर्स भी गठित की है। यह समिति परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के उपाय सुझाएगी। सरकार का दावा है कि छात्रों का विश्वास बहाल करना उसकी प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यापक सुधार किए जाएंगे।
अब संसद का मानसून सत्र केवल एक विधेयक तक सीमित नहीं रहने वाला है। एक ओर सरकार पेपर लीक के खिलाफ कठोर कानून लाकर अपनी प्रतिबद्धता दिखाना चाहती है, वहीं विपक्ष छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी कर चुका है। ऐसे में सोमवार का दिन संसद के भीतर तीखी बहस, आरोप-प्रत्यारोप और संभावित हंगामे के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सदन में सरकार अपने विधेयक को किस तरह आगे बढ़ाती है और विपक्ष अपनी मांगों को लेकर कितना दबाव बना पाता है।




